नई दिल्ली | 16 सितंबर 2026
भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की T20I सीरीज के दूसरे मुकाबले में अफगानिस्तान को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा। नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारतीय टीम ने अफगानिस्तान को 7 विकेट से हराकर सीरीज पर कब्जा कर लिया। भारत ने 160 रन के लक्ष्य को महज 14.5 ओवर में हासिल कर लिया।
इस हार के बाद अफगानिस्तान के कप्तान इब्राहिम जादरान ने टीम की बल्लेबाजी को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने माना कि उनकी टीम पावरप्ले में अपनी रणनीति के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। उनके मुताबिक टीम का लक्ष्य बड़ा स्कोर खड़ा करना था, लेकिन मैदान पर 200+ रन बनाने वाला इरादा और आक्रामकता दिखाई नहीं दी।
अफगानिस्तान ने बनाए 159 रन
टॉस के बाद अफगानिस्तान ने पहले बल्लेबाजी की। टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और सलामी बल्लेबाज रहमानुल्लाह गुरबाज सिर्फ 3 रन बनाकर आउट हो गए।
इसके बाद कप्तान इब्राहिम जादरान ने पारी को संभालने की कोशिश की। उन्होंने 33 गेंदों पर 37 रन बनाए, लेकिन अपनी पारी को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। नितीश कुमार रेड्डी की गेंद पर उनका कैच रवि बिश्नोई ने पकड़ा।
अफगानिस्तान ने निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 159 रन बनाए।
मध्यक्रम में मोहम्मद नबी और राशिद खान ने टीम को संभालने की कोशिश की। राशिद खान ने 16 गेंदों पर 28 रन की तेज पारी खेली, लेकिन अफगानिस्तान का स्कोर भारत के लिए चुनौतीपूर्ण स्तर तक नहीं पहुंच सका।
पावरप्ले में ही पिछड़ गया अफगानिस्तान
मैच के बाद इब्राहिम जादरान ने माना कि अफगानिस्तान की सबसे बड़ी कमी पावरप्ले में रही।
उनके मुताबिक टीम के पास शुरुआत में तेजी से रन बनाने की योजना थी, लेकिन उस योजना को मैदान पर सही तरीके से लागू नहीं किया जा सका। शुरुआती ओवरों में विकेट गंवाने के कारण बल्लेबाजों पर दबाव बढ़ता गया और टीम उस गति से आगे नहीं बढ़ सकी, जिसकी जरूरत बड़े स्कोर के लिए थी।
यही कारण रहा कि अफगानिस्तान 200 रन के आसपास पहुंचने के बजाय 159 रन पर रुक गया।
जादरान ने बल्लेबाजों की कमी पर क्या कहा?
कप्तान जादरान के बयान का मुख्य फोकस टीम की बल्लेबाजी रणनीति पर रहा। उन्होंने माना कि बल्लेबाजों को अधिक सकारात्मक रवैया अपनाने की जरूरत थी।
टी20 क्रिकेट में शुरुआती छह ओवरों का महत्व बेहद ज्यादा होता है। यदि पावरप्ले में पर्याप्त रन नहीं बनते और विकेट भी गिरते हैं, तो बाद के ओवरों में बल्लेबाजों पर तेजी से रन बनाने का दबाव बढ़ जाता है।
अफगानिस्तान के साथ दूसरे T20I में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
भारत ने 14.5 ओवर में हासिल किया लक्ष्य
160 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की।
अभिषेक शर्मा ने 19 गेंदों पर 39 रन बनाए, जबकि संजू सैमसन ने सिर्फ 22 गेंदों पर 57 रन की तेज पारी खेली। सैमसन की पारी में 7 चौके और 4 छक्के शामिल रहे।
इसके बाद ईशान किशन ने नाबाद 38 रन बनाए और तिलक वर्मा ने नाबाद 15 रन बनाकर टीम को जीत तक पहुंचाया।
भारत ने 14.5 ओवर में 163/3 बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
नितीश कुमार रेड्डी बने मैच के हीरो
भारत की जीत में गेंदबाज नितीश कुमार रेड्डी का भी अहम योगदान रहा। उन्होंने 3 ओवर में सिर्फ 24 रन देकर 3 विकेट लिए।
उन्होंने इब्राहिम जादरान को भी आउट किया और अफगानिस्तान की पारी के मध्यक्रम पर दबाव बनाए रखा। उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
राशिद खान ने तीन विकेट लिए, लेकिन काम नहीं आया
अफगानिस्तान के लिए कप्तान के अलावा राशिद खान ने गेंद से प्रभाव छोड़ा। उन्होंने भारतीय पारी में 3 विकेट लिए और भारत के शीर्ष क्रम को चुनौती देने की कोशिश की।
