आस्था और संस्कृति

वट सावित्री पूर्णिमा 2026: पढ़ें पवित्र व्रत कथा, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

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तकनीक का दुस्साहस: AI से महाकाल मंदिर का फर्जी VIP पास बनाकर पहुंचे तीन युवक; सुरक्षा घेरे में हुए बेनकाब

उज्जैन | 15 जुलाई, 2026

विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में सुरक्षा और प्रवेश व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भोपाल से आए तीन युवक, जिसमें एक मुख्य आरोपी और दो नाबालिग शामिल हैं, ‘ChatGPT’ और अन्य AI टूल की मदद से तैयार किए गए फर्जी ‘गर्भगृह दर्शन पास’ के जरिए मंदिर के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश करते हुए पकड़े गए हैं [1.1.2, 1.2.4]।

QR कोड स्कैन होते ही खुला फर्जीवाड़े का राज

घटना मंगलवार की है, जब भोपाल के कोलार रोड निवासी भरत उइके (19) अपने दो नाबालिग साथियों के साथ मंदिर परिसर पहुंचा [1.1.2, 1.2.4]। युवकों ने ‘शीघ्र दर्शन’ लाइन से प्रवेश करने का प्रयास किया। उनके पास मौजूद मोबाइल में दिखाए गए पास को देखकर निजी सुरक्षाकर्मी को संदेह हुआ [1.2.4]। जब मंदिर समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर ने पास पर अंकित QR कोड को स्कैन किया, तो वह फर्जी पाया गया [1.1.1, 1.2.4]।

फर्जी पास में थी हूबहू जानकारी

आरोपियों द्वारा तैयार किए गए उस नकली पास में QR कोड, आधार फोटो, एंट्री पास, नाम, मोबाइल नंबर, विजिट का प्रकार, पेमेंट टाइप, तारीख-समय, ट्रांजेक्शन आईडी और रजिस्ट्रेशन नंबर जैसी सभी जानकारियां दर्ज थीं [1.2.4]। पहली नजर में यह पास पूरी तरह असली लग रहा था, जिससे सुरक्षा प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं [1.1.2, 1.2.4]।

ढाई साल से बंद है गर्भगृह में प्रवेश

पकड़े जाने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने तीनों को महाकाल थाना पुलिस के हवाले कर दिया [1.1.2, 1.2.4]। पुलिस पूछताछ में पता चला कि उन्होंने AI टूल की मदद से वीआईपी पास जैसा दिखने वाला फॉर्मेट तैयार किया था [1.1.2]। गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में सामान्य श्रद्धालुओं का प्रवेश जून 2022 से ही पूरी तरह प्रतिबंधित है [1.3.1]। इसी प्रतिबंधित व्यवस्था के कारण सुरक्षाकर्मियों का शक और गहरा गया और वे पकड़े गए [1.2.4]।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर डिजिटल सत्यापन प्रणाली (Digital Verification System) को लेकर चिंता बढ़ा दी है [1.1.2]। विशेषज्ञों का मानना है कि AI जैसी आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए मंदिर की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक ‘स्मार्ट’ और सुरक्षित बनाने की तत्काल आवश्यकता है [1.1.2]। फिलहाल मंदिर समिति की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है [1.2.4]।

महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था, मंदिर समिति द्वारा सुरक्षा में किए जा रहे बदलावों और इस मामले की कानूनी अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट के ‘सिटी क्राइम डेस्क’ को लगातार फॉलो करते रहें।

महाकाल मंदिर का फर्जी पास

यह वीडियो उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली दर्शन व्यवस्था और उससे जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों को समझने में मदद करेगा।




वट सावित्री पूर्णिमा 2026: पढ़ें पवित्र व्रत कथा, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
नई दिल्ली | 29 जून 2026

हिंदू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन वट सावित्री पूर्णिमा व्रत रखा जाता है, जिसे विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, वट वृक्ष और माता सावित्री की पूजा करने तथा व्रत कथा का श्रवण या पाठ करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

क्या है वट सावित्री व्रत का महत्व?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है। इसलिए इस दिन वट वृक्ष की पूजा और उसकी परिक्रमा करने का विशेष महत्व है। श्रद्धालु वट वृक्ष के तने पर कच्चा सूत या रक्षा सूत्र बांधकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना करते हैं।

