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लोकसभा सीटें 850 करने पर सियासत तेज: अमित शाह ने दिया फॉर्मूला, विपक्ष ने उठाए सवाल

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लोकसभा सीटें 850 करने पर सियासत तेज: अमित शाह ने दिया फॉर्मूला, विपक्ष ने उठाए सवाल

नई दिल्ली। 17 अप्रैल 2026

अमित शाह ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिलों पर चर्चा के दौरान परिसीमन (Delimitation) को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने विस्तार से बताया कि भविष्य में लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 कैसे की जा सकती हैं और इससे किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा।

गृह मंत्री ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और इसका उद्देश्य सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व देना है। उन्होंने खासतौर पर दक्षिण भारत के राज्यों को लेकर उठ रही आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि वहां की सीटों में भी बढ़ोतरी होगी। उनके मुताबिक, दक्षिण के पांच राज्यों की कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 तक पहुंच सकती हैं।

शाह ने स्पष्ट किया कि यह विस्तार जनसंख्या और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाएगा, जिससे देश के हर हिस्से को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया किसी क्षेत्र को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र को और मजबूत बनाने के लिए है।

हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन लागू करने की कोशिश कर रही है, जिससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

विपक्ष का कहना है कि उत्तर भारत के राज्यों में जनसंख्या वृद्धि ज्यादा रही है, ऐसे में परिसीमन से वहां की सीटों में अधिक बढ़ोतरी होगी, जबकि दक्षिणी राज्यों को अपेक्षाकृत कम लाभ मिलेगा। इससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है।

चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि सबसे ज्यादा फायदा बड़े राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र को हो सकता है, जहां जनसंख्या अधिक है। इससे इन राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने का प्रस्ताव देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। हालांकि, इसके लिए व्यापक सहमति और संवैधानिक प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।

फिलहाल, संसद में इस मुद्दे पर बहस जारी है और आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार इस प्रस्ताव को किस रूप में आगे बढ़ाती है।


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लोकसभा में आज अहम विधेयकों पर चर्चा: FCRA संशोधन और अमरावती राजधानी बिल पर नजर

नई दिल्ली | 01 अप्रैल 2026

देश की संसद के बजट सत्र के अंतिम चरण में आज लोकसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने जा रही है। सत्र के केवल दो दिन शेष हैं और 2 अप्रैल को संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी जाएगी। ऐसे में सरकार आज लंबित विधायी कार्यों को पूरा करने की कोशिश में जुटी है।

सबसे प्रमुख रूप से आज विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पर बहस और पारित करने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह विधेयक Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) में संशोधन से जुड़ा है, जिसे 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेशी चंदे के माध्यम से जबरन धर्म परिवर्तन जैसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है, और विपक्ष इस विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठा सकता है।

इसके अलावा, आज एक और अहम विधेयक लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है, जिसमें अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव शामिल है। यह विधेयक राज्य की राजधानी को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

प्रस्तावित कानून के अनुसार, विधेयक के पारित होने के बाद अमरावती को 2 जून 2024 से राज्य की आधिकारिक राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता मिल जाएगी। इससे प्रशासनिक स्थिरता आने और विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

संसद के इस अंतिम चरण में सरकार की प्राथमिकता प्रमुख विधेयकों को पारित कराना है, जबकि विपक्ष इन पर विस्तृत चर्चा और जवाबदेही की मांग कर सकता है। ऐसे में आज का दिन संसदीय गतिविधियों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।


 


नई दिल्ली | 19 मार्च, 2026

दिल्ली के पालम इलाके में एक रिहायशी इमारत में लगी भीषण आग में 9 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद आज सुबह इलाके में भारी तनाव देखा गया। घटना के बाद शोक संतप्त परिवारों से मिलने पहुंचे बीजेपी और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते ही देखते कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट में बदल गई।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

हादसे वाली जगह पर सुबह करीब 10:30 बजे बीजेपी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता पहुंचे थे। थोड़ी ही देर बाद आम आदमी पार्टी के विधायक और समर्थक भी वहां पहुंच गए।

