Friday, January 27News That Matters

कॉलेज की बिल्डिंग महाराष्ट्र में, गार्डन कर्नाटक में:कन्नड़-मराठी के झगड़े में उलझे 865 गांव, घर-घर में शिवाजी की प्रतिमा

‘इस डिग्री कॉलेज में 7000 स्टूडेंट पढ़ते हैं। ये सब रहते कर्नाटक में हैं, लेकिन डिग्री महाराष्ट्र की मिलती है। जब ये लोग कर्नाटक सरकार की वैकेंसी के लिए अप्लाई करते हैं, तो बोला जाता है कि आपकी डिग्री तो महाराष्ट्र की है। जब ये महाराष्ट्र की वैकेंसी के लिए अप्लाई करते हैं, तो कहा जाता है कि आप तो कर्नाटक के रहने वाले हैं। अब बताइए, क्या सरकारें सो रही हैं।’

ये कहानी है महाराष्ट्र-कर्नाटक बॉर्डर पर बसे मराठी बहुल टाउन निप्पानी के देवचंद कॉलेज की। इस कॉलेज की मेन बिल्डिंग महाराष्ट्र में है, लेकिन इसी कॉलेज का गार्डन कर्नाटक में आता है। पढ़ने वाले सब कर्नाटक के हैं, लेकिन स्टूडेंट्स को डिग्री लेने महाराष्ट्र के कोल्हापुर जाना पड़ता है।

इसी कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. भरत पाटिल बताते हैं- ‘हमारे कॉलेज का एफिलिएशन महाराष्ट्र की शिवाजी यूनिवर्सिटी से है। महाराष्ट्र-कनार्टक डिस्प्यूटेड बॉर्डर एरिया के नाम पर महाराष्ट्र ने स्टूडेंट्स को रिजर्वेशन दिया है, लेकिन उसमें हमें सिर्फ 15 सीटें मिलती हैं, जबकि इस इलाके में 865 गांव आते हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि हमें स्थायी तौर पर महाराष्ट्र में शामिल कर दिया जाए।’