वट सावित्री व्रत कथा

धार्मिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री अत्यंत तेजस्वी और पतिव्रता थीं। उन्होंने स्वयंवर में सत्यवान को अपने पति के रूप में चुना। महर्षि नारद ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि सत्यवान की आयु बहुत कम है और विवाह के एक वर्ष बाद उनकी मृत्यु हो जाएगी।

सावित्री ने यह भविष्यवाणी जानने के बावजूद सत्यवान से विवाह किया और पूरे समर्पण के साथ उनका साथ निभाया। नियत समय आने पर जब सत्यवान जंगल में लकड़ी काटते समय मूर्छित होकर गिर पड़े, तब यमराज उनके प्राण लेकर जाने लगे।

सावित्री अपने पति के पीछे-पीछे यमराज के साथ चल पड़ीं। उनकी अटूट निष्ठा, बुद्धिमत्ता और धर्म के प्रति समर्पण से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें कई वरदान दिए। अंत में सावित्री ने अपने पति सत्यवान के जीवन का वरदान मांग लिया। यमराज ने उनकी पतिव्रता शक्ति से प्रसन्न होकर सत्यवान को पुनर्जीवन प्रदान कर दिया।

इसी घटना की स्मृति में वट सावित्री व्रत मनाया जाता है। यह व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

पूजा विधि

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और माता सावित्री का पूजन करें।
  • वट वृक्ष को जल, दूध, रोली, अक्षत, पुष्प और फल अर्पित करें।
  • कच्चा सूत लपेटते हुए सात या 108 परिक्रमा करें।
  • वट सावित्री व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
  • अंत में परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें।

क्या मिलेगा इस व्रत से?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है, परिवार में समृद्धि आती है और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने वालों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों में व्रत की परंपराएं और पूजा-विधि अलग-अलग हो सकती हैं।


वास्तु के अनुसार इस समय लगाएं झाड़ू, घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

 8 जून 2026

वास्तु शास्त्र में झाड़ू को केवल सफाई का साधन नहीं, बल्कि मां लक्ष्मी का प्रतीक भी माना गया है। मान्यता है कि घर में झाड़ू का सही उपयोग सकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देता है, जबकि कुछ गलतियां धन हानि और आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकती हैं।

झाड़ू लगाने का सही समय

वास्तु के अनुसार सुबह सूर्योदय के बाद और दिन के समय झाड़ू लगाना शुभ माना जाता है। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। शाम के समय या सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे लक्ष्मी के आगमन का समय माना जाता है।

गलती नंबर 1: सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाना

वास्तु मान्यताओं के अनुसार सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाने से घर की सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाती है। हालांकि यदि किसी विशेष परिस्थिति में सफाई जरूरी हो तो कचरे को घर के बाहर न फेंकें और सुबह उसका निपटान करें।

गलती नंबर 2: झाड़ू को खुले में रखना

झाड़ू को हमेशा ऐसी जगह रखना चाहिए जहां वह लोगों की नजर में न आए। मुख्य द्वार, पूजा घर या रसोई के बीच में झाड़ू रखना वास्तु दोष का कारण माना जाता है।

गलती नंबर 3: झाड़ू पर पैर लगाना या खड़ा रखना

झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक मानकर उसका सम्मान करने की सलाह दी जाती है। झाड़ू पर पैर लगाना, उसे फेंकना या खड़ा करके रखना शुभ नहीं माना जाता। इसे हमेशा जमीन पर लिटाकर सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।

झाड़ू खरीदने का शुभ दिन

वास्तु मान्यताओं के अनुसार शनिवार, अमावस्या या कृष्ण पक्ष के कुछ दिनों में झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। नई झाड़ू का उपयोग भी शुभ मुहूर्त में करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है।

ध्यान रखें

ये सभी बातें धार्मिक और वास्तु मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग इन्हें परंपरा और आस्था के रूप में मानते हैं।


31 मई से फिर खुलेंगे भीमाशंकर मंदिर के द्वार, पुनर्विकास और सुरक्षा कार्य अंतिम चरण में

