मध्य प्रदेश

आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा अपडेट, 1 अक्टूबर से इंदौर-भोपाल समेत 4 बड़े शहरों के 289 अस्पताल हो सकते हैं इससे बाहर

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भोपाल, मध्य प्रदेश | 4 सितंबर 2026

मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। प्रदेश में योजना के तहत मरीजों का इलाज कर रहे करीब 289 अस्पतालों के सामने मान्यता और निर्धारित मानकों को पूरा करने की चुनौती है। इन अस्पतालों को जरूरी शर्तें पूरी करने के लिए दी गई अतिरिक्त समय-सीमा 1 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रही है। अगर संबंधित अस्पताल तय मानकों को पूरा नहीं करते हैं, तो उन्हें आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर किए जाने का खतरा बताया जा रहा है।

इस बदलाव का असर खास तौर पर प्रदेश के बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में देखने को मिल सकता है। इनमें अकेले भोपाल के 139 अस्पताल ऐसे बताए गए हैं, जिन पर आयुष्मान योजना से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, फिलहाल इन अस्पतालों को निश्चित रूप से योजना से बाहर किए जाने की घोषणा नहीं हुई है। यह कार्रवाई निर्धारित मानकों को पूरा करने की स्थिति पर निर्भर करेगी।

1 अक्टूबर से खत्म हो रही है अतिरिक्त मोहलत

रिपोर्ट के मुताबिक, आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए कुछ आवश्यक मान्यता और गुणवत्ता संबंधी मानकों को पूरा करना जरूरी है। इनमें NABH मान्यता से जुड़े मानदंड भी शामिल हैं।

अस्पतालों को इन शर्तों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था। अब यह मोहलत 1 अक्टूबर 2026 को समाप्त होने जा रही है। ऐसे में संबंधित अस्पतालों के पास तय समय-सीमा के भीतर जरूरी प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती है।

यदि कोई अस्पताल निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता है, तो उसकी आयुष्मान योजना के तहत स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा संबंध उन मरीजों से भी है जो इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल करते हैं।

भोपाल के 139 अस्पतालों पर सबसे ज्यादा नजर

राजधानी भोपाल में इस मामले को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल के 139 अस्पताल ऐसे हैं जिन पर योजना से बाहर होने का खतरा बताया गया है।

इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी अस्पतालों का आयुष्मान पैनल खत्म हो चुका है। बल्कि इन अस्पतालों को निर्धारित मानकों को पूरा करने की जरूरत है। अगर वे समय-सीमा के भीतर आवश्यक शर्तें पूरी कर लेते हैं, तो स्थिति अलग हो सकती है।

इसलिए आयुष्मान कार्डधारकों के लिए भी अस्पताल की वर्तमान स्थिति की जानकारी रखना महत्वपूर्ण होगा।

इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर भी दायरे में

यह मामला सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है। इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों के आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पताल भी नए मानदंडों के दायरे में हैं।

प्रदेश में करीब 289 अस्पतालों के सामने आवश्यक मान्यता और गुणवत्ता संबंधी शर्तें पूरी करने की चुनौती बताई जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन अस्पतालों की स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसियों की नजर रहेगी।

मरीजों को क्यों रखना होगा ध्यान?

आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित उपचार का लाभ मिलता है। ऐसे में किसी अस्पताल की योजना से जुड़ी स्थिति में बदलाव होने पर मरीजों को इलाज से पहले इसकी जानकारी लेना जरूरी हो जाएगा।

मसलन, अगर कोई अस्पताल पहले आयुष्मान योजना के तहत इलाज कर रहा था, लेकिन बाद में उसके पैनल की स्थिति बदल गई, तो मरीज को वहां इलाज की सुविधा को लेकर परेशानी हो सकती है।

इसी वजह से 1 अक्टूबर के बाद आयुष्मान कार्डधारकों को अस्पताल चुनते समय केवल पुराने अनुभव या अस्पताल के नाम पर निर्भर रहने के बजाय उसकी मौजूदा योजना स्थिति और आवश्यक मान्यता की जानकारी जांचने की सलाह दी जा रही है।

अस्पतालों के लिए क्यों जरूरी हैं ये मानक?

आयुष्मान योजना के तहत बड़ी संख्या में मरीजों को कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलता है। ऐसे में योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाओं और निर्धारित प्रक्रियाओं से संबंधित मानकों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।

NABH यानी National Accreditation Board for Hospitals & Healthcare Providers की मान्यता अस्पतालों में गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों से संबंधित है।

इसी तरह योजना से जुड़े अस्पतालों को अन्य जरूरी नियमों और शर्तों का भी पालन करना होता है। इन्हीं मानकों को लेकर अब निगरानी सख्त किए जाने की बात सामने आई है।

नियमों की अनदेखी पर पहले भी हुई कार्रवाई

आयुष्मान भारत योजना में अस्पतालों की ओर से नियमों के उल्लंघन और अनियमितताओं को लेकर पहले भी कार्रवाई की गई है।

मध्य प्रदेश में करीब 83 अस्पतालों में अनियमितताएं सामने आने के बाद उन्हें व्यवस्था में सुधार के अवसर दिए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, सुधार नहीं होने पर 15 अस्पतालों को निलंबित किया गया, जबकि 18 अस्पतालों का डी-एम्पैनलमेंट कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया। इसके अलावा 50 अस्पतालों पर आर्थिक जुर्माना लगाया गया।

इन मामलों में कुल 3 करोड़ 13 लाख 79 हजार 311 रुपये की पेनल्टी लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। यह कार्रवाई योजना में नियमों के पालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सख्ती को दिखाती है।

भोपाल में 25 अस्पतालों पर हो चुकी है कार्रवाई

राजधानी भोपाल में भी आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों पर कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल में कार्रवाई की सूची में 25 अस्पताल शामिल रहे। इनमें 4 अस्पतालों का डी-एम्पैनलमेंट, 8 अस्पतालों का निलंबन और 13 अस्पतालों पर आर्थिक दंड लगाया गया।

इन अस्पतालों पर कुल 2 करोड़ 11 लाख 91 हजार 492 रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा दो अस्पतालों के खिलाफ FIR दर्ज होने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

1 अक्टूबर के बाद क्या बदल सकता है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि 1 अक्टूबर के बाद इन 289 अस्पतालों की स्थिति क्या होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, जिन अस्पतालों ने निर्धारित मानदंड पूरे नहीं किए हैं, उन्हें योजना से बाहर किए जाने का खतरा है। वहीं जो अस्पताल जरूरी शर्तें पूरी कर लेंगे, उनके लिए स्थिति अलग हो सकती है।

इसलिए फिलहाल 289 अस्पतालों को योजना से बाहर घोषित करना सही नहीं होगा। इन्हें ऐसे अस्पतालों के रूप में देखा जाना चाहिए जिनकी मान्यता/पात्रता को लेकर 1 अक्टूबर की समय-सीमा महत्वपूर्ण है।

आयुष्मान कार्डधारकों के लिए जरूरी सलाह

आयुष्मान कार्डधारकों के लिए इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अस्पताल की वर्तमान स्थिति से जुड़ा है।

अगर कोई मरीज अक्टूबर के बाद आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने की योजना बना रहा है, तो उसे अस्पताल जाने से पहले यह देख लेना चाहिए कि संबंधित अस्पताल उस समय आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध है या नहीं।

पुरानी जानकारी के आधार पर अस्पताल पहुंचने के बजाय मौजूदा स्थिति की पुष्टि करना मरीज और उसके परिवार के लिए ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

आयुष्मान योजना का दायरा लगातार बढ़ रहा है

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश की प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में से एक है। केंद्र सरकार के अनुसार, मई 2026 तक योजना के तहत 43.93 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके थे और अस्पतालों में भर्ती के करीब 12.03 करोड़ मामले दर्ज किए गए थे। योजना के तहत कुल उपचार खर्च करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये बताया गया है।

इतने बड़े स्तर पर योजना के संचालन के कारण अस्पतालों की गुणवत्ता, पात्रता और नियमों के पालन की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

आगे क्या होगा?

