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सायोनी घोष पर भी चला थलपति विजय का जादू! CM से मुलाकात के बाद जमकर की तारीफ

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नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बागी सांसद सायोनी घोष ने चेन्नई में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय यानी थलपति विजय से मुलाकात की। यह मुलाकात चेन्नई स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई। मुलाकात के बाद सायोनी घोष ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए मुख्यमंत्री विजय की गर्मजोशी भरी मेहमाननवाजी और उनके राजनीतिक विजन की जमकर तारीफ की।

सायोनी घोष ने तमिलनाडु के भविष्य को लेकर विजय की सोच की सराहना करते हुए कहा कि उनका विजन समावेशी विकास, अवसर और सुशासन पर आधारित है। मुलाकात के दौरान पश्चिम बंगाल की संस्कृति और परंपराओं को लेकर भी बातचीत हुई। विजय ने पश्चिम बंगाल की समृद्ध संस्कृति के प्रति अपना लगाव जाहिर किया।

मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई मुलाकात

रिपोर्ट के मुताबिक, सायोनी घोष मंगलवार को चेन्नई पहुंची थीं, जहां उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात की। दोनों नेताओं की मुलाकात चेन्नई स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई।

सायोनी घोष ने मुलाकात की तस्वीरों को एक वीडियो के रूप में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। इस वीडियो में वह मुख्यमंत्री विजय के साथ नजर आ रही हैं। दोनों ने इस दौरान एक सेल्फी भी ली।

मुलाकात की तस्वीरों में सायोनी घोष मुख्यमंत्री विजय को कुछ भेंट करती हुई भी दिखाई दे रही हैं। इस मुलाकात के बाद उन्होंने विजय के व्यक्तित्व और उनके व्यवहार की सराहना की।

सायोनी घोष ने की विजय के विजन की तारीफ

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सायोनी घोष ने तमिलनाडु और उसके भविष्य को लेकर विजय के विचारों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि विजय का विजन समावेशी विकास, अवसर और अच्छे शासन पर केंद्रित है।

सायोनी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री विजय की गर्मजोशी भरी मेहमाननवाजी के लिए उनका आभार जताया और तमिलनाडु के लिए उनके विजन को पूरा करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने पश्चिम बंगाल की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के प्रति अपना लगाव जाहिर किया।

विजय के साथ सायोनी ने ली सेल्फी

मुलाकात की तस्वीरों में सायोनी घोष और थलपति विजय एक साथ नजर आए। सायोनी ने मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी भी ली, जिसे उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में साझा किया।

इसके अलावा उन्होंने मुलाकात की कई तस्वीरों को जोड़कर एक वीडियो भी पोस्ट किया। वीडियो के बैकग्राउंड में थलपति विजय की फिल्म का गाना सुनाई देता है। पोस्ट सामने आने के बाद दोनों नेताओं की मुलाकात सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।

सायोनी ने क्या लिखा?

सायोनी घोष ने X पर अपनी पोस्ट में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात को सुखद बताया। उन्होंने तमिलनाडु और उसके भविष्य को लेकर विजय की सोच का उल्लेख किया और उनके विजन की सराहना की।

सायोनी ने विशेष रूप से समावेशी विकास, अवसर और सुशासन का जिक्र किया। उन्होंने मुख्यमंत्री की गर्मजोशी भरी मेहमाननवाजी के लिए आभार जताया और अपने राज्य के लिए उनके विजन को पूरा करने की दिशा में काम करने के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

बंगाल की संस्कृति पर भी हुई चर्चा

मुलाकात का एक दिलचस्प पहलू पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के सांस्कृतिक संबंधों से जुड़ा रहा। सायोनी घोष के मुताबिक, बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने पश्चिम बंगाल की संस्कृति और परंपराओं के प्रति अपनी रुचि और लगाव जाहिर किया।

सायोनी खुद बंगाली मनोरंजन जगत से राजनीति में आई हैं। ऐसे में बंगाल और तमिलनाडु की संस्कृति को लेकर दोनों के बीच बातचीत को भी इस मुलाकात का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

दोनों नेताओं का है फिल्मी कनेक्शन

सायोनी घोष और थलपति विजय की मुलाकात सिर्फ राजनीति के लिहाज से ही दिलचस्प नहीं है। दोनों नेताओं का सिनेमा से भी गहरा जुड़ाव रहा है।

थलपति विजय दक्षिण भारतीय सिनेमा के बड़े सितारों में शामिल रहे हैं और बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। वहीं सायोनी घोष भी बंगाली फिल्मों में काम करने के बाद राजनीति में सक्रिय हुईं।

यानी दोनों नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि अलग होने के बावजूद उनका एक साझा पहलू फिल्म जगत से जुड़ाव है। इसी वजह से इस मुलाकात को राजनीतिक और फिल्मी दोनों नजरिए से चर्चा मिल रही है।

सायोनी घोष और थलपति विजय की मुलाकात क्यों अहम?