हालांकि, भारत के बल्लेबाजों ने जरूरी रनरेट को नियंत्रण में रखा और लक्ष्य तक पहुंचने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। भारत ने सात विकेट से जीत दर्ज कर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली।
अब अफगानिस्तान के सामने क्लीन स्वीप बचाने की चुनौती
दो मुकाबले हारने के बाद अफगानिस्तान अब सीरीज का अंतिम मैच जीतकर सम्मान बचाने की कोशिश करेगा।
वहीं भारतीय टीम के पास अब तीन मैचों की सीरीज को 3-0 से क्लीन स्वीप करने का मौका है। सीरीज का तीसरा और अंतिम T20I 17 सितंबर 2026 को खेला जाना है।

अर्जेंटीना से 5-3 से हारकर वर्ल्ड कप से बाहर हुआ भारत, टूटा खिताब जीतने का सपना
एम्स्टेलवीन, नीदरलैंड्स, 24 अगस्त 2026
भारतीय पुरुष हॉकी टीम का FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में सफर निराशाजनक अंदाज में समाप्त हो गया। सोमवार को वागेनर स्टेडियम में खेले गए Pool E के बेहद अहम मुकाबले में अर्जेंटीना ने भारत को 5-3 से हरा दिया। इस हार के साथ भारतीय टीम सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई और एक बार फिर विश्व कप खिताब जीतने का सपना अधूरा रह गया।
भारत इस मुकाबले में पहले से ही मुश्किल स्थिति में था। सेमीफाइनल की उम्मीद कायम रखने के लिए उसे अर्जेंटीना के खिलाफ बड़े अंतर से जीत दर्ज करनी थी। इसके साथ ही दूसरे मुकाबले के नतीजे पर भी भारत की नजर थी। लेकिन मुकाबले में अर्जेंटीना ने शुरुआत से ही दबाव बनाकर भारत की मुश्किलें बढ़ा दीं।
शुरुआत में ही भारत पर भारी पड़ा अर्जेंटीना
मैच शुरू होते ही अर्जेंटीना ने आक्रामक रुख अपनाया। मुकाबले के शुरुआती मिनट में ही जोकिन टोस्कानी ने गोल करके अर्जेंटीना को 1-0 की बढ़त दिला दी।
भारत अभी इस झटके से उबर भी नहीं पाया था कि छठे मिनट में निकोलस डेला टोरे ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर अर्जेंटीना की बढ़त 2-0 कर दी। शुरुआती छह मिनट में दो गोल खाने के कारण भारत पर काफी दबाव आ गया।
सुखजीत सिंह ने जगाई वापसी की उम्मीद
दो गोल से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम ने वापसी की कोशिश शुरू की। 10वें मिनट में सुखजीत सिंह ने शानदार गोल करते हुए भारत का स्कोर 1-2 कर दिया।
इस गोल के बाद भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा और टीम ने अर्जेंटीना के सर्किल में दबाव बनाने की कोशिश की। हालांकि, अर्जेंटीना की मजबूत रक्षापंक्ति ने भारत को ज्यादा स्पष्ट मौके नहीं दिए। पहला हाफ खत्म होने तक अर्जेंटीना 2-1 से आगे रहा।
दूसरे हाफ में अर्जेंटीना ने बढ़ाई बढ़त
तीसरे क्वार्टर में अर्जेंटीना ने फिर हमला तेज किया। टॉमस डोमेने ने 33वें मिनट में गोल करके अर्जेंटीना की बढ़त 3-1 कर दी।
भारत के पास वापसी के लिए कई मौके आए। टीम को पेनल्टी कॉर्नर भी मिले, लेकिन भारतीय खिलाड़ी उन्हें गोल में बदलने में सफल नहीं रहे। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के ड्रैग-फ्लिक भी अपेक्षित नतीजा नहीं दे सके।
इसके बाद अर्जेंटीना को पेनल्टी स्ट्रोक मिला और डोमेने ने इसे गोल में बदलकर अपना दूसरा गोल किया। स्कोर 4-1 होते ही भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद लगभग खत्म हो गई।
53वें मिनट में अर्जेंटीना का पांचवां गोल
अर्जेंटीना यहीं नहीं रुका। 53वें मिनट में लुकास टोस्कानी ने शानदार रिवर्स हिट के जरिए गोल दाग दिया।
इस गोल के साथ अर्जेंटीना ने 5-1 की बड़ी बढ़त हासिल कर ली। भारत के लिए अब मुकाबले में वापसी करना बेहद मुश्किल हो गया था।
आखिरी मिनटों में भारत ने किया पलटवार
मुकाबले के अंतिम कुछ मिनटों में भारतीय टीम ने संघर्ष जरूर किया। 58वें मिनट में सुखजीत सिंह ने अपना दूसरा गोल करके स्कोर 5-2 किया।
इसके ठीक अगले मिनट में भारत को पेनल्टी स्ट्रोक मिला, जिसे हार्दिक सिंह ने गोल में बदल दिया। इससे स्कोर 5-3 हो गया और भारतीय टीम ने थोड़ी देर के लिए उम्मीद जगाई।