अब सबसे ज्यादा नजर 1 अक्टूबर 2026 की समय-सीमा पर है। उससे पहले संबंधित अस्पतालों को आवश्यक मानकों और मान्यता से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और अस्पतालों की अनुपालन स्थिति के आधार पर आगे यह तय होगा कि कौन से अस्पताल आयुष्मान योजना के पैनल में बने रहते हैं और किनकी सेवाओं पर रोक लगती है।

फिलहाल आयुष्मान कार्डधारकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे किसी भी अस्पताल में इलाज कराने से पहले उसकी मौजूदा आयुष्मान स्थिति की पुष्टि जरूर करें।


महंगी चीनी पर सवाल, कुर्सी से उठते हुए शिवराज सिंह चौहान बोले- ‘चिंता मत करो’

रायसेन, मध्य प्रदेश | 24 अगस्त 2026

मध्य प्रदेश के रायसेन में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक दिवसीय दौरे के दौरान चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर पूछा गया सवाल चर्चा में आ गया। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक खत्म होने के बाद जब शिवराज सिंह चौहान अपनी कुर्सी से उठकर बाहर निकल रहे थे, तभी पत्रकारों ने उनसे देश में बढ़ रही चीनी की कीमतों को लेकर सवाल किया।

पत्रकारों के सवाल पर शिवराज सिंह चौहान ने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, “सब इंतजाम हो रहे हैं जी, चिंता मत करो…” इसके बाद वह वहां से आगे बढ़ गए। उनके इस जवाब का वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

रायसेन पहुंचे थे केंद्रीय मंत्री शिवराज

शिवराज सिंह चौहान सोमवार को अपने एक दिवसीय दौरे पर रायसेन पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने जिले में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने छात्राओं से संवाद किया, मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया और जिले में चल रही केंद्र सरकार की योजनाओं तथा विकास कार्यों की समीक्षा की।

उनके दौरे का एक प्रमुख कार्यक्रम शासकीय कन्या महाविद्यालय में आयोजित किया गया था। यहां उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और कहा कि आर्थिक कारणों से किसी भी होनहार बेटी की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

छात्राओं को लैपटॉप और प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को लैपटॉप और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने महाविद्यालय परिसर में नवनिर्मित कंप्यूटर लैब का लोकार्पण किया और विद्यार्थियों से बातचीत की।

उन्होंने छात्राओं को अजीम प्रेमजी छात्रवृत्ति योजना के बारे में भी जानकारी दी। छात्राओं की सुविधा के लिए स्थापित हेल्प डेस्क के माध्यम से योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों की छात्राओं से संवाद किया और पात्र विद्यार्थियों से समय पर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने की अपील की।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधारोपण

केंद्रीय मंत्री ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत कॉलेज परिसर में पौधारोपण भी किया। इस दौरान उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की।

दिशा बैठक में विकास योजनाओं की समीक्षा

दौरे के अंतिम चरण में शिवराज सिंह चौहान रायसेन कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक में कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा, पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता, जिला पंचायत सीईओ कमल सोलंकी समेत जिले के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की और अधिकारियों को विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।

बैठक खत्म होते ही चीनी पर आया सवाल

दिशा बैठक समाप्त होने के बाद शिवराज सिंह चौहान अपनी कुर्सी से उठकर बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान पत्रकारों ने देश में लगातार बढ़ रही चीनी की कीमतों को लेकर उनसे सवाल किया।

रक्षाबंधन के आसपास चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा आम लोगों के बीच भी चर्चा में था। पत्रकारों के सवाल पर शिवराज सिंह चौहान ने मुस्कुराते हुए कहा—“सब इंतजाम हो रहे हैं जी, चिंता मत करो…”

उन्होंने इस मुद्दे पर विस्तार से जवाब नहीं दिया और इसके बाद आगे बढ़ गए। उनका यह छोटा-सा जवाब अब राजनीतिक और सोशल मीडिया चर्चा का हिस्सा बन गया है।

एक महीने में करीब 29 प्रतिशत बढ़ी औसत कीमत

चीनी के दामों में हाल के दिनों में तेजी देखी गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त को चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत ₹63.05 प्रति किलो थी। एक महीने पहले यही कीमत ₹48.73 प्रति किलो थी। यानी एक महीने में करीब 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं चीनी की अधिकतम खुदरा कीमत करीब ₹75 प्रति किलो और मॉडल कीमत लगभग ₹65 प्रति किलो बताई गई।

त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की कीमत बढ़ने से घरेलू बजट पर असर पड़ने की चिंता भी सामने आई है। खासतौर पर रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के समय मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ने की संभावना रहती है।

ISMA ने कहा- देश में चीनी की कमी नहीं

चीनी की कीमतों में तेजी के बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है।

एसोसिएशन के अनुसार, शुल्क-मुक्त चीनी आयात की अनुमति देने और कारोबारियों तथा थोक उपभोक्ताओं पर भंडारण सीमा लगाने जैसे कदमों से बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है। इससे आने वाले समय में खुदरा कीमतों में कमी आने की उम्मीद जताई गई है।

रायसेन में ‘मामा कोचिंग क्लासेस’ की घोषणा

शिवराज सिंह चौहान के रायसेन दौरे में विद्यार्थियों से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण ऐलान सामने आया। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए ‘मामा कोचिंग क्लासेस’ शुरू करने की घोषणा की।

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके अपने जिले में ही गुणवत्तापूर्ण कोचिंग उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें महंगी निजी कोचिंग संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े।

चीनी के दाम पर शिवराज का जवाब बना चर्चा का विषय

रायसेन दौरे में विकास योजनाओं की समीक्षा, छात्राओं से संवाद, लैपटॉप वितरण और पौधारोपण जैसे कार्यक्रमों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा चीनी की कीमतों पर शिवराज सिंह चौहान के संक्षिप्त जवाब की हो रही है।

एक तरफ सरकारी आंकड़ों में चीनी की कीमतों में करीब 29 प्रतिशत की वृद्धि सामने आई है, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि “सब इंतजाम हो रहे हैं जी, चिंता मत करो।”

अब नजर इस बात पर है कि चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से आने वाले दिनों में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।


राजस्थान-एमपी बॉर्डर पर नशा तस्करी का नया सिंडिकेट: ’12 मिनट में होम डिलीवरी’, तस्करों का दुस्साहस कैमरे में कैद

स्थान: राजस्थान-मध्य प्रदेश सीमा

दिनांक: 15 जुलाई, 2026

विशेष संवाददाता:

राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी के नए और खतरनाक तरीके सामने आए हैं। हाल ही में हुए कुछ सनसनीखेज खुलासों ने यह साबित कर दिया है कि ड्रग माफिया अब ‘होम डिलीवरी’ जैसी सुविधाओं के जरिए युवाओं को नशे के जाल में धकेल रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करों का नेटवर्क इतना सक्रिय हो गया है कि महज 12 मिनट के भीतर नशे की खेप ग्राहक तक पहुंचाई जा रही है [1.1.2]।

’12 मिनट में डिलीवरी’ का खौफनाक नेटवर्क

तस्करी के इस नए मॉडल में तस्कर तकनीक और स्थानीय रास्तों का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। तस्करों का दावा है कि उनके पास एक ऐसा नेटवर्क है, जिसके जरिए वे किसी भी इलाके में 12 मिनट से कम समय में स्मैक या अन्य ड्रग्स पहुंचा सकते हैं।

  • तस्करों का दुस्साहस: एक स्टिंग ऑपरेशन में एक तस्कर को यह कहते हुए सुना गया— “साथ दो, किसी को टिकने नहीं देंगे।” यह बयान उनके नेटवर्क के विस्तार और स्थानीय स्तर पर उनके प्रभाव को दर्शाता है।

  • होम डिलीवरी: सांचौर और उसके आसपास के सीमावर्ती इलाकों में, नेशनल हाईवे के किनारे बने ढाबों और होटलों को ‘नशा आपूर्ति केंद्रों’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है [1.1.2]। वहां से बिना किसी डर के नशे की होम डिलीवरी की जा रही है [1.1.2]।

क्या है तस्करी का रूट?