  • आरोप-प्रत्यारोप: बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इलाके में अवैध निर्माण और फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी के लिए दिल्ली सरकार और एमसीडी जिम्मेदार है।

  • पलटवार: वहीं AAP समर्थकों का कहना था कि बीजेपी इस दुखद हादसे पर राजनीति कर रही है और पीड़ितों को सांत्वना देने के बजाय हंगामा खड़ा कर रही है।

झड़प और पुलिस की कार्रवाई

दोनों पक्षों के बीच पहले नारेबाजी शुरू हुई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियां भी फेंकी।

  • स्थिति को बिगड़ता देख मौके पर मौजूद दिल्ली पुलिस के जवानों को बीच-बचाव करना पड़ा।

  • पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर दोनों गुटों को अलग किया और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल (CRPF) की तैनाती कर दी गई है।

हादसे का मंजर: 9 की मौत, कई गंभीर

पालम के संकरी गलियों वाले इस इलाके में बुधवार रात एक चार मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने इलेक्ट्रिक पैनल में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी।

  • धुआं इतना घना था कि ऊपरी मंजिल पर सो रहे लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला।

  • मरने वालों में एक ही परिवार के 5 सदस्य शामिल हैं।

  • संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियों को मौके पर पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, जिसे लेकर स्थानीय निवासियों में भारी गुस्सा है।

नेताओं के बयान

  • बीजेपी: “यह प्रशासनिक विफलता है। दिल्ली सरकार को जवाब देना होगा कि ऐसी रिहायशी इमारतों में कमर्शियल काम कैसे हो रहा था।”

  • AAP: “हादसा बेहद दुखद है। हमारी प्राथमिकता घायलों का इलाज और पीड़ितों की मदद है, लेकिन बीजेपी के नेता यहाँ सिर्फ फोटो खिंचवाने और माहौल बिगाड़ने आए हैं।”


खामेनेई की हत्या पर कांग्रेस का बयान: ‘अंतरराष्ट्रीय नियमों की आत्मा पर हमला’, अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई की निंदा

02 मार्च 2026

कांग्रेस ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित लक्षित हत्या को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने रविवार को जारी आधिकारिक बयान में अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यवस्था के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।

‘शांति और संवाद के सिद्धांतों का उल्लंघन’

कांग्रेस ने कहा कि ऐसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय नियमों की आत्मा पर हमला हैं और इससे वैश्विक शांति व स्थिरता को खतरा पैदा होता है। पार्टी ने जोर देकर कहा कि विवादों का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं बल्कि संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान से होना चाहिए।

अनुच्छेद 51 का हवाला

अपने बयान में पार्टी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल आधार राष्ट्रों के बीच समानता, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को बढ़ावा देना है। कांग्रेस के अनुसार यही सिद्धांत भारत की सभ्यतागत विरासत और वैश्विक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।

ईरान और शिया समुदाय के प्रति संवेदना

पार्टी ने ईरान के नागरिकों और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा कहा कि इस प्रकार की घटनाएं क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती हैं। कांग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयम बरतने और हालात को शांतिपूर्ण ढंग से संभालने की अपील भी की।

बढ़ सकता है पश्चिम एशिया में तनाव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान से स्पष्ट है कि भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी इस घटनाक्रम को वैश्विक स्तर पर गंभीर मान रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि हालात नहीं संभले तो पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ सकता है और इसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति, सुरक्षा और आर्थिक परिदृश्य पर पड़ सकता है।




तारिक़ रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगे पीएम मोदी, कूटनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज

नई दिल्ली  |16 फरवरी 2026

तारिक़ रहमान के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल न होने की खबर सामने आने के बाद कूटनीतिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, समारोह में भारत की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जा सकता है, लेकिन स्वयं प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना नहीं है।

