भोपाल | 4 नवंबर 2026
मध्य प्रदेश पुलिस महकमे से एक बड़ी खबर सामने आई है। सागर के पूर्व पुलिस अधीक्षक (SP) और 2014 बैच के IPS अधिकारी अनुराग सुजानिया ने भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 2 नवंबर को राज्य सरकार को अपना त्यागपत्र सौंपा। खास बात यह है कि उनका इस्तीफा सागर SP के पद से हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय में नई जिम्मेदारी दिए जाने के महज चार दिन बाद आया है। सुजानिया ने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारण बताए हैं।
27 अक्टूबर को हुआ था तबादला
राज्य सरकार ने 27 अक्टूबर को प्रशासनिक फेरबदल करते हुए अनुराग सुजानिया को सागर SP के पद से हटाकर भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) के पद पर पदस्थ किया था। उनकी जगह 2016 बैच के IPS अधिकारी संजीव कुमार सिन्हा को सागर का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया।
यह फेरबदल सागर और देवास जिलों के कलेक्टरों तथा पुलिस अधीक्षकों के तबादलों के साथ किया गया था।
जहरीली शराब कांड के बाद चर्चा में आया था नाम
अनुराग सुजानिया का तबादला सागर जिले के बंडा क्षेत्र में हुए जहरीली शराब कांड के बाद हुआ था। सितंबर 2026 में हुई इस घटना में अवैध रूप से बनाई गई जहरीली शराब के सेवन से सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कम से कम 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी। इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।
सुजानिया उस समय सागर के SP थे और जहरीली शराब मामले की जांच की निगरानी कर रहे थे। घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में फेरबदल किया गया था।
इस्तीफे की वजह बताई व्यक्तिगत
सुजानिया ने अपने इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। हालांकि, उनके तबादले और इस्तीफे के बीच कम समय होने के कारण पुलिस महकमे में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अचानक हुए तबादले से अधिकारी असहज थे, लेकिन इस्तीफे के पीछे किसी अन्य वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अभी इस्तीफा स्वीकार होने की पुष्टि नहीं
अनुराग सुजानिया का इस्तीफा राज्य सरकार को भेजा गया है, लेकिन फिलहाल इसे स्वीकार किए जाने की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। सरकार के फैसले के बाद ही उनकी सेवा से अलग होने की प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट होगी।

भोपाल प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई की दो तस्वीरें चर्चा में, बच्ची को देखकर मां की मदद के लिए आगे आया पुलिसकर्मी; दूसरी महिला को घसीटकर वैन में बैठाया
भोपाल, मध्य प्रदेश | 30 अक्टूबर 2026
भोपाल में गुरुवार को शिक्षक भर्ती के चयनित अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। नियुक्ति पत्र जारी करने और जॉइनिंग प्रक्रिया शुरू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने बोर्ड ऑफिस चौराहे पर सड़क जाम कर दिया। इसके बाद पुलिस ने रास्ता खुलवाने के लिए कार्रवाई की और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
प्रदर्शन के दौरान दिखे दो अलग-अलग दृश्य
इस प्रदर्शन की दो तस्वीरें विशेष रूप से चर्चा में हैं। एक तस्वीर में एक पुलिसकर्मी छोटी बच्ची को देखकर उसकी मां को प्रदर्शनकारियों की भीड़ से अलग सुरक्षित स्थान पर ले जाता दिखाई दे रहा है। वहीं दूसरी तस्वीर में पुलिसकर्मी एक महिला प्रदर्शनकारी को पकड़कर घसीटते हुए पुलिस वैन में बैठाते नजर आ रहे हैं। इन दोनों दृश्यों ने पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ हुए व्यवहार को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें जबरन सड़क से हटाया और इस दौरान महिला अभ्यर्थियों के साथ भी खींचतान की गई। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर यातायात बाधित कर दिया था। आम लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए रास्ता खाली कराना जरूरी था।
नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग की मांग को लेकर प्रदर्शन