लेकिन समय बहुत कम बचा था। भारत ने अंतिम क्षणों में एक और पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया, मगर अर्जेंटीना के गोलकीपर टॉमस सैंटियागो ने शानदार बचाव करते हुए भारत की आखिरी उम्मीद भी खत्म कर दी।
सेमीफाइनल का सपना हुआ खत्म
अंतिम सीटी बजते ही अर्जेंटीना ने मुकाबला 5-3 से अपने नाम कर लिया। भारत को इस मैच में सिर्फ जीत नहीं, बल्कि पर्याप्त अंतर से जीत की जरूरत थी। हार के साथ भारत Pool E में बिना अंक के रह गया और सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया।
अर्जेंटीना की टीम ने जीत के साथ अपने खाते में छह अंक कर लिए और सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार रखीं। अब उसकी स्थिति नीदरलैंड्स और इंग्लैंड के मुकाबले के नतीजे पर भी निर्भर थी।
भारत अब खेलेगा 7वें-8वें स्थान का मुकाबला
विश्व कप के सेमीफाइनल से बाहर होने के बाद भारत अब 7वें-8वें स्थान के लिए वर्गीकरण मुकाबला खेलेगा। रिपोर्ट के अनुसार भारत का सामना सह-मेजबान बेल्जियम से होना है। यह मुकाबला 28 अगस्त को निर्धारित है।
पेनल्टी कॉर्नर बने भारत की बड़ी कमजोरी
अर्जेंटीना के खिलाफ भारत की हार की एक बड़ी वजह पेनल्टी कॉर्नर को गोल में नहीं बदल पाना भी रही। भारतीय टीम को कई मौके मिले, लेकिन अर्जेंटीना के डिफेंस और गोलकीपर ने उन्हें रोक दिया।
दूसरी ओर अर्जेंटीना ने भारत की रक्षात्मक गलतियों का पूरा फायदा उठाया। शुरुआती छह मिनट में दो गोल गंवाने के बाद भारत लगातार दबाव में खेलता रहा।
51 साल से विश्व कप खिताब का इंतजार
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने आखिरी बार 1975 में विश्व कप खिताब जीता था। इसके बाद से टीम इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी को दोबारा हासिल नहीं कर सकी है।
2026 विश्व कप में भारतीय टीम से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अर्जेंटीना के खिलाफ हार ने एक बार फिर खिताब के इंतजार को लंबा कर दिया। भारत अब टूर्नामेंट को बेहतर स्थान पर खत्म करने के लिए 7वें स्थान की लड़ाई में उतरेगा।
भारत के लिए निराशाजनक अभियान
इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने शुरुआत में पाकिस्तान को 5-3 से हराकर शानदार शुरुआत की थी। इसके बाद टीम दूसरे दौर में पहुंची, लेकिन Pool E में नीदरलैंड्स के खिलाफ 1-3 की हार और फिर अर्जेंटीना के खिलाफ 3-5 की हार ने उसकी सेमीफाइनल की उम्मीदें खत्म कर दीं।
अर्जेंटीना के खिलाफ मैच में भारत ने अंतिम क्वार्टर में वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन शुरुआती और मध्य चरण में किए गए नुकसान की भरपाई नहीं हो सकी।

400 टेस्ट विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज, जिन्होंने बदली ब्लैककैप्स की किस्मत
वेलिंगटन | 3 जुलाई 2026
विश्व क्रिकेट के महानतम तेज गेंदबाजों में शामिल सर रिचर्ड हैडली का नाम आज भी न्यूज़ीलैंड क्रिकेट के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 1980 के दशक में जब न्यूज़ीलैंड की टीम दुनिया की मजबूत टीमों के सामने संघर्ष कर रही थी, तब हैडली ने अपनी घातक गेंदबाजी और शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर टीम को नई पहचान दिलाई। यही कारण है कि उन्हें आधुनिक न्यूज़ीलैंड क्रिकेट का सबसे बड़ा निर्माता माना जाता है।
रिचर्ड हैडली ने अपने 17 वर्ष लंबे टेस्ट करियर में 86 मैचों में 431 विकेट हासिल किए। वह टेस्ट क्रिकेट में 400 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज बने। उन्होंने अपने करियर में 36 बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा किया, जो आज भी विश्व क्रिकेट के सबसे बेहतरीन रिकॉर्ड में गिना जाता है। इसके अलावा उन्होंने 3,124 रन भी बनाए और खुद को एक बेहतरीन ऑलराउंडर के रूप में स्थापित किया।