पुलिस सूत्रों और हालिया पड़ताल के अनुसार, राजस्थान से एमपी की ओर जाने वाले तस्कर मुख्य रूप से उन रास्तों का उपयोग कर रहे हैं जो पुलिस की सीधी निगरानी से दूर हैं:

  • हाइवे के किनारे होटल: नेशनल हाईवे पर स्थित छोटे होटल और ढाबे इस सिंडिकेट के ‘स्टॉपओवर’ बने हुए हैं, जहाँ से ड्रग्स को छोटे पैकेट्स में एमपी के जिलों में भेजा जाता है [1.1.2]।

  • गुप्त रास्ते: तस्कर सीमावर्ती गाँवों के कच्चे रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वे पुलिस की पिकेट्स से बचकर निकल जाते हैं।

  • छोटे सप्लायर: बड़ी खेप को पहले सुरक्षित गोदामों में रखा जाता है और फिर स्थानीय स्तर पर छोटे सप्लायर्स के माध्यम से ग्राहकों तक 10-12 मिनट में पहुंचाया जाता है [1.1.2]।

प्रशासन की कार्रवाई और चुनौतियां

राजस्थान और मध्य प्रदेश की पुलिस सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘ऑपरेशन वज्र प्रहार’ जैसे अभियानों के जरिए तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है [1.1.1]। हालांकि, तस्करों की बदलती रणनीति के कारण इन्हें पकड़ना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

हाल के दिनों में पुलिस ने कई तस्करों को गिरफ्तार किया है, जो नशे की खेप ले जाने के लिए जानवरों का सहारा लेने या एंबुलेंस जैसी गाड़ियों का उपयोग करने जैसे हथकंडे अपना रहे हैं [1.1.1]।

विशेषज्ञों की राय:

समाजशास्त्रियों का मानना है कि नशे की इस ‘होम डिलीवरी’ ने छोटे कस्बों के युवाओं को बड़ी मुश्किल में डाल दिया है। जब ड्रग्स इतनी आसानी से उपलब्ध होते हैं, तो नशे की लत लगने की दर कई गुना बढ़ जाती है।

पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत दें। साथ ही, सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी और ‘नशा मुक्ति अभियान’ को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग उठ रही है।



एंबुलेंस नहीं मिली, ऑटो में हुई डिलीवरी; चार नवजातों की नहीं बच सकी जान
मंडला | 8 जुलाई 2026

मध्य प्रदेश के मंडला जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल ले जाई जा रही एक गर्भवती महिला ने रास्ते में ऑटो-रिक्शा में ही चार बच्चों (क्वाड्रुप्लेट्स) को जन्म दिया। समय पर चिकित्सीय सुविधा नहीं मिलने के कारण चारों नवजातों की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने एंबुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया है।

परिजनों के अनुसार, महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उन्होंने सरकारी एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन समय पर वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। मजबूरी में परिवार ने ऑटो-रिक्शा से अस्पताल के लिए रवाना होने का निर्णय लिया। रास्ते में ही महिला ने एक-एक कर चार बच्चों को जन्म दिया।

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने चारों नवजातों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। चिकित्सकों के अनुसार, एक साथ चार बच्चों का जन्म (क्वाड्रुप्लेट्स) अत्यंत दुर्लभ और उच्च जोखिम वाली स्थिति होती है। समय से पहले जन्म, कम वजन और तत्काल विशेषज्ञ नवजात चिकित्सा की आवश्यकता ऐसे मामलों में बेहद महत्वपूर्ण होती है।

घटना के बाद मृत नवजातों के परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती और महिला को जल्दी अस्पताल पहुंचाया जाता, तो बच्चों की जान बच सकती थी। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले की जानकारी मिलने के बाद घटना की जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि एंबुलेंस सेवा उपलब्ध क्यों नहीं हो सकी और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा आपातकालीन एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।


ट्विशा केस के ‘क्राइम सीन’ पर चोरी, गिरिबाला सिंह के घर से रिवॉल्वर और अहम फाइलें निशाने पर

भोपाल (मध्य प्रदेश) | 29 जून 2026

ट्विशा शर्मा मौत मामले से जुड़े पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के भोपाल स्थित घर में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। घटना उस मकान में हुई, जिसे इस हाई-प्रोफाइल मामले का अहम ‘क्राइम सीन’ माना जाता है। बदमाशों ने देर रात घर में घुसकर एक रिवॉल्वर, सोने का हार और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों से जुड़ी फाइलों को निशाना बनाया।

पुलिस के अनुसार, शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात करीब 2 बजे तीन नकाबपोश बदमाश घर के पिछले हिस्से से पहली मंजिल पर पहुंचे और कमरों में घुसकर सामान खंगालना शुरू कर दिया। उस समय घर में गिरिबाला सिंह का बड़ा बेटा मौजूद था, जबकि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह ट्विशा शर्मा मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि चोर घर से सोने के आभूषण, रिवॉल्वर और महत्वपूर्ण दस्तावेजों वाली फाइलें लेकर भागने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान रात्रि गश्त कर रही पुलिस की चार्ली टीम को संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोपियों ने हाथापाई के बाद अंधेरे का फायदा उठाकर फरार होने में सफलता हासिल कर ली।

भागते समय बदमाश कुछ सामान मौके पर ही छोड़ गए। पुलिस ने वहां से सोने के आभूषण, चांदी के बर्तन और कई दस्तावेज बरामद किए हैं। अब यह जांच की जा रही है कि बरामद फाइलें और अन्य सामान इसी घर के हैं या किसी अन्य स्थान से चोरी कर लाए गए थे।

भोपाल पुलिस के अनुसार, पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए घर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी का उद्देश्य केवल कीमती सामान ले जाना था या फिर ट्विशा शर्मा मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों तक पहुंच बनाना भी इसका मकसद था।

गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद यह मकान जांच एजेंसियों के लिए बेहद अहम बन गया था। इसी घर में पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने डमी की मदद से घटनास्थल का पुनर्निर्माण (क्राइम सीन रीक्रिएशन) भी किया था। ऐसे में इस चोरी की घटना ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही संदिग्धों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही इस बात की भी जांच जारी है कि चोरी की यह घटना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा तो नहीं थी।


NEET 2026: छात्रों के लिए रेलवे का बड़ा तोहफा, भोपाल-इंदौर के बीच चलेगी स्पेशल ट्रेन

भोपाल | 19 जून 2026

NEET UG 2026 री-एग्जाम को देखते हुए भारतीय रेलवे ने मध्य प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था की है। 21 जून को होने वाली परीक्षा में बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के भोपाल पहुंचने की संभावना को देखते हुए रेलवे ने इंदौर, रतलाम, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले छात्रों की सुविधा के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा के दौरान अतिरिक्त भीड़ को नियंत्रित करने और छात्रों को समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह विशेष सेवा शुरू की गई है। भोपाल मंडल ने भी रेलवे स्टेशनों पर विशेष भीड़ प्रबंधन और अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की घोषणा की है।

इंदौर-भोपाल स्पेशल ट्रेन का शेड्यूल

रेलवे द्वारा गाड़ी संख्या 09354 इंदौर-भोपाल स्पेशल ट्रेन का संचालन 20 जून 2026 को किया जाएगा। यह ट्रेन इंदौर से सुबह 11:25 बजे रवाना होकर कई प्रमुख स्टेशनों से होते हुए शाम 7:00 बजे भोपाल पहुंचेगी।

स्टॉपेज और समय

  • इंदौर – 11:25 AM
  • फतेहाबाद – 12:00 PM
  • बड़नगर – 12:42 PM
  • रतलाम – 1:30 PM
  • नागदा – 2:23 PM
  • उज्जैन – 3:25 PM
  • मक्सी – 4:30 PM
  • शुजालपुर – 5:21 PM
  • सीहोर – 6:00 PM
  • संत हिरदाराम नगर – 6:38 PM
  • भोपाल – 7:00 PM

वापसी के लिए भी विशेष ट्रेन

परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने वापसी के लिए भी विशेष ट्रेन की व्यवस्था की है।

गाड़ी संख्या 09353 भोपाल-रतलाम स्पेशल ट्रेन 20 जून को शाम 7:40 बजे भोपाल से रवाना होगी। यह ट्रेन संत हिरदाराम नगर, सीहोर, शुजालपुर, मक्सी, उज्जैन और नागदा होते हुए रात 12:55 बजे रतलाम पहुंचेगी।