हाल ही में आम चुनाव में बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन हुआ है और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) गठबंधन ने बहुमत हासिल किया है। इसके बाद तारिक़ रहमान के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के गठन के शुरुआती चरण में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संकेतों को काफी अहम माना जाता है।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम पहले से तय अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बैठकों के कारण व्यस्त है, जिसकी वजह से वे शपथ समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे। हालांकि भारत सरकार की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं और प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से भारत की ओर से शुभकामनाएं और समर्थन का संदेश दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सुरक्षा और सीमा सहयोग जैसे कई अहम मुद्दे हैं, इसलिए नई सरकार के साथ संबंधों को संतुलित और सकारात्मक बनाए रखना दोनों देशों के हित में है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात या द्विपक्षीय वार्ता की संभावना से भी इन संबंधों की दिशा तय होगी।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भले ही प्रधानमंत्री समारोह में शामिल न हों, लेकिन भारत की रणनीति पड़ोसी देश के साथ स्थिर और सहयोगात्मक रिश्ते बनाए रखने की ही रहेगी।


बेंगलुरु:17 जनवरी, 2026 

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने अपना प्रस्तावित दावोस (स्विट्जरलैंड) दौरा रद्द कर दिया है। वे वहां वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की सालाना बैठक में हिस्सा लेने वाले थे। आधिकारिक तौर पर इसे ‘प्रशासनिक व्यस्तता’ बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके पीछे राज्य की सत्ता में चल रहे नेतृत्व परिवर्तन (Leadership Change) के संघर्ष को मुख्य कारण माना जा रहा है।

दौरा रद्द होने के 3 बड़े कारण:

  1. ढाई साल का फॉर्मूला: कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे हो चुके हैं। चर्चा है कि सरकार बनने के वक्त शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद का समझौता हुआ था। अब शिवकुमार खेमा इस वादे को लागू करने के लिए आलाकमान पर दबाव बना रहा है।

  2. दिल्ली में अहम बैठकें: सूत्रों के अनुसार, शिवकुमार को कांग्रेस आलाकमान (AICC) ने महत्वपूर्ण चर्चाओं के लिए दिल्ली बुलाया है। माना जा रहा है कि 20 जनवरी के आसपास कोई बड़ा फैसला हो सकता है।

  3. विधानसभा सत्र: कर्नाटक विधानसभा का विशेष सत्र 22 जनवरी से शुरू होने वाला है। मनरेगा (MNREGA) और केंद्र सरकार के खिलाफ राज्य के अभियान का नेतृत्व भी शिवकुमार ही कर रहे हैं, जिसके कारण उनका राज्य में रहना जरूरी माना गया।

शिवकुमार की जगह कौन जाएगा?

शिवकुमार के जाने के बजाय अब कर्नाटक का प्रतिनिधित्व भारी और मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल करेंगे। वे 19 से 23 जनवरी तक दावोस में रहकर वैश्विक निवेशकों को कर्नाटक में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे।

विपक्ष का तंज

बीजेपी और विपक्षी दलों ने इस पर तंज कसते हुए कहा है कि कांग्रेस की “कुर्सी की लड़ाई” के कारण कर्नाटक का विकास और अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की आपसी कलह ने राज्य प्रशासन को ठप कर दिया है।

इस्‍लाम से भी पुराना है संभल का श्री हरि विष्णु मंदिर –  CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि संभल का श्री हरि विष्णु मंदिर इस्‍लाम से भी पुराना है. लोगों को यह सच्‍चाई जानकार कोई सवाल उठाना चाहिए. संभल के मस्जिद विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संभल का उल्लेख 5,000 साल पुराने शास्त्रों में है और यह इस्लाम से पहले का है. उन्होंने कहा कि दुनिया में हर धर्म और पूजा पद्धति में कुछ अच्छे गुण होते हैं, लेकिन किसी की आस्था को जबरन जब्त करना और उनकी मान्यताओं को कुचलना अस्वीकार्य है-‘खासकर जब हम संभल के बारे में सच्चाई जानते हैं.’

