सीहोर के 258 गांवों में जल संकट की आशंका: 31 जुलाई तक पेयजल परिरक्षण अधिनियम लागू
24 मार्च 2026
सीहोर | जिले में बढ़ती गर्मी और गिरते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर बालागुरु के. के निर्देश पर जिले के 258 गांवों में संभावित जल संकट को ध्यान में रखते हुए पेयजल परिरक्षण अधिनियम लागू कर दिया गया है। यह अधिनियम 31 जुलाई तक प्रभावी रहेगा।
जल संकट से निपटने की तैयारी
गर्मी के मौसम में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने समय रहते पानी के संरक्षण और दुरुपयोग को रोकने के लिए यह कदम उठाया है।
पानी के दुरुपयोग पर सख्ती
अधिनियम लागू होने के बाद अब पेयजल के अनावश्यक उपयोग और बर्बादी पर प्रतिबंध रहेगा। खासतौर पर निम्न गतिविधियों पर रोक लगाई गई है:
- पेयजल से वाहन धोना
- निर्माण कार्यों में उपयोग
- बागवानी या अन्य गैर-जरूरी कामों में इस्तेमाल
नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस
जिले के 258 गांवों को जल संकट की दृष्टि से संवेदनशील माना गया है। इन क्षेत्रों में जल स्रोतों की निगरानी बढ़ाई गई है और टैंकरों के माध्यम से वैकल्पिक जल आपूर्ति की योजना भी तैयार की जा रही है।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे पानी का संयमित और जिम्मेदारी से उपयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि यदि सभी लोग सहयोग करें, तो गर्मी के पूरे सीजन में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
लंबी अवधि के समाधान पर भी काम
प्रशासन जल संरक्षण के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर भी काम कर रहा है, जिसमें वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्भरण और जागरूकता अभियान शामिल हैं।
सीहोर में लागू किया गया यह कदम आने वाले महीनों में जल संकट से निपटने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, बशर्ते आमजन इसका पालन करें और पानी बचाने में सहयोग दें।
खेरी में होली पर ‘बर्तन प्रथा’ खत्म करने का फैसला, उल्लंघन पर 5000 रुपये जुर्माने का प्रावधान
सीहोर | 27 फरवरी , 2026
सामाजिक सुधार की दिशा में एक अहम पहल करते हुए अखिल भारतीय चंद्रवंशी खाती समाज ने होली के अवसर पर वर्षों से चली आ रही ‘बर्तन प्रथा’ को समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह फैसला ग्राम पंचायत खेरी स्थित हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित समाज की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया, जिसमें समाज के वरिष्ठजन, युवा प्रतिनिधि और महिला सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक में प्रथा से जुड़े सामाजिक दबाव, अनावश्यक खर्च और आपसी प्रतिस्पर्धा जैसी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि ‘बर्तन प्रथा’ के तहत त्योहारों पर परिवारों को परंपरा के नाम पर बर्तन या अन्य सामान देना पड़ता था, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। कई परिवार सामाजिक प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए कर्ज तक लेने को मजबूर हो जाते थे। इसी स्थिति को देखते हुए समाज ने सामूहिक रूप से इसे बंद करने का निर्णय लिया, ताकि सभी वर्गों के लोग बिना दबाव और भेदभाव के त्योहार मना सकें।
बैठक में यह भी तय किया गया कि इस निर्णय का उल्लंघन करने वालों पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह दंड व्यवस्था केवल नियम पालन सुनिश्चित करने के लिए है और इसका उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं बल्कि सामाजिक सुधार को मजबूत बनाना है।
स्थानीय लोगों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे प्रगतिशील कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे समाज में दिखावे की प्रवृत्ति कम होगी और त्योहारों का असली उद्देश्य—सौहार्द और खुशी—बरकरार रहेगा। समाज के नेताओं ने अन्य समुदायों से भी ऐसी कुप्रथाओं को समाप्त करने की अपील की है, ताकि सामाजिक समानता और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिल सके।
गाय राधा की सम्मानपूर्ण अंतिम यात्र
सीहोर | 4 फरवरी , 2026
सीहोर जिले के लाचौर गांव में गाय राधा की अंतिम यात्रा । यह कोई साधारण पशु संस्कार नहीं था बल्कि परिवार ने इसे अपने घर के सदस्य की तरह सम्मान देते हुए अनोखे तरीके से विदाई दी।