1985-86 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हैडली का प्रदर्शन आज भी क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार गेंदबाजी श्रृंखलाओं में गिना जाता है। उन्होंने ब्रिस्बेन टेस्ट में 9 विकेट और पूरी सीरीज में 33 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। उनकी सटीक लाइन-लेंथ, तेज स्विंग और घातक सीम गेंदबाजी के कारण ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज उनके सामने बेहद सतर्क नजर आते थे।
रिचर्ड हैडली के नेतृत्व और प्रदर्शन का असर पूरी न्यूज़ीलैंड टीम पर दिखाई दिया। उनके दौर में ब्लैककैप्स ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीमों को चुनौती देना शुरू किया। क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि हैडली ने अकेले दम पर न्यूज़ीलैंड क्रिकेट की सोच और पहचान बदल दी।
1990 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी रिचर्ड हैडली का योगदान जारी रहा। क्रिकेट के प्रति उनकी सेवाओं के लिए उन्हें ‘सर’ की उपाधि से सम्मानित किया गया और बाद में उन्हें ICC Hall of Fame में भी शामिल किया गया। आज भी दुनिया भर के तेज गेंदबाज उन्हें अपनी प्रेरणा मानते हैं।
क्रिकेट इतिहास में रिचर्ड हैडली का नाम केवल उनके रिकॉर्ड्स के लिए नहीं, बल्कि न्यूज़ीलैंड क्रिकेट को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए भी हमेशा याद किया जाएगा। उनका करियर इस बात का उदाहरण है कि एक महान खिलाड़ी पूरे देश की क्रिकेट संस्कृति बदल सकता है।

वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी नजरें, श्रीलंका के खिलाफ भारत-A की अग्निपरीक्षा
दांबुला (श्रीलंका), 15 जून 2026
भारत-A और श्रीलंका-A के बीच त्रिकोणीय वनडे सीरीज का मुकाबला आज दांबुला में खेला जाएगा। मैच से पहले सबसे ज्यादा चर्चा 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की हो रही है, जिन्होंने आईपीएल 2026 में अपने विस्फोटक प्रदर्शन से क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा था।
भारत-A की कमान Tilak Varma के हाथों में है, जबकि अनुभवी बल्लेबाज Ruturaj Gaikwad टीम के बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ माने जा रहे हैं। चयनकर्ताओं की नजर भी इस सीरीज पर है, क्योंकि कई खिलाड़ी सीनियर टीम में जगह बनाने की दौड़ में शामिल हैं।
पिछले मुकाबले में श्रीलंका-A के खिलाफ वैभव बड़ी पारी नहीं खेल सके थे और 14 रन बनाकर आउट हो गए थे। हालांकि उनकी आक्रामक शुरुआत ने संकेत दे दिए थे कि वह किसी भी समय मैच का रुख बदल सकते हैं।
वहीं, ऋतुराज गायकवाड़ ने पिछले मैच में शानदार शतक जड़कर भारत-A को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला था। उनकी 101 रन की पारी की बदौलत टीम ने प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा किया और अंततः रोमांचक जीत हासिल की।
कप्तान तिलक वर्मा पर दोहरी जिम्मेदारी होगी। उन्हें बल्लेबाजी में योगदान देने के साथ-साथ युवा खिलाड़ियों को संभालना भी होगा। पिछले मैच में उन्होंने अर्धशतक लगाकर अपनी उपयोगिता साबित की थी।
दांबुला की पिच शुरुआत में बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जा रही है, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा, स्पिनरों को सहायता मिल सकती है। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी की आक्रामक बल्लेबाजी और ऋतुराज की संयमित पारी भारत-A के लिए अहम साबित हो सकती है।
क्रिकेट प्रेमियों की नजरें एक बार फिर वैभव सूर्यवंशी पर टिकी होंगी। अगर युवा बल्लेबाज आज बड़ी पारी खेलने में सफल रहते हैं, तो वह सीनियर भारतीय टीम में अपनी दावेदारी और मजबूत कर सकते हैं।
प्रमुख बिंदु
🔹 वैभव सूर्यवंशी 36 रन बनाकर आउट हुए।
🔹 भारत ए को शुरुआती झटका लगा।
🔹 अफगानिस्तान ए के गेंदबाजों ने बनाया दबाव।
🔹 फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए भारत ए के लिए जीत अहम।
🔹 मध्यक्रम के बल्लेबाजों पर बढ़ी जिम्मेदारी।