17 कोचों की विशेष व्यवस्था

रेलवे ने संभावित भीड़ को देखते हुए इस स्पेशल ट्रेन में कुल 17 कोच लगाए हैं, जिनमें:

  • 13 स्लीपर कोच
  • 2 सामान्य श्रेणी कोच
  • 2 एसएलआर/डी कोच

शामिल हैं। रेलवे का मानना है कि इससे हजारों विद्यार्थियों और उनके परिजनों को राहत मिलेगी।

मध्य प्रदेश में लगभग 1 लाख छात्र देंगे परीक्षा

NEET UG 2026 री-एग्जाम में मध्य प्रदेश के लगभग एक लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। इसी कारण रेलवे और प्रशासन ने सुरक्षा, यात्रा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए हैं।


भोपाल में भीषण हादसा: बैरागढ़ रोड पर पटाखा दुकान में लगी आग, लगातार धमाकों से दहला इलाका; 70 फीट ऊपर उठीं लपटें

दिनांक: 12 जून, 2026

भोपाल: राजधानी भोपाल के हलाली क्षेत्र के पास बैरागढ़ रोड पर शुक्रवार को एक भीषण हादसा हो गया। यहाँ स्थित एक पटाखा दुकान में अचानक आग लग गई। दुकान के भीतर भारी मात्रा में बारूद और पटाखे होने के कारण देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग लगने के साथ ही दुकान के भीतर एक के बाद एक लगातार तेज धमाके होने शुरू हो गए, जिससे पूरा इलाका थर्रा उठा।

70 फीट ऊपर तक उठीं आग की लपटें

चश्मदीदों के अनुसार, आग इतनी भयानक थी कि इसकी लपटें करीब 70 फीट ऊँचाई तक उठती दिखाई दीं। आसमान में काले धुएं का एक विशाल गुबार छा गया, जिसे कई किलोमीटर दूर से भी साफ देखा जा सकता था। लगातार हो रहे विस्फोटों के कारण आसपास की सड़कों पर भगदड़ मच गई और लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ लगाई। धमाकों की गूंज से आसपास की इमारतों के शीशे भी चटक गए।

फायर ब्रिगेड और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही भोपाल नगर निगम के फायर कंट्रोल रूम से बैरागढ़, गांधीनगर और लालघाटी फायर स्टेशनों से दमकल की गाड़ियां तुरंत मौके के लिए रवाना की गईं।

  • राहत कार्य में रुकावट: शुरुआत में लगातार हो रहे धमाकों और उड़ते हुए पटाखों के कारण दमकलकर्मियों को आग के करीब पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

  • सुरक्षा घेरा: पुलिस ने एहतियात के तौर पर बैरागढ़ रोड के प्रभावित हिस्से पर दोनों तरफ से आवाजाही को रोक दिया और ट्रैफिक को अन्य रास्तों पर डायवर्ज किया, ताकि कोई राहगीर इसकी चपेट में न आए।

नुकसान और जांच का विषय

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में दुकान के भीतर रखा लाखों रुपये का माल जलकर खाक हो गया है। गनीमत यह रही कि आग लगते ही दुकान में मौजूद लोग और कर्मचारी तुरंत बाहर की ओर भाग निकले, जिससे किसी के हताहत होने की शुरुआती खबर नहीं है। हालांकि, दमकल विभाग और पुलिस की टीमें पूरी तरह आग पर काबू पाने के बाद ही मलबे की सघन जांच करेंगी।

आग लगने का प्राथमिक कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, लेकिन रिहायशी और व्यस्त मार्ग पर इस तरह पटाखों के भंडारण को लेकर प्रशासन अब मुस्तैद हो गया है। पुलिस प्रशासन द्वारा दुकान के लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है।


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मोदी सरकार के कार्यकाल पर विशेष रिपोर्ट

नई दिल्ली, 10 जून 2026।
प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अपने शासनकाल को “सेवा, सुशासन और संकल्प” की अवधारणा के साथ जोड़ते हुए देशभर में उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं को रेखांकित करने का अभियान शुरू किया है। भाजपा और सरकार दोनों स्तरों पर इस थीम को विकसित भारत 2047 के विजन से जोड़ा जा रहा है।

मुख्य शीर्षक

सेवा, सुशासन और संकल्प के 12 वर्ष: विकसित भारत की ओर बढ़ता देश

देश में बुनियादी ढांचे, डिजिटल गवर्नेंस, सामाजिक सुरक्षा और गरीब कल्याण योजनाओं के विस्तार को सरकार अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत कर रही है। सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों में योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।

सुशासन पर विशेष फोकस

प्रशासन गांव की ओर: जमीनी स्तर तक पहुंची सरकार

सुशासन सप्ताह (Good Governance Week) के तहत “प्रशासन गांव की ओर” अभियान चलाया गया, जिसमें जिला प्रशासन को गांव स्तर पर शिकायत निवारण और सेवा वितरण के लिए सक्रिय किया गया। देशभर में लाखों शिकायतों के समाधान और जनसेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया।

सरकार का कहना है कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं बल्कि नागरिकों तक समय पर सेवाएं पहुंचाने से सिद्ध होता है। इसी उद्देश्य से डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाएं और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को मजबूत किया गया।

सेवा का संकल्प

गरीब कल्याण से जनभागीदारी तक

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं को सेवा के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया है। भाजपा का दावा है कि इन योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन स्तर में सुधार किया है और बिचौलिया व्यवस्था को समाप्त किया है।

संकल्प से सिद्धि तक

विकसित भारत 2047 का रोडमैप

सरकार ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को केंद्र में रखते हुए रोजगार, आधारभूत संरचना, तकनीकी नवाचार और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है। “संकल्प से सिद्धि” अभियान के माध्यम से विभिन्न राज्यों में जनसभाएं, संवाद कार्यक्रम और विकास प्रदर्शनी आयोजित की जा रही हैं।

राजनीतिक संदेश

भाजपा ने शुरू किया उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान

भाजपा देशभर में “सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण” विषय पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है। पार्टी का कहना है कि यह अभियान सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करने के लिए चलाया जा रहा है।

निष्कर्ष

“सेवा, सुशासन और संकल्प” केवल एक राजनीतिक नारा नहीं बल्कि सरकार द्वारा प्रस्तुत विकास मॉडल का आधार बताया जा रहा है। जहां सरकार इसे जनकल्याण, पारदर्शिता और विकास की यात्रा मानती है, वहीं विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाता रहा है। इसके बावजूद विकसित भारत 2047 का लक्ष्य आने वाले वर्षों की राजनीति और नीति निर्माण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।


Indore Metro: अंडरग्राउंड रूट के लिए एयरपोर्ट क्षेत्र में ब्लास्टिंग की तैयारी, पथरीली जमीन से खुदाई में मुश्किल

इंदौर। 4 जून 2026

इंदौर मेट्रो परियोजना के अंडरग्राउंड कॉरिडोर के निर्माण कार्य में एयरपोर्ट क्षेत्र की पथरीली जमीन बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। भूमिगत सुरंग (टनल) निर्माण के लिए चल रही प्रारंभिक खुदाई के दौरान कठोर चट्टानी सतह मिलने से कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में निर्माण एजेंसियों को कई स्थानों पर नियंत्रित ब्लास्टिंग (Controlled Blasting) का सहारा लेना पड़ रहा है, ताकि सुरंग निर्माण का कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ाया जा सके।

मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, एयरपोर्ट क्षेत्र से गुजरने वाला अंडरग्राउंड कॉरिडोर इंदौर मेट्रो परियोजना का सबसे जटिल हिस्सा माना जा रहा है। भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण में सामने आया है कि यहां जमीन के नीचे कठोर चट्टानों और पथरीली परतों की अधिकता है, जिससे सामान्य खुदाई तकनीकों से कार्य करना मुश्किल हो रहा है। इसी कारण सुरंग निर्माण के लिए विशेष मशीनों और नियंत्रित विस्फोट तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