प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 की मेरिट सूची में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया में सफल होने और मेरिट में जगह बनाने के बावजूद उन्हें अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिले हैं। अभ्यर्थी लंबे समय से नियुक्ति और पदस्थापना की मांग उठा रहे हैं।
उनकी प्रमुख मांग है कि पात्र अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं और स्कूलों में पदस्थापना की प्रक्रिया शुरू की जाए। अभ्यर्थियों ने भर्ती नियमावली के क्लॉज-49 और डीएलएड की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी शर्तों पर भी सवाल उठाए हैं।
सड़क पर लेटकर जताया विरोध, हिरासत के दौरान गाया राष्ट्रगान
गुरुवार को प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थी सड़क पर लेट गए और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर पुलिस को उन्हें हटाने से रोकने लगे। कुछ प्रदर्शनकारी थालियां बजाकर और नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे।
जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया, तो कुछ अभ्यर्थियों ने सड़क पर बैठकर राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और खींचतान भी हुई। कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें व्यक्तिगत मुचलके पर छोड़ दिया गया।
पहले भी कर चुके हैं प्रदर्शन
नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थी इससे पहले भी भोपाल में प्रदर्शन कर चुके हैं। करीब 22 दिन पहले एमपी नगर क्षेत्र में भी चक्काजाम किया गया था। अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार मांग उठाने और अधिकारियों से बातचीत के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
अभ्यर्थियों के अनुसार, उन्हें पहले 16 अक्टूबर तक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद दी गई थी, लेकिन निर्धारित समय तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुए। इसी वजह से उनका आक्रोश बढ़ता गया और उन्होंने गुरुवार को सड़क पर उतरकर विरोध तेज कर दिया।
अब आगे क्या होगा?
प्रदर्शन के बाद भी अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। वे नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग की प्रक्रिया शुरू होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। वहीं पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक रास्तों को बाधित करने पर कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले में अभ्यर्थियों की मांगों, भर्ती नियमों की स्थिति और सरकार के अगले फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

MP Coaching Rules 2026: 100% चयन की गारंटी पर रोक, हॉस्टल में सुरक्षा वाले पंखे जरूरी
भोपाल, 26 अक्टूबर 2026।
मध्य प्रदेश सरकार ने कोचिंग संस्थानों के संचालन को व्यवस्थित करने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मध्य प्रदेश कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। नए नियमों के तहत कोचिंग संस्थानों को पंजीयन कराना होगा और विद्यार्थियों को गुमराह करने वाले विज्ञापनों से बचना होगा। इसके साथ ही पढ़ाई के घंटों, शिक्षकों की योग्यता, फीस की जानकारी, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और हॉस्टल की सुरक्षा को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं।
100 प्रतिशत चयन की गारंटी वाले विज्ञापनों पर रोक
नए नियमों के तहत कोचिंग संस्थान विद्यार्थियों और अभिभावकों को आकर्षित करने के लिए ‘100 प्रतिशत चयन की गारंटी’ या नौकरी मिलने की निश्चित गारंटी जैसे भ्रामक दावे नहीं कर सकेंगे।
संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर कोर्स, फीस, शिक्षकों की योग्यता और विद्यार्थियों के परिणामों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। पिछले पांच वर्षों में प्रत्येक कार्यक्रम में कुल नामांकित विद्यार्थियों और सफल विद्यार्थियों का वर्षवार विवरण भी देना होगा। इससे अभिभावक किसी संस्थान में दाखिला लेने से पहले उसके दावों की बेहतर तरीके से जांच कर सकेंगे।
हॉस्टल में सीलिंग फैन को लेकर क्या है नियम?
विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवासीय परिसरों में छेड़छाड़-रोधी सीलिंग फैन या उसके समान सुरक्षा देने वाले उपकरण लगाने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य जोखिम कम करना और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना है।
इसका अर्थ सभी सीलिंग फैन पर सामान्य प्रतिबंध नहीं है। नियम का जोर हॉस्टल और आवासीय परिसर में ऐसी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर है, जिससे पंखों का असुरक्षित इस्तेमाल रोका जा सके। इसके अलावा छतों, बालकनियों और अन्य जोखिम वाले स्थानों तक पहुंच को नियंत्रित करने का भी प्रावधान है।
16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं
नियमों के अनुसार, 16 वर्ष से कम उम्र के विद्यार्थियों या माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने से पहले के विद्यार्थियों को कोचिंग में प्रवेश देने पर रोक है। इसका उद्देश्य कम उम्र के विद्यार्थियों पर अत्यधिक शैक्षणिक दबाव कम करना है।
कोचिंग संस्थानों को नियमित स्कूल के समय में कक्षाएं संचालित नहीं करनी होंगी। विद्यार्थियों को एक दिन में पांच घंटे से अधिक पढ़ाने पर भी रोक का प्रावधान है। संस्थानों को साप्ताहिक अवकाश और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा।
बिना पंजीयन नहीं चलेंगे कोचिंग संस्थान
नए नियमों के तहत प्रदेश के कोचिंग संस्थानों के लिए पंजीयन अनिवार्य है। पहले से संचालित संस्थानों को नियम राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से 90 दिनों के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा।
पंजीयन तीन वर्ष के लिए मान्य रहेगा, जिसके बाद उसका नवीनीकरण कराना होगा। यदि किसी संस्थान की एक से अधिक शाखाएं हैं, तो प्रत्येक शाखा के लिए अलग पंजीयन जरूरी होगा। पंजीयन संबंधी आवेदन और प्रक्रिया के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकरण से संपर्क करना होगा।
वेबसाइट पर फीस और शिक्षकों की जानकारी देना जरूरी
कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर, कोर्स की जानकारी, फीस वापसी और संस्थान छोड़ने की नीति सार्वजनिक करनी होगी। शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों के नाम तथा उनकी शैक्षणिक योग्यता का विवरण भी देना होगा।
नियमों में ट्यूटर के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की गई है। संस्थानों को सुरक्षा व्यवस्था, उपलब्ध सुविधाओं, कामकाज के समय और शिकायत निवारण की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर और CCTV की व्यवस्था
विद्यार्थियों को परीक्षा के दबाव और अन्य समस्याओं से निपटने में मदद देने के लिए कोचिंग संस्थानों को योग्य मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर की व्यवस्था करनी होगी। अभिभावकों के साथ हर तीन महीने में संवाद या फॉलो-अप कार्यक्रम आयोजित करने का भी प्रावधान है।
इसके अलावा संस्थानों में आवश्यक स्थानों पर CCTV कैमरे, अग्निशमन उपकरण, प्राथमिक उपचार किट, साफ पेयजल और पर्याप्त बैठने की व्यवस्था जरूरी होगी। शौचालय, काउंसलिंग कक्ष और अन्य संवेदनशील स्थानों पर CCTV रिकॉर्डिंग नहीं की जा सकेगी।
यदि कोचिंग में नामांकित किसी विद्यार्थी की आत्महत्या की कोशिश या आत्महत्या की घटना होती है, तो संबंधित घटना की जानकारी 24 घंटे के भीतर जिला निगरानी समिति को देनी होगी।
नियम तोड़ने पर हो सकती है पंजीयन संबंधी कार्रवाई
यदि किसी संस्थान की ओर से गलत या भ्रामक जानकारी दी जाती है अथवा नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो सक्षम प्राधिकरण नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। इसमें पंजीयन निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। ऐसी कार्रवाई से पहले कारण बताओ नोटिस और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
पंजीयन, नवीनीकरण या उसे जारी रखने से जुड़े आदेश से असंतुष्ट संस्थान निर्धारित समयसीमा में संभागायुक्त के समक्ष अपील कर सकता है।

इंदौर: ऐतिहासिक ड्रेनेज चैंबर का पूजन कर कर्मचारियों के कल्याण की कामना
इंदौर, मध्य प्रदेश | 21 अक्टूबर 2026
