मुंबई | 14 सितंबर 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA द्वारा शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा। अमित शाह ने यह बात रविवार को मुंबई में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की उपलब्धियों को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही।
अमित शाह के इस बयान के बाद UCC एक बार फिर देश की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो गया है। केंद्र सरकार और BJP लंबे समय से समान नागरिक संहिता को अपने प्रमुख नीतिगत एजेंडे का हिस्सा बताते रहे हैं। अब 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित सभी राज्यों में इसे लागू करने की समयसीमा सामने रखे जाने से इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
अमित शाह ने क्या कहा?
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा कि कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि 21 BJP-NDA शासित राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू कर दिया जाएगा।
उनके बयान का सीधा संकेत यह है कि UCC को केवल कुछ राज्यों तक सीमित रखने के बजाय NDA शासन वाले सभी राज्यों में लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।
हालांकि, प्रत्येक राज्य में UCC लागू करने की प्रक्रिया संबंधित राज्य की विधायी और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।
क्या है समान नागरिक संहिता?
समान नागरिक संहिता यानी UCC का मतलब ऐसे समान नागरिक कानून से है, जो नागरिकों के व्यक्तिगत मामलों से जुड़े कुछ विषयों पर समान कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास करता है।
आमतौर पर इसके दायरे में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषयों की चर्चा होती है।
भारत में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए व्यक्तिगत कानूनों की अलग-अलग व्यवस्थाएं रही हैं। UCC का उद्देश्य इन व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता लाने की दिशा में काम करना है।
हालांकि, UCC की वास्तविक व्यवस्था और उसके प्रावधान उस कानून पर निर्भर करेंगे जिसे संबंधित राज्य लागू करता है।
किन राज्यों में पहले से लागू हो चुका है UCC?
UCC लागू करने की दिशा में कुछ राज्यों ने पहले ही कदम उठाए हैं। उत्तराखंड ने 2024 में UCC लागू किया था। इसके बाद गुजरात और असम ने भी 2026 में इस दिशा में कानून पारित किए। मध्य प्रदेश भी 2026 में UCC लागू करने वाला राज्य बना।
इससे साफ है कि UCC को लेकर राज्यों में अलग-अलग स्तर पर विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
अमित शाह ने अपने ताजा बयान में इन्हीं प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए NDA शासित सभी 21 राज्यों में इसे लागू करने का लक्ष्य रखा है।
2029 लोकसभा चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है यह समयसीमा?
भारत में अगला लोकसभा चुनाव 2029 में प्रस्तावित है। ऐसे में अमित शाह द्वारा UCC को 2029 से पहले सभी NDA शासित राज्यों में लागू करने की बात राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
UCC लंबे समय से BJP के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में रहा है। अब इसे 21 NDA शासित राज्यों में लागू करने का लक्ष्य बताकर पार्टी ने इस मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
इस घोषणा के बाद आने वाले महीनों में अलग-अलग राज्यों में UCC को लेकर विधायी प्रक्रिया, समितियों और राजनीतिक चर्चाओं पर नजर रहेगी।
UCC को लेकर राज्यों में क्या स्थिति है?
सभी NDA शासित राज्यों में UCC की स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ राज्यों में कानून लागू हो चुका है, जबकि कुछ राज्यों में कानून बनाने की प्रक्रिया अभी आगे बढ़ाई जानी है।
कई राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों, परंपराओं और अलग-अलग समुदायों से जुड़े प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कानून का प्रारूप तैयार करना एक महत्वपूर्ण चरण होगा।
इसलिए अमित शाह की घोषणा एक राजनीतिक और नीतिगत लक्ष्य के रूप में सामने आई है, जबकि प्रत्येक राज्य में वास्तविक क्रियान्वयन के लिए संबंधित विधायी प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होगा।
आदिवासी समुदायों को लेकर क्या स्थिति है?
UCC को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा आदिवासी समुदायों की पारंपरिक और प्रथागत व्यवस्थाओं से जुड़ा है।
UCC पर चल रही चर्चाओं में कई बार यह सवाल उठता रहा है कि विभिन्न जनजातीय समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्थाओं को किस तरह संरक्षित किया जाएगा।
कुछ मौजूदा UCC व्यवस्थाओं में आदिवासी समुदायों से संबंधित विशेष प्रावधानों या अपवादों की चर्चा हुई है। इसलिए देशभर में UCC लागू होने की स्थिति में अलग-अलग राज्यों की सामाजिक और संवैधानिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
शाह ने सरकार की अन्य उपलब्धियों का भी किया जिक्र
मुंबई में अमित शाह ने केवल UCC पर ही बात नहीं की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों के दौरान सरकार की कई उपलब्धियों का उल्लेख किया।
उन्होंने अनुच्छेद 370 में बदलाव, तीन तलाक की समाप्ति, आपराधिक कानूनों में सुधार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कदमों को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिनाया।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने देश में सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
तीन तलाक के बाद UCC पर जोर
अमित शाह ने अपने बयान में तीन तलाक के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तीन तलाक खत्म किए जाने से मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार मिले।
इसके साथ ही उन्होंने UCC को भी समान नागरिक अधिकारों और कानूनी एकरूपता से जोड़ते हुए इसे सरकार के प्रमुख एजेंडे के रूप में पेश किया।
राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत
UCC भारत में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है। इसके समर्थक इसे नागरिक कानूनों में समानता और एकरूपता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं, जबकि इसके आलोचक धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता तथा व्यक्तिगत कानूनों पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
अमित शाह की 2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की घोषणा के बाद यह बहस आने वाले समय में और तेज हो सकती है।
मध्य प्रदेश के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा
मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां 2026 में UCC लागू किए जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ऐसे में अमित शाह की घोषणा राज्य के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
अब फोकस उन राज्यों पर रहेगा जहां अभी UCC लागू नहीं हुआ है और जहां आने वाले समय में कानून बनाने या लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
2029 से पहले कितना बड़ा बदलाव संभव?
