15 जून 2026
हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों की पूजा-अर्चना का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत, स्नान, दान और कथा श्रवण करने से सुख-समृद्धि, सौभाग्य और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार को मनाई जा रही है।
सोमवती अमावस्या व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक ब्राह्मण परिवार में एक कन्या थी। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि विवाह के बाद उसके पति की अल्पायु होगी। यह सुनकर परिवार चिंतित हो गया। एक संत ने उपाय बताते हुए कहा कि यदि कन्या सिंहल द्वीप में रहने वाली पुण्यात्मा महिला सोना धोबिन का आशीर्वाद प्राप्त कर ले, तो उसका वैधव्य दोष दूर हो सकता है।
कन्या और उसकी मां लंबी यात्रा कर सोना धोबिन के पास पहुंचीं और उसकी सेवा करने लगीं। कई वर्षों की सेवा से प्रसन्न होकर सोना धोबिन ने उन्हें आशीर्वाद दिया। समय आने पर कन्या का विवाह हुआ, लेकिन विवाह के दौरान वर की मृत्यु हो गई।
तब सोना धोबिन ने अपने वर्षों के पुण्य का फल उस नवविवाहिता को अर्पित कर दिया। उसके पुण्य प्रभाव से युवक पुनः जीवित हो उठा। कहा जाता है कि इस पुण्यदान के कारण स्वयं सोना धोबिन के पति की मृत्यु हो गई।
इसके बाद सोना धोबिन ने भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हुए पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा की तथा सोमवती अमावस्या का व्रत किया। उसके व्रत और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसके पति को भी पुनर्जीवन प्रदान कर दिया। तभी से सोमवती अमावस्या के व्रत और पीपल पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
क्या है धार्मिक महत्व?
मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने, पितरों का तर्पण करने तथा पीपल वृक्ष की परिक्रमा करने से परिवार में सुख-शांति आती है। इस दिन किया गया दान-पुण्य कई गुना फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु पितृ दोष से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए भी यह व्रत रखते हैं।
पूजा और व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर प्रातः स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक करना, बेलपत्र अर्पित करना, पितरों का तर्पण करना और जरूरतमंदों को दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत कथा का पाठ या श्रवण करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और शिव कृपा प्राप्त होती है।

मेघालय में हनुमान मंदिर में तोड़फोड़ और चोरी, CCTV कैमरे क्षतिग्रस्त
10 मई 2026 | शिलांग, मेघालय
Hanuman Temple Garikhana में शनिवार देर रात अज्ञात बदमाशों द्वारा तोड़फोड़ और चोरी की घटना सामने आई है। घटना के बाद इलाके में तनाव और नाराजगी का माहौल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार यह घटना 10 मई 2026 की रात करीब 1 बजे शिलांग के गरिखाना इलाके स्थित हनुमान मंदिर में हुई। आरोपियों ने मंदिर परिसर में घुसकर मूर्तियां, चांदी के गहने, पूजा सामग्री और दानपात्र में रखी नकदी चोरी कर ली।
मंदिर में घुसकर की तोड़फोड़
एफआईआर के अनुसार बदमाश मंदिर के साइड एंट्रेंस को तोड़कर अंदर घुसे। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की और कई धार्मिक वस्तुओं को नुकसान पहुंचाया।
मंदिर के अंदर रखे पीतल के बर्तन, दीपक, पूजा की थालियां और जल पात्र भी चोरी कर लिए गए। घटना के बाद मंदिर परिसर अस्त-व्यस्त स्थिति में मिला।
कई मूर्तियां चोरी होने की सूचना
पुलिस के अनुसार चोर भगवान कृष्ण, राधा जी और भगवान हनुमान की छोटी प्रतिमाएं अपने साथ ले गए। हालांकि गर्भगृह में स्थापित मुख्य मूर्ति को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
CCTV कैमरे तोड़े, आग लगाने की कोशिश
घटना के दौरान आरोपियों ने सबूत मिटाने के उद्देश्य से मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों को भी नुकसान पहुंचाया। कुछ कैमरों में आग लगाने की कोशिश किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
हालांकि मंदिर के कैमरे क्षतिग्रस्त कर दिए गए थे, लेकिन आसपास के घरों में लगे CCTV कैमरों में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं। पुलिस ने फुटेज कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में जुटी
मामले की जांच Lumdiengjri Police Station द्वारा की जा रही है। पुलिस ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और संदिग्धों की तलाश जारी है।
अधिकारियों के अनुसार घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
घटना के बाद गरिखाना और झालूपारा इलाके के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय निवासियों ने धार्मिक स्थल की सुरक्षा व्यवस्था और रात के समय पुलिस गश्त को लेकर सवाल उठाए हैं।
लोगों का कहना है कि मंदिर जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह घटना धार्मिक स्थल पर हमला, चोरी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला बन गई है, जिस पर पुलिस और प्रशासन की नजर बनी हुई है।