गाय राधा वर्षों से परिवार के साथ रही और उनका घर का अभिन्न हिस्सा बन गई थी। उनके निधन पर परिवार ने पारंपरिक वैदिक रीति‑रिवाजों का पालन करते हुए एक भव्य अंतिम यात्रा का आयोजन किया। यात्रा के दौरान गाय को सजाकर बैलगाड़ी पर बैठाया गया और गांव की गलियों से ले जाया गया।
इस दौरान ढोल-नगाड़े की थाप, पटाखों की रोशनी और वैदिक मंत्रोच्चार ने पूरे माहौल को उत्सव जैसी भव्यता दे दी। पड़ोसी और ग्रामीण भी श्रद्धा के साथ इस यात्रा में शामिल हुए और गाय को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
परिवार ने कहा कि यह अनोखी विदाई केवल एक पशु के प्रति सम्मान दिखाने के लिए नहीं, बल्कि गौ‑सेवा और जीव‑दया के संदेश को समाज तक पहुँचाने के लिए भी आयोजित की गई थी। इस घटना ने स्थानीय लोगों के दिलों को छू लिया और सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन गई।
सीहोर: इछावर क्षेत्र में तेंदुए का आतंक, 5 गांवों में फैली दहशत; वन विभाग की सुस्ती पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
सीहोर | 6 जनवरी, 2026
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में इन दिनों तेंदुए की सक्रियता ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में इलाके के पांच से अधिक गांवों में तेंदुए की दस्तक देखी गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीण अब जान-माल की सुरक्षा को लेकर भारी चिंता में हैं।
पांच गांवों में लगातार दिख रहा तेंदुआ
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तेंदुआ एक गांव से दूसरे गांव में लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है। अब तक इसे क्षेत्र के पांच प्रमुख गांवों के आस-पास देखा जा चुका है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तेंदुआ न केवल खेतों में, बल्कि रिहाइशी बस्तियों की सीमाओं तक पहुँच रहा है। इसके डर से किसानों ने शाम के बाद खेतों पर जाना बंद कर दिया है, जिससे फसलों की सिंचाई और देखभाल पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
वन विभाग पर ‘निष्क्रियता’ का आरोप
तेंदुए की मौजूदगी की लगातार सूचनाओं के बावजूद, ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी असंतोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि:
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वन विभाग को बार-बार सूचना दी गई, लेकिन टीम केवल खानापूर्ति के लिए आती है।
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तेंदुए को पकड़ने के लिए अब तक पिंजरा नहीं लगाया गया है।
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प्रभावित इलाकों में गश्त (Petrolling) बढ़ाने की मांग को भी अनसुना किया गया है।
घरों में कैद होने को मजबूर ग्रामीण
दहशत का आलम यह है कि सूरज ढलते ही लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं। पालतू मवेशियों पर हमले का खतरा बढ़ गया है, जिसे देखते हुए लोग रात-भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही तेंदुए को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर नहीं भेजा गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
“हम डरे हुए हैं, बच्चे घर से बाहर नहीं निकल पा रहे। वन विभाग को कई बार बताया पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?” — एक स्थानीय ग्रामीण
बुधनी उप निर्वाचन में अधिक से अधिक मतदान के लिए आयोजित की जा रही अनेक स्वीप गतिविधियां
सीहोर : नवम्बर 4, 2024
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री प्रवीण सिंह के निर्देशानुसार बुधनी विधानसभा उप निर्वाचन के तहत बुधनी विधानसभा क्षेत्र में अधिक से अधिक मतदान के लिए अनेक स्वीप गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इन मतदाता जागरूकता गतिविधियों के तहत मतदाताओं को उनके मतदान के अधिकार और जिम्मेदारियों के प्रति प्रेरित करने के लिए रैलियों, मतदान की शपथ, रंगोली, पोस्टर, बैनर और होडिंग्स के माध्यम से अधिक से अधिक मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
प्राकृतिक खेती के लिए वरदान साबित हो सकता है एडवांस जीवामृत
June 07, 2024
