Z+ कवर खत्म होने के बाद लालू-राबड़ी का ऐलान, सुरक्षा को लेकर अपनाया नया रास्ता
पटना | 6 जून 2026
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा हटाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सुरक्षा व्यवस्था में हुए इस बदलाव के बीच लालू-राबड़ी परिवार ने अपने आवास और व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार ने सरकारी सुरक्षा में कमी के बाद निजी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया है।
जानकारी के अनुसार, लालू प्रसाद यादव के पटना स्थित आवास पर अतिरिक्त निजी सुरक्षा गार्ड तैनात किए जा रहे हैं। इसके साथ ही परिसर में आने-जाने वाले लोगों की निगरानी बढ़ाने, प्रवेश व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने और सुरक्षा संबंधी अन्य उपायों पर भी काम शुरू कर दिया गया है। परिवार का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े होने और लगातार राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहने के कारण सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है।
सुरक्षा में बदलाव के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
Z+ सुरक्षा देश की सबसे उच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक मानी जाती है। इस श्रेणी में सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों को विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बदलाव के बाद बिहार की राजनीति में इसे लेकर बहस शुरू हो गई है।
RJD नेताओं का कहना है कि लालू प्रसाद यादव लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं और उनकी लोकप्रियता तथा राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी जानी चाहिए। पार्टी के कई नेताओं ने सुरक्षा में कटौती पर चिंता जताई है और इसे गंभीर विषय बताया है।
प्रशासन का पक्ष
दूसरी ओर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को दी जाने वाली सुरक्षा समय-समय पर खतरे के आकलन और सुरक्षा समीक्षा के आधार पर तय की जाती है। सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होता है और यह विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सभी निर्णय निर्धारित मानकों और सुरक्षा मूल्यांकन के अनुसार लिए जाते हैं। इसलिए किसी भी बदलाव को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय सुरक्षा प्रक्रिया के हिस्से के रूप में समझा जाना चाहिए।
समर्थकों और कार्यकर्ताओं में चिंता
सुरक्षा में बदलाव की खबर सामने आने के बाद RJD कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी चर्चा का माहौल है। कई समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लालू प्रसाद यादव की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि निजी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का फैसला परिवार की सतर्कता को दर्शाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में चुनावी और राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती रहती हैं। ऐसे में बड़े नेताओं की सुरक्षा हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती है। लालू-राबड़ी परिवार द्वारा निजी सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
आवास की निगरानी व्यवस्था होगी मजबूत
सूत्रों के अनुसार, निजी सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने के अलावा आवास परिसर में निगरानी व्यवस्था को भी और मजबूत किया जा सकता है। आने वाले दिनों में सुरक्षा उपकरणों और निगरानी तंत्र को अपडेट करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित जोखिम से बचा जा सके।
आगे की रणनीति पर नजर
फिलहाल लालू-राबड़ी परिवार ने सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने का फैसला किया है। परिवार और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच इस विषय पर लगातार चर्चा जारी है। आने वाले समय में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर और भी कदम उठाए जा सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक ओर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लालू-राबड़ी परिवार का निजी सुरक्षा बढ़ाने का फैसला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

TMC में बड़ा फेरबदल, Kalyan Banerjee फिर बने लोकसभा के Chief Whip
14 मई 2026
इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश, सिक्किम में शुरू हुए ₹4000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स
28 अप्रैल, 2026
गंगटोक | 28 अप्रैल 2026
सिक्किम के 50वें राज्य स्थापना दिवस (Golden Jubilee) के खास मौके पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राज्य को बड़ी विकास सौगात दी। उन्होंने ₹4000 करोड़ से अधिक की लागत वाली कई अहम परियोजनाओं की शुरुआत की, जिससे सिक्किम के साथ-साथ पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को बड़ा विकास बूस्ट मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री का यह दो दिवसीय दौरा (27–28 अप्रैल) केवल औपचारिक नहीं रहा, बल्कि इसे क्षेत्र के आर्थिक और रणनीतिक महत्व को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