इंदौर में होलकरकालीन ड्रेनेज चैंबर का पूजन कर नगर निगम के कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुख और समृद्धि की कामना की गई। इस अवसर पर निगमायुक्त ने कर्मचारियों के कल्याण और उनकी सुरक्षित कार्य परिस्थितियों के महत्व को रेखांकित किया।
इंदौर अपनी ऐतिहासिक विरासत और परंपराओं के लिए जाना जाता है। शहर में होलकरकालीन धरोहरों का विशेष महत्व है। ड्रेनेज व्यवस्था से जुड़े इस ऐतिहासिक चैंबर का पूजन परंपरा और कर्मचारियों के प्रति सम्मान से जुड़ा आयोजन माना जा रहा है।
होलकरकालीन धरोहर से जुड़ा आयोजन
इंदौर का इतिहास होलकर शासनकाल की अनेक विरासतों से जुड़ा हुआ है। शहर की पुरानी जल निकासी और नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था भी इसके ऐतिहासिक विकास का हिस्सा रही है।
होलकरकालीन ड्रेनेज चैंबर का पूजन इसी ऐतिहासिक विरासत के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजनों के जरिए शहर की पुरानी व्यवस्थाओं और उनसे जुड़े कार्यों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है।
कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना
पूजन के दौरान नगर निगम के कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुख और समृद्धि की कामना की गई। सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी शहर की नागरिक सेवाओं को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इन कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। ड्रेनेज और सीवर से संबंधित कार्यों में जोखिम हो सकता है, इसलिए निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं, आवश्यक उपकरणों और सुरक्षित कार्यप्रणाली का पालन जरूरी है।
शहर की व्यवस्था में कर्मचारियों की अहम भूमिका
इंदौर नगर निगम शहर की सफाई, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं के संचालन की जिम्मेदारी निभाता है। इन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने में मैदानी कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है।
कर्मचारियों के कल्याण की कामना के साथ-साथ सुरक्षित कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराना भी जरूरी है, ताकि वे बिना अनावश्यक जोखिम के अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।
एक नजर में पूरी खबर
- आयोजन: होलकरकालीन ड्रेनेज चैंबर का पूजन।
- स्थान: इंदौर, मध्य प्रदेश।
- मुख्य उद्देश्य: नगर निगम कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुख और समृद्धि की कामना।
- प्रमुख संदेश: ऐतिहासिक विरासत के सम्मान के साथ कर्मचारियों के कल्याण और सुरक्षा पर ध्यान देना।

ओंकारेश्वर में सिंहस्थ की तैयारियां तेज, ब्रह्मपुरी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का अभियान
ओंकारेश्वर, मध्य प्रदेश | 9 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश की प्रमुख धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच अतिक्रमण हटाने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। श्रद्धालुओं की आवाजाही, पार्किंग और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन ब्रह्मपुरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता रहा है। हालांकि, 26 मकानों को ध्वस्त किए जाने के दावे की ताजा स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है।
सिंहस्थ-2028 के लिए विकास कार्यों पर जोर
सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए ओंकारेश्वर में सड़क, पार्किंग और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों की योजना बनाई जा रही है। धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन आवागमन सुगम बनाने और सार्वजनिक स्थानों को व्यवस्थित करने पर जोर दे रहा है।
इसी क्रम में ब्रह्मपुरी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पहले भी की गई है। प्रशासन का कहना है कि विकास कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिन्हित अवैध निर्माणों को हटाना आवश्यक है।
ब्रह्मपुरी क्षेत्र में पहले भी हुई कार्रवाई
ओंकारेश्वर के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में मई और सितंबर 2026 के दौरान अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं। इन कार्रवाइयों में मकानों, दुकानों, होटलों और धर्मशाला से जुड़े कुछ निर्माणों को हटाए जाने की जानकारी दी गई थी।