सायोनी घोष की थलपति विजय से मुलाकात ऐसे समय हुई है जब विजय तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चेहरे के तौर पर उभर चुके हैं। वहीं सायोनी घोष भी तृणमूल कांग्रेस से अलग रुख अपनाने के बाद राजनीतिक रूप से चर्चा में हैं।

ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को क्षेत्रीय राजनीति में संभावित संवाद के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि, मुलाकात के पीछे कोई विशेष राजनीतिक एजेंडा या भविष्य की राजनीतिक रणनीति घोषित नहीं की गई है। उपलब्ध रिपोर्ट में भी सायोनी घोष ने मुलाकात का कोई विस्तृत राजनीतिक उद्देश्य नहीं बताया है।

मुलाकात को लेकर सायोनी ने नहीं बताया पूरा कार्यक्रम

रिपोर्ट के अनुसार, सायोनी घोष ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस विशेष सिलसिले में मुख्यमंत्री विजय से मिलने चेन्नई पहुंची थीं। उन्होंने मुख्य रूप से मुलाकात के दौरान विजय के व्यवहार, उनकी मेहमाननवाजी और तमिलनाडु को लेकर उनके विजन की सराहना की।

मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई।

क्षेत्रीय राजनीति में नए संवाद की चर्चा

भारत की राजनीति में क्षेत्रीय दलों और क्षेत्रीय नेताओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में अलग-अलग राज्यों के नेताओं के बीच होने वाली मुलाकातें अक्सर राजनीतिक नजरिए से भी चर्चा में आती हैं।

सायोनी घोष और थलपति विजय की मुलाकात को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, फिलहाल दोनों के बीच हुई बातचीत से किसी बड़े राजनीतिक गठजोड़ या रणनीति का आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।

इस मुलाकात की खास बात यह रही कि सायोनी घोष ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री विजय के विजन, सुशासन और मेहमाननवाजी की तारीफ की। साथ ही पश्चिम बंगाल की संस्कृति के प्रति विजय के लगाव का भी उल्लेख किया।

सोशल मीडिया पर तस्वीरें बनीं चर्चा का विषय

सायोनी घोष द्वारा साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में दोनों नेताओं की मुलाकात की झलक दिखाई गई। एक तस्वीर में दोनों साथ खड़े नजर आए, जबकि दूसरी तस्वीर में सायोनी घोष विजय को कुछ भेंट करती दिखाई दीं।

वीडियो में थलपति विजय की फिल्म का गाना भी इस्तेमाल किया गया। इससे मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई।

फिलहाल राजनीतिक मायने पर कोई आधिकारिक बयान नहीं

सायोनी घोष और थलपति विजय की मुलाकात निश्चित रूप से चर्चा में है, लेकिन फिलहाल इसे किसी राजनीतिक गठबंधन या रणनीतिक समझौते से जोड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

मुलाकात के बाद सायोनी घोष की ओर से जारी संदेश मुख्य रूप से मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व, तमिलनाडु के विकास को लेकर उनके विचार और उनकी मेहमाननवाजी की प्रशंसा पर केंद्रित रहा।

ऐसे में आने वाले दिनों में यदि इस मुलाकात को लेकर दोनों पक्षों की ओर से कोई राजनीतिक बयान सामने आता है, तो उसके बाद ही इसके व्यापक राजनीतिक मायने स्पष्ट हो सकेंगे।


संगठन में जगह नहीं, क्या सरकार में मिलेगी जिम्मेदारी? अनुराग ठाकुर, राघव चड्ढा और तेजस्वी सूर्या पर टिकी नजरें

नई दिल्ली | 18 अगस्त 2026

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला है। कई पुराने नेताओं को दोबारा जिम्मेदारी दी गई है, जबकि बड़ी संख्या में नए चेहरों को भी संगठन में जगह मिली है।

लेकिन इस नई टीम के बाद कुछ चर्चित नेताओं की अगली भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या प्रमुख नाम हैं। इन नेताओं को नई संगठनात्मक टीम में जगह नहीं मिली है। इसी के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या संगठन से बाहर रखे गए इन चेहरों को केंद्र सरकार में कोई नई जिम्मेदारी दी जा सकती है?

नितिन नवीन की नई टीम में 51 नए चेहरे

बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में व्यापक बदलाव किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 51 नए चेहरों को संगठन में शामिल किया गया है, जबकि 14 नेताओं को दोबारा जिम्मेदारी मिली है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को एक बार फिर पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं कई नेताओं को राज्यों में संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।

इसी बदलाव के बीच अनुराग ठाकुर और राघव चड्ढा जैसे नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में पद नहीं मिलने से उनके अगले राजनीतिक रोल को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं।

अनुराग ठाकुर का अगला रोल क्या होगा?

हिमाचल प्रदेश से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर बीजेपी के प्रमुख युवा और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में सूचना एवं प्रसारण तथा खेल मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

नई राष्ट्रीय टीम में उनका नाम नहीं होने के बाद अब चर्चा है कि पार्टी उनके प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल किसी दूसरी महत्वपूर्ण भूमिका में कर सकती है।

हिमाचल प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में राज्य की राजनीति और केंद्र की राजनीति—दोनों लिहाज से अनुराग ठाकुर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषणों में यह संभावना जताई जा रही है कि यदि मोदी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल होता है, तो अनुराग ठाकुर को फिर से केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि, अभी तक उनके मंत्री बनने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

राघव चड्ढा को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा?

राघव चड्ढा का मामला राजनीतिक रूप से अलग है। आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आने के बाद वह बीजेपी के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल हुए हैं।

नई बीजेपी संगठनात्मक टीम में उन्हें भी जगह नहीं मिली है। दूसरी तरफ पंजाब से जुड़े कुछ नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं। ऐसे में राघव चड्ढा की अगली भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

पंजाब की राजनीति में युवा चेहरे के तौर पर उनकी पहचान और आने वाले चुनावी समीकरणों को देखते हुए यह अटकल लगाई जा रही है कि पार्टी उन्हें केंद्र सरकार में कोई जिम्मेदारी दे सकती है।

हालांकि, यहां भी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मंत्री पद को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल यह राजनीतिक संभावनाओं और अटकलों का विषय है।

तेजस्वी सूर्या की संगठन से सरकार तक एंट्री?