इंदौर मेट्रो के संशोधित प्रस्ताव के तहत खजराना क्षेत्र से एयरपोर्ट तक लगभग 8.7 किलोमीटर लंबा हिस्सा पूरी तरह भूमिगत बनाया जाएगा। इस अंडरग्राउंड कॉरिडोर में सात मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं। पहले केवल रेलवे स्टेशन से एयरपोर्ट तक का हिस्सा भूमिगत रखने की योजना थी, लेकिन यातायात प्रबंधन और जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पूरे खंड को भूमिगत बनाने का निर्णय लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि पथरीली जमीन के कारण सुरंग निर्माण की गति धीमी हो सकती है और परियोजना की लागत भी बढ़ सकती है। ब्लास्टिंग कार्य एयरपोर्ट क्षेत्र में होने के कारण सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। किसी भी प्रकार के विस्फोट को नियंत्रित तरीके से और विशेषज्ञों की निगरानी में अंजाम दिया जा रहा है ताकि आसपास के क्षेत्रों तथा हवाई अड्डे के संचालन पर कोई प्रभाव न पड़े।

मेट्रो परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आगामी महीनों में टनल बोरिंग मशीन (TBM) के माध्यम से सुरंग निर्माण कार्य और तेज किया जाएगा। यह अंडरग्राउंड कॉरिडोर शहर के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले हिस्सों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा भविष्य में यातायात दबाव कम करने में मदद करेगा।

इंदौर मेट्रो परियोजना का यह भूमिगत खंड शहर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा। हालांकि भूगर्भीय चुनौतियों और अतिरिक्त निर्माण लागत के कारण परियोजना की समयसीमा पर असर पड़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।


MP में सियासी घमासान: जीतू पटवारी का विधानसभा सचिवालय पर धावा; कांग्रेस विधायक की सदस्यता पर मंडराया संकट

भोपाल | 3 अप्रैल, 2026

गुरुवार की आधी रात को मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी, वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के साथ विधानसभा सचिवालय पहुँचे। यह कदम दिल्ली की एक विशेष अदालत द्वारा दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाए जाने के बाद उठाया गया है।

विवाद की जड़: राजेंद्र भारती की सजा

  • मामला: दिल्ली की एक कोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 को राजेंद्र भारती को करीब 28 साल पुराने एक बैंक धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में दोषी करार दिया था।

  • सजा: गुरुवार (2 अप्रैल) को कोर्ट ने उन्हें 3 साल की जेल और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

  • सदस्यता का नियम: नियमानुसार, यदि किसी मौजूदा विधायक को 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उनकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से खत्म हो सकती है (जैसा कि राहुल गांधी के मामले में हुआ था)।

जीतू पटवारी के आरोप: ‘लोकतंत्र पर हमला’

विधानसभा सचिवालय के बाहर मीडिया से बात करते हुए जीतू पटवारी ने गंभीर आरोप लगाए:

  1. भाजपा की साजिश: पटवारी का दावा है कि भाजपा जानबूझकर पुराने मामलों को उछालकर कांग्रेस विधायकों को निशाना बना रही है ताकि विधानसभा में विपक्ष की आवाज को दबाया जा सके।

  2. जल्दबाजी पर सवाल: उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोर्ट ने सजा को दो महीने के लिए निलंबित (Suspend) कर दिया है ताकि अपील की जा सके, तो विधानसभा सचिवालय सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रहा है?

  3. देर रात पहुंचने की वजह: कांग्रेस नेताओं को अंदेशा था कि सचिवालय रात में ही सदस्यता रद्द करने का नोटिफिकेशन जारी कर सकता है, इसलिए वे अपनी आपत्ति दर्ज कराने सीधे वहां पहुँच गए।

कांग्रेस की रणनीति: कानूनी और राजनीतिक मोर्चा

  • हाईकोर्ट में अपील: विवेक तन्खा ने स्पष्ट किया है कि वे इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। कांग्रेस का तर्क है कि मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है।

  • उपचुनाव और राज्यसभा का गणित: मध्य प्रदेश में जून-जुलाई 2026 में राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। कांग्रेस के पास फिलहाल 64 विधायक हैं। यदि एक-एक कर विधायकों की सदस्यता जाती है, तो राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार की जीत मुश्किल हो सकती है।

अन्य ‘असुरक्षित’ विधायक

जीतू पटवारी ने यह भी उल्लेख किया कि भारती अकेले नहीं हैं जिन्हें निशाना बनाया गया है:

  • मुकेश मल्होत्रा (विजयपुर): चुनाव हलफनामे के विवाद में उनकी वोटिंग राइट्स पर पहले ही हाईकोर्ट की रोक है।

  • निर्मला सप्रे (बीना): जो भाजपा में शामिल हो चुकी हैं लेकिन तकनीकी रूप से अभी भी कांग्रेस विधायक हैं।


61 वर्ष के हो रहे हैं डॉक्टर मोहन यादव जी

मध्य प्रदेश के लोकप्रिय जनप्रिय यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं । संतोष गंगेले कर्मयोगी
उनके जीवन पर सोशल मीडिया और अनेक स्थानों से जीवनी संग्रह करके आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं जिससे कि यह साबित हो सके कि आपकी मुख्यमंत्री जी कहां के हैं कैसे हैं कौन हैं कहां तक शिक्षा है इन्होंने अपने जीवन में कितना संघर्ष किया है।डॉ. यादव उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2023 में तीसरी बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए। डॉ. यादव को 11 दिसम्बर 2023 को राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने मुख्यमंत्री नियुक्त किया।
लेखक संग्रह कर्ता।
‌ संतोष गंगेले कर्मयोगी
नौगांव बुंदेलखंड जिला छतरपुर मध्य
समाजसेवी प्रदेश स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार
डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के 19वें और वर्तमान मुख्यमंत्री (दिसंबर 2023 से) हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और उज्जैन दक्षिण से तीन बार के विधायक, मोहन यादव ने छात्र राजनीति (ABVP) से अपना करियर शुरू किया और उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। वे एक मजबूत ओबीसी (OBC) चेहरा और संघ (RSS) के करीबी माने जाते हैं।
डॉ. मोहन यादव का व्यक्तिगत एवं राजनीतिक परिचय:
पिता का नाम सेठ पूनम चंद यादव
एवं माता जी का नाम श्रीमती लीला देवी यादव
जन्म: 25 मार्च 1965, उज्जैन, मध्य प्रदेश।
शिक्षा: बीएससी (B.Sc.), एलएलबी (LLB), एमए (MA), एमबीए (MBA) और पीएचडी (PhD)।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता का नाम पूनमचंद यादव है। पत्नी सीमा यादव हैं और उनके तीन बच्चे (दो बेटे और एक बेटी) हैं।
छात्र राजनीति: छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और 1984 में उज्जैन नगर मंत्री बने।
विधायक: पहली बार 2013 में उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक बने। 2018 और 2023 के चुनावों में भी इस सीट से लगातार जीत हासिल की।
मंत्री पद: शिवराज सिंह चौहान की सरकार में 2020 में उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में कैबिनेट मंत्री बने।
विशेष उपलब्धि: उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार विधायक बनने के बाद, 2023 में भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी।