10 मई 2026 | पुणे, महाराष्ट्र

Bhimashankar Temple को आगामी 31 मई 2026 से श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोलने की घोषणा की गई है। मंदिर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने बताया कि मंदिर परिसर में चल रहे संरक्षण, पुनर्विकास और आधारभूत संरचना उन्नयन कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल भीमाशंकर मंदिर जनवरी 2026 के पहले सप्ताह से बंद था। लगभग चार महीनों तक श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था बंद रखी गई थी ताकि बड़े स्तर पर विकास और सुरक्षा संबंधी कार्य पूरे किए जा सकें।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए किए गए विकास कार्य

अधिकारियों के अनुसार मंदिर क्षेत्र में तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या और आगामी 2027 नासिक कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया गया है।

प्रशासन को उम्मीद है कि कुंभ मेले के दौरान Trimbakeshwar Temple आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी भीमाशंकर पहुंचेंगे। इसी कारण भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

मंदिर परिसर में किए गए प्रमुख कार्य

पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इनमें:

  • तीर्थ मार्गों की मरम्मत और मजबूतीकरण
  • नए viewing corridors का निर्माण
  • विश्राम स्थलों और सुविधा केंद्रों का विकास
  • प्रवेश और निकास प्रबंधन प्रणाली
  • मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण और उन्नयन

जैसे कार्य शामिल हैं।

नया भव्य सभामंडप बनाया जा रहा

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में एक नया भव्य सभामंडप भी विकसित किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इससे बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा।

पर्यावरणीय संतुलन पर विशेष ध्यान

भीमाशंकर मंदिर पश्चिमी घाट के संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित है। इसी कारण विकास कार्यों के दौरान पर्यावरणीय संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार परियोजना में प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने और वन क्षेत्र पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय परिवारों पर पड़ सकता है असर

पुनर्विकास योजना के चलते लगभग 103 स्थानीय परिवार प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन ने मंदिर से करीब 500 मीटर दूर पुनर्वास के लिए जमीन चिन्हित की है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों को विश्वास में लेकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

₹288 करोड़ से अधिक की विकास योजना

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार भीमाशंकर विकास योजना की कुल लागत ₹288 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन, सुरक्षा और सुविधाओं को आधुनिक स्तर तक पहुंचाना है।

स्थानीय व्यापारियों और किसानों पर असर

मंदिर बंद रहने का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। आसपास के आदिवासी किसान, स्ट्रॉबेरी विक्रेता और छोटे दुकानदार श्रद्धालुओं की संख्या कम होने से आर्थिक रूप से प्रभावित हुए।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि मंदिर खुलने के बाद क्षेत्र में फिर से व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी

Forest Department Maharashtra ने मंदिर क्षेत्र के आसपास कई अवैध निर्माण हटाए हैं और रास्तों को साफ कराया है ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही और विकास कार्यों में बाधा न आए।

महाशिवरात्रि पर भी बंद रहा मंदिर

इस वर्ष महाशिवरात्रि 2026 के दौरान भी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद रखा गया था क्योंकि निर्माण और सुरक्षा संबंधी कार्य जारी थे। हालांकि स्थानीय चर्चाओं और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मंदिर तक जाने वाले रास्ते खुले रहे और लोग ट्रैकिंग तथा राइडिंग के लिए क्षेत्र तक पहुंचते रहे।

धार्मिक विरासत और सुरक्षा पर फोकस

भीमाशंकर मंदिर से जुड़ी यह परियोजना धार्मिक विरासत संरक्षण, तीर्थयात्री सुरक्षा, कुंभ तैयारी, पर्यावरण संतुलन और स्थानीय आजीविका जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़ी हुई है। प्रशासन का कहना है कि मंदिर खुलने के बाद श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था उपलब्ध होगी।


Kharmas 2024: खरमास कब होगा समाप्त? इस पूरे 1 महीने भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, होगा अशुभ, इन कार्यों को करने से मिलेगा शुभ फल

Kharmas 2024: इस साल खरमास 15 दिसंबर से शुरू हो चुका है. खरमास में कोई भी शुभ कार्य करने से मनाही होती है. इस साल 15 दिसंबर से लेकर 14 जनवरी 2025 को खरमास समाप्त होगा. तब तक कोई भी मांगलिक कार्य जैसे शादी-ब्याह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि नहीं की जाती है. अगर कोई करता है, तो उसे शुभ नहीं अशुभ फल की प्राप्ति हो सकती है. आप चाहते हैं कि आपके साथ कोई अनहोनी ना हो तो जान लें कि खरमास में क्या करना चाहिए और क्या करने से बचना चाहिए.

