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इन्दौर

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इंदौर जिले में धूमधाम से मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस 

आदिवासी संस्कृति पर आधारित हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम, मेधावी विद्यार्थियों का किया गया सम्मान, आदिवासियों को दिए गए वन अधिकार पत्र 

इन्दौर | 09-अगस्त-2019

 इंदौर जिले में आज धूमधाम से विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया। विश्व आदिवासी दिवस पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। राज्य शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन तथा आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति के रंगों को बिखेरते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। साथ ही प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर आदिवासियों को वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत वन अधिकार पत्र वितरित किए गए।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नेहा मीणा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण विभाग की सहायक आयुक्त श्रीमती मोहिनी श्रीवास्तव, खाद्य नियंत्रक श्री लोण्या मुजाल्दे, कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्री सी.एल. पासी सहित अन्य अधिकारी, विद्यार्थी और ग्रामीणजन मौजूद थे। कार्यक्रम में छिंदवाड़ा में आयोजित हुए मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ जी के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने आदिवासी गीत-नृत्य प्रस्तुत किए। प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान अतिथियों ने किया। जिले में वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पात्र परिवारों को वन अधिकार पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती नेहा मीना ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस की शुरुआत एक अच्छी पहल है। इससे आदिवासी बच्चों में एकता का भाव आयेगा। उन्होंने कहा कि बच्चे पढ़े-लिखे और आगे बढ़ें। राज्य शासन द्वारा उन्हें ढेरों सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि जिले में विश्व आदिवासी दिवस पर गांव-गांव कार्यक्रम आयोजित किए गए। राज्य शासन के निर्देशानुसार आदिवासी बहुल गांव में शिक्षा स्वास्थ्य और इसके साथ अनेक मूलभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कार्यक्रम के प्रारंभ में सहायक आयुक्त श्रीमती मोहिनी श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अलका भार्गव ने किया। कार्यक्रम को श्री मुजाल्दे ने भी संबोधित किया।

कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में आये 208 आवेदन 

इन्दौर | 30-जुलाई-2019

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष अपर कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना, अपर कलेक्टर श्री दिनेश जैन, अपर कलेक्टर श्री कैलाश वानखेड़े द्वारा जनसुनवाई की गई। जनसुनवाई में आज 208 आवेदन आये। यह प्रकरण वृद्धावस्था पेंशन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, जमीन पर अवैध कब्जा, शिक्षा का अधिकार, शिक्षा शुल्क से मुक्ति, बिजली बिल, बीपीएल राशन कार्ड में नाम जुड़वाने, स्वास्थ्य विभाग में बीमारी सहायता योजना, प्लाट पर अवैध कब्जा और छात्रवृत्ति की स्वीकृति से संबंधित थे। इन प्रकरणों को संबंधित विभाग में 15 दिन में निराकरण करने हेतु प्रेषित कर दिया गया। जनसुनवाई में विभिन्न विभागों के कार्यालय प्रमुख भी थे।

रेरा एक्ट में रियल एस्टेट को पुनर्जीवित करने की अपार संभावनाएँ

इन्दौर | 26-जुलाई-2019

 म.प्र. भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) अध्यक्ष श्री अन्टोनी डिसा ने गत दिवस कहा है कि रेरा एक्ट में रियल एस्टेट सेक्टर को पुनर्जीवित कर, विकास की नयी ऊंचाईयों तक ले जाने की अपार संभावनायें है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने रेरा एक्ट के क्रियान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान बनाया है। श्री डिसा लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के 121वें इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम में “रेरा-परिणाम, मुद्दे और चुनौतियाँ” विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।
श्री डिसा ने कहा कि रेरा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन से रियल एस्टेट सेक्टर में बदलाव, पारदर्शिता तथा संतुलन आया है। उन्होंने बताया कि परियोजनाओं को आसानी और शीघ्रता से अनुमतियाँ मिलने पर उनका भविष्य निर्भर करता है। ऐसा किया जाना रियल एस्टेट सेक्टर में “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” को प्रोत्साहित करने के लिये भी आवश्यक है। इसमें अधोसंरचना विकास, विनियमन तथा मान्यता इसके महत्वपूर्ण पहलू हैं।