डॉ. मोहन यादव का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुँचा है। उन्हें एक हिंदूवादी और जमीन से जुड़े नेता के रूप में जाना जाता है।
पूर्व दायित्व: केबिनेट मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, जुलाई 2020 से। उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में देश में पहली बार मप्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सफल क्रियान्वयन, 54 नए महाविद्यालय खोले।
सन् 2004-2010 में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा)।
सन् 2011-2013 में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, भोपाल के अध्यक्ष (केबिनेट मंत्री दर्जा)।
भा.ज.पा. की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य. सन् 2013-2016 में भा.ज.पा. के अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के सह-संयोजक।
डॉ यादव को उज्जैन के समग्र विकास के लिए अप्रवासी भारतीय संगठन शिकागो (अमेरिका) द्वारा महात्मा गांधी पुरस्कार तथा इस्कॉन इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें मध्यप्रदेश में पर्यटन के निरंतर विकास के लिए वर्ष 2011-2012 एवं 2012-2013 में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किया गया। डॉ. यादव वर्ष 2013 में चौदहवीं विधान सभा, वर्ष 2018 में दूसरी बार पन्द्रहवी विधान सभा सदस्य निर्वाचित हुए। वे दिनांक 2 जुलाई, 2020 को केबिनेट मंत्री बने। डॉ. यादव वर्ष 2023 में सोलहवी विधानसभा के लिए तीसरी बार सदस्य निर्वाचित हुए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामय उपस्थिति में डॉ. यादव ने 13 दिसंबर 2023 को भोपाल में प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
छात्र राजनीति – अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में प्रदेश के विभिन्न पदों पर रहे, राष्ट्रीय महामंत्री के पद के दायित्वों का निर्वहन किया। माधव विज्ञान महाविद्यालय में वर्ष 1982 में डॉ. यादव छात्र संघ के संयुक्त सचिव तथा 1984 में छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
सामाजिक क्षेत्र – डॉ. यादव वर्ष 2006 में भारत स्काउट एवं गाइड के जिलाध्यक्ष, मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष, वर्ष 2007 में अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष, वर्ष 1992, 2004 एवं 2016 सिंहस्थ उज्जैन केन्द्रीय समिति के सदस्य रहे।
वर्ष 2000-2003 तक विक्रम विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद (सिंडीकेट) सदस्य के दायित्व का निर्वहन किया तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, विकलांग पुर्नवास केन्द्रों में सक्रिय भागीदारी निभाई।
राजनैतिक क्षेत्र – वर्ष 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव एवं 1984 में अध्यक्ष बने। वर्ष 1984 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री एवं 1986 में विभाग प्रमुख रहे। वर्ष 1988 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री, वर्ष 1991-92 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री, वर्ष 1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खण्डकार्यवाह, सायं भाग नगरकार्यवाह, वर्ष 1996 में खण्डकार्यवाह और नगरकार्यवाह, वर्ष 1997 में भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य बने।
डॉ. यादव वर्ष 1998 में पश्चिम रेलवे बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य बनाये गये वे वर्ष 1999 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के उज्जैन संभाग प्रभारी, वर्ष 2000-2003 में भा.ज.पा. के नगर जिला महामंत्री, वर्ष 2004 में भा.ज.पा. की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य, वर्ष 2004 में सिंहस्थ, मध्यप्रदेश की केन्द्रीय समिति के सदस्य तथा वर्ष 2008 से भारत स्काउट एण्ड गाइड के जिलाध्यक्ष रहे

डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री – मध्य प्रदेश शासन
मुख्यमंत्री –

जिले का प्रभार
इन्दौर
मुख्यमंत्री निवास श्यामला हिल्स
नाम – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मप्र शासन
जन्म – 25 मार्च 1965 उज्जैन
शिक्षा – बीएससी, एलएलबी, एमबीए, पीएचडी (राजनैतिक शास्त्र)
तीसरी बार उज्जैन दक्षिण विधान सभा से लगातार निर्वाचित।
पूर्व दायित्व: केबिनेट मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, जुलाई 2020 से। उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में देश में पहली बार मप्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सफल क्रियान्वयन, 54 नए महाविद्यालय खोले।

सन् 2004-2010 में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा)।

सन् 2011-2013 में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, भोपाल के अध्यक्ष (केबिनेट मंत्री दर्जा)।

भा.ज.पा. की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य. सन् 2013-2016 में भा.ज.पा. के अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के सह-संयोजक।

डॉ यादव को उज्जैन के समग्र विकास के लिए अप्रवासी भारतीय संगठन शिकागो (अमेरिका) द्वारा महात्मा गांधी पुरस्कार तथा इस्कॉन इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें मध्यप्रदेश में पर्यटन के निरंतर विकास के लिए वर्ष 2011-2012 एवं 2012-2013 में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किया गया। डॉ. यादव वर्ष 2013 में चौदहवीं विधान सभा, वर्ष 2018 में दूसरी बार पन्द्रहवी विधान सभा सदस्य निर्वाचित हुए। वे दिनांक 2 जुलाई, 2020 को केबिनेट मंत्री बने। डॉ. यादव वर्ष 2023 में सोलहवी विधानसभा के लिए तीसरी बार सदस्य निर्वाचित हुए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामय उपस्थिति में डॉ. यादव ने 13 दिसंबर 2023 को भोपाल में प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।

छात्र राजनीति – अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में प्रदेश के विभिन्न पदों पर रहे, राष्ट्रीय महामंत्री के पद के दायित्वों का निर्वहन किया। माधव विज्ञान महाविद्यालय में वर्ष 1982 में डॉ. यादव छात्र संघ के संयुक्त सचिव तथा 1984 में छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

सामाजिक क्षेत्र – डॉ. यादव वर्ष 2006 में भारत स्काउट एवं गाइड के जिलाध्यक्ष, मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष, वर्ष 2007 में अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष, वर्ष 1992, 2004 एवं 2016 सिंहस्थ उज्जैन केन्द्रीय समिति के सदस्य रहे।

वर्ष 2000-2003 तक विक्रम विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद (सिंडीकेट) सदस्य के दायित्व का निर्वहन किया तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, विकलांग पुर्नवास केन्द्रों में सक्रिय भागीदारी निभाई।

राजनैतिक क्षेत्र – वर्ष 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव एवं 1984 में अध्यक्ष बने। वर्ष 1984 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री एवं 1986 में विभाग प्रमुख रहे। वर्ष 1988 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री, वर्ष 1991-92 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री, वर्ष 1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खण्डकार्यवाह, सायं भाग नगरकार्यवाह, वर्ष 1996 में खण्डकार्यवाह और नगरकार्यवाह, वर्ष 1997 में भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य बने।

डॉ. यादव वर्ष 1998 में पश्चिम रेलवे बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य बनाये गये वे वर्ष 1999 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के उज्जैन संभाग प्रभारी, वर्ष 2000-2003 में भा.ज.पा. के नगर जिला महामंत्री, वर्ष 2004 में भा.ज.पा. की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य, वर्ष 2004 में सिंहस्थ, मध्यप्रदेश की केन्द्रीय समिति के सदस्य तथा वर्ष 2008 से भारत स्काउट एण्ड गाइड के जिलाध्यक्ष रहे।
धार्मिक क्षेत्र – विक्रमोत्सव-चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा आरंभ विक्रम संवत पर प्रारंभ होने वाले भारतीय नववर्ष मनाने की परंपरा, विगत 11 वर्षों से प्रतिवर्ष भव्य उत्सव शिप्रा तट पर आयोजित किया जाता है। धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए भारतीय संस्कृति, तीज, त्यौहार, रीति-रिवाज के पारंपरिक आयोजनों में शामिल होकर साहित्यिक, सांस्कृतिक, कला, विज्ञान, पुरातत्व, वेद ज्योतिष से जुडने हेतु जनमानस को अभिप्रेरित किया।
साहित्य: विक्रमादित्य शोधपीठ का गठन।
लेखन: उज्जैयनी का पर्यटन, विश्वकाल गणना के केंद्र डोंगला।
प्रकाशन: संकल्प शुभकृत, क्रोधी, विश्वावसु, पराभव आदि पुस्तकों का प्रकाशन।
विदेश यात्रा: अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, बैंकाक, थाईलैंड, चीन, नेपाल, बर्मा, भूटान, म्यांमार, अरब देशों की यात्रा की


फाइनल ट्रायल सफल, सुपर कॉरिडोर से एमआर-10 तक जल्द दौड़ेंगी ट्रेनें; CMRS ने जांची सुरक्षा

इंदौर | 19 मार्च, 2026

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो रेल का सपना अब हकीकत के बेहद करीब है। मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) जनक कुमार गर्ग की टीम ने 17 से 19 मार्च तक इंदौर मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर (फेज-2) का व्यापक निरीक्षण किया। इस टेस्ट के सफल होने के बाद अब केवल औपचारिक सर्टिफिकेट का इंतजार है, जिसके बाद कमर्शियल रन शुरू किया जा सकेगा।

निरीक्षण में क्या-क्या रहा खास?