प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत वरदान के रूप में कार्य कर रहा है। जीवामृत की एक यूनिट से 100 एकड़ तक खेती की जा सकती है। जीवामृत को सिंचाई से सांथ खेती में उपयोग करने से भूमि में लाभदायक जीवाणुओ की संख्या बढती है। मृदा स्वस्थ बनती है, और फसल उतनी ही बेहतर आती है, इसी के साथ इसके से मृदा में केंचुओ संख्या बढती है। जिला मुख्यालय से 28 किमी दूरी ग्राम सालीखेडा में कई आदिवासी बरेला जनजाति के किसान परिवार रहते हैं, जहां जीवामृत को अपनाया गया है। गांव में 164 किसानो के पास वन अधिकार पत्र हे जिसके आधार पर वह गांव में खेती करते है।
समर्थन संस्था द्वारा विगत 2 वर्षों से गांव में जैविक खेती को बढावा देने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए सर्वप्रथम गांव में 2023 में किसान संजय बरेला के खेत पर बोयो इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) की स्थापना की गई, जिसमे प्राकृतिक खेती के लिए सबसे ज्यादा आवश्यक गो मूत्र है। गोमूत्र कलेक्शन के लिए यूनिट बनाई गई। श्री संजय बारेला के खेत पर 5 प्लास्टिक के ड्रम और गोमूत्र कलेक्शन सेंटर के माध्यम से (बीआरसी) को प्रारम्भ किया गया। जिसमें कीट प्रबंधन के लिए चार चटनी, पांच पत्ती काडा, नीम अस्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्नि अस्त्र जेसी जैविक कीटनाशको और ग्रोथ प्रमोटर और टॉनिक के स्थान पर सोया टॉनिक और कंडा पानी, जीव अमृत का प्रयोग किया गया। बीआरसी सेंटर को धीरे- धीरे तकनीकी रूप से अपडेट किया गया, जिमसे जैविक कीटनाशको को बनाने के लिए कटाई और पिसाई के लिए ग्रेवी मशीन का उपयोग किया गया जिससे कम समय में ज्यादा से ज्यादा दवाइयों को बनाया जा सके । बीआरसी से 40 किसानों को जोड़ा गया। आज किसान अपनी 2 एकड़ से लेकर 14 एकड़ में जैविक अदानो का प्रयोग कर रहे है।
इसी प्रकार अप्रैल में बड़वानी जिले के किसानो को एक शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम में एडवांस जीवामृत यूनिट को दिखाया गया। जिसके परिणाम स्वरूप ग्राम सालीखेडा में अभय बरेला और बीलखेडा में थॉमस के यंहा एक एक यूनिट को लगाया गया है, जिससे 200 लीटर जीवामृत प्रतिदिन बनाया जा सकता है। यह तकनीक कृषि के क्षेत्र में एक क्रांति के रूप में कार्य करते हुए किसानों की मदद कर सकती है|
कलेक्टर ने पेंशन प्रकरणों को समय-सीमा में शिविर आयोजित कर निराकरण के निर्देश दिये
मई 22, 2024
जिले में लंबित पेंशन प्रकरणों को निर्धारित समय-सीमा में निराकरण के लिए कलेक्टर श्री प्रवीण सिंह ने जिले के समस्त आहरण एवं सवितरण अधिकारियों निर्देश दिये कि अपने-अपने कार्यालयों के लंबित प्रेंशन प्रकरणों को शिविर लगाकर शीघ्र अतिशीघ्र निराकरण करें।
कलेक्टर श्री प्रवीण सिंह ने इस आशय के निर्देश गत दिवस आयोजित टी०एल० बैठक के अवसर पर जिला अधिकारियों को दिये। जिलें में लंबित पेंशन प्रकरणों के निराकरण के लिए शिविर का आयोजन किया जा रहा है।जिसमें अपने अधिनस्थ लेखा सहायक, स्थापना प्रभारी, पेंशन प्रकरण क्रियेटर के साथ लंबित पेंशन प्रकरणों की सेवापुस्तिका एवं समस्त दस्तावेजो के साथ 24 मई को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित शिविर में अनिवार्यतः उपस्थित होना सुनिश्चित करें। शिविर में संबंधित पेंशनर को भी उपस्थित होने के लिए कहा जायाए।साथ ही लंबित पेंशन प्रकरणों में न्यायालय प्रकरणों एवं विभागीय जांच संबंधी लंबित प्रकरणों की अद्यतन स्थिति एवं आपके द्वारा तत्संबंधी की गई कार्यवाही स्पष्ट करता हुआ पत्र भी साथ लेकर आवें। आपके डीडीओ अंतर्गत कोई नाम छूट गया हो तो उसे भी शामिल करें और कहा कि पेंशन प्रकरण के निराकरण कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाये।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की हीट स्ट्रोक एडवाइजरी स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध हैं लू के उपचार की सभी व्यवस्थाएं
सीहोर : मई 6, 2024,
तापमान में बढ़ोत्तरी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। साथ ही जिला अस्पताल से लेकर उपस्वास्थ्य केंद्र तक की संस्थाओं को लू के प्रकरणों के उपचार के लिए अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।
हीट स्ट्रोक के प्रारंभिक प्रबंधन के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में ओआरएस कॉर्नर बनाए गए हैं। उल्टी, दस्त, बुखार के प्रबंधन और उपचार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं स्वास्थ्य केंद्रों में सुनिश्चित की गई हैं।