 

जल सुविधा पोर्टल एवं पेयजल सुविधा-एमपी मोबाइल एप का होगा शुभारंभ

इन्दौर | 23-जुलाई-2019

ग्रामीण नल-जल योजनाओं के संचालन की स्थिति की ऑनलाईन समीक्षा हेतु लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा एनआईसी के माध्यम से “जल सुविधा पोर्टल” तथा “पेयजल सुविधा-एमपी” मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किया गया है। इस पोर्टल तथा मोबाइल एप का उपयोग ग्रामीण नल-जल योजनाओं के बंद होने की शिकायतें तथा उनके निवारण की प्रगति की समीक्षा हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा किया जा सकेगा

ट्राइबल विभाग के स्कूलों में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन 19 जुलाई जमा करें

खण्डवा | 12-जुलाई-2019
  स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आदिम-जाति कल्याण विभाग की शालाओं में प्रतिनियुक्ति के लिये ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 19 जुलाई, 2019 है। ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा आदिम-जाति कल्याण विभाग के पोर्टल  www.tribal.mp.gov.in पर उपलब्ध कराई गई है। आवेदक MPTAAS पर ट्रांसफर मॉड्यूल में ‘‘शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर‘‘ के विकल्प पर क्लिक करेगा। आवेदक द्वारा यूनिक आई.डी., मोबाइल नम्बर तथा ई-मेल दर्ज करने पर आवेदक के मोबाइल नम्बर तथा ई-मेल पर ओटीपी प्राप्त होगा। आवेदक द्वारा ओटीपी दर्ज करने पर अगली स्क्रीन पर आवेदक की सामान्य जानकारी जैसे नाम, पदनाम, विषय, वर्तमान पद-स्थापना एवं जिला आदि की जानकारी प्रदर्शित होगी। तत्पश्चात् आदिम-जाति कल्याण विभाग की शालाओं की जिलेवार जानकारी प्रदर्शित होगी।

कृषक पशुपालन, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी से अपनी आय दुगुनी कर सकते हैं – एसीएस श्री प्रभांशु कमल

