05 जून 2026
हिंदू मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। इस दिन अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से धन, वैभव, ज्ञान, साहस, अन्न, संतान, विजय और समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है।
अष्टलक्ष्मी कौन हैं?
अष्टलक्ष्मी, देवी लक्ष्मी के आठ स्वरूप माने जाते हैं, जो जीवन की अलग-अलग प्रकार की समृद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं:
- आदि लक्ष्मी
- धन लक्ष्मी
- धान्य लक्ष्मी
- गज लक्ष्मी
- संतान लक्ष्मी
- वीर/धैर्य लक्ष्मी
- विजय लक्ष्मी
- विद्या लक्ष्मी
स्तोत्र पाठ का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का नियमित पाठ करने से:
- आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
- घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
- नकारात्मकता दूर होती है।
- जीवन में सफलता और आत्मविश्वास बढ़ता है।
शुक्रवार को क्या करने की सलाह दी जाती है?
- मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें।
- “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करें।
- घर और पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखें।
- सुगंधित पुष्प, चंदन या इत्र अर्पित करें।
ध्यान देने वाली बात
अष्टलक्ष्मी स्तोत्र और उससे जुड़े लाभ धार्मिक आस्था एवं परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में देखा जाता है, न कि आर्थिक सफलता की गारंटी के रूप में।
यदि चाहें तो मैं अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का संक्षिप्त पाठ, हिंदी अर्थ और शुक्रवार की पूजा-विधि भी बता सकता हूँ।

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श्री हुलिगेम्मा देवी जात्रा महोत्सव शुरू, कर्नाटक के कोप्पल में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़
11 मई 2026 | कर्नाटक
Sri Huligemma Devi Temple में सोमवार से “श्री हुलिगेम्मा देवी जात्रा महोत्सव” की शुरुआत हो गई। कर्नाटक के कोप्पल जिले के हुलिगी गांव में आयोजित होने वाला यह महोत्सव दक्षिण भारत के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में माना जाता है। प्रशासन के अनुसार इस वर्ष उत्सव के दौरान लगभग 35 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों को विशेष रोशनी और सजावट से आकर्षक बनाया गया है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं।
14 मई तक चलेंगे मुख्य धार्मिक आयोजन
महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम 11 मई से 14 मई 2026 तक आयोजित किए जाएंगे, हालांकि धार्मिक गतिविधियां और भक्तिमय आयोजन इससे अधिक समय तक चलते रहेंगे।
विशेष रूप से महारथोत्सव के दिन करीब 3 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। इस दौरान देवी के रथ उत्सव और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान मुख्य आकर्षण रहेंगे।
सांसद के. राजशेखर बसवराज हितनाल ने दी तैयारियों की जानकारी
महोत्सव की तैयारियों को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में K. Rajashekar Basavaraj Hitnal ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर व्यवस्थाएं की गई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन, मंदिर समिति और स्थानीय विभाग मिलकर आयोजन को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित करने में जुटे हुए हैं।
महादसोहा कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को मिलेगा निःशुल्क भोजन
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण “महादसोहा” कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन कराया जाएगा। दक्षिण भारतीय मंदिर परंपरा में दसोहा सेवा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंदिर परिसर में भोजन वितरण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
मंदिर परिसर में विशेष रोशनी और सजावट
महोत्सव के अवसर पर मंदिर क्षेत्र को भव्य रोशनी और सजावट से सजाया गया है। रात के समय मंदिर परिसर की आकर्षक प्रकाश व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
इसके अलावा प्रशासन ने सड़क मरम्मत, पार्किंग व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाओं और भीड़ नियंत्रण के लिए भी व्यापक इंतजाम किए हैं।
सुरक्षा के लिए लगाए गए CCTV और विशेष निगरानी दल
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। प्रशासन की ओर से मंदिर क्षेत्र में CCTV कैमरे लगाए गए हैं और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
इसके साथ ही कंट्रोल रूम, बैरिकेडिंग सिस्टम और विशेष भीड़ निगरानी दल भी बनाए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
भगदड़ जैसी स्थिति रोकने के लिए विशेष उपाय
पिछले वर्षों में धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ बढ़ने से अव्यवस्था की स्थिति सामने आने के बाद इस बार प्रशासन ने अतिरिक्त सावधानी बरती है।
भीड़ नियंत्रण के लिए अतिक्रमण हटाए गए हैं, अलग-अलग प्रवेश मार्ग बनाए गए हैं और कई स्थानों पर यातायात प्रतिबंध लागू किए गए हैं। प्रशासन का उद्देश्य अत्यधिक भीड़ और भगदड़ जैसी स्थिति से बचाव करना है।
विभिन्न शहरों से पहुंच रहे श्रद्धालु
महोत्सव में शामिल होने के लिए श्रद्धालु कर्नाटक सहित आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। विशेष रूप से हुबली, गडग, बल्लारी और होसपेटे से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अधिक बताई जा रही है।
उत्सव के दौरान ट्रेनों और बसों की आवाजाही में भी काफी वृद्धि देखी गई है।
तुंगभद्रा नदी स्नान के बाद करते हैं देवी दर्शन
परंपरा के अनुसार बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले तुंगभद्रा नदी में स्नान करते हैं और उसके बाद देवी हुलिगेम्मा के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं। इसे धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ माना जाता है।
महिला श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी
प्रशासन के अनुसार इस वर्ष महिला श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। इसके पीछे कर्नाटक सरकार की “शक्ति” योजना को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिसके अंतर्गत महिलाओं को राज्य परिवहन बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा दी जा रही है।
देवी हुलिगेम्मा की धार्मिक मान्यता
Sri Huligemma Devi Temple को उत्तर कर्नाटक का प्रमुख शक्ति उपासना केंद्र माना जाता है। देवी हुलिगेम्मा को ग्राम देवी, रक्षक शक्ति और मां दुर्गा के स्वरूप के रूप में पूजा जाता है।
कर्नाटक के अलावा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के श्रद्धालुओं में भी इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है।