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान नगर परिषद, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें शामिल रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, सिंहस्थ के दौरान यातायात और पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
रहवासियों ने जताई चिंता
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और नोटिस जारी किए जाने को लेकर स्थानीय रहवासियों की चिंताएं भी सामने आई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने मकानों और दुकानों में रह रहे हैं और उनकी आजीविका भी इन्हीं से जुड़ी है।
रहवासियों ने कार्रवाई से पहले दस्तावेजों की जांच, अपनी बात रखने का अवसर और प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर विचार करने की मांग उठाई है। ऐसे में विकास कार्यों के साथ प्रभावित लोगों की चिंताओं का समाधान करना भी प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण विषय है।
विकास और जनहित के बीच संतुलन जरूरी
सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारी में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण है। वहीं, अतिक्रमण से जुड़े प्रत्येक मामले में संबंधित दस्तावेजों, नियमों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई किया जाना भी जरूरी है।
ओंकारेश्वर में आगे होने वाली कार्रवाई और विकास योजनाओं को लेकर स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर बनी हुई है। फिलहाल 26 मकानों को ध्वस्त किए जाने की संख्या की आधिकारिक पुष्टि होने पर ही इस आंकड़े को अंतिम रूप से बताया जा सकेगा।

VIP रोड पर पलटा सोयाबीन तेल का टैंकर, सड़क पर तेल फैलते ही टूट पड़ी भीड़
भोपाल, 30 सितंबर 2026।
राजधानी भोपाल के VIP रोड चौराहे पर बुधवार तड़के एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। इंदौर से मंडीदीप जा रहा सोयाबीन रिफाइंड तेल से भरा टैंकर अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। टैंकर पलटते ही उसमें भरा तेल सड़क पर फैल गया और कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
सड़क पर तेल फैला देखकर बड़ी संख्या में लोग बाल्टी, डिब्बे, कंटेनर और दूसरे बर्तन लेकर पहुंच गए। देखते ही देखते कई लोग सड़क पर फैले तेल को भरकर अपने साथ ले जाने लगे। इस दौरान कुछ लोग वाहनों में भी तेल ले जाते हुए नजर आए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया।
रात करीब 3 बजे VIP रोड पर पलटा टैंकर
जानकारी के अनुसार हादसा बुधवार रात करीब 3 बजे VIP रोड चौराहे के आसपास हुआ। टैंकर इंदौर से मंडीदीप की ओर जा रहा था। इसी दौरान टैंकर अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया।
हादसे के बाद टैंकर में भरा बड़ी मात्रा में सोयाबीन रिफाइंड तेल सड़क पर फैलने लगा। तेल को सड़क पर बहता देखकर आसपास के लोगों को इसकी जानकारी मिली और कुछ ही देर में वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।
35 टन तेल था, कीमत करीब 55 लाख रुपये
बताया जा रहा है कि टैंकर में करीब 35 टन सोयाबीन रिफाइंड तेल भरा हुआ था। इसकी अनुमानित कीमत करीब 55 लाख रुपये बताई गई है।
टैंकर पलटने के बाद इतनी बड़ी मात्रा में तेल सड़क पर फैल गया कि आसपास का काफी हिस्सा तेल से भर गया। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने इसे बर्तनों में भरना शुरू कर दिया।
बाल्टी-डिब्बे लेकर पहुंच गए लोग
तेल सड़क पर फैलने की जानकारी मिलते ही लोगों की भीड़ बढ़ती गई। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 300 से 400 लोग मौके पर पहुंच गए।
किसी के हाथ में बाल्टी थी तो कोई डिब्बा और कंटेनर लेकर आया था। कई लोग सड़क पर जमा तेल को भरकर ले जाते हुए दिखाई दिए। कुछ लोगों ने अपने वाहनों में भी तेल रखने की कोशिश की।
इस दौरान VIP रोड पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया।
पुलिस पहुंची, लोगों को तेल ले जाने से रोका
हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने सड़क पर जमा लोगों को हटाया और तेल को भरकर ले जाने से रोकने की कोशिश की।
भीड़ को नियंत्रित करने के बाद यातायात व्यवस्था को सामान्य कराया गया। हादसे के बाद सड़क पर फैले तेल के कारण फिसलन का खतरा भी पैदा हो गया था, इसलिए मौके पर सुरक्षा व्यवस्था जरूरी हो गई थी।