बीजेपी के युवा नेताओं में तेजस्वी सूर्या का नाम काफी प्रमुख है। वह लंबे समय तक भारतीय जनता युवा मोर्चा यानी BJYM के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।

नई टीम में उनकी जगह वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी को युवा मोर्चा की कमान दी गई है। इस बदलाव के बाद तेजस्वी सूर्या के अगले राजनीतिक रोल पर चर्चा शुरू हो गई है।

तेजस्वी सूर्या की आक्रामक राजनीतिक शैली और युवा मतदाताओं के बीच उनकी पहचान को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि उन्हें केंद्र सरकार में राज्यमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी दी जा सकती है।

कर्नाटक में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भी पार्टी उनके अनुभव और युवा अपील का इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन अभी तक उनके मंत्री बनने की भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

संगठन में बदलाव के बाद कैबिनेट फेरबदल की चर्चा क्यों?

बीजेपी संगठन में हुए बदलाव को संभावित मोदी कैबिनेट फेरबदल से जोड़कर देखने की एक वजह यह है कि कुछ मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों को पार्टी संगठन में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।

हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी और पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि पीयूष गोयल को पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया है।

इसके अलावा रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन के मंत्री पद से हटने के बाद केंद्र सरकार में कुछ पद खाली हुए हैं। धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्रालय से हटने के बाद प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इन घटनाक्रमों के कारण मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों को बल मिला है।

रामदास आठवले के बयान से भी बढ़ी हलचल

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने भी संकेत दिया है कि मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल जल्द हो सकता है। उनके बयान के बाद कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चा और तेज हो गई।

हालांकि, आठवले का बयान उनका व्यक्तिगत राजनीतिक आकलन है। इसे केंद्र सरकार की ओर से कैबिनेट विस्तार की आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं माना जा सकता।

क्या संगठन से बाहर होना मंत्री बनने का संकेत है?

यह इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल है। बीजेपी में संगठन और सरकार की जिम्मेदारियां अलग-अलग होती हैं। कई बार किसी नेता को पार्टी संगठन में पद नहीं दिया जाता, लेकिन इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि उसे सरकार में मंत्री बनाया ही जाएगा।

अनुराग ठाकुर, राघव चड्ढा और तेजस्वी सूर्या के मामले में भी फिलहाल यही स्थिति है। तीनों के नाम संभावित नए राजनीतिक रोल को लेकर चर्चा में जरूर हैं, लेकिन मंत्री पद की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

आगामी चुनावी राजनीति—खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव—को देखते हुए बीजेपी अपने नेताओं को अलग-अलग मोर्चों पर जिम्मेदारी दे सकती है।

अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि नितिन नवीन की नई संगठनात्मक टीम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में अगला बड़ा बदलाव कब और किस रूप में होता है। अगर कैबिनेट फेरबदल होता है, तो अनुराग ठाकुर, राघव चड्ढा और तेजस्वी सूर्या जैसे चेहरों की भूमिका पर फैसला राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाएगा।

फिलहाल निष्कर्ष यही है—संगठन में जगह नहीं मिली है, लेकिन मंत्री बनने की खबर अभी सिर्फ राजनीतिक अटकल है, आधिकारिक फैसला नहीं।


बिहार की VVIP सीट पर प्रशांत किशोर की एंट्री, चुनावी मुकाबला दिलचस्प

पटना | 6 जुलाई 2026

चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने Prashant Kishor ने आखिरकार सक्रिय चुनावी राजनीति में उतरने का फैसला कर लिया है। जनसुराज पार्टी ने घोषणा की है कि प्रशांत किशोर बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट से होने वाले उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार होंगे। यह उनके राजनीतिक जीवन का पहला विधानसभा चुनाव होगा।

जनसुराज की कोर कमेटी की बैठक के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी की औपचारिक घोषणा की। पार्टी का कहना है कि बांकीपुर उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की वर्तमान सरकार के कामकाज पर जनता की राय का महत्वपूर्ण अवसर होगा।

प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने पिछले कई वर्षों तक बिहार के गांव-गांव का दौरा कर लोगों की समस्याओं को समझा है और अब वे सीधे जनता के बीच रहकर विधानसभा में उनकी आवाज उठाना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि जनता का समर्थन मिला तो वे राजनीति में नई कार्यशैली और जवाबदेही का उदाहरण पेश करेंगे।

बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी। ऐसे में इस उपचुनाव को बिहार की सबसे चर्चित और प्रतिष्ठित राजनीतिक लड़ाइयों में से एक माना जा रहा है।

जनसुराज का दावा है कि इस चुनाव में उसका मुकाबला सीधे भाजपा से होगा और पार्टी इसे अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का अवसर मान रही है। वहीं भाजपा ने भी उपचुनाव में पूरी ताकत झोंकने के संकेत दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से यह मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है।

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 30 जुलाई 2026 को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त 2026 को मतगणना की जाएगी। सभी प्रमुख दलों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं और बांकीपुर सीट अब बिहार की राजनीति का केंद्र बन गई है।


सिंधु जल संधि पर फिर गरमाया विवाद: पाकिस्तान ने भारत को दी ‘जंग’ की धमकी; रक्षामंत्री बोले- “पानी पर खतरा लगा, तो शुरू कर देंगे युद्ध”