🔹 मल्टी-सेक्टर डेवलपमेंट का बड़ा पैकेज
सरकार ने करीब ₹4018 करोड़ की लागत से लगभग 30 प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। ये प्रोजेक्ट्स स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, ऊर्जा, शहरी विकास, पर्यटन और कृषि जैसे कई अहम क्षेत्रों से जुड़े हैं।
इस व्यापक योजना का उद्देश्य सिक्किम में संतुलित और तेज विकास सुनिश्चित करना है।
🔹 स्वास्थ्य सुविधाओं को नई मजबूती
राज्य में हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत करने के लिए नई परियोजनाएं शुरू की गईं।
• नामची में 100 बेड का आयुर्वेद अस्पताल
• गंगटोक में 30 बेड का सोवा-रिग्पा चिकित्सा केंद्र
इन पहलों से पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को एक साथ बढ़ावा मिलेगा।
🔹 शिक्षा में डिजिटल और आधुनिक पहल
शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े सुधारों की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
• नए रेजिडेंशियल स्कूलों की स्थापना
• डिग्री और प्रोफेशनल कॉलेज खोलने की योजना
• 160 स्कूलों में IT-आधारित लर्निंग सिस्टम लागू
इससे छात्रों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
🔹 इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास
राज्य में कनेक्टिविटी और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए।
• सड़कों और पुलों का निर्माण व सुधार
• जन सेवा सचिवालय का विकास
• सिविल सर्विस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट की स्थापना
• शहरी गरीबों के लिए आवास योजनाएं
इनसे जीवन स्तर और प्रशासनिक दक्षता दोनों में सुधार होगा।
🔹 पर्यटन और पर्यावरण पर फोकस
सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता को ध्यान में रखते हुए ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है।
• ईको-पिलग्रिमेज कॉम्प्लेक्स का निर्माण
• 1000+ होमस्टे विकसित करने की योजना
• पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रोजेक्ट्स
इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
🔹 खास और आकर्षक प्रोजेक्ट्स
कुछ प्रोजेक्ट्स अपनी खासियत के कारण चर्चा में हैं:
• ऑर्किड एक्सपीरियंस सेंटर
• स्टील आर्च ब्रिज
• सांस्कृतिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं
ये परियोजनाएं विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास हैं।
🔹 ‘अष्टलक्ष्मी’ विजन और नई रणनीति
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पूर्वोत्तर राज्यों को “अष्टलक्ष्मी” बताते हुए इसे देश के विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
सरकार अब “Act East Policy” से आगे बढ़कर “Act Fast” रणनीति पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य तेज विकास और बेहतर कनेक्टिविटी है।
🔹 दीर्घकालिक असर क्या होगा?
इन परियोजनाओं का मकसद है:
• समावेशी विकास को बढ़ावा देना
• रोजगार के अवसर पैदा करना
• इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना
• पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सिक्किम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की आर्थिक दिशा बदल सकती है।
🔹 निष्कर्ष
सिक्किम में ₹4000 करोड़ से अधिक की इन परियोजनाओं की शुरुआत केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत को एक नए ग्रोथ हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा संकेत है।
यह पहल आने वाले समय में न सिर्फ क्षेत्रीय विकास को गति देगी, बल्कि देश की आर्थिक एकता को भी मजबूत करेगी।
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असम में सियासी मुकाबला तेज: पीएम मोदी का NDA की ‘हैट्रिक’ का दावा, राहुल गांधी का युवाओं को ₹2000 सहायता का वादा
नई दिल्ली/गुवाहाटी। 06 अप्रैल 2026
सम विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम दौरे के दौरान नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) की जीत का दावा करते हुए कहा कि राज्य में इस बार “हैट्रिक” लगेगी। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुडुचेरी में युवाओं के लिए नई आर्थिक सहायता योजना का ऐलान कर सियासी बहस को और तेज कर दिया है।
बरपेटा में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि असम की जनता NDA पर लगातार भरोसा जता रही है और इस बार भी जीत तय है। उन्होंने कहा, “असम में NDA की हैट्रिक लगेगी और कांग्रेस की हार की सेंचुरी पूरी होगी।” पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के पास विकास का कोई स्पष्ट विजन नहीं है और न ही भविष्य के लिए ठोस योजना है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जो वादे करती है, उन्हें जमीन पर उतारकर दिखाती है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने विकास, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं को अपनी सरकार की उपलब्धियां बताया।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुडुचेरी में एक कार्यक्रम के दौरान युवाओं को साधने की कोशिश की। उन्होंने घोषणा की कि अगर उनकी सरकार बनती है, तो युवाओं को हर महीने ₹2000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी। राहुल गांधी ने कहा कि यह योजना युवाओं को आर्थिक सहारा देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक तरफ जहां BJP विकास और स्थिरता के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस युवाओं और आर्थिक सहायता जैसे मुद्दों पर फोकस कर रही है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और वादों की राजनीति से चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है।