IPL 2026: जेसिका हेड के बयान ने बटोरी सुर्खियां, RCB मैच के बाद खुलासा
दिनांक: 25 मई 2026
मुकाबला: सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB)
मुख्य अपडेट: ट्रेविस हेड की पत्नी जेसिका हेड का ऑस्ट्रेलियाई मीडिया को दिया गया बयान
## विवाद की बड़ी बातें (Key Takeaways)
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मैदान की जंग, सोशल मीडिया पर गाली-गलौज: हैदराबाद और बेंगलुरु के बीच हुए हाई-वोल्टेज मैच के बाद ट्रेविस हेड की पत्नी, दोस्तों और रिश्तेदारों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नफरत भरे कमेंट्स की बाढ़ आ गई।
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जेसिका का बयान: जेसिका हेड ने दर्द साझा करते हुए कहा कि यह बिल्कुल 2023 के वनडे वर्ल्ड कप फाइनल के बाद मिले टॉर्चर जैसा है; फैंस को नहीं भूलना चाहिए कि खिलाड़ियों के पीछे भी परिवार और इंसान होते हैं।
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नो-हैंडशेक वीडियो वायरल: मैच खत्म होने के बाद विराट कोहली द्वारा ट्रेविस हेड से हाथ मिलाए बिना आगे बढ़ जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है, जिसने इस विवाद को और हवा दी।
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दिग्गजों का बचाव: पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान सहित कई क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने इसे मैदान का स्वाभाविक जोश बताते हुए फैंस से संयम बरतने की अपील की है।
## मुख्य समाचार: ‘वर्ल्ड कप 2023’ जैसा बर्ताव, जेसिका ने बयां की आपबीती
हैदराबाद/मेलबर्न, 25 मई 2026
आईपीएल 2026 में 22 मई (शुक्रवार) को सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के बीच खेले गए मुकाबले का तनाव अब मैदान से बाहर निकलकर खिलाड़ियों के घरों तक पहुंच गया है। मुकाबले के दौरान विराट कोहली और ऑस्ट्रेलियाई स्टार ट्रेविस हेड के बीच तीखी बहस देखने को मिली थी। इस घटना के बाद कुछ सिरफिरे फैंस ने सोशल मीडिया पर ट्रेविस हेड की पत्नी जेसिका हेड और उनके करीबियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया आउटलेट ‘द एडवरटाइजर’ से बातचीत में जेसिका हेड ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा:
“यह बिल्कुल वैसा ही लग रहा है जैसा 2023 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत की हार के बाद हमारे साथ हुआ था। जब मैं सुबह उठी तो मेरे सोशल मीडिया अकाउंट्स नफरत भरे संदेशों से भरे पड़े थे। हम तो ठीक हैं, लेकिन लोग हमारे दोस्तों और परिवार को भी नहीं छोड़ रहे हैं, उन्हें निशाना बना रहे हैं।”
जेसिका ने आगे कहा, “खेल में जुनून (Passion) होना अच्छी बात है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मैदान पर खेलने वाले खिलाड़ियों के पीछे उनके परिवार और असल इंसान भी होते हैं। उम्मीद है कि लोग सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के प्रति थोड़ी दयालुता और सम्मान दिखाएंगे।”
## क्या था पूरा मामला? मैदान पर क्यों भिड़े कोहली और हेड?
यह पूरा विवाद बेंगलुरु की बल्लेबाजी के दौरान शुरू हुआ, जब आरसीबी 256 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा कर रही थी।
| घटनाक्रम (Timeline) | मैदान पर क्या हुआ? |
| चौथे ओवर की स्लेजिंग | जब वेंकटेश अय्यर शानदार चौके-छक्के लगा रहे थे, तब नॉन-स्ट्राइकर एंड पर खड़े विराट कोहली मिड-विकेट पर फील्डिंग कर रहे ट्रेविस हेड को बार-बार गेंदबाजी करने के लिए उकसाते दिखे। कमेंटेटर्स के मुताबिक कोहली ने कहा— “आओ, थोड़ी ऑफ स्पिन डालो।” |
| ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ का ताना | कोहली यहीं नहीं रुके, उन्होंने हेड की तरफ इशारा करते हुए ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ (Impact Player) सब्स्टीट्यूशन का भी मजाक उड़ाया। बता दें कि हेड अक्सर बल्लेबाजी के बाद फील्डिंग से बाहर हो जाते हैं। |
