Kerala को मिला नया मुख्यमंत्री, VD Satheesan संभालेंगे कमान
14 मई 2026
VD Satheesan को Kerala का नया मुख्यमंत्री घोषित किया गया है। Indian National Congress ने कई दौर की बैठकों और चर्चा के बाद उनके नाम पर अंतिम फैसला लिया। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में UDF alliance को बड़ी जीत मिली थी, जिसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही थी।
मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में थे। इनमें KC Venugopal और Ramesh Chennithala के नाम भी शामिल थे। लगभग 10 दिनों तक चली अंदरूनी चर्चा के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने VD Satheesan को जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया।
इस फैसले के बाद Bharatiya Janata Party ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधा। BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चयन में Indian Union Muslim League (IUML) का प्रभाव ज्यादा रहा और नई सरकार “remote controlled” तरीके से चल सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक IUML लगातार VD Satheesan के समर्थन में सक्रिय था और उसने जल्द फैसला लेने के लिए कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव भी बनाया। इससे Kerala की alliance politics को लेकर नई राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
2026 Kerala Assembly Election में UDF alliance ने 140 में से 102 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि LDF को बड़ा नुकसान हुआ। वहीं BJP केवल 3 सीटों तक सीमित रही। चुनाव परिणाम के बाद अब नई सरकार के गठन और कैबिनेट तैयारियों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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पश्चिम एशिया संकट पर ‘टीम इंडिया’ मोड में सरकार: पीएम मोदी आज करेंगे मुख्यमंत्रियों से बातचीत
नई दिल्ली | 05 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत पर भी दिखने लगा है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक बुलाने का फैसला किया है। इस पहल को ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत समन्वित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
कोविड मॉडल पर रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए समन्वय मॉडल को एक बार फिर लागू करने की तैयारी में है। उस दौरान केंद्र और राज्यों ने मिलकर संकट से निपटने के लिए साझा रणनीति बनाई थी, जिसे अब पश्चिम एशिया संकट के संदर्भ में अपनाने की योजना है।
राज्यों के साथ समन्वय पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी इस बैठक में राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मौजूदा हालात की समीक्षा करेंगे। बैठक में ईंधन आपूर्ति, महंगाई, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और सुरक्षा मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
‘टीम इंडिया’ की भावना
सरकार का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय संकट से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत तालमेल जरूरी है। ‘टीम इंडिया’ की अवधारणा के तहत सभी राज्य मिलकर एकजुट होकर काम करेंगे।
संभावित चुनौतियों पर चर्चा
बैठक में खासतौर पर निम्न मुद्दों पर चर्चा हो सकती है:
- पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति और कीमतों का प्रभाव
- आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता
- निर्यात-आयात पर असर
- देश के भीतर सुरक्षा और कानून व्यवस्था
आम जनता पर असर कम करने की कोशिश
सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर देश की आम जनता पर न्यूनतम पड़े। इसके लिए पहले से तैयारी और समन्वित निर्णय लेने पर जोर दिया जा रहा है।
आगे की रणनीति तय होगी
इस बैठक के बाद केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही संकट से निपटने के लिए ठोस कार्ययोजना भी सामने आ सकती है।
कोलकाता में CM ममता बनर्जी का SIR के खिलाफ धरना, मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाने का आरोप
07 मार्च 2026
कोलकाता | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता के केंद्रीय इलाके में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह कदम उन्होंने राज्य की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के कथित विरोध के रूप में उठाया है। मुख्यमंत्री के इस धरने ने विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच बढ़ते विवाद को और उग्र कर दिया है।