अगर NDA शासित सभी 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू किया जाता है, तो यह देश के व्यक्तिगत कानूनों के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होगा।
हालांकि, इसकी वास्तविक व्यापकता इस बात पर निर्भर करेगी कि अलग-अलग राज्यों में लागू किए जाने वाले कानूनों के प्रावधान कितने समान होते हैं और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।
अभी अमित शाह ने राजनीतिक स्तर पर समयसीमा को लेकर स्पष्ट लक्ष्य सामने रखा है। अब संबंधित राज्य सरकारों और विधानसभाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
खबर की मुख्य बातें
- बयान की तारीख: 14 सितंबर 2026
- मुख्य स्थान: मुंबई, महाराष्ट्र
- बयान देने वाले: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
- मुख्य मुद्दा: समान नागरिक संहिता यानी UCC
- लक्ष्य: 2029 लोकसभा चुनाव से पहले
- कुल NDA/BJP शासित राज्य: 21
- घोषणा: सभी 21 राज्यों में UCC लागू करने का भरोसा
- पहले से UCC लागू करने वाले राज्यों में: उत्तराखंड, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश
- मुख्य विषय: विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता
- राजनीतिक महत्व: UCC एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में
निष्कर्ष
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी 21 BJP-NDA शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने का लक्ष्य सामने रखा है। मुंबई में दिए गए उनके इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि UCC आने वाले वर्षों में NDA सरकारों के प्रमुख राजनीतिक और विधायी एजेंडे में बना रहेगा।
कुछ राज्यों में UCC लागू हो चुका है, जबकि अन्य राज्यों में इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। ऐसे में अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि NDA शासित राज्य किस गति से कानून तैयार करते हैं और स्थानीय सामाजिक एवं कानूनी परिस्थितियों के अनुरूप इसे किस तरह लागू किया जाता है।
2029 से पहले UCC लागू करने की यह घोषणा आने वाले विधानसभा सत्रों और राज्य स्तर की राजनीति में भी एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।

राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में FIR, SC वर्ग की भावनाएं आहत करने का आरोप; ‘शुद्धिकरण’ विवाद ने पकड़ा सियासी तूल
हल्द्वानी, उत्तराखंड | 31 अगस्त 2026।
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी में FIR दर्ज होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। यह मामला हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम और उस पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया से जुड़ा है।
हल्द्वानी कोतवाली में अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े अमित कुमार की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने शुद्धिकरण के मामले को जातिगत रंग देते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिससे अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुईं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, विवाद की शुरुआत हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की रैली के बाद हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद मैदान में कथित तौर पर सफाई और धार्मिक अनुष्ठान किए जाने की घटना सामने आई थी।
इस कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए गए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि खड़गे की दलित पहचान की वजह से कार्यक्रम स्थल का ‘शुद्धिकरण’ किया गया। दूसरी ओर, कार्यक्रम से जुड़े लोगों ने इसे अलग संदर्भ में बताया। इसी घटना ने बाद में राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
इस विवाद के सामने आने के बाद राहुल गांधी ने कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने इसे दलितों के अपमान और छुआछूत से जोड़ते हुए सवाल उठाए थे।
राहुल गांधी की ओर से इस घटना को लेकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और FIR की मांग भी की गई थी। उनके बयान के बाद यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में और ज्यादा चर्चा में आ गया।
अब राहुल गांधी के खिलाफ क्यों दर्ज हुई FIR?
अब इसी विवाद में नया मोड़ आया है। शिकायतकर्ता अमित कुमार ने पुलिस के सामने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने शुद्धिकरण कार्यक्रम को जातिगत रंग देकर अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके बयान से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की स्थिति पैदा हुई।
हालांकि, ये शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया में होगा।
किन धाराओं में मामला दर्ज हुआ?
रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 299 के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों, संबंधित बयानों और घटना से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी।
शिकायतकर्ता अमित कुमार कौन हैं?