दिनांक: 22 जून, 2026

भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक ‘सिंधु जल संधि’ (Indus Waters Treaty – IWT) को लेकर जारी दशकों पुराना विवाद एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। पाकिस्तान सरकार ने भारत को सीधे तौर पर ‘जंग’ की धमकी दी है। पाकिस्तान के रक्षामंत्री ने एक कड़े और उत्तेजक बयान में कहा है कि जिस क्षण पाकिस्तान को अपनी नदियों के पानी पर खतरा महसूस होगा, वे भारत के खिलाफ पूर्ण पैमाने पर युद्ध (War) शुरू कर देंगे।

यह तीखी प्रतिक्रिया भारत सरकार द्वारा संधि के प्रावधानों की समीक्षा करने और सिंधु नदी प्रणाली के पानी का अधिकतम इस्तेमाल करने के लिए जम्मू-कश्मीर में नए जलविद्युत प्रोजेक्ट्स (Hydroelectric Projects) में तेजी लाने के संकेतों के बाद आई है।

“पानी हमारा जीवन है, समझौता नामुमकिन” — पाकिस्तानी रक्षामंत्री

इस्लामाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी रक्षामंत्री ने भारत पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों का पानी पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है।

रक्षामंत्री का बयान: “हम भारत को स्पष्ट चेतावनी देना चाहते हैं कि सिंधु जल संधि कोई कमजोर दस्तावेज नहीं है जिसे वे जब चाहें तोड़ सकें। पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी की एक-एक बूंद की रक्षा करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। अगर भारत ने कोई भी ऐसा कदम उठाया जिससे हमारी नदियों का प्रवाह बाधित होता है या पाकिस्तान में पानी का संकट पैदा होता है, तो हम इसे सीधा हमला मानेंगे। उस पल, हमारे पास जंग शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

क्या है सिंधु जल संधि (IWT) और विवाद की जड़?

1960 में विश्व बैंक (World Bank) की मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच यह संधि हुई थी।

  1. पानी का बंटवारा: संधि के तहत, पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) का पानी भारत को, जबकि पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का 80% से अधिक पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था।

  2. भारत का अधिकार: भारत को पश्चिमी नदियों पर केवल ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (बिना पानी रोके) प्रोजेक्ट्स और सिंचाई के लिए सीमित इस्तेमाल का अधिकार है।

  3. ताजा विवाद: भारत वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा (Kishanganga) और रतले (Ratle) जैसी बड़ी पनबिजली परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है। पाकिस्तान लगातार इन प्रोजेक्ट्स के डिजाइन पर आपत्ति जताता रहा है, जबकि भारत का कहना है कि ये पूरी तरह संधि के दायरे में हैं।

भारत का कड़ा रुख और वर्ल्ड बैंक की भूमिका

पाकिस्तान की इस धमकी पर भारत के विदेश मंत्रालय ने फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत अपने संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल जारी रखेगा।

बीते कुछ सालों में भारत ने सिंधु जल संधि के क्रियान्वयन पर कड़ा रुख अपनाया है। भारत सरकार ने वर्ल्ड बैंक को भी पत्र लिखकर पाकिस्तान की “अनावश्य रुकावट डालने वाली रणनीति” की शिकायत की थी और संधि में संशोधन की मांग की थी। भारत का तर्क है कि पाकिस्तान की हरकतें संधि के उद्देश्य को विफल कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह धमकी उसकी आंतरिक राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, दो परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच ‘जल’ को लेकर इस तरह की बयानबाजी दक्षिण एशिया में तनाव को चरम पर पहुंचा सकती है, जिससे विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ गई हैं।




राहुल गांधी के जन्मदिन पर PM मोदी का संदेश, दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली | 19 जून 2026

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi आज 56 वर्ष के हो गए। उनके जन्मदिन के अवसर पर देशभर से राजनीतिक नेताओं, समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच पर संदेश जारी कर राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री के संदेश के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी राहुल गांधी को बधाई संदेश भेजे।

कांग्रेस पार्टी ने देशभर में कई स्थानों पर सेवा और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए। पार्टी कार्यकर्ताओं ने रक्तदान शिविर, पौधारोपण अभियान और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से राहुल गांधी का जन्मदिन मनाया। कई राज्यों में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केक काटकर तथा जनकल्याणकारी गतिविधियों का आयोजन कर इस अवसर को खास बनाया।

राहुल गांधी भारतीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। वे कई वर्षों से कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा रहे हैं और वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। हाल के वर्षों में उनकी विभिन्न यात्राओं और जनसंपर्क अभियानों ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा बटोरी है।

जन्मदिन के अवसर पर सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी ट्रेंड करते रहे। समर्थकों ने उनके राजनीतिक सफर, जन आंदोलनों और सामाजिक मुद्दों पर उनके विचारों को साझा करते हुए शुभकामनाएं दीं।


INDIA ब्लॉक की बैठक पर नया विवाद, बिना सांसद वाले दलों को नहीं मिला निमंत्रण

नई दिल्ली | 8 जून 2026

INDIA गठबंधन की प्रस्तावित बैठक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बैठक में किन दलों को आमंत्रित किया गया और किन्हें नहीं, इस पर चर्चा के बीच गठबंधन की ओर से बड़ा स्पष्टीकरण सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, जिन राजनीतिक दलों का संसद में प्रतिनिधित्व नहीं है, उन्हें बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया।