मुख्यमंत्री के आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य की मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम “अनैतिक तरीके” से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा, “यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। हमारे मतदाता बिना किसी गलती के चुनाव प्रक्रिया से वंचित हो रहे हैं। इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।”
धरने के दौरान मुख्यमंत्री ने SIR (State Identification Register) और चुनाव आयोग के अधिकारियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही है और टीएमसी के समर्थन वाले मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
धरना प्रदर्शन का स्वरूप
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता और पार्टी समर्थक जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने सड़क आंदोलन के माध्यम से अपनी ताकत दिखाने का प्रयास किया। उन्होंने धरने के दौरान कहा कि अगर उनके विरोध को नहीं सुना गया, तो वे आंदोलन को और बड़ा करेंगे और इसे पूरे राज्य में फैलाएंगे।
धरने के दौरान ट्रैफिक प्रभावित रहा और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए धरना स्थल पर बल तैनात किया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
ममता बनर्जी ने राजनीतिक करियर में कई बार सड़क आंदोलनों का सहारा लिया है। टीएमसी के विरोधी दलों का कहना है कि इस कदम से चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, TMC का कहना है कि यह धरना लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची विवाद राजनीतिक बहस का एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है और यह टीएमसी और अन्य पार्टियों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है।
एआई समिट विवाद पर शशि थरूर का बयान: “बड़े आयोजनों में छोटी गड़बड़ियां सामान्य”, राहुल के आरोपों से अलग रुख
नई दिल्ली | 20 फरवरी 2026
शशि थरूर ने दिल्ली में चल रहे एआई समिट को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में छोटी-मोटी गड़बड़ियां होना असामान्य नहीं है। दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम के संदर्भ में उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में समिट का आयोजन बेहद प्रभावशाली रहा और दुनिया भर के शीर्ष नेताओं की भागीदारी इसकी बड़ी सफलता रही।
थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राहुल गांधी ने समिट को “पीआर तमाशा” बताते हुए इसकी आलोचना की थी। कांग्रेस के भीतर ही दो वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग रुख को राजनीतिक हलकों में अहम माना जा रहा है। थरूर ने कहा कि तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे जटिल विषयों पर वैश्विक स्तर का मंच तैयार करना आसान नहीं होता और इतने बड़े पैमाने पर कार्यक्रम में कुछ व्यवस्थागत समस्याएं आना स्वाभाविक है।
समिट से जुड़ा गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवाद भी चर्चा में है, जिस पर उन्होंने सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि आयोजनों का मूल्यांकन समग्र प्रभाव से होना चाहिए, न कि अलग-थलग घटनाओं से। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम में राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और कई देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि दुनिया एआई विकास में सहयोगात्मक और एकीकृत भविष्य की ओर बढ़ना चाहती है।
उधर, इसी दौरान थरूर की नई पुस्तक हिंदू धर्म को पुनर्परिभाषित करने वाले संत: श्री नारायण गुरु का जीवन, पाठ और विरासत का विमोचन भी हुआ, जिसमें केरल के समाज सुधारक श्री नारायण गुरु के जीवन और विचारों पर प्रकाश डाला गया है। इस पुस्तक का लोकार्पण सी.पी. राधाकृष्णन ने किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एआई समिट को लेकर कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग बयान पार्टी के भीतर दृष्टिकोण की विविधता को दर्शाते हैं। वहीं, सरकार समर्थक दल इसे वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी छवि मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं। फिलहाल समिट और उससे जुड़े विवाद दोनों ही राष्ट्रीय चर्चा का विषय बने हुए हैं।
यूपी बजट से पहले सपा का सरकार पर हमला, अखिलेश-शिवपाल ने कहा—‘ये विदाई बजट’
लखनऊ | 11 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार आज विधानसभा में अपना अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने जा रही है, लेकिन उससे पहले ही राज्य की राजनीति गर्मा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने बजट पेश होने से ठीक पहले सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव और सांसद रामगोपाल यादव ने संयुक्त रूप से सरकार पर निशाना साधते हुए प्रस्तावित बजट को ‘विदाई बजट’ और ‘जुमलों का बजट’ करार दिया है।