शिकायतकर्ता अमित कुमार अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े बताए जा रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने हल्द्वानी कोतवाली में शिकायत देकर राहुल गांधी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई।
उनका दावा है कि वह रामलीला मैदान में हुए सफाई और धार्मिक अनुष्ठान से जुड़े कार्यक्रम में मौजूद थे। शिकायत में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी से उनके समुदाय की भावनाएं आहत हुईं।
रामलीला मैदान में क्या हुआ था?
यह पूरा विवाद कांग्रेस की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम से जुड़ा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद मैदान में सफाई और धार्मिक अनुष्ठान किया गया। इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे लेकर सवाल उठाए।
कांग्रेस की ओर से इसे खड़गे की दलित पहचान से जोड़कर देखा गया, जबकि कार्यक्रम से जुड़े पक्षों ने अपने अलग कारण बताए। इसी मतभेद ने मामले को राजनीतिक विवाद में बदल दिया।
कांग्रेस ने इसे दलित अपमान से जोड़ा
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि किसी दलित नेता की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल का ‘शुद्धिकरण’ किया जाना सामाजिक भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता को दर्शाता है।
राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बहस से जोड़ते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
अब कांग्रेस नेता के खिलाफ ही FIR
मामले में सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ यह है कि जिस विवाद में राहुल गांधी खुद कार्रवाई की मांग कर रहे थे, उसी घटनाक्रम से जुड़े बयान को लेकर अब उनके खिलाफ FIR दर्ज हो गई है।
इससे उत्तराखंड में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस इस मामले को राजनीतिक कार्रवाई के रूप में देख सकती है, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष इसे अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाओं से जुड़ा कानूनी मामला बता रहा है।
मामला राजनीतिक से कानूनी विवाद में बदला
शुरुआत में यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित था, लेकिन अब FIR दर्ज होने के बाद इसका कानूनी पहलू भी सामने आ गया है।
पुलिस अब यह जांच करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं और राहुल गांधी के कथित बयान का कानूनी संदर्भ क्या है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी।
उत्तराखंड की राजनीति में बढ़ सकती है गर्मी
राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने का असर उत्तराखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है। कांग्रेस पहले ही ‘शुद्धिकरण’ प्रकरण को लेकर भाजपा और उससे जुड़े संगठनों पर सवाल उठा रही थी।
अब राहुल गांधी के खिलाफ SC/ST एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज होने से दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
FIR का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं
कानूनी रूप से यह समझना जरूरी है कि FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। FIR के बाद पुलिस मामले की जांच करती है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होती है।
इस मामले में भी राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी शिकायत और FIR के स्तर पर हैं। इनकी पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
आगे क्या होगा?
अब पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। संबंधित बयान, कार्यक्रम से जुड़े तथ्य, उपलब्ध वीडियो या अन्य साक्ष्य और शिकायत में दिए गए दावों की जांच की जा सकती है।
जांच के बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई तय करेगी। वहीं राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है।
निष्कर्ष
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद अब राहुल गांधी के खिलाफ FIR तक पहुंच गया है।
30 अगस्त 2026 को सामने आई FIR और 31 अगस्त को आई विस्तृत रिपोर्टों के मुताबिक, हल्द्वानी कोतवाली में अमित कुमार की शिकायत पर राहुल गांधी के खिलाफ BNS की धारा 196 और 299 तथा SC/ST एक्ट की धारा 3(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि राहुल गांधी की टिप्पणी से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुईं।
अब इस मामले में पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, इस FIR के बाद उत्तराखंड में ‘शुद्धिकरण’ विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

BJP में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, नितिन नवीन की नई टीम में युवाओं और महिलाओं को मिल सकता है बड़ा रोल
नई दिल्ली, 17 अगस्त 2026।
भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई केंद्रीय टीम का ऐलान इसी सप्ताह होने की संभावना जताई जा रही है। करीब सात महीने पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब नितिन नवीन अपनी टीम के जरिए बीजेपी के अगले राजनीतिक रोडमैप को आकार देने की तैयारी में हैं।
पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, नई टीम में युवा और अनुभवी नेताओं का संतुलन देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही महिलाओं और युवा चेहरों को संगठन में पहले की तुलना में अधिक महत्व देने की तैयारी है। यह बदलाव 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