असम में चुनावी रैलियों और प्रचार अभियान के तेज होने के साथ ही आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और भी तेज होने की संभावना है। अब यह देखना अहम होगा कि जनता किसके दावों और वादों पर भरोसा जताती है।
गुवाहाटी/नई दिल्ली | 20 मार्च, 2026
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी इस नई सूची में पार्टी ने अनुभवी चेहरों और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। 126 सीटों वाली असम विधानसभा के लिए हो रहे इस चुनाव में कांग्रेस विपक्षी गठबंधन (Asom Sonmilito Morcha) का नेतृत्व कर रही है।
तीसरी लिस्ट के प्रमुख नाम और सीटें
पार्टी ने इस लिस्ट में अपने कई दिग्गज और मौजूदा विधायकों (MLAs) को फिर से मौका दिया है:
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जाकिर हुसैन सिकदर: पाकाबेतबारी (Pakabetbari) से चुनाव लड़ेंगे।
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प्रदीप सरकार: अभयापुरी (Abhayapuri) सीट से उम्मीदवार बनाए गए हैं।
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माणिक चंद्र ब्रह्मा: कोकराझार-ST (Kokrajhar) से ताल ठोकेंगे।
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बेबी बेगम: धुबरी (Dhubri) से चुनाव मैदान में होंगी।
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रोजलीना तिर्की: खुमटाई (Khumtai) से प्रत्याशी बनाई गई हैं।
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डॉ. आसिफ मोहम्मद नज़र: लाहरीघाट (Laharighat) से फिर से चुनाव लड़ेंगे।
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आफताब उद्दीन मुल्ला: जालेश्वर (Jaleshwar) सीट से चुनावी मैदान में होंगे।
अन्य महत्वपूर्ण उम्मीदवार
| निर्वाचन क्षेत्र | उम्मीदवार का नाम |
| नगांव-बताद्रवा | डॉ. दुर्लभ चमुआ |
| लखीमपुर | घना बुरागोहेन |
| रंगानदी | जयंत खाउंड (पूर्व AGP नेता) |
| चेंगा | अब्दुर रहीम अहमद |
| होराघाट (ST) | संजीव तेरोन |
प्रद्युत बोरदोलोई फैक्टर और बगावत
तीसरी लिस्ट जारी होने से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा, जब पूर्व सांसद और दिग्गज नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया।
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विवाद की वजह: बोरदोलोई लाहरीघाट सीट से डॉ. आसिफ मोहम्मद नज़र को टिकट दिए जाने का विरोध कर रहे थे।
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बीजेपी का दांव: बीजेपी ने बोरदोलोई को तुरंत दिसपुर विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इसके अलावा, बोरदोलोई के बेटे प्रतीक बोरदोलोई ने भी मार्गेरिटा सीट से अपना नामांकन वापस ले लिया है।
चुनावी कार्यक्रम एक नजर में
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कुल सीटें: 126
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मतदान की तारीख: 9 अप्रैल, 2026 (एक ही चरण में)
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नतीजे: 4 मई, 2026
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गठबंधन: कांग्रेस ने करीब 15 सीटें अपने सहयोगी दलों (AJP, CPI-M, APHLC) के लिए छोड़ी हैं।
राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने 6 उम्मीदवारों की घोषणा की, सिंघवी-फूलो देवी को फिर मौका; तमिलनाडु से एम. क्रिस्टोफर तिलक मैदान में
नई दिल्ली | 05 मार्च 2026
कांग्रेस ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए गुरुवार को छह उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी। पार्टी ने कुछ मौजूदा सांसदों पर दोबारा भरोसा जताया है, जबकि कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया है।
सिंघवी और फूलो देवी को फिर से उम्मीदवार
पार्टी ने तेलंगाना से वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी को दोबारा उम्मीदवार बनाया है। सिंघवी वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और पार्टी के प्रमुख विधि विशेषज्ञों में गिने जाते हैं।
वहीं छत्तीसगढ़ से फूलो देवी नेताम को फिर से राज्यसभा का टिकट दिया गया है। वह भी मौजूदा सांसद हैं और आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करती रही हैं।
हरियाणा और हिमाचल से नए चेहरे
हरियाणा से कांग्रेस ने करमवीर सिंह बौद्ध को उम्मीदवार बनाया है। वहीं हिमाचल प्रदेश से अनुराग शर्मा को मैदान में उतारा गया है। अनुराग शर्मा कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं और उन्हें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का करीबी माना जाता है।
