Saturday, March 28News That Matters

MP संकट पर SC ने स्पीकर से कहा- अब तक इस्तीफों पर फैसला क्यों नहीं लिया

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मध्य प्रदेश में पिछले कई दिनों से सियासी ड्रामा चल रहा है. सत्ता के लिए बीजेपी और कांग्रेस में कोर्ट और उससे बाहर जंग जारी है. बुधवार को बेंगलुरु और सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश की राजनीति का केंद्र रहा. सुप्रीम कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने कोई फैसला तो नहीं सुनाया और गुरुवार सुबह साढ़े 10 बजे एक फिर सुनवाई होगी. लेकिन सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियां अहम रहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि स्पीकर ने 16 बागियों के इस्तीफे पर कोई फैसला क्यों नहीं किया. अगर स्पीकर संतुष्ट नहीं तो इस्तीफों को नामंजूर कर सकते हैं. अदालत ने ये भी टिप्पणी की कि अगर बजट पास नहीं होगा तो राज्य का काम कैसे चलेगा?

बहरहाल, कोर्ट क्या फैसला देगा ये तो बाद में पता चलेगा, लेकिन कमलनाथ सरकार को बचाने का दांव आज कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने चल दिया. वो बेंगलुरू में हैं और राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर बागी विधायकों से मिलने की कोशिश कर रहे हैं.

कर्नाटक की पुलिस ने उन्हें विधायकों के पास नहीं पहुंचने दिया तो विधायकों ने फिर कहा है कि वो स्वेच्छा से बेंगलुरू आए हैं, लेकिन दिग्विजय विधायकों से मिलने की मांग पर कर्नाटक हाई कोर्ट चले गए. हालांकि, यहां से उनको झटका लगा और कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. मामले की अगली सुनवाई अब 26 मार्च को होगी.

बताया जा रहा है कि दिग्विजय सिंह सुप्रीम कोर्ट में भी गुहार लगाएंगे. इस बीच मध्य प्रदेश बीजेपी ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर कहा है कि दिग्विजय सिंह विधायकों पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं.

हिरासत में लिए गए दिग्विजय सिंह

कमलनाथ सरकार को बचाने का जिम्मा अब दिग्विजय सिंह ने खुद अपने कंधों पर ले लिया है. बागी विधायकों से मिलने की कोशिश के दौरान दिग्विजय सिंह को कर्नाटक पुलिस ने हिरासत में लिया फिर छोड़ा, लेकिन दिग्विजय मैदान छोड़ने को तैयार नहीं हैं. बता दें कि कांग्रेस के 16 बागी विधायक बेंगलुरु के रिजॉर्ट में हैं.

हालांकि, जब दिग्विजय सिंह बेंगलुरू में हैं तो बागी विधायकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके फिर एक बार साफ किया कि उन्होंने कांग्रेस से खुद से दूरी बना ली है. बेंगलुरू में मौजूद 16 विधायकों से ही कमलनाथ सरकार के बने रहने या नहीं रहने का फैसला होना है, इसलिए इन्हें लेकर आर-पार की लड़ाई छिड़ रही है.