युवा चेहरों पर फोकस, Gen-Z को साधने की कोशिश
नितिन नवीन खुद अपेक्षाकृत युवा नेता हैं और उनकी नई टीम में भी युवा चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में युवाओं के बीच बढ़ी राजनीतिक सक्रियता और देशभर में सामने आए Gen-Z आंदोलनों को देखते हुए बीजेपी संगठन में नई पीढ़ी को शामिल करने पर जोर दे सकती है।
पार्टी की रणनीति यह बताई जा रही है कि युवा नेताओं को संगठन में आगे लाकर युवाओं की सोच, उनकी प्राथमिकताओं और बदलते राजनीतिक रुझानों को बेहतर तरीके से समझा जाए।
खास तौर पर उत्तर प्रदेश को लेकर युवा मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, यूपी में करीब 15 प्रतिशत मतदाता Gen-Z वर्ग से जुड़े हैं और चुनावी नतीजों पर उनका प्रभाव पड़ सकता है।
संगठन में 33 फीसदी महिलाओं की हिस्सेदारी
नितिन नवीन की नई टीम में महिलाओं को भी बड़ी हिस्सेदारी दिए जाने की तैयारी है। बीजेपी के संगठनात्मक प्रावधान के मुताबिक केंद्रीय पदाधिकारियों में 33 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व का लक्ष्य रखा गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 38 पदाधिकारियों की टीम में कम से कम 13 महिलाओं को शामिल किया जाना होगा। यानी नई टीम में महिला चेहरों की मौजूदगी एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर सामने आ सकती है।
नितिन नवीन इससे पहले भी पार्टी संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात कर चुके हैं। ऐसे में उनकी नई टीम में इस नीति का असर दिखाई देने की संभावना जताई जा रही है।
हर राज्य से संभावित नामों पर मंथन
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले सात महीनों के दौरान नितिन नवीन ने अलग-अलग राज्यों का दौरा किया और कार्यकर्ताओं तथा पार्टी नेताओं से मुलाकात की। इन दौरों के दौरान उनकी टीम के लिए संभावित चेहरों को चिह्नित किए जाने की बात कही गई है।
पार्टी ने लगभग हर राज्य से दो-दो संभावित नेताओं के नामों की सूची तैयार की है। इनमें से कुछ नेताओं को केंद्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने की संभावना है।
चुनावी राज्यों को मिल सकती है प्राथमिकता
नितिन नवीन की नई टीम के गठन में 2027 के विधानसभा चुनावों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
ऐसे में इन राज्यों से आने वाले नेताओं को केंद्रीय संगठन में जगह देकर बीजेपी चुनावी तैयारियों को मजबूत करना चाहती है। पार्टी के लिए खास तौर पर उत्तर प्रदेश का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अनुभवी नेताओं को भी मिलेगी जगह
नई टीम में सिर्फ युवाओं को ही आगे लाने की रणनीति नहीं है। बीजेपी संगठन में अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश भी कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अनुभवी नेताओं को महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। इसके अलावा मोदी सरकार में मंत्री पद संभाल रहे कुछ नेताओं को भी सरकार से संगठन में वापस लाए जाने की चर्चा है।
पार्टी का मानना है कि ऐसे नेताओं का सरकार और संगठन दोनों का अनुभव नई टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
2029 लोकसभा चुनाव पर भी नजर
नितिन नवीन की नई टीम का फोकस केवल 2027 के विधानसभा चुनावों तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन का ढांचा 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर भी तैयार किया जा रहा है।
नई टीम को आने वाले वर्षों में संगठन को मजबूत करने, राज्यों में पार्टी की स्थिति बेहतर करने और चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
यही वजह है कि बीजेपी के अंदर नितिन नवीन की टीम को महज संगठनात्मक फेरबदल नहीं बल्कि पार्टी की अगली पीढ़ी की नेतृत्व संरचना तैयार करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
अमित शाह-नितिन नवीन की मैराथन बैठक, नई टीम को लेकर तेज हुई हलचल
नई दिल्ली | 3 जुलाई 2026
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में संगठनात्मक बदलाव की चर्चाओं के बीच पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच करीब तीन घंटे तक चली अहम बैठक ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में भाजपा की नई केंद्रीय टीम, आगामी चुनावों की रणनीति और संगठन में संभावित फेरबदल पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व नई टीम में अनुभव और युवाओं के संतुलन पर विशेष जोर दे रहा है। पार्टी उन नेताओं को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने पर विचार कर रही है, जिन्होंने हाल के चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया है या राज्यों में संगठन को मजबूत किया है। साथ ही महिलाओं, युवाओं और सामाजिक रूप से प्रभावशाली वर्गों को भी प्रतिनिधित्व देने की रणनीति बनाई जा रही है।
बैठक में आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, अन्य राज्यों के चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि पार्टी संगठन को चुनावी मोड में लाने के लिए जल्द ही राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई सूची जारी की जा सकती है।