| पलटवार और विकेट | विराट कोहली महज 15 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद जब हेड खुद 18वें ओवर में गेंदबाजी करने आए, तो उन्होंने अपनी दूसरी ही गेंद पर आरसीबी के कप्तान रजत पाटीदार को आउट कर दिया। इसके बाद हेड ने सोशल मीडिया पर ‘कीप द बॉडी गेसिंग’ लिखकर एक स्टोरी भी पोस्ट की। |
| Snub (नजरअंदाज करना) | असली विवाद मैच के बाद हुआ। सनराइजर्स की 55 रनों से जीत के बाद जब दोनों टीमों के खिलाड़ी हाथ मिला रहे थे, तब हेड ने हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन कोहली उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए ईशान किशन और पैट कमिंस से हाथ मिलाकर आगे बढ़ गए। |
## पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां
यह पहली बार नहीं है जब ट्रेविस हेड के परिवार को इस तरह की ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले:
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2023 वनडे वर्ल्ड कप फाइनल (अहमदाबाद में हेड के शतक के बाद)।
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वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) फाइनल 2023।
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2024 का बॉक्सिंग डे टेस्ट।
इन सभी मौकों पर जब-जब भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा, तब-तब कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने हेड की मासूम बेटी और पत्नी को बेहद आपत्तिजनक धमकियां दी थीं। क्रिकेट पंडितों का मानना है कि मैदान की प्रतिद्वंद्विता को खेल के दायरे में ही रखा जाना चाहिए और खिलाड़ियों के परिवारों को इसमें घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
IPL 2026 में BCCI का बड़ा Security Alert, Teams को “Honey-Trap” Warning
8 May 2026
23 अप्रैल 2026
आईपीएल 2026 के बीच एक दिलचस्प क्रिकेट बहस सामने आई है, जहां Kevin Pietersen और Alastair Cook युवा खिलाड़ियों के विकास को लेकर अलग-अलग राय रखते नजर आए। चर्चा का केंद्र हैं इंग्लैंड के उभरते खिलाड़ी Jacob Bethell—क्या उन्हें आईपीएल में रहकर सीखना चाहिए या नियमित मैच खेलने के लिए इंग्लैंड लौट जाना चाहिए?
क्या है मुद्दा?
यह बहस एक बड़े सवाल पर टिकी है—एक युवा खिलाड़ी के लिए ज्यादा जरूरी क्या है:
मैच खेलने का लगातार अनुभव या फिर बड़े खिलाड़ियों के बीच रहकर सीखना?
आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में कई युवा खिलाड़ी प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं बना पाते, लेकिन उन्हें विश्वस्तरीय माहौल जरूर मिलता है।
Cook की सोच: “गेम टाइम सबसे अहम”
Alastair Cook का मानना है कि:
- Jacob Bethell को आईपीएल में पर्याप्त मौके नहीं मिल रहे
- लगातार बेंच पर बैठना उनके विकास को रोक सकता है
- उन्हें इंग्लैंड जाकर काउंटी क्रिकेट (Warwickshire) खेलना चाहिए
उनके मुताबिक, असली सुधार मैच खेलने से ही आता है, न कि सिर्फ अभ्यास या ड्रेसिंग रूम में रहने से।
Pietersen का तर्क: “IPL ही असली क्लासरूम”
वहीं Kevin Pietersen इस सोच से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है:
- आईपीएल में रहना अपने आप में एक बड़ी सीख है
- दुनिया के टॉप खिलाड़ियों के साथ रहने से सोच और आत्मविश्वास बदलता है
- भले ही मैच न खेलो, लेकिन सीखना लगातार जारी रहता है
उन्होंने साफ कहा कि भारत में रहकर आईपीएल का हिस्सा बनना ही युवा खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा अवसर है।
Bethell का नजरिया
Jacob Bethell ने भी आईपीएल में बने रहने के फैसले का समर्थन किया। उनका मानना है:
- टूर्नामेंट का माहौल बेहद हाई-लेवल का है
- यहां रहकर हर खिलाड़ी अपने आप बेहतर होता है
- बेंच पर रहकर भी exposure और सीख मिलती है
क्यों चर्चा में हैं Bethell?
- उम्र: 22 साल
- इंग्लैंड के उभरते टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज़
- हाल ही में Ashes में 154 रन की शानदार पारी
- भविष्य के स्टार के रूप में देखे जा रहे हैं
दो अलग सोच, एक बड़ा सवाल
इस बहस ने क्रिकेट की दो अलग philosophies को सामने रखा है:
1. Traditional Approach (Cook)
- ज्यादा से ज्यादा मैच खेलना
- निरंतरता बनाना
- मैदान का अनुभव सबसे अहम
2. Modern Approach (Pietersen)
- exposure और माहौल से सीखना
- बड़े खिलाड़ियों के साथ समय बिताना
- high-pressure environment में खुद को ढालना
IPL: सिर्फ लीग नहीं, एक सिस्टम
आज आईपीएल केवल एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है जहां खिलाड़ी:
- रणनीति और गेम अवेयरनेस सीखते हैं
- दबाव में प्रदर्शन करना सीखते हैं
- विश्वस्तरीय खिलाड़ियों की आदतों को करीब से समझते हैं
निष्कर्ष
इस बहस में दोनों पक्षों की अपनी-अपनी मजबूती है। Alastair Cook जहां मैच खेलने को प्राथमिकता देते हैं, वहीं Kevin Pietersen exposure को उतना ही अहम मानते हैं।
हालांकि, आधुनिक क्रिकेट का ट्रेंड धीरे-धीरे उस दिशा में बढ़ता दिख रहा है, जहां सीख और अनुभव का मिश्रण ही खिलाड़ी को लंबी दौड़ में सफल बनाता है।
टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की सबसे बड़ी हार: साउथ अफ्रीका ने 76 रन से हराया, सेमीफाइनल की राह मुश्किल
23 फरवरी 2026
भारत राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को ICC पुरुष टी20 विश्व कप के इतिहास की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। रविवार को खेले गए सुपर-8 चरण के तीसरे मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रीय क्रिकेट टीम ने भारत को 76 रन से करारी शिकस्त दी। इस हार के साथ ही टूर्नामेंट में टीम इंडिया का लगातार जीत का सिलसिला भी थम गया और सेमीफाइनल में पहुंचने की राह कठिन हो गई है।
मैच में दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए मजबूत स्कोर खड़ा किया और भारतीय गेंदबाज़ों पर दबाव बनाए रखा। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम शुरुआत से ही लय में नहीं दिखी। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के कारण मध्यक्रम पर दबाव बढ़ गया और टीम नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही। अंततः पूरी टीम निर्धारित ओवर पूरे होने से पहले ही कम स्कोर पर सिमट गई, जिससे हार का अंतर काफी बड़ा हो गया।
इस परिणाम का असर अंक तालिका पर भी पड़ा है। सुपर-8 चरण में अब भारत की स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है और सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए उसे अपने बचे हुए दोनों मैच हर हाल में जीतने होंगे। यदि टीम ऐसा करने में सफल रहती है, तभी अंतिम चार में पहुंचने की उम्मीद बनी रहेगी; वरना टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा बढ़ जाएगा।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस हार ने टीम की बल्लेबाज़ी क्रम और रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। खास तौर पर दबाव वाले मैचों में साझेदारी न बन पाना और रन गति बनाए रखने में असफलता चिंता का विषय बन गई है। हालांकि टीम प्रबंधन को भरोसा है कि खिलाड़ी जल्द वापसी करेंगे और अगले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन दिखाएंगे।
अब सभी की निगाहें भारत के अगले मैच पर टिकी हैं, जहां जीत ही एकमात्र विकल्प होगी। यह मुकाबला तय करेगा कि टीम टूर्नामेंट में आगे बढ़ेगी या उसका अभियान यहीं समाप्त हो जाएगा।
AUS vs IND: Jasprit Bumrah ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में बनाएं ये धांसू 5 रिकॉर्ड्स, इस मामले में रहे सबसे तेज
भारतीय टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में धमाकेदार प्रदर्शन किया। टीम इंडिया को भले ही सीरीज में शिकस्त मिली हो लेकिन बुमराह के प्रदर्शन को फैंस लंबे समय तक याद रखेंगे। दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 5 ऐसे धांसू रिकॉर्ड्स बने जो उनकी महानता को साबित करते हैं। चलिए आपको बताते हैं कि बुमराह ने क्या कमाल किया।
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय टीम के लिए बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में जसप्रीत बुमराह ने अकेले दमदार प्रदर्शन किया। पर्थ में 295 रन की जीत दर्ज करने के बाद भारत ने सीरीज में 0-1 की बढ़त बनाई थी, लेकिन फिर वह पांच मैचों की सीरीज 1-3 के अंतर से गंवा बैठी। इसका नतीजा यह रहा कि भारतीय टीम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में पहुंचने की हैट्रिक लगाने से चूक गई। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच डब्ल्यूटीसी फाइनल खेला जाएगा।
बुमराह ने अकेले की लड़ाई
बता दें कि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में बुमराह ने भारतीय तेज गेंदबाजी का आक्रमण अकेले अपने कंधों पर उठाया। मोहम्मद सिराज अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से दूर रहे जबकि मेहमान टीम को तीसरे तेज गेंदबाज की जगह भरने के लिए तीन गेंदबाजों का उपयोग करना पड़ा। इनमें से कोई भी बुमराह के बराबर खूंखार नजर नहीं आया।
इस बात का रहा मलाल
वैसे, बुमराह ने पूरी सीरीज में शानदार गेंदबाजी करके कई कीर्तिमान गढ़े, लेकिन सिडनी की दूसरी पारी में गेंदबाजी नहीं करने का उन्हें मलाल जरूर रहेगा। बुमराह पीठ दर्द की समस्या के कारण गेंदबाजी नहीं कर सके थे। उन्होंने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की 9 पारियों में 13.06 की औसत से 32 विकेट चटकाए और प्लेयर ऑफ द सीरीज का अवॉर्ड हासिल किया।चलिए आपको बताते हैं कि बुमराह ने हाल ही में संपन्न सीरीज में कौन-से पांच बड़े रिकॉर्ड्स बनाए।
1) बुमराह का कमाल
जसप्रीत बुमराह ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 32 विकेट चटकाए। यह विदेशी टेस्ट सीरीज में किसी भारतीय द्वारा लिए गए सबसे ज्यादा विकेट रहे। बुमराह ने पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर बिशन सिंह बेदी का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 1977-78 में पांच मैचों की सीरीज में 31 विकेट झटके थे। बेदी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह कमाल किया था। बीएस चंद्रशेखर इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर हैं। चंद्रशेखर ने 1977-78 ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 28 विकेट झटके थे।
2) सबसे तेज 200 विकेट
जसप्रीत बुमराह ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए बॉक्सिंग-डे टेस्ट के दौरान लाल गेंद क्रिकेट में अपने 200 शिकार पूरे किए। वह सबसे तेज 200 टेस्ट विकेट लेने वाले भारतीय तेज गेंदबाज बने। उन्होंने अपने करियर के 44वें टेस्ट में यह इतिहास रचा। बुमराह पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के बाद सबसे तेज 200 टेस्ट विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज बने। याद हो कि अश्विन ने केवल 37 टेस्ट में 200 विकेट का आंकड़ा छुआ था।
3) एकमात्र ऐसे गेंदबाज हैं बुमराह
जसप्रीत बुमराह टेस्ट इतिहास के एकमात्र गेंदबाज हैं, जिन्होंने 20 से कम की औसत रखते हुए 200 विकेट चटकाए। भारतीय तेज गेंदबाज ने 19.40 की औसत से 205 टेस्ट विकेट हासिल किए हैं। वेस्टइंडीज के महान तेज गेंदबाज मालकम मार्शल लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं, जिनकी औसत 20.94 की थी। फिर जोएल गार्नर (20.97) और कर्टली एंब्रोज (20.97) क्रमश: तीसरे व चौथे स्थान पर काबिज हैं। इंग्लैंड के फ्रेड ट्रूमैन टॉप-5 की लिस्ट को पूरा करते हैं, जिनकी औसत 21.57 की थी।
सबसे तेज 200 विकेट और सबसे कम औसत
- जसप्रीत बुमराह – 200 विकेट – 19.40 औसत
- मालकम मार्शल – 200 विकेट – 20.94 औसत
- जोएल गार्नर – 200 विकेट – 20.97 औसत
- कर्टली एंब्रोज – 200 विकेट – 20.97 औसत
- फ्रेड ट्रूमैन – 200 विकेट – 21.57 औसत
4) सेना देशों में सबसे ज्यादा विकेट
जसप्रीत बुमराह ने 2018 में केपटाउन में टेस्ट डेब्यू किया और अब तक 45 टेस्ट में 205 विकेट झटक चुके हैं। इनमें से 153 विकेट सेना देशों (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) में लिए गए हैं। इस तरह बुमराह सेना देशों में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज बने। उन्होंने अनिल कुंबले (141) को पीछे छोड़ा। ईशांत शर्मा (130) और मोहम्मद शमी (123) ने क्रमश: तीसरा व चौथा स्थान हासिल कर रखा है।
सेना देशों में सर्वाधिक विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज
- जसप्रीत बुमराह – 153 विकेट
- अनिल कुंबले – 141 विकेट
- ईशांत शर्मा – 130 विकेट
- मोहम्मद शमी – 123 विकेट
5) बुमराह का कमाल
जसप्रीत बुमराह सेना देशों में सबसे ज्यादा एक पारी में पांच विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज बन गए हैं। बुमराह ने सेना देशों में 9 बार पंजा मारा। भारतीय तेज गेंदबाज ने ऑस्ट्रेलिया में चार बार एक पारी में पांच विकेट चटकाए। उन्होंने इंग्लैंड में दो बार जबकि दक्षिण अफ्रीका में तीन बार एक पारी में पांच विकेट लेने का कमाल किया।
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव सेना देशों में सात बार एक पारी में पांच विकेट लेकर इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर काबिज हैं। देव ने ऑस्ट्रेलिया में पांच बार जबकि इंग्लैंड में दो बार एक पारी में पांच विकेट झटके।