इन्दौर | 06-जून-2019 कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री प्रभांशु कमल की अध्यक्षता में आज रेसीडेंसी सभाकक्ष में संभाग स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें इंदौर संभाग के सभी कलेक्टर्स और सभी जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी मौजूद थे। इस अवसर पर श्री प्रभांशु कमल ने पशुपालन, कुक्कुट पालन, उद्यानिकी और मत्स्य विभाग की समीक्षा की। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार किसानों की आय दुगुनी करना चाहते हैं। प्रदेश के कृषक पशुपालन, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी के जरिये अपनी आय दुगुनी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, दृढ़ इच्छाशक्ति, पक्के इरादे से किसान अपनी किस्मत बदल सकते हैं और अपनी गरीबी मिटा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी और पशुपालन के क्षेत्र में रोजगार की व्यापक संभावनाएँ हैं। किसान अपने व्यवसाय के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकते हैं। बैठक को संभागायुक्त श्री आकाश त्रिपाठी ने भी सम्बोधित किया।
उन्होंने उद्यानिकी विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि इंदौर संभाग में फल, सब्जी, मसाले और औषधीय खेती की व्यापक संभावनाएँ हैं। उद्यानिकी विभाग द्वारा इस क्षेत्र में क्षेत्र विस्तार के लिये न केवल अनुदान बल्कि तकनीक और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी विभाग के अधिकारी शासकीय नर्सरी का विस्तार और रखरखाव करें। नर्सरी के संधारण के लिये स्वसहायता समूह और मनरेगा योजना का भी सहयोग ले सकते हैं। प्रदेश के साथ-साथ इंदौर संभाग में भी वन विस्तार की बहुत अधिक आवश्यकता है। नमामि देवि नर्मदे योजना के तहत राज्य शासन नर्मदा नदी के किनारे इस पार और उस पार दो-दो किमी. वृक्षारोपण करना चाहता है। उद्यान विभाग की जिम्मेदारी यह भी है कि वह सस्ती दर पर वृक्षारोपण के लिये आम आदमी और शासकीय एजेंसियों को पौधे उपलब्ध करायें। उद्यान विभाग द्वारा प्रदेश में बीपीएल परिवारों को सब्जी के मुफ्त में बीज वितरित किये जाते हैं। किसानों को संरक्षित खेती के लिये पोलीहाउस, शेडनेट और प्लास्टिक मल्चिंग के लिये अनुदान प्रदान किया जायेगा।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव पशुपालन श्री मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि पशुपालन और डेयरी उद्योग से किसान अपनी गरीबी दूर कर सकते हैं। उन्हें उन्नत नस्ल के पशुओं का पालन करना होगा और पशुपालन से पहले चारे और पानी की व्यवस्था करना होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशुओं के इलाज में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा पशुओं के इलाज की त्वरित सेवा के लिये पशु संजीवनी योजना शुरू की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशुओं की टैगिंग की जा रही है। हर जिले में प्राथमिकता के आधार पर गौशाला खोली जा रही है। गौशाला का रखरखाव ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जायेगा। इसके लिये आवश्यक बजट राज्य शासन द्वारा दे दिया गया है।
इस अवसर प्रमुख सचिव मत्स्य पालन श्री अश्विनी राय ने बताया कि प्रदेश में मछली पालन की व्यापक संभावनाएँ हैं। इससे किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। प्रदेश में ऐसे कई मत्स्य कृषक हैं, जो एक लाख रूपये से अधिक प्रतिमाह कमाते हैं। मत्स्य विभाग की वेबसाइट पर उनकी सक्सेस स्टोरी भी दर्ज है। बैठक में भी कई मत्स्य कृषकों ने अपनी सफलता की कहानी सुनायी। धार जिले के सुंद्रैल गाँव में एक किसान द्वारा व्यापक पैमाने पर मत्स्य बीज का उत्पादन किया जा रहा है। उसका टर्न ओवर चार करोड़ रूपये सालाना है और उसके पास 40 नौकर भी हैं। प्रदेश के सभी तालाबों में मछली पालन करके मत्स्य पालन चार गुना बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश में मत्स्य पालन के क्षेत्र में उन्नत तकनीक आ गयी है। मत्‍स्य विभाग द्वारा इस उन्नत तकनीक का व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस अवसर पर बैठक में बताया गया कि इंदौर संभाग में दुग्ध उत्पादन यानि श्वेत क्रांति की व्यापक संभावनाएँ हैं। उन्नत नस्ल के गाय-भैंस पाल कर किसान अपनी माली हालत सुधार सकते हैं। हर जिले में दुग्ध समितियों के गठन करने की जरूरत है। हर जिले में दुग्ध संघ द्वारा या निजी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर डेयरी उद्योग स्थापित करने की जरूरत है। डेयरी उद्योग के लिये कृत्रिम गर्भाधान, दुग्ध समितियों द्वारा दुग्ध संकलन, पशु आहार विक्रय जरूरी है। इंदौर जिले में दुग्ध उत्पादन का काम बहुत अच्छा चल रहा है। इंदौर साँची डेयरी की क्षमता का विस्तार किया जायेगा। खरगोन जिले में 400 दुग्ध समितियाँ काम कर रहीं हैं। इसी प्रकार धार जिले में 535 दुग्ध समितियाँ कार्यरत हैं। इंदौर जिले में डेढ़ लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन किसान जा रहा है। 2019-20 में 2 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। इंदौर जिले में स्थानीय स्तर पर लगभग 1 लाख 51 हजार लीटर दुग्ध विक्रय किया जा रहा है। इंदौर सहकारी दुग्ध संघ द्वारा 2 हजार लीटर प्रति पारी क्षमता वाला आइसक्रीम प्लांट की स्थापना की कार्यवाही की जा रही है। इस योजना में अनुमानित लागत साढ़े तीन करोड़ है।
कार्यक्रम को वरिष्ठ अधिकारी श्री एम.के. अग्रवाल, उद्यानिकी संचालक श्री कवीन्द्र कियावत ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर बैठक में पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन और डेयरी उद्योग के संभागीय और जिला अधिकारी मौजूद थे।