राजनीतिक गलियारों में कई नामों को लेकर अटकलें तेज हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों से कुछ नए चेहरों को राष्ट्रीय टीम में जगह मिल सकती है। हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बैठक में संगठन महासचिवों की भूमिका, विभिन्न राज्यों में पार्टी विस्तार, बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और सामाजिक समीकरणों को साधने पर भी मंथन हुआ। सूत्रों का कहना है कि नई टीम का गठन भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा होगा, जिसमें युवा नेतृत्व को आगे लाने के साथ अनुभवी नेताओं की भूमिका भी बरकरार रखी जाएगी।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और शीर्ष नेतृत्व की सहमति के बाद लिया जाएगा। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में भाजपा की नई केंद्रीय टीम का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।

राहुल गांधी के कोटा दौरे से पहले पोस्टर हटाने पर सियासत गरम
कोटा/जयपुर | 17 जून 2026
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने आरोप लगाया है कि कोटा में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के छात्रों के साथ होने वाले संवाद कार्यक्रम से पहले प्रशासन द्वारा कार्यक्रम से जुड़े पोस्टर और होर्डिंग हटाए जा रहे हैं।
गहलोत ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान विपक्षी दलों के कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में प्रशासन सहयोग करता था, लेकिन वर्तमान में राहुल गांधी के कार्यक्रम से संबंधित प्रचार सामग्री हटाई जा रही है। उन्होंने इसे राजनीतिक दबाव और सत्तारूढ़ दल की घबराहट का संकेत बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ कोचिंग संस्थानों पर दबाव बनाया जा रहा है तथा छात्रों को कार्यक्रम में शामिल होने से हतोत्साहित किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने दावा किया कि इन प्रयासों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र कार्यक्रम में भाग लेंगे।
कांग्रेस द्वारा आयोजित “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम के तहत राहुल गांधी कोटा में विद्यार्थियों से संवाद करने वाले हैं। कार्यक्रम का मुख्य फोकस प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना बताया गया है।
इस बीच, पोस्टर हटाने को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं, जबकि इस मामले पर प्रशासन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Z+ कवर खत्म होने के बाद लालू-राबड़ी का ऐलान, सुरक्षा को लेकर अपनाया नया रास्ता
पटना | 6 जून 2026
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा हटाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सुरक्षा व्यवस्था में हुए इस बदलाव के बीच लालू-राबड़ी परिवार ने अपने आवास और व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार ने सरकारी सुरक्षा में कमी के बाद निजी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया है।
जानकारी के अनुसार, लालू प्रसाद यादव के पटना स्थित आवास पर अतिरिक्त निजी सुरक्षा गार्ड तैनात किए जा रहे हैं। इसके साथ ही परिसर में आने-जाने वाले लोगों की निगरानी बढ़ाने, प्रवेश व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने और सुरक्षा संबंधी अन्य उपायों पर भी काम शुरू कर दिया गया है। परिवार का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े होने और लगातार राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहने के कारण सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है।
सुरक्षा में बदलाव के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
Z+ सुरक्षा देश की सबसे उच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक मानी जाती है। इस श्रेणी में सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों को विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बदलाव के बाद बिहार की राजनीति में इसे लेकर बहस शुरू हो गई है।
RJD नेताओं का कहना है कि लालू प्रसाद यादव लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं और उनकी लोकप्रियता तथा राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी जानी चाहिए। पार्टी के कई नेताओं ने सुरक्षा में कटौती पर चिंता जताई है और इसे गंभीर विषय बताया है।
प्रशासन का पक्ष
दूसरी ओर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को दी जाने वाली सुरक्षा समय-समय पर खतरे के आकलन और सुरक्षा समीक्षा के आधार पर तय की जाती है। सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होता है और यह विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सभी निर्णय निर्धारित मानकों और सुरक्षा मूल्यांकन के अनुसार लिए जाते हैं। इसलिए किसी भी बदलाव को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय सुरक्षा प्रक्रिया के हिस्से के रूप में समझा जाना चाहिए।
समर्थकों और कार्यकर्ताओं में चिंता
सुरक्षा में बदलाव की खबर सामने आने के बाद RJD कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी चर्चा का माहौल है। कई समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लालू प्रसाद यादव की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि निजी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का फैसला परिवार की सतर्कता को दर्शाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में चुनावी और राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती रहती हैं। ऐसे में बड़े नेताओं की सुरक्षा हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती है। लालू-राबड़ी परिवार द्वारा निजी सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
आवास की निगरानी व्यवस्था होगी मजबूत