बैठक का उद्देश्य आगामी राजनीतिक रणनीति, संसद सत्र और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्षी दलों की साझा भूमिका तय करना बताया जा रहा है। इसी बीच कुछ दलों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठने लगे थे।

सांसदों के आधार पर तय हुआ निमंत्रण

गठबंधन से जुड़े नेताओं का कहना है कि बैठक में उन्हीं दलों को बुलाया गया है, जिनके लोकसभा या राज्यसभा में सांसद हैं। इसी कारण कुछ छोटे क्षेत्रीय दलों को निमंत्रण सूची में शामिल नहीं किया गया।

राजनीतिक हलकों में चर्चा

बैठक को लेकर विपक्षी राजनीति में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी रणनीति और संसद में समन्वय को लेकर यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

साझा रणनीति पर होगा मंथन

बैठक में विपक्षी दल महंगाई, बेरोजगारी, कृषि, संघीय ढांचे और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी संयुक्त रणनीति को अंतिम रूप दे सकते हैं। इसके अलावा संसद में सरकार को घेरने के मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

विपक्षी एकता पर नजर

INDIA गठबंधन की बैठकों को विपक्षी एकता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में कौन-कौन से दल इसमें शामिल होते हैं और क्या निर्णय लिए जाते हैं, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजर बनी हुई है।

फिलहाल बैठक को लेकर तैयारियां जारी हैं और राजनीतिक दलों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।

 


भवानीपुर तो सिर्फ ‘किला’ था, फलता का नतीजा TMC के पूरे ‘मॉडल’ पर ही बड़ा सवालिया निशान है

दिनांक: 25 मई 2026

स्थान: कोलकाता / दक्षिण 24 परगना

## मुख्य तुलना: भवानीपुर बनाम फलता

पैमाना भवानीपुर (Bhabanipur) फलता (Falta)
भौगोलिक चरित्र कोलकाता का शहरी, मिश्रित और कॉस्मोपॉलिटन इलाका। दक्षिण 24 परगना का पूरी तरह ग्रामीण और टीएमसी का अभेद्य कैडर-बेस क्षेत्र।
2026 का नतीजा शुभेंदु अधिकारी (BJP) ने ममता बनर्जी (TMC) को 15,105 वोटों से हराया। देबांशु पांडा (BJP) ने टीएमसी के गढ़ में 1,09,021 वोटों के ऐतिहासिक अंतर से जीत दर्ज की।
राजनीतिक प्रभाव एक हाई-प्रोफाइल नेता या चेहरे की हार, जिसे ‘एंटी-इंकंबेंसी’ से जोड़ा जा सकता है। संगठनात्मक ढांचे और पार्टी के सबसे सुरक्षित ‘वोट बैंक’ का पूरी तरह ढह जाना।

## क्यों ज्यादा गंभीर है फलता का नतीजा? 3 मुख्य कारण

1. ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ के गढ़ में महा-सेंध

फलता विधानसभा सीट दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आती है, जो अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र ‘डायमंड हार्बर’ का हिस्सा है। टीएमसी राजनीति में ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ को अजेय और सांगठनिक रूप से सबसे मजबूत माना जाता था। यहाँ चुनाव से ठीक पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान का पीछे हटना और फिर बीजेपी के देबांशु पांडा का 1 लाख से अधिक वोटों से जीतना यह दर्शाता है कि पार्टी का वह जमीनी ढांचा (Organizational Grip) अब पूरी तरह बिखर चुका है जिस पर वह गर्व करती थी।

2. अल्पसंख्यक और ग्रामीण वोट बैंक का खिसकना

भवानीपुर एक शहरी सीट है जहां गैर-बंगाली और बिजनेस क्लास वोटर हार-जीत तय करते हैं, जिससे वहां बीजेपी की पकड़ पहले से मजबूत मानी जाती रही है। इसके विपरीत, फलता एक ग्रामीण इलाका है जहां मुस्लिम मतदाता और किसान वर्ग टीएमसी का पारंपरिक और अटूट ‘वोट बैंक’ रहे हैं। फलता में बीजेपी की यह ऐतिहासिक बढ़त यह साफ संदेश देती है कि ग्रामीण बंगाल और विशेषकर अल्पसंख्यक बहुल इलाकों के मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा अब टीएमसी के पारंपरिक कैडर के दबाव से बाहर निकल चुका है।

3. कैडर का मनोवैज्ञानिक टूटना और वॉकओवर की स्थिति

भवानीपुर में ममता बनर्जी ने आखिरी वक्त तक बेहद कड़ा मुकाबला लड़ा और हार का अंतर (15 हजार) बहुत बड़ा नहीं था। लेकिन फलता में स्थिति यह थी कि चुनाव के दौरान ही टीएमसी के अंदरूनी सांगठनिक कलह और डर की खबरें बाहर आईं। विश्लेषकों के अनुसार, फलता का नतीजा केवल एक सीट की हार नहीं है, बल्कि यह कैडर के स्तर पर पूरी तरह ‘हौसला टूट जाने’ (Psychological Collapse) और बिना लड़े वॉकओवर देने जैसी स्थिति को बयां करता है।