सपा नेताओं का कहना है कि सरकार चुनाव से पहले जनता को लुभाने के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर सकती है, लेकिन पिछले वादों का हिसाब अब तक नहीं दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याएं बढ़ी हैं, जबकि सरकार केवल प्रचार पर ध्यान दे रही है।
उधर, सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि इस बार का बजट आकार और योजनाओं के लिहाज़ से ऐतिहासिक हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक बजट में महिलाओं के लिए स्कूटी योजना, आंगनबाड़ी और संविदा कर्मियों के मानदेय में बढ़ोतरी, बुनियादी ढांचे के विकास, किसानों और युवाओं के लिए नई योजनाओं जैसी घोषणाएं शामिल हो सकती हैं। फिलहाल बजट पेश होने से पहले कैबिनेट बैठक में प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लगाई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट से पहले सपा का आक्रामक रुख आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए रणनीतिक कदम है, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके और जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा सके। वहीं सत्तारूढ़ भाजपा का दावा है कि बजट विकास, निवेश और रोजगार को नई गति देगा।
अब सभी की निगाहें विधानसभा में पेश होने वाले बजट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सरकार किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा फोकस करने जा रही है और विपक्ष के आरोपों का जवाब किस तरह देती है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चिनाब ब्रिज के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने वह कर दिखाया जो अंग्रेज भी नहीं कर सके. चिनाब ब्रिज प्रोजेक्ट को पूरा होते हुए देखना सबका सपना था, जिसे आज पीएम मोदी ने पूरा कर दिखाया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेल ब्रिज पर तिरंगा लहराकर उद्घाटन किया. इसके बाद पीएम ने अंजी ब्रिज और कटर में कश्मीर की पहली ट्रेन वंदे भारत को हरी झंडी भी दिखाई.
‘अंग्रेजों ने नहीं, मोदी ने पूरा किया काम’
CM उमर अब्दुल्ला ने तारीफ करते हुए कहा कि जो काम अंग्रेज न कर सके, वो काम पीएम मोदी ने पूरा कर दिखाया. उन्होंने कहा कि जब ये प्रोजेक्ट शुरू हुआ तो मैं 8वीं क्लास में था. अब मैं 55 साल का हो गया हूं. इस प्रोजेक्ट से जम्मू-कश्मीर को बहुत फायदा होगा. स्थानीय लोगों को आने वाले दिनों में बहुत लाभ मिलने जा रहा है. चिनाब ब्रिज से प्रदेश के विकास में तेजी आएगी. उमर ने आगे कहा कि इसका ख्वाब कई दशकों तक देखा गया. अंग्रेजों तक ने यह सपना देखा. लेकिन, जो अंग्रेज के हाथों न पूरा हो सका वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल में संपन्न हुआ.
इससे राज्य करेगा तरक्की
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस परियोजना से राज्य के विकास में तेजी आएगी. इससे राज्य के किसानों, विशेषकर सेब का व्यापार करने वालों लोगों को बहुत फायदा होगा. अब कश्मीर में पैदा होने वाले सेब देश के अलग-अलग हिस्से में आसानी पहुंच सकेंगे, जिससे देश की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा. उन्होंने कहा कि इससे न केवल आमदनी बढ़ेगी बल्कि युवाओं को भी रोजगार मिलेगा.
जम्मू-कश्मीर को मिलीं दो नई ट्रेनें
पीएम ने कहा कि मुझे चिनाब ब्रिज और अंजी ब्रिज का उद्घाटन करने का मौका मिला, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है. दो नई ट्रेनें जम्मू-कश्मीर को मिलीं. उन्होंने जम्मू-कश्मीर की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि मैं इस विकास के लिए आप सबको बधाई देता हूं. यहां कई पीढ़ियां रेल कनेक्टिविटी का सपना देखते हुईं गुजर गईं. उन्होंने सीएम उमर की बातों का जिक्र करते हुए बोला कि उमर कहते है कि जब वे सातवीं-आठवीं क्लास में पढ़ते थे, तब से इस प्रोजेक्ट के पूरा होने का इंतजार कर रहे थे. इसके आगे उन्होंने कहा कि आज लाखों लोगों का सपना पूरा हुआ.
पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग भी उठाई
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष राज्य को पुनः पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि इस मंच पर चार लोग हैं जो 2014 में कटरा रेलवे स्टेशन के उद्घाटन के समय मौजूद थे. आप (प्रधानमंत्री मोदी) उस समय पहली बार प्रधानमंत्री बने थे. मनोज सिन्हा रेल राज्य मंत्री थे, और मैं राज्य का मुख्यमंत्री था.