इस्लाम से भी कम से कम 2,000 साल मंदिर…

आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि संभल में श्री हरि विष्णु मंदिर को 1526 में नष्ट कर दिया गया था. उन्होंने कहा, ‘संभल का उल्लेख 5,000 साल पुराने ग्रंथों में है. उनमें भगवान विष्णु के भावी अवतार का उल्लेख है. दूसरी ओर, इस्लाम का उदय केवल 1,400 साल पहले हुआ. मैं ऐसी चीज़ की बात कर रहा हूं जो इस्लाम से कम से कम 2,000 साल पुरानी है. इन बातों के सबूत सदियों से मौजूद हैं. याद कीजिए, 1526 में संभल में भगवान विष्णु का मंदिर तोड़ा गया था. दो साल बाद, 1528 में अयोध्या में राम मंदिर को भी तोड़ दिया गया था.’ आरएसएस से जुड़ी साप्ताहिक पत्रिका ‘ऑर्गनाइजर’ द्वारा आयोजित किये गये ‘मंथन: कुंभ और उसके आगे’ विषयक कार्यक्रम के दौरान  अपने संबोधन उन्होंने कहा कि दोनों कृत्य एक ही व्यक्ति द्वारा किए गए थे. संभल में पिछले नवंबर में अदालत के आदेश के बाद एक मस्जिद के सर्वेक्षण के कारण तनाव बना हुआ है. कुछ लोगों का दावा है कि यह मस्जिद एक ध्वस्त मंदिर पर बनाई गई है.

विपक्षी दलों पर भी बरसे सीएम योगी 

विपक्षी दलों और आलोचकों की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले धर्मग्रंथों को पढ़ें, तब उन्हें (योगी को) उन पर बहस करने की चुनौती दें. उन्होंने कहा कि किसी की आस्था को जबरन जब्त करना और उनकी मान्यताओं को कुचलना अस्वीकार्य है -‘खासकर तब जब हम संभल के बारे में सच्चाई जानते हैं. संभल हमेशा से एक तीर्थ स्थल रहा है. इसमें 68 पवित्र स्थान थे, और अब तक हम उनमें से 18 को पुनः प्राप्त करने में सक्षम हैं. 19 प्राचीन कुएं थे, जिन्हें हमने पुनर्जीवित किया है. 56 साल बाद, पहली बार संभल में भगवान शिव के मंदिर में जल चढ़ाने की रस्म देखी गई. ये तथाकथित नेता इतने समय तक क्या कर रहे थे?’

‘विश्‍व कल्याण का मार्ग भारत से ही होकर निकलेगा’

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारत 21वीं सदी में दुनिया का नेतृत्व करेगा और विश्‍व कल्याण का मार्ग ‘भारत’ से ही होकर निकलेगा. आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में, 500 वर्षों के बाद, जनवरी 2024 में भगवान राम को आखिरकार उनके जन्मस्थान पर विराजमान किया गया. उन्होंने कहा कि भारत एक नई दिशा में आगे बढ़ चुका है एवं विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है, यहीं से वैश्विक कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा.

‘अपने पूर्वजों की खोज भारत के विकास पर सवाल उठाने वाले’

सीएम योगी का कहना था कि भारत के विकास पर सवाल उठाने वालों के लिए बेहतर होगा कि वे अपने पूर्वजों की खोज करें. इसका सबसे ताजा उदाहरण इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का है. दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया रामलीला को अपना राष्ट्रीय त्योहार मानता है. इसकी मुद्रा में भगवान गणेश की तस्वीर है और इसकी राष्ट्रीय एयरलाइन का नाम गरुड़ के नाम पर है. यह कई लोगों के लिए एक सबक होना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने खुद कहा कि अगर उनका डीएनए टेस्ट किया जाए तो वह भारतीय ही निकलेगा. उन्होंने आगे कहा, ‘भारत के संसाधनों पर पलने वालों को बयान देने से पहले अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए और विदेशी आक्रमणकारियों का महिमामंडन करना बंद कर देना चाहिए. अन्यथा, जब संभल जैसी ऐतिहासिक सच्चाई सामने आएगी, तो उनके पास छिपने के लिए कोई जगह नहीं होगी.’

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