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निकाय चुनाव / विधानसभा में तय होगा – निगम की कमान प्रशासक संभाले या बढ़ाएं कार्यकाल

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रतलाम. नगरीय निकायों की सीमावृद्धि, वार्ड सीमा व संख्या विभाजन और उनके आरक्षण के नए सरकारी टाइम टेबल से एक नया पेंच सामने आ गया है। नगर निगम की परिषद का कार्यकाल 31 दिसंबर को खत्म हो रहा है।
फिर महापौर, अध्यक्ष सहित तमांम पार्षदों के अधिकार शून्य हो जाएंगे।

जानकारों के अनुसार ऐसे में निगम चलाने के लिए सिर्फ दो ही विकल्प रह जाएंंगे। पहला प्रशासक को कमान सौंप दे, दूसरा परिषद कार्यकाल बढ़ा दिया जाए। अंतिम फैसला हालांकि विधानसभा में लिया जाएगा क्योंकि दोनों विकल्प के लिए सरकार को विधिवत रूप से विधेयक पारित करना पड़ेगा। नई परिषद का गठन तो मई-जून में निकाय चुनाव होने के बाद ही होगा।

ये हैं विकल्प और उनका असर 
प्रशासक – इसकी संभावना सबसे ज्यादा है। सरकार कलेक्टर या उसके समकक्ष किसी अधिकारी को निगम की जिम्मेदारी सौंप सकती है। कमिश्नर इनके अधीनस्थ होकर निगम की व्यवस्था चलाएगा। इससे कांग्रेस को फायदा होगा क्योंकि प्रदेश में सरकार उसी की है, पसंदीदा अधिकारी आने पर कांग्रेसी पार्षद विकास कार्य हो या अन्य काम वार्ड में तेजी से करा सकेंगे। भाजपा वाले वर्तमान में भी अधिकारियों के सामने कमजोर साबित हो रहे हैं।

कार्यकाल बढ़ेगा – इसकी संभावना कम है क्योंकि वर्तमान में भाजपा बहुमत वाली परिषद है। उसे शहर में तेजी से विकास कार्य करवाकर चुनावी माहौल अपने पक्ष में करने का मौका मिल जाएगा। इसलिए कांग्रेस ऐसा होने नहीं देगी। कांग्रेसियों ने अभी से घेराबंदी करते हुए राजधानी के बैठे आलाकमानों तक इनपुट भेजकर सारी स्थिति बता दी है। प्रदेश में सरकार होने के फायदा उठाते हुए कांग्रेस इस बार पहले से ज्यादा वार्ड जितने के मंसूबे बनाए बैठी हैं।