टैंकर चालक और कंडक्टर घायल
हादसे में टैंकर चालक और कंडक्टर के घायल होने की जानकारी सामने आई है। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
राहत की बात यह रही कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार हादसे में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि, टैंकर के पलटने और सड़क पर तेल फैलने के कारण काफी देर तक स्थिति असामान्य बनी रही।
कार की वजह से टैंकर अनियंत्रित होने का दावा
टैंकर से जुड़े बालाजी प्रोडक्शन के विकास अग्रवाल के हवाले से बताया गया है कि चालक ने हादसे के पीछे चौराहे पर एक कार चालक की गलती को वजह बताया है।
हालांकि, हादसा वास्तव में किस परिस्थिति में हुआ, इसकी पूरी तस्वीर पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए कार चालक की गलती को फिलहाल चालक द्वारा बताए गए कारण के तौर पर ही देखा जा रहा है।
VIP रोड पर सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल
हादसे के बाद VIP रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। टैंकर पलटने के बाद सड़क पर बड़ी मात्रा में तेल फैल गया था। ऐसे में वहां बड़ी भीड़ जमा होना दूसरे वाहनों और खुद मौके पर मौजूद लोगों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता था।
अगर सड़क पर फैला तेल समय रहते साफ न किया जाए तो फिसलन के कारण दूसरे वाहन भी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। ऐसे हादसों में तत्काल ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा घेरा बनाना महत्वपूर्ण होता है।
वीडियो सामने आने के बाद चर्चा में आया मामला
हादसे के बाद सड़क पर फैले तेल को लोग अपने बर्तनों में भरते नजर आए। इसी दौरान बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिसके बाद यह घटना तेजी से चर्चा में आ गई।
वीडियो में सड़क पर पलटा टैंकर और उसके आसपास बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी दिखाई दे रही है। घटना ने यह भी दिखाया कि किसी दुर्घटना के बाद सड़क पर फैले सामान को उठाने के लिए भीड़ कितनी तेजी से जमा हो सकती है।

भोपाल में दतिया की RTO इंस्पेक्टर की हत्या, शादी को लेकर विवाद के बाद प्रेमी ने भी दी जान
भोपाल | 21 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को एक सनसनीखेज घटना सामने आई। खजूरी सड़क थाना क्षेत्र की लेकपर्ल कॉलोनी में दतिया में पदस्थ 45 वर्षीय RTO इंस्पेक्टर मीनाक्षी गोखले की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई। घटना उनके परिचित पवन द्विवेदी के मकान में हुई। पुलिस को मौके से महिला का शव और खून से सना हुआ हथौड़ा मिला है।
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मीनाक्षी गोखले और पवन द्विवेदी के बीच शादी को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस के अनुसार पवन द्विवेदी मीनाक्षी से शादी करना चाहता था, जबकि वह इसके लिए तैयार नहीं थीं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद होने की आशंका जताई जा रही है।
लेकपर्ल कॉलोनी में मिला महिला का शव
घटना भोपाल के खजूरी सड़क थाना क्षेत्र की लेकपर्ल कॉलोनी की है। पुलिस को सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची तो मकान में मीनाक्षी गोखले का शव मिला।
पुलिस की शुरुआती जांच में उनके सिर पर गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं। शव के पास ही एक हथौड़ा भी बरामद हुआ, जिस पर खून लगा हुआ था। इसी कारण पुलिस को आशंका है कि हथौड़े से हमला कर उनकी हत्या की गई।
पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर आवश्यक साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू की है। मामले की जांच में फोरेंसिक टीम की मदद भी ली जा रही है।
शादी को लेकर विवाद की बात सामने आई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि पवन द्विवेदी मीनाक्षी गोखले से शादी करना चाहता था। वहीं, मीनाक्षी शादी के लिए तैयार नहीं थीं।
पुलिस को आशंका है कि रविवार देर रात इसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच बहस हुई होगी। विवाद बढ़ने के बाद मीनाक्षी पर हमला किए जाने की आशंका है।