सूत्रों के अनुसार, निजी सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने के अलावा आवास परिसर में निगरानी व्यवस्था को भी और मजबूत किया जा सकता है। आने वाले दिनों में सुरक्षा उपकरणों और निगरानी तंत्र को अपडेट करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित जोखिम से बचा जा सके।
आगे की रणनीति पर नजर
फिलहाल लालू-राबड़ी परिवार ने सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने का फैसला किया है। परिवार और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच इस विषय पर लगातार चर्चा जारी है। आने वाले समय में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर और भी कदम उठाए जा सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक ओर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लालू-राबड़ी परिवार का निजी सुरक्षा बढ़ाने का फैसला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

TMC में बड़ा फेरबदल, Kalyan Banerjee फिर बने लोकसभा के Chief Whip
14 मई 2026
इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश, सिक्किम में शुरू हुए ₹4000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स
28 अप्रैल, 2026
गंगटोक | 28 अप्रैल 2026
सिक्किम के 50वें राज्य स्थापना दिवस (Golden Jubilee) के खास मौके पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राज्य को बड़ी विकास सौगात दी। उन्होंने ₹4000 करोड़ से अधिक की लागत वाली कई अहम परियोजनाओं की शुरुआत की, जिससे सिक्किम के साथ-साथ पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को बड़ा विकास बूस्ट मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री का यह दो दिवसीय दौरा (27–28 अप्रैल) केवल औपचारिक नहीं रहा, बल्कि इसे क्षेत्र के आर्थिक और रणनीतिक महत्व को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
🔹 मल्टी-सेक्टर डेवलपमेंट का बड़ा पैकेज
सरकार ने करीब ₹4018 करोड़ की लागत से लगभग 30 प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। ये प्रोजेक्ट्स स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, ऊर्जा, शहरी विकास, पर्यटन और कृषि जैसे कई अहम क्षेत्रों से जुड़े हैं।
इस व्यापक योजना का उद्देश्य सिक्किम में संतुलित और तेज विकास सुनिश्चित करना है।
🔹 स्वास्थ्य सुविधाओं को नई मजबूती
राज्य में हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत करने के लिए नई परियोजनाएं शुरू की गईं।
• नामची में 100 बेड का आयुर्वेद अस्पताल
• गंगटोक में 30 बेड का सोवा-रिग्पा चिकित्सा केंद्र
इन पहलों से पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को एक साथ बढ़ावा मिलेगा।
🔹 शिक्षा में डिजिटल और आधुनिक पहल
शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े सुधारों की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
• नए रेजिडेंशियल स्कूलों की स्थापना
• डिग्री और प्रोफेशनल कॉलेज खोलने की योजना
• 160 स्कूलों में IT-आधारित लर्निंग सिस्टम लागू
इससे छात्रों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
🔹 इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास
राज्य में कनेक्टिविटी और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए।
• सड़कों और पुलों का निर्माण व सुधार
• जन सेवा सचिवालय का विकास
• सिविल सर्विस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट की स्थापना
• शहरी गरीबों के लिए आवास योजनाएं
इनसे जीवन स्तर और प्रशासनिक दक्षता दोनों में सुधार होगा।
🔹 पर्यटन और पर्यावरण पर फोकस
सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता को ध्यान में रखते हुए ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है।
• ईको-पिलग्रिमेज कॉम्प्लेक्स का निर्माण
• 1000+ होमस्टे विकसित करने की योजना
• पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रोजेक्ट्स
इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
🔹 खास और आकर्षक प्रोजेक्ट्स
कुछ प्रोजेक्ट्स अपनी खासियत के कारण चर्चा में हैं:
• ऑर्किड एक्सपीरियंस सेंटर
• स्टील आर्च ब्रिज
• सांस्कृतिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं
ये परियोजनाएं विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास हैं।
🔹 ‘अष्टलक्ष्मी’ विजन और नई रणनीति
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पूर्वोत्तर राज्यों को “अष्टलक्ष्मी” बताते हुए इसे देश के विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
सरकार अब “Act East Policy” से आगे बढ़कर “Act Fast” रणनीति पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य तेज विकास और बेहतर कनेक्टिविटी है।
🔹 दीर्घकालिक असर क्या होगा?
इन परियोजनाओं का मकसद है:
• समावेशी विकास को बढ़ावा देना
• रोजगार के अवसर पैदा करना
• इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना
• पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सिक्किम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की आर्थिक दिशा बदल सकती है।
🔹 निष्कर्ष
सिक्किम में ₹4000 करोड़ से अधिक की इन परियोजनाओं की शुरुआत केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत को एक नए ग्रोथ हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा संकेत है।
यह पहल आने वाले समय में न सिर्फ क्षेत्रीय विकास को गति देगी, बल्कि देश की आर्थिक एकता को भी मजबूत करेगी।