गंभीर और घातक हो सकता है हीट स्ट्रोक
हीट स्ट्रोक होने पर शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे हो सकती है या एकाएक भी आ सकती है। जटिल अवस्था होने पर किडनी काम करना बंद कर सकती है। लू लगने पर अगर तुरंत उपचार न किया जाए तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।
लक्षणों की जल्द पहचान करके बीमारी की गंभीरता को किया जा सकता है कम
तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना, चक्कर और उल्टी आना, कमजोरी के साथ शरीर में दर्द होना, शरीर का तापमान अधिक होने के बावजूद पसीने का न आना, सिर में भारीपन और दर्द का अनुभव होना, अधिक प्यास लगना और पेशाब कम आना, भूख कम लगना, बेहोश होना, लू लगने के लक्षण है। इन लक्षणों की पहचान जल्द से जल्द किया जाना जरूरी है, जिससे शीघ्र उपचार शुरू किया जा सके।
विशेष प्रकार के सायबर अपराधों ठगी की शिकायत देखने में आ रही है
अप्रैल 22, 2024
पिछले कुछ समय से एक विशेष प्रकार के सायबर अपराधों की शिकायत देखने में आ रही है, जिसमें आम नागरिकों को किसी इंवेस्टीगेशन एजेंसी/संस्था के वरिष्ठ अधिकारी के नाम से कॉल/व्हाट्सएप कॉल करके बड़े पैमाने पर ठगी के संबंध में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, राज्य सायबर पुलिस भोपाल द्वारा आम नागरिकों को सलाह। खुद को साइबर ठगों से बचाने के लिए सबसे जरूरी है जागरूकता व सतर्कता लालच और लापरवाही के कारण साइबर अपराध का शिकार हो जाते हैं।
कार्य प्रणाली
पिछले कुछ समय से एक विशेष प्रकार का अपराध देखने में आ रहा है, जिसमें सायबर अपराधी कॉल अथवा व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से संपर्क करते हैं। यह कॉल अधिकांशतः +92(पाकिस्तानी) नम्बर या किसी अन्य देश के नम्बर(+91 के अतिरिक्त) से आते हैं। संदिग्ध व्यक्ति कॉल करके आपको डराते हुये यह कहते हैं कि आपके PAN / AADHAR कार्ड का उपयोग करके पार्सल भेजा गया है, जिसमें नार्कोटिक्स (नशीली) सामग्री है। जालसाज NCB/CBI/ED/NIA आदि इंवेस्टीगेशन एजेंसी के अधिकारी के नाम से बदल-बदल कर कभी कॉल, कभी व्हाट्सएप वीडियो कॉल करते हैं, और कहते हैं कि उन्होंने आपके नाम से एक पार्सल पकड़ा है, जिसमें नार्कोटिक्स (नशीली) सामग्री है।
जालसाजों द्वारा कभी आपको कोर्ट फीस देने या जमानत देने के नाम से अथवा आपका नाम केस से हटाने के नाम पर पैसे की मांग की जाती है। कभी-कभी वीडियो कॉल पर पुलिस अधिकारी से बात करने को भी कहते हैं। वीडियो कॉल पर रहते हुये आपको एक फर्जी नोटिस दे दिया जाता है, जिसमें आपको डिजिटल अरेस्ट करते हुये घर में ही रहने को कहा जाता है। और कहा जाता है कि आप स्वयं को किसी कमरे में बंद करलें तथा उनके सभी सवालों के जवाब दें। यह भी कहा जाता है कि कैमरे के सामने ही रहना है, कमरे में यदि कोई और आया तो आप दोनों को गिरफ्तार कर लिया जायेगा। धीरे-धीरे आपको और अधिक डराया जाता है और आपकी निजी व खातों तथा विभिन्न इंवेस्टमेंट की जानकारी आपसे ले ली जाती है। अंत में यह कहकर कि शायद आपको गलत फंसा दिया गया है, आप जांच पूरी होने तक अपना पैसा आरबीआई/भारत सरकार के खाते में जमा कर दें, जो जांच पूरी होने के बाद आपको लौटा दिया जायेगा। इस पूरी कार्यवाही के दौरान आपको न ही किसी से संपर्क करने का मौका दिया जाता है, न ही बाहर जाने दिया जाता है और इस प्रकार आपसे मोटी रकम जमा करा ली जाती है।
एहतियात
अनजान नम्बर खासकर जो +92 से शुरु होते हों, से आने वाले कॉल, व्हाट्सएप कॉल/वीडियो कॉल, टेलीग्राम कॉल न उठाएं। भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट का कोई नियम नहीं है। अतः किसी के कहने पर या डर से खुद को कहीं बंद न करें। अपनी निजी जानकारी जैसे बैंक खाते संबंधी, आधार आदि को किसी के साथ साझा न करें। कोई भी संस्था आपसे आपका निजी पैसा किसी भी शासकीय खाते में जमा करने या सुरक्षित करने की सलाह नही देता। अतः कभी भी अपना पैसा किसी अनजान खाते में ट्रांसफर न करें। यदि आपके साथ कोई सायबर अपराध घटित होता है तो उसकी शिकायत अपने नजदीकी पुलिस थाने में या www.cybercrime.gov.in याCyber Crime Help Line (Toll Free) नम्बर 1930 पर करें।