तेलंगाना की दूसरी सीट पर वीम नरेंद्र रेड्डी
तेलंगाना की दूसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने वीम नरेंद्र रेड्डी को उम्मीदवार घोषित किया है। उन्हें मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का करीबी बताया जाता है।
तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस तालमेल
तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट दी है। इस सीट से कांग्रेस ने एम. क्रिस्टोफर तिलक को उम्मीदवार बनाया है। यह गठबंधन राज्य की राजनीति में दोनों दलों के बीच मजबूत तालमेल का संकेत माना जा रहा है।
भाजपा ने भी घोषित किए उम्मीदवार
इधर भारतीय जनता पार्टी भी दो चरणों में 13 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों में सक्रियता बढ़ गई है और विभिन्न राज्यों में समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने अनुभवी और संगठनात्मक रूप से सक्रिय नेताओं को मौका देकर राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। अब नजर नामांकन प्रक्रिया और चुनावी गणित पर रहेगी, जिससे राज्यसभा की तस्वीर साफ होगी।
BSP का ऐलान: यूपी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी पार्टी
18 फरवरी 2026
मायावती ने स्पष्ट किया है कि BSP (बहुजन समाज पार्टी) आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बिना किसी गठबंधन के अपने दम पर लड़ेगी। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख ने कहा कि गठबंधन को लेकर चल रही सभी अटकलें भ्रामक और निराधार हैं तथा पार्टी की रणनीति पूरी तरह स्वतंत्र चुनाव लड़ने की है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जनता के बीच पार्टी की नीतियों को पहुंचाने का आह्वान किया। मायावती ने भरोसा जताया कि बसपा का पारंपरिक वोट बैंक और जमीनी नेटवर्क उसे चुनाव में मजबूत स्थिति दिलाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा के इस फैसले से राज्य की चुनावी रणनीतियों और संभावित गठबंधन समीकरणों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि अब मुकाबला और अधिक बहुकोणीय होने की संभावना है।
निशिकांत दुबे के बयान से संसद में सियासी हंगामा, विपक्ष का विरोध—लोकसभा रिकॉर्ड से हटे आपत्तिजनक शब्द
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता व अन्य विधायकों ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायकों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया है उसमें उठाए गए मुद्दों पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए। पिछले पांच महीने से न कैबिनेट की बैठक हुई है और न विधानसभा का सत्र नहीं बुलाया गया है। अविलंब विशेष सत्र बुलाने की जरूरत है।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता व अन्य विधायकों ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायकों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया है उसमें उठाए गए मुद्दों पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए। पिछले पांच महीने से न कैबिनेट की बैठक हुई है और न विधानसभा का सत्र नहीं बुलाया गया है। अविलंब विशेष सत्र बुलाने की जरूरत है।
प्रेसवार्ता में विजेंद्र गुप्ता ने कहा, “मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पांच माह से जेल में हैं। उन्होंने त्यागपत्र देने की जगह जेल से सरकार चलाने की घोषणा की है। सरकार को बताना चाहिए कि मुख्यमंत्री ने जेल से कितने निर्णय लिए हैं। इस दौरान कैबिनेट की हुई बैठक और उसमें लिए गए निर्णय की जानकारी देनी चाहिए।”
खराब हो रही नगर निगम की वित्तीय स्थिति
विजेंद्र ने कहा, “मुख्यमंत्री राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं। इसकी बैठक नहीं होने का कारण भी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन नहीं कर सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है। नगर निगम की वित्तीय स्थिति खराब हो रही है। आयोग नगर निगम में स्थायी समिति का गठन नहीं करने और पिछले सात वर्षों से कैग की 11 रिपोर्ट का कारण सरकार को बताना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “15 मार्च 2024 को मुख्य सचिव द्वारा जल मंत्री को जल बोर्ड में वित्तीय अनियमितता की रिपोर्ट सौंपी थी जिसे उन्होंने सदन में पेश नहीं किया। जल बोर्ड ने दिल्ली सरकार को 73 हजार करोड़ रुपये का लोन वापस करने से मना कर दिया है। सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू नहीं करने, राज्य सरकार से वित्त पोषित 12 कॉलेजों को फंड नहीं देने के बारे में भी प्रश्न पूछे।”
खेल विश्वविद्यालय पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग
उन्होंने दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विकास विश्वविद्यालय, शिक्षक विश्वविद्यालय व खेल विश्वविद्यालय पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। सात आइसीयू अस्पताल व पाली क्लीनिक बनाने के लिए के काम में देरी होने और इसकी लागत बढ़ने के कारण बताना चाहिए। उन्होंने झुग्गियों में नल से जल उपलब्ध कराने और जहां झुग्गी वहीं मकान योजना की स्थिति का विवरण भी मांगा।