___________________________________________________________
असम में सियासी मुकाबला तेज: पीएम मोदी का NDA की ‘हैट्रिक’ का दावा, राहुल गांधी का युवाओं को ₹2000 सहायता का वादा
नई दिल्ली/गुवाहाटी। 06 अप्रैल 2026
सम विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम दौरे के दौरान नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) की जीत का दावा करते हुए कहा कि राज्य में इस बार “हैट्रिक” लगेगी। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुडुचेरी में युवाओं के लिए नई आर्थिक सहायता योजना का ऐलान कर सियासी बहस को और तेज कर दिया है।
बरपेटा में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि असम की जनता NDA पर लगातार भरोसा जता रही है और इस बार भी जीत तय है। उन्होंने कहा, “असम में NDA की हैट्रिक लगेगी और कांग्रेस की हार की सेंचुरी पूरी होगी।” पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के पास विकास का कोई स्पष्ट विजन नहीं है और न ही भविष्य के लिए ठोस योजना है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जो वादे करती है, उन्हें जमीन पर उतारकर दिखाती है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने विकास, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं को अपनी सरकार की उपलब्धियां बताया।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुडुचेरी में एक कार्यक्रम के दौरान युवाओं को साधने की कोशिश की। उन्होंने घोषणा की कि अगर उनकी सरकार बनती है, तो युवाओं को हर महीने ₹2000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी। राहुल गांधी ने कहा कि यह योजना युवाओं को आर्थिक सहारा देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक तरफ जहां BJP विकास और स्थिरता के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस युवाओं और आर्थिक सहायता जैसे मुद्दों पर फोकस कर रही है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और वादों की राजनीति से चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है।
असम में चुनावी रैलियों और प्रचार अभियान के तेज होने के साथ ही आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और भी तेज होने की संभावना है। अब यह देखना अहम होगा कि जनता किसके दावों और वादों पर भरोसा जताती है।
गुवाहाटी/नई दिल्ली | 20 मार्च, 2026
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी इस नई सूची में पार्टी ने अनुभवी चेहरों और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। 126 सीटों वाली असम विधानसभा के लिए हो रहे इस चुनाव में कांग्रेस विपक्षी गठबंधन (Asom Sonmilito Morcha) का नेतृत्व कर रही है।
तीसरी लिस्ट के प्रमुख नाम और सीटें
पार्टी ने इस लिस्ट में अपने कई दिग्गज और मौजूदा विधायकों (MLAs) को फिर से मौका दिया है:
-
जाकिर हुसैन सिकदर: पाकाबेतबारी (Pakabetbari) से चुनाव लड़ेंगे।
-
प्रदीप सरकार: अभयापुरी (Abhayapuri) सीट से उम्मीदवार बनाए गए हैं।
-
माणिक चंद्र ब्रह्मा: कोकराझार-ST (Kokrajhar) से ताल ठोकेंगे।
-
बेबी बेगम: धुबरी (Dhubri) से चुनाव मैदान में होंगी।
-
रोजलीना तिर्की: खुमटाई (Khumtai) से प्रत्याशी बनाई गई हैं।
-
डॉ. आसिफ मोहम्मद नज़र: लाहरीघाट (Laharighat) से फिर से चुनाव लड़ेंगे।
-
आफताब उद्दीन मुल्ला: जालेश्वर (Jaleshwar) सीट से चुनावी मैदान में होंगे।
अन्य महत्वपूर्ण उम्मीदवार
| निर्वाचन क्षेत्र | उम्मीदवार का नाम |
| नगांव-बताद्रवा | डॉ. दुर्लभ चमुआ |
| लखीमपुर | घना बुरागोहेन |
| रंगानदी | जयंत खाउंड (पूर्व AGP नेता) |
| चेंगा | अब्दुर रहीम अहमद |
| होराघाट (ST) | संजीव तेरोन |
प्रद्युत बोरदोलोई फैक्टर और बगावत
तीसरी लिस्ट जारी होने से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा, जब पूर्व सांसद और दिग्गज नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया।
-
विवाद की वजह: बोरदोलोई लाहरीघाट सीट से डॉ. आसिफ मोहम्मद नज़र को टिकट दिए जाने का विरोध कर रहे थे।
-
बीजेपी का दांव: बीजेपी ने बोरदोलोई को तुरंत दिसपुर विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इसके अलावा, बोरदोलोई के बेटे प्रतीक बोरदोलोई ने भी मार्गेरिटा सीट से अपना नामांकन वापस ले लिया है।
चुनावी कार्यक्रम एक नजर में
-
कुल सीटें: 126
-
मतदान की तारीख: 9 अप्रैल, 2026 (एक ही चरण में)
-
नतीजे: 4 मई, 2026
-
गठबंधन: कांग्रेस ने करीब 15 सीटें अपने सहयोगी दलों (AJP, CPI-M, APHLC) के लिए छोड़ी हैं।
राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने 6 उम्मीदवारों की घोषणा की, सिंघवी-फूलो देवी को फिर मौका; तमिलनाडु से एम. क्रिस्टोफर तिलक मैदान में
नई दिल्ली | 05 मार्च 2026
कांग्रेस ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए गुरुवार को छह उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी। पार्टी ने कुछ मौजूदा सांसदों पर दोबारा भरोसा जताया है, जबकि कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया है।
सिंघवी और फूलो देवी को फिर से उम्मीदवार
पार्टी ने तेलंगाना से वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी को दोबारा उम्मीदवार बनाया है। सिंघवी वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और पार्टी के प्रमुख विधि विशेषज्ञों में गिने जाते हैं।
वहीं छत्तीसगढ़ से फूलो देवी नेताम को फिर से राज्यसभा का टिकट दिया गया है। वह भी मौजूदा सांसद हैं और आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करती रही हैं।