## ममता बनर्जी का आरोप और डैमेज कंट्रोल की चुनौती

इस करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए ईवीएम रीगिंग (EVM Rigging) और केंद्रीय बलों की मदद से वोट-लूटने के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन आरोपों से परे, टीएमसी के लिए असल चुनौती आत्ममंथन करने की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का निष्कर्ष: भवानीपुर की हार प्रतीकात्मक थी—एक बड़े चेहरे की विदाई। लेकिन फलता की हार संरचनात्मक (Structural) है। यह बताती है कि पार्टी का कोर सांगठनिक आधार, जो कि ग्रामीण और दक्षिण 24 परगना का इलाका था, अब सुरक्षित नहीं बचा है। नई सरकार (BJP) के आने के बाद अब टीएमसी के सामने विपक्ष में बैठकर अपने इस बिखरते संगठन को दोबारा खड़ा करने की एक बहुत बड़ी और कठिन चुनौती है।


पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक उलटफेर: BJP की ऐतिहासिक जीत, ममता बनर्जी ने हार के बाद भी इस्तीफा देने से किया इनकार

दिनांक: 5 मई 2026

West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां Bharatiya Janata Party (BJP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए पहली बार राज्य में सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। इस चुनाव में सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress (TMC) को भारी नुकसान हुआ है।

294 सीटों वाली विधानसभा में BJP ने दो-तिहाई से अधिक सीटें जीत लीं, जबकि TMC की सीटें 215 से घटकर करीब 80 तक सिमट गईं। यह परिणाम राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब तक TMC का दबदबा बना हुआ था।

इस चुनाव का सबसे बड़ा झटका मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को लगा, जो अपनी ही सीट से चुनाव हार गईं। हालांकि, हार के बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि “मैं नहीं हारी हूं” और उन्होंने इसे “मोरल विक्ट्री” बताया।

ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 100 सीटें जबरदस्ती छीनी गईं और Election Commission of India पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव को निष्पक्ष नहीं माना, हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे क्या होगा। भारतीय संविधान के अनुसार चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री के इस्तीफे की परंपरा होती है। यदि ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल उन्हें विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं या फिर नई सरकार बनाने के लिए BJP को आमंत्रित कर सकते हैं। ऐसे में आगे की स्थिति काफी हद तक राज्यपाल के फैसले पर निर्भर करेगी।

दूसरी ओर, BJP ने ममता बनर्जी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और कहा है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हुई है। इससे राज्य में राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह जीत केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा। पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य में BJP की जीत से पूर्वी भारत में पार्टी का प्रभाव काफी बढ़ेगा और आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए उसकी स्थिति और मजबूत हो सकती है।

वहीं, TMC के लिए यह परिणाम एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिससे पार्टी के नेतृत्व और रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। कुल मिलाकर, यह चुनाव परिणाम देश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है।

 
 


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लोकसभा में आज अहम विधेयकों पर चर्चा: FCRA संशोधन और अमरावती राजधानी बिल पर नजर

नई दिल्ली | 01 अप्रैल 2026

देश की संसद के बजट सत्र के अंतिम चरण में आज लोकसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने जा रही है। सत्र के केवल दो दिन शेष हैं और 2 अप्रैल को संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी जाएगी। ऐसे में सरकार आज लंबित विधायी कार्यों को पूरा करने की कोशिश में जुटी है।

सबसे प्रमुख रूप से आज विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पर बहस और पारित करने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह विधेयक Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) में संशोधन से जुड़ा है, जिसे 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेशी चंदे के माध्यम से जबरन धर्म परिवर्तन जैसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है, और विपक्ष इस विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठा सकता है।

इसके अलावा, आज एक और अहम विधेयक लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है, जिसमें अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव शामिल है। यह विधेयक राज्य की राजधानी को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

प्रस्तावित कानून के अनुसार, विधेयक के पारित होने के बाद अमरावती को 2 जून 2024 से राज्य की आधिकारिक राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता मिल जाएगी। इससे प्रशासनिक स्थिरता आने और विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

संसद के इस अंतिम चरण में सरकार की प्राथमिकता प्रमुख विधेयकों को पारित कराना है, जबकि विपक्ष इन पर विस्तृत चर्चा और जवाबदेही की मांग कर सकता है। ऐसे में आज का दिन संसदीय गतिविधियों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।


 


नई दिल्ली | 19 मार्च, 2026

दिल्ली के पालम इलाके में एक रिहायशी इमारत में लगी भीषण आग में 9 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद आज सुबह इलाके में भारी तनाव देखा गया। घटना के बाद शोक संतप्त परिवारों से मिलने पहुंचे बीजेपी और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते ही देखते कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट में बदल गई।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

हादसे वाली जगह पर सुबह करीब 10:30 बजे बीजेपी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता पहुंचे थे। थोड़ी ही देर बाद आम आदमी पार्टी के विधायक और समर्थक भी वहां पहुंच गए।

  • आरोप-प्रत्यारोप: बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इलाके में अवैध निर्माण और फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी के लिए दिल्ली सरकार और एमसीडी जिम्मेदार है।

  • पलटवार: वहीं AAP समर्थकों का कहना था कि बीजेपी इस दुखद हादसे पर राजनीति कर रही है और पीड़ितों को सांत्वना देने के बजाय हंगामा खड़ा कर रही है।

झड़प और पुलिस की कार्रवाई

दोनों पक्षों के बीच पहले नारेबाजी शुरू हुई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियां भी फेंकी।

  • स्थिति को बिगड़ता देख मौके पर मौजूद दिल्ली पुलिस के जवानों को बीच-बचाव करना पड़ा।

  • पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर दोनों गुटों को अलग किया और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल (CRPF) की तैनाती कर दी गई है।

हादसे का मंजर: 9 की मौत, कई गंभीर

पालम के संकरी गलियों वाले इस इलाके में बुधवार रात एक चार मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने इलेक्ट्रिक पैनल में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी।