खरमास क्या है? (What is Kharmas)
ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव कहते हैं कि सूर्य देव जब धनु राशि में प्रवेश करते हैं तब धनु संक्रांति होती है. इसी राशि परिवर्तन और धनु संक्रांति पड़ने से खरमास महीने की शुरुआत हो जाती है. इस दौरान भगवान सूर्य धनु राशि में ही रहते हैं. इसी के बाद मकर संक्रांति मनाई जाएगी. खरमास के समाप्त होते ही आप सभी मांगलिक और शुभ कार्यों को कर सकते हैं. शादी-ब्याह भी की जाएगी. जब धनु राशि से मकर राशि में भगवान सूर्य प्रवेत करते हैं तो मकर संक्रांति सेलिब्रेट किया जाता है.

खरमास में क्या करना चाहिए (kharmas me kya karna chahiye)

खरमास के महीने में पूजा-पाठ प्रतिदिन करते रहना चाहिए. मंत्रों का जाप करना चाहिए. इन शुभ कार्यों को करने से आपको कई लाभ हो सकते हैं. प्रतिदिन सूरज भगवान की पूजा करने से विशेष लाभ होगा. जल से अर्घ्य दें, सूर्य मंत्रों का जाप करें. इस पूरे महीने आप कृष्ण भगवान, विष्णु भगवान की भी पूजा करनी चाहिए. आपके जीवन में मौजूद सभी दुख-दर्द, परेशानी दूर होंगी और इच्छाओं की पूर्ति होगी. बृहस्पति ग्रह का प्रभाव कम होने से आप इनकी भी पूजा और मंत्रों का जाप कर सकते हैं. आपके बिगड़े कार्य होंगे पूरे. यदि आप खरमास में तुलसी मां की पूजा करें और शाम में तुलसी पौधे के पास दीपक जलाते हैं तो घर में सुख-समृद्धि आती है. घर में शांति बरकरार रहती है. इस पूरे महीने आपको बिस्तर का त्याग कर देना चाहिए और फर्श पर गद्दे बिछाकर सोएं. स्टील, कांच आदि बर्तनों में भोजन करने की बजाय पत्तलों में खाना भी शुभ माना गया है.

खरमास में क्या नहीं करना चाहिए? ( kharmas me kya nahi karna chahiye)

– आप चाहते हैं कि आपके घर सुख-समृद्धि आए, बरकत हो, तरक्की हासिल हो तो आप खरमास महीने में कोई भी शुभ कार्य करने से बचें. कोई भी नए व्यापार की शुरुआत न करें. किसी से बिजनेस डील न करें. शादी-ब्याह, घर खरीदना, गृह प्रवेश, मुंडन, जमीन, वाहन, रत्न, गहने, कपड़े आदि खरीदने से परहेज करें.

– जनेऊ संस्कार से भी बचना चाहिए. यदि आप शादी-ब्याह कर लेते हैं तो हो सकता है कि आगे चलकर आपके जीवन में परेशानियां उत्पन्न हो जाएं. आपके रिश्ते में खटास आ जाए. दांपत्य जीवन में नेगेटिव प्रभाव देखने को मिल पाता है. बेहतर है कि आप कोई भी मांगलिक कार्य खरमास समाप्त होने के बाद ही करें.

– खरमास के दौरान तामसिक भोजन भी नहीं करना चाहिए. ऐसे में मांस-मछली, प्याज, लहसुन, शराब, धूम्रपान करने से बिल्कुल भी परहेज करें.

– बेटी की शादी हुई है और खरमास पड़ गया है तो उसे इस दौरान अपने घर से विदा करने से भी बचना चाहिए. विदाई का शुभ कार्य खरमास लगने से पूर्व या समाप्त होने के बाद ही करें.

-यदि आपके घर कोई दुखियारा, गरीब, जरूतमंद या भिखारी आकर कुछ मांगता है तो उसे बुरा और अपशब्द करने से भी बचना चाहिए. डांटकर भगाने से बचें. ऐसा करना आपके लिए अशुभ होगा.

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