हरियाणा और हिमाचल से नए चेहरे
हरियाणा से कांग्रेस ने करमवीर सिंह बौद्ध को उम्मीदवार बनाया है। वहीं हिमाचल प्रदेश से अनुराग शर्मा को मैदान में उतारा गया है। अनुराग शर्मा कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं और उन्हें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का करीबी माना जाता है।
तेलंगाना की दूसरी सीट पर वीम नरेंद्र रेड्डी
तेलंगाना की दूसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने वीम नरेंद्र रेड्डी को उम्मीदवार घोषित किया है। उन्हें मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का करीबी बताया जाता है।
तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस तालमेल
तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट दी है। इस सीट से कांग्रेस ने एम. क्रिस्टोफर तिलक को उम्मीदवार बनाया है। यह गठबंधन राज्य की राजनीति में दोनों दलों के बीच मजबूत तालमेल का संकेत माना जा रहा है।
भाजपा ने भी घोषित किए उम्मीदवार
इधर भारतीय जनता पार्टी भी दो चरणों में 13 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों में सक्रियता बढ़ गई है और विभिन्न राज्यों में समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने अनुभवी और संगठनात्मक रूप से सक्रिय नेताओं को मौका देकर राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। अब नजर नामांकन प्रक्रिया और चुनावी गणित पर रहेगी, जिससे राज्यसभा की तस्वीर साफ होगी।
BSP का ऐलान: यूपी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी पार्टी
18 फरवरी 2026
मायावती ने स्पष्ट किया है कि BSP (बहुजन समाज पार्टी) आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बिना किसी गठबंधन के अपने दम पर लड़ेगी। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख ने कहा कि गठबंधन को लेकर चल रही सभी अटकलें भ्रामक और निराधार हैं तथा पार्टी की रणनीति पूरी तरह स्वतंत्र चुनाव लड़ने की है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जनता के बीच पार्टी की नीतियों को पहुंचाने का आह्वान किया। मायावती ने भरोसा जताया कि बसपा का पारंपरिक वोट बैंक और जमीनी नेटवर्क उसे चुनाव में मजबूत स्थिति दिलाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा के इस फैसले से राज्य की चुनावी रणनीतियों और संभावित गठबंधन समीकरणों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि अब मुकाबला और अधिक बहुकोणीय होने की संभावना है।
निशिकांत दुबे के बयान से संसद में सियासी हंगामा, विपक्ष का विरोध—लोकसभा रिकॉर्ड से हटे आपत्तिजनक शब्द
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता व अन्य विधायकों ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायकों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया है उसमें उठाए गए मुद्दों पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए। पिछले पांच महीने से न कैबिनेट की बैठक हुई है और न विधानसभा का सत्र नहीं बुलाया गया है। अविलंब विशेष सत्र बुलाने की जरूरत है।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता व अन्य विधायकों ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायकों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया है उसमें उठाए गए मुद्दों पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए। पिछले पांच महीने से न कैबिनेट की बैठक हुई है और न विधानसभा का सत्र नहीं बुलाया गया है। अविलंब विशेष सत्र बुलाने की जरूरत है।
प्रेसवार्ता में विजेंद्र गुप्ता ने कहा, “मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पांच माह से जेल में हैं। उन्होंने त्यागपत्र देने की जगह जेल से सरकार चलाने की घोषणा की है। सरकार को बताना चाहिए कि मुख्यमंत्री ने जेल से कितने निर्णय लिए हैं। इस दौरान कैबिनेट की हुई बैठक और उसमें लिए गए निर्णय की जानकारी देनी चाहिए।”
खराब हो रही नगर निगम की वित्तीय स्थिति
विजेंद्र ने कहा, “मुख्यमंत्री राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं। इसकी बैठक नहीं होने का कारण भी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन नहीं कर सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है। नगर निगम की वित्तीय स्थिति खराब हो रही है। आयोग नगर निगम में स्थायी समिति का गठन नहीं करने और पिछले सात वर्षों से कैग की 11 रिपोर्ट का कारण सरकार को बताना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “15 मार्च 2024 को मुख्य सचिव द्वारा जल मंत्री को जल बोर्ड में वित्तीय अनियमितता की रिपोर्ट सौंपी थी जिसे उन्होंने सदन में पेश नहीं किया। जल बोर्ड ने दिल्ली सरकार को 73 हजार करोड़ रुपये का लोन वापस करने से मना कर दिया है। सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू नहीं करने, राज्य सरकार से वित्त पोषित 12 कॉलेजों को फंड नहीं देने के बारे में भी प्रश्न पूछे।”
खेल विश्वविद्यालय पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग
उन्होंने दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विकास विश्वविद्यालय, शिक्षक विश्वविद्यालय व खेल विश्वविद्यालय पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। सात आइसीयू अस्पताल व पाली क्लीनिक बनाने के लिए के काम में देरी होने और इसकी लागत बढ़ने के कारण बताना चाहिए। उन्होंने झुग्गियों में नल से जल उपलब्ध कराने और जहां झुग्गी वहीं मकान योजना की स्थिति का विवरण भी मांगा।