  • धुआं इतना घना था कि ऊपरी मंजिल पर सो रहे लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला।

  • मरने वालों में एक ही परिवार के 5 सदस्य शामिल हैं।

  • संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियों को मौके पर पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, जिसे लेकर स्थानीय निवासियों में भारी गुस्सा है।

नेताओं के बयान

  • बीजेपी: “यह प्रशासनिक विफलता है। दिल्ली सरकार को जवाब देना होगा कि ऐसी रिहायशी इमारतों में कमर्शियल काम कैसे हो रहा था।”

  • AAP: “हादसा बेहद दुखद है। हमारी प्राथमिकता घायलों का इलाज और पीड़ितों की मदद है, लेकिन बीजेपी के नेता यहाँ सिर्फ फोटो खिंचवाने और माहौल बिगाड़ने आए हैं।”


खामेनेई की हत्या पर कांग्रेस का बयान: ‘अंतरराष्ट्रीय नियमों की आत्मा पर हमला’, अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई की निंदा

02 मार्च 2026

कांग्रेस ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित लक्षित हत्या को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने रविवार को जारी आधिकारिक बयान में अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यवस्था के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।

‘शांति और संवाद के सिद्धांतों का उल्लंघन’

कांग्रेस ने कहा कि ऐसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय नियमों की आत्मा पर हमला हैं और इससे वैश्विक शांति व स्थिरता को खतरा पैदा होता है। पार्टी ने जोर देकर कहा कि विवादों का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं बल्कि संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान से होना चाहिए।

अनुच्छेद 51 का हवाला

अपने बयान में पार्टी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल आधार राष्ट्रों के बीच समानता, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को बढ़ावा देना है। कांग्रेस के अनुसार यही सिद्धांत भारत की सभ्यतागत विरासत और वैश्विक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।

ईरान और शिया समुदाय के प्रति संवेदना

पार्टी ने ईरान के नागरिकों और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा कहा कि इस प्रकार की घटनाएं क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती हैं। कांग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयम बरतने और हालात को शांतिपूर्ण ढंग से संभालने की अपील भी की।

बढ़ सकता है पश्चिम एशिया में तनाव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान से स्पष्ट है कि भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी इस घटनाक्रम को वैश्विक स्तर पर गंभीर मान रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि हालात नहीं संभले तो पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ सकता है और इसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति, सुरक्षा और आर्थिक परिदृश्य पर पड़ सकता है।




तारिक़ रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगे पीएम मोदी, कूटनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज

नई दिल्ली  |16 फरवरी 2026

तारिक़ रहमान के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल न होने की खबर सामने आने के बाद कूटनीतिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, समारोह में भारत की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जा सकता है, लेकिन स्वयं प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना नहीं है।

हाल ही में आम चुनाव में बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन हुआ है और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) गठबंधन ने बहुमत हासिल किया है। इसके बाद तारिक़ रहमान के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के गठन के शुरुआती चरण में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संकेतों को काफी अहम माना जाता है।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम पहले से तय अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बैठकों के कारण व्यस्त है, जिसकी वजह से वे शपथ समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे। हालांकि भारत सरकार की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं और प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से भारत की ओर से शुभकामनाएं और समर्थन का संदेश दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सुरक्षा और सीमा सहयोग जैसे कई अहम मुद्दे हैं, इसलिए नई सरकार के साथ संबंधों को संतुलित और सकारात्मक बनाए रखना दोनों देशों के हित में है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात या द्विपक्षीय वार्ता की संभावना से भी इन संबंधों की दिशा तय होगी।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भले ही प्रधानमंत्री समारोह में शामिल न हों, लेकिन भारत की रणनीति पड़ोसी देश के साथ स्थिर और सहयोगात्मक रिश्ते बनाए रखने की ही रहेगी।


बेंगलुरु:17 जनवरी, 2026 

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने अपना प्रस्तावित दावोस (स्विट्जरलैंड) दौरा रद्द कर दिया है। वे वहां वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की सालाना बैठक में हिस्सा लेने वाले थे। आधिकारिक तौर पर इसे ‘प्रशासनिक व्यस्तता’ बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके पीछे राज्य की सत्ता में चल रहे नेतृत्व परिवर्तन (Leadership Change) के संघर्ष को मुख्य कारण माना जा रहा है।

दौरा रद्द होने के 3 बड़े कारण:

  1. ढाई साल का फॉर्मूला: कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे हो चुके हैं। चर्चा है कि सरकार बनने के वक्त शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद का समझौता हुआ था। अब शिवकुमार खेमा इस वादे को लागू करने के लिए आलाकमान पर दबाव बना रहा है।

  2. दिल्ली में अहम बैठकें: सूत्रों के अनुसार, शिवकुमार को कांग्रेस आलाकमान (AICC) ने महत्वपूर्ण चर्चाओं के लिए दिल्ली बुलाया है। माना जा रहा है कि 20 जनवरी के आसपास कोई बड़ा फैसला हो सकता है।

  3. विधानसभा सत्र: कर्नाटक विधानसभा का विशेष सत्र 22 जनवरी से शुरू होने वाला है। मनरेगा (MNREGA) और केंद्र सरकार के खिलाफ राज्य के अभियान का नेतृत्व भी शिवकुमार ही कर रहे हैं, जिसके कारण उनका राज्य में रहना जरूरी माना गया।

शिवकुमार की जगह कौन जाएगा?