CMRS की टीम ने स्टेशन के प्रबंधन से लेकर ट्रेन की तकनीकी बारीकियों तक, हर उस पहलू की जांच की जो यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है:

  • इमरजेंसी ब्रेक टेस्ट: ट्रायल के दौरान ट्रेन को निर्धारित गति पर चलाकर अचानक ‘इमरजेंसी ब्रेक’ लगाकर देखा गया कि सिस्टम कितनी सटीकता से काम कर रहा है।

  • स्टेशन मैनेजमेंट: गांधी नगर से लेकर सुपर कॉरिडोर के स्टेशनों पर एस्केलेटर, लिफ्ट, टिकट काउंटर (AFC गेट्स) और यात्री सुविधाओं का बारीकी से मुआयना किया गया।

  • सिग्नलिंग और ट्रैक: ‘कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल’ (CBTC) सिस्टम की जांच की गई, जो दो ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखता है।

  • सुरक्षा और बचाव: स्टेशनों पर फायर फाइटिंग सिस्टम, आपातकालीन निकास और सीसीटीवी कंट्रोल रूम की वर्किंग को परखा गया।

इन स्टेशनों के बीच शुरू होगी सेवा

दूसरे फेज के तहत मेट्रो सेवा मुख्य रूप से सुपर कॉरिडोर के हिस्से को कवर करेगी। इसमें गांधी नगर डिपो से लेकर एमआर-10 (MR-10) तक के स्टेशन शामिल हैं। यह रूट शहर के आईटी हब और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अगला कदम: कमर्शियल रन का इंतजार

मेट्रो कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार:

  1. CMRS अगले कुछ दिनों में अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपेंगे।

  2. रिपोर्ट में यदि कोई छोटे-मोटे सुधार बताए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत पूरा किया जाएगा।

  3. उम्मीद जताई जा रही है कि अप्रैल 2026 के पहले या दूसरे सप्ताह में मुख्यमंत्री इस रूट का औपचारिक उद्घाटन कर सकते हैं।

यात्रियों के लिए क्या होगा खास?

इंदौर मेट्रो की ट्रेनें पूरी तरह से ड्राइवरलेस तकनीक (GoA4) से लैस हैं, हालांकि शुरुआती दौर में सुरक्षा के लिए अटेंडेंट मौजूद रहेंगे। स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए डिजिटल पेमेंट और स्मार्ट कार्ड की व्यवस्था पहले ही इंस्टॉल की जा चुकी है।


भोपाल में जलसा-ए-शहादत कार्यक्रम: अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद के नारे, ट्रंप के पोस्टर कुचले गए

भोपाल | 07 मार्च 2026

भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र स्थित बिस्मिल्लाह कॉलोनी की गरीब नवाज मस्जिद में शुक्रवार देर रात ईरान के सुप्रीम लीडर रहबर-ए-मोअज्जम आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई की याद में जलसा-ए-शहादत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

लंबे समय से सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कार्यक्रम के दौरान ही कुछ लोग अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर जमीन पर रखकर पैरों से कुचलते नजर आए। साथ ही सभा में मौजूद लोगों ने “इजराइल मुर्दाबाद” और “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाए।

मौलाना ने की आपत्तिजनक टिप्पणी

कार्यक्रम में मौलाना रजी-उल-हसन हैदरी ने मंच से कहा, “आज दुनिया में जालिम ताकतें मजलूमों का खून बहा रही हैं। चाहे इजराइल हो या अमेरिका, उनके हाथ मजलूमों और मासूमों के खून से रंगे हुए हैं। अल्लाह उन्हें गैरत दे।”
उन्होंने भाषण के दौरान ट्रंप पर आपत्तिजनक टिप्पणी भी की। इस पर सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार नारेबाजी की।

पुलिस और प्रशासन की तैयारी

स्थानीय पुलिस ने कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त जवान तैनात किए। कार्यक्रम में बड़ी भीड़ के बावजूद किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस ने कार्यक्रम स्थल और आसपास के मार्गों पर नजर रखी।

विवाद और सामाजिक प्रभाव

कार्यक्रम के दौरान की गई पोस्टर कुचलने और नारेबाजी की घटनाओं ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को फिर हवा दी है। स्थानीय प्रशासन ने मामले पर सतर्क रहने की बात कही है।

कार्यक्रम के आयोजकों का कहना है कि यह जलसा-ए-शहादत ईरान के नेतृत्व और उनके शहादतों को याद करने के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन मौलाना के भाषण और नारेबाजी के कारण यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में सुर्खियों में आ गया है।

इस घटना ने भोपाल में धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को भी उजागर कर दिया है।

 


इंदौर में ट्रैफिक निगरानी का नया तरीका: हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन से चौराहों पर सख्ती, 111 चालान

इंदौर  |23 फरवरी 2026

इंदौर में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अब आसमान से नजर रखी जा रही है। मध्य प्रदेश पुलिस ने शहर के व्यस्त चौराहों और बाजार क्षेत्रों में हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन के जरिए निगरानी शुरू कर दी है। इस डिजिटल पेट्रोलिंग सिस्टम के तहत अब तक 111 वाहन चालकों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जिनमें सिग्नल तोड़ना, लेफ्ट टर्न बाधित करना और सड़क जाम करने जैसे उल्लंघन शामिल हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन तकनीक से निगरानी करने का उद्देश्य ट्रैफिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना है। ये ड्रोन शहर के अलग-अलग चौराहों पर उड़ाए जाते हैं और लाइव वीडियो कंट्रोल रूम तक पहुंचाते हैं। कंट्रोल रूम में लगी बड़ी एलईडी स्क्रीन पर फुटेज लगातार मॉनिटर की जाती है, जिससे संदिग्ध गतिविधि तुरंत पकड़ी जा सके।

ड्रोन निगरानी के दौरान दो टीमें एक साथ काम करती हैं—पहली टीम कंट्रोल रूम में बैठकर लाइव फुटेज देखती है, जबकि दूसरी टीम मौके पर मौजूद रहती है। जैसे ही कंट्रोल रूम को किसी वाहन चालक द्वारा नियम तोड़ने की जानकारी मिलती है, वायरलेस सेट के जरिए फील्ड टीम को सूचना दी जाती है और मौके पर ही वाहन रोककर कार्रवाई कर दी जाती है।

अधिकारियों का कहना है कि हाई-रेजोल्यूशन कैमरों की वजह से ड्रोन फुटेज बेहद स्पष्ट होती है, जिससे नंबर प्लेट और वाहन की गतिविधियां साफ दिखाई देती हैं। पुलिस का मानना है कि इस तकनीक से न केवल ट्रैफिक उल्लंघन पर अंकुश लगेगा बल्कि लोगों में नियमों के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में शहर के और इलाकों में भी ड्रोन निगरानी का दायरा बढ़ाया जा सकता है।


आज से शुरू MP विधानसभा का बजट सत्र: राज्यपाल के अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों का होगा लेखा-जोखा

भोपाल |16 फरवरी 2026

मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है, जिसकी शुरुआत पारंपरिक रूप से वंदे मातरम् के गायन से होगी। इसके बाद राज्यपाल मंगू भाई पटेल सदन को संबोधित करेंगे। अपने अभिभाषण में राज्यपाल सरकार की विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और पिछले एक वर्ष में हुए प्रशासनिक व आर्थिक बदलावों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करेंगे।

राज्यपाल अपने संबोधन में वर्ष 2023 के संकल्प पत्र में किए गए वादों की प्रगति रिपोर्ट भी रखेंगे और बताएंगे कि सरकार ने किन योजनाओं को जमीन पर उतारा तथा आने वाले समय के लिए क्या लक्ष्य तय किए गए हैं। यह अभिभाषण सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं का आधिकारिक दस्तावेज माना जाता है, जिस पर आगे सदन में चर्चा भी होगी।

अभिभाषण के बाद सदन में दिवंगत नेताओं और प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य अपने विचार रखेंगे। इसके साथ ही सत्र की औपचारिक कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

6 मार्च तक चलेगा सत्र

बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक आयोजित होगा। पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण और उस पर कृतज्ञता प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा। सत्र के लिए विधायकों ने व्यापक तैयारी की है—विधानसभा सचिवालय को कुल 3478 प्रश्नों की सूचनाएं मिली हैं। इसके अलावा 236 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, 10 स्थगन प्रस्ताव और 41 अशासकीय संकल्प पेश किए जाएंगे। शून्यकाल के दौरान ही 83 मुद्दे उठाए जाने की सूची तैयार है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह सत्र कई अहम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस का मंच बन सकता है, क्योंकि बजट, विकास योजनाओं, रोजगार, कृषि और सामाजिक योजनाओं जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