हालांकि, घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों और दोनों के बीच संबंधों की प्रकृति को लेकर पुलिस की विस्तृत जांच अभी जारी है। इसलिए शुरुआती जानकारी को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा रहा है।
हत्या के बाद आरोपी ने भी उठाया खौफनाक कदम
पुलिस के मुताबिक मीनाक्षी की हत्या के बाद पवन द्विवेदी ने भी आत्महत्या कर ली। उसका शव मकान से करीब 20 मीटर की दूरी पर एक पेड़ से लटका मिला।
इस घटनाक्रम ने पुलिस के सामने मामले की जांच को और गंभीर बना दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले दोनों के बीच क्या बातचीत हुई थी और विवाद की वास्तविक वजह क्या थी।
पुलिस को आरोपी की तलाशी के दौरान उसकी जेब से एक बैंक पासबुक भी मिली है। पुलिस ने बरामद सामान को जांच का हिस्सा बनाया है।
पुलिस जुटा रही घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य
घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से मिले हथौड़े समेत अन्य वस्तुओं को जांच के लिए सुरक्षित किया गया है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि घटना के समय मकान में कौन-कौन मौजूद था, दोनों के बीच आखिरी बार कब संपर्क हुआ था और वारदात से पहले किसी तरह का विवाद या बातचीत हुई थी या नहीं।
पुलिस आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटा रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।
दतिया में पदस्थ थीं मीनाक्षी गोखले
मृतका मीनाक्षी गोखले परिवहन विभाग में RTO इंस्पेक्टर के पद पर दतिया में पदस्थ थीं। भोपाल में हुई इस घटना की जानकारी मिलने के बाद विभाग और उनके परिचितों में भी शोक का माहौल है।
घटना ने एक बार फिर निजी रिश्तों में बढ़ते विवाद के गंभीर परिणामों को सामने ला दिया है। हालांकि इस मामले में हत्या के कारण और घटनाक्रम को लेकर पुलिस की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच के आधार पर घटनाक्रम को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार शादी को लेकर विवाद इस घटना की संभावित वजह हो सकता है। हालांकि, अंतिम कारण और वारदात की पूरी परिस्थितियों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

इंदौर में बड़ी कार्रवाई: करोड़ों की सरकारी जमीन से हटाया अतिक्रमण, 47 निर्माण ध्वस्त
इंदौर, मध्य प्रदेश | 9 सितंबर 2026
सरकारी जमीन पर लंबे समय से था अतिक्रमण
इंदौर में सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रशासन की ओर से बड़ी कार्रवाई की गई। करीब 43 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटाते हुए प्रशासन ने 45 दुकान-गोडाउन और 2 मकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम का अमला और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
सरकारी जमीन पर लंबे समय से बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए यह कार्रवाई की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अतिक्रमणकारियों में हड़कंप की स्थिति रही।
45 दुकान-गोडाउन और 2 मकानों पर चला बुलडोजर
कार्रवाई के दौरान सरकारी भूमि पर बने व्यावसायिक और आवासीय निर्माणों को हटाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, जमीन पर 45 दुकान एवं गोडाउन बनाए गए थे। इसके अलावा यहां 2 मकान भी मौजूद थे।
प्रशासन की टीम ने जेसीबी और अन्य मशीनरी की मदद से इन निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की। अतिक्रमण हटाने के दौरान मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया था, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
करोड़ों की सरकारी जमीन को कराया गया कब्जामुक्त
इस कार्रवाई में जिस जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया, उसकी अनुमानित कीमत करीब 43 करोड़ रुपये बताई गई है। इतनी बड़ी कीमत की सरकारी जमीन पर लंबे समय से अतिक्रमण होने के कारण प्रशासन की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर प्रशासन पहले भी कार्रवाई करता रहा है। इस अभियान का उद्देश्य सरकारी संपत्ति को अतिक्रमण से मुक्त कराकर उसका संरक्षण करना है।
प्रशासन की कार्रवाई से मचा हड़कंप
अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंचा। कार्रवाई शुरू होने के बाद क्षेत्र में लोगों की भीड़ जमा हो गई। अधिकारियों की मौजूदगी में एक-एक कर अवैध निर्माण हटाए गए।
दुकान और गोडाउन हटाए जाने के