शिवकुमार के जाने के बजाय अब कर्नाटक का प्रतिनिधित्व भारी और मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल करेंगे। वे 19 से 23 जनवरी तक दावोस में रहकर वैश्विक निवेशकों को कर्नाटक में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे।

विपक्ष का तंज

बीजेपी और विपक्षी दलों ने इस पर तंज कसते हुए कहा है कि कांग्रेस की “कुर्सी की लड़ाई” के कारण कर्नाटक का विकास और अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की आपसी कलह ने राज्य प्रशासन को ठप कर दिया है।

इस्‍लाम से भी पुराना है संभल का श्री हरि विष्णु मंदिर –  CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि संभल का श्री हरि विष्णु मंदिर इस्‍लाम से भी पुराना है. लोगों को यह सच्‍चाई जानकार कोई सवाल उठाना चाहिए. संभल के मस्जिद विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संभल का उल्लेख 5,000 साल पुराने शास्त्रों में है और यह इस्लाम से पहले का है. उन्होंने कहा कि दुनिया में हर धर्म और पूजा पद्धति में कुछ अच्छे गुण होते हैं, लेकिन किसी की आस्था को जबरन जब्त करना और उनकी मान्यताओं को कुचलना अस्वीकार्य है-‘खासकर जब हम संभल के बारे में सच्चाई जानते हैं.’

इस्लाम से भी कम से कम 2,000 साल मंदिर…

आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि संभल में श्री हरि विष्णु मंदिर को 1526 में नष्ट कर दिया गया था. उन्होंने कहा, ‘संभल का उल्लेख 5,000 साल पुराने ग्रंथों में है. उनमें भगवान विष्णु के भावी अवतार का उल्लेख है. दूसरी ओर, इस्लाम का उदय केवल 1,400 साल पहले हुआ. मैं ऐसी चीज़ की बात कर रहा हूं जो इस्लाम से कम से कम 2,000 साल पुरानी है. इन बातों के सबूत सदियों से मौजूद हैं. याद कीजिए, 1526 में संभल में भगवान विष्णु का मंदिर तोड़ा गया था. दो साल बाद, 1528 में अयोध्या में राम मंदिर को भी तोड़ दिया गया था.’ आरएसएस से जुड़ी साप्ताहिक पत्रिका ‘ऑर्गनाइजर’ द्वारा आयोजित किये गये ‘मंथन: कुंभ और उसके आगे’ विषयक कार्यक्रम के दौरान  अपने संबोधन उन्होंने कहा कि दोनों कृत्य एक ही व्यक्ति द्वारा किए गए थे. संभल में पिछले नवंबर में अदालत के आदेश के बाद एक मस्जिद के सर्वेक्षण के कारण तनाव बना हुआ है. कुछ लोगों का दावा है कि यह मस्जिद एक ध्वस्त मंदिर पर बनाई गई है.

विपक्षी दलों पर भी बरसे सीएम योगी 

विपक्षी दलों और आलोचकों की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले धर्मग्रंथों को पढ़ें, तब उन्हें (योगी को) उन पर बहस करने की चुनौती दें. उन्होंने कहा कि किसी की आस्था को जबरन जब्त करना और उनकी मान्यताओं को कुचलना अस्वीकार्य है -‘खासकर तब जब हम संभल के बारे में सच्चाई जानते हैं. संभल हमेशा से एक तीर्थ स्थल रहा है. इसमें 68 पवित्र स्थान थे, और अब तक हम उनमें से 18 को पुनः प्राप्त करने में सक्षम हैं. 19 प्राचीन कुएं थे, जिन्हें हमने पुनर्जीवित किया है. 56 साल बाद, पहली बार संभल में भगवान शिव के मंदिर में जल चढ़ाने की रस्म देखी गई. ये तथाकथित नेता इतने समय तक क्या कर रहे थे?’

‘विश्‍व कल्याण का मार्ग भारत से ही होकर निकलेगा’

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारत 21वीं सदी में दुनिया का नेतृत्व करेगा और विश्‍व कल्याण का मार्ग ‘भारत’ से ही होकर निकलेगा. आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में, 500 वर्षों के बाद, जनवरी 2024 में भगवान राम को आखिरकार उनके जन्मस्थान पर विराजमान किया गया. उन्होंने कहा कि भारत एक नई दिशा में आगे बढ़ चुका है एवं विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है, यहीं से वैश्विक कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा.

‘अपने पूर्वजों की खोज भारत के विकास पर सवाल उठाने वाले’

सीएम योगी का कहना था कि भारत के विकास पर सवाल उठाने वालों के लिए बेहतर होगा कि वे अपने पूर्वजों की खोज करें. इसका सबसे ताजा उदाहरण इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का है. दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया रामलीला को अपना राष्ट्रीय त्योहार मानता है. इसकी मुद्रा में भगवान गणेश की तस्वीर है और इसकी राष्ट्रीय एयरलाइन का नाम गरुड़ के नाम पर है. यह कई लोगों के लिए एक सबक होना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने खुद कहा कि अगर उनका डीएनए टेस्ट किया जाए तो वह भारतीय ही निकलेगा. उन्होंने आगे कहा, ‘भारत के संसाधनों पर पलने वालों को बयान देने से पहले अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए और विदेशी आक्रमणकारियों का महिमामंडन करना बंद कर देना चाहिए. अन्यथा, जब संभल जैसी ऐतिहासिक सच्चाई सामने आएगी, तो उनके पास छिपने के लिए कोई जगह नहीं होगी.’

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