इस प्रकार मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक दिशा तय करने वाला यह बजट सत्र राज्य की आगामी नीतियों और वित्तीय प्राथमिकताओं की रूपरेखा स्पष्ट करेगा।

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एमपी में कल से शुरू होंगी 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं, 16 लाख से अधिक विद्यार्थी होंगे शामिल

भोपाल |09 फरवरी 2026

3856 परीक्षा केंद्रों पर ‘तीसरी आंख’ की निगरानी, नकल पर लगेगा सख्त पहरा

मध्य प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) द्वारा आयोजित कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं कल से शुरू होने जा रही हैं। इन परीक्षाओं में प्रदेश भर से करीब 16 लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल होंगे। परीक्षाओं के सफल और निष्पक्ष आयोजन के लिए राज्यभर में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।

बोर्ड परीक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक एक ही पाली में आयोजित की जाएंगी। विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पहले पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सुरक्षा जांच और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी की जा सकें।

नकल रोकने के लिए सख्त इंतजाम

बोर्ड परीक्षाओं में नकल पर रोक लगाने के लिए इस बार कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी, जिसे ‘तीसरी आंख’ का पहरा कहा जा रहा है। इसके अलावा संवेदनशील और अति-संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

परीक्षा के दौरान फ्लाइंग स्क्वॉड लगातार केंद्रों का निरीक्षण करेंगे। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

प्रश्न-पत्रों की सुरक्षा में भी विशेष व्यवस्था

प्रश्न-पत्रों की सुरक्षा को लेकर भी बोर्ड ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। प्रश्न-पत्रों को थानों से परीक्षा केंद्र तक ले जाने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाएगी। इससे पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे।

प्रशासन और पुलिस अलर्ट

परीक्षा अवधि के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में रहेगा। परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू रहेगी और अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक रहेगी।

छात्रों के लिए दिशा-निर्देश

बोर्ड ने छात्रों को निर्देश दिए हैं कि वे—

समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचें

प्रवेश-पत्र और पहचान पत्र साथ रखें

मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट साथ न लाएं

बोर्ड अधिकारियों ने छात्रों से शांतिपूर्वक और ईमानदारी से परीक्षा देने की अपील की है और कहा है कि सभी व्यवस्थाएं छात्रों की सुविधा और निष्पक्ष परीक्षा के उद्देश्य से की गई हैं।

एक कक्षा का दृश्य जहाँ नीली और सफेद वर्दी पहने स्कूली छात्र और छात्राएं अपनी डेस्क पर बैठकर परीक्षा दे रहे हैं। छात्र पूरी एकाग्रता के साथ कागज पर लिख रहे हैं।



भोपाल | 12 जनवरी, 2026

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज कई बड़े घटनाक्रम एक साथ देखने को मिले हैं। एक तरफ जहां प्रशासन ने साल 2026 के लिए छुट्टियों का कैलेंडर जारी किया है, वहीं दूसरी ओर गोमांस मामले और राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल गरमा दिया है।

1. भोपाल के लिए 4 स्थानीय अवकाश घोषित

मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने वर्ष 2026 के लिए भोपाल शहर के लिए 4 स्थानीय अवकाश (Local Holidays) की घोषणा की है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ये छुट्टियाँ निम्नलिखित अवसरों पर रहेंगी:

  • 14 जनवरी (बुधवार): मकर संक्रांति

  • 25 सितंबर (शुक्रवार): अनंत चतुर्दशी

  • 19 अक्टूबर (सोमवार): महानवमी (दशहरा के एक दिन पहले)

  • 03 दिसंबर (बुधवार): भोपाल गैस त्रासदी स्मृति दिवस

2. गोमांस मामला: “मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई होगी”

भोपाल में पिछले दिनों एक ट्रक से जब्त किए गए भारी मात्रा में मांस (करीब 26 टन) की लैब रिपोर्ट आने के बाद तनाव बढ़ गया है। रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि होने के बाद प्रदेश के गृह मंत्री और संबंधित मंत्रियों ने कड़ा रुख अपनाया है।

  • मंत्री का बयान: सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ ‘मिसाल पेश करने वाली’ कानूनी और बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी है।

  • अब तक की कार्रवाई: भोपाल नगर निगम ने संबंधित स्लॉटर हाउस (वधशाला) को पहले ही सील कर दिया है और कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

3. सज्जन सिंह वर्मा का CM मोहन यादव पर तंज

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने एक बार फिर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर तीखा हमला बोला है।

  • तंज का विषय: कानून-व्यवस्था और हालिया घटनाओं को लेकर सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि “मुख्यमंत्री केवल घोषणाओं के मास्टर हैं, जमीन पर स्थिति नियंत्रण से बाहर है।”

  • उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार केवल धर्म की राजनीति में उलझी है, जबकि जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है।

4. अन्य महत्वपूर्ण अपडेट्स

  • ठंड का अलर्ट: भोपाल सहित पूरे प्रदेश में शीतलहर का प्रकोप जारी है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

  • किसान कल्याण: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आज ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ की औपचारिक शुरुआत की घोषणा की है, जिसके तहत किसानों को विशेष सुविधाएं दी जाएंगी।


देशभर में चर्चा में आया भोपाल का 90 डिग्री वाला रेलवे ओवर ब्रिज, उठ रहे डिजाइन पर सवाल

राजधानी भोपाल में 18 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुए ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज उद्घाटन से पहले ही देश भर में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। चर्चा ब्रिज के 90 डिग्री मोड़ की हो रही है, जो भविष्य में हादसों का बड़ा केंद्र बन सकता है। इसका सेप एल आकर का दिया गया है। बतादें कि इस ब्रिज का शहर की बड़ी आबादी को लगभग 10 साल से इंतजार था। इसका निर्माण कार्य 2023 में शुरू हुआ तो अब बन कर तैयार हो गया है। लेकिन लोगों के बीच इसके बनने की खुशी के बजाए चिंता दिखा ई देने लगी।

नहीं था कोई और विकल्प
अधिकारियों का तर्क है कि जमीन की कमी के चलते और पास में मेट्रो रेल स्टेशन की मौजूदगी के चलते उनके पास ब्रिज निर्माण का कोई और विकल्प नहीं था। वहीं, मामला सुर्ख़ियों में आने पर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह भी इस मामले में सक्रीय हो गए हैं। उन्होंने जानकारी दी की भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधीकरण की टीम ने निरीक्षण कर लिया है। जल्द ही इस पर निर्णय लिया।
ओवरब्रिज के डिजाइन पर सवाल
भोपाल को ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने उद्देश्य से बनाए गए ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज का डिजाइन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बनकर तैयार हुए इस ब्रिज की टॉप हाईट पर 90 डिग्री के खतरनाक टर्न दे दिया है, जिसने लोगों को असमंजस में डाल दिया है। लोग इस ब्रिज को भविष्य में भोपाल में होने वाले हादसों का सबसे बड़ा केंद्र बता रहे हैं तो वहीं कुछ लोग इसे पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट की ‘टेकनोलॉजिया’ कहकर मीम बना रहे हैं।
करीब तीन लाख लोगों को होगा फायदा
मार्च 2023 में इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ। इससे पहले सरकार का कहना था कि, ब्रिज शुरु होने से ऐशबाग इलाके के लोगों को न तो रेलवे क्रॉसिंग पर इंतजार करना पड़ेगा, न ही लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। ये भी दावा था कि, इससे हर दिन करीब तीन लाख लोग फायदा लेंगे। अधिकारियों ने बताया कि 18 करोड़ रुपये की लागत से बना यह ओवरब्रिज 648 मीटर लंबा और 8.5 मीटर चौड़ा है। हालांकि, इसके 90 डिग्री के घुमाव के कारण, सोशल मीडिया के साथ-साथ स्थानीय लोगों द्वारा भी इसके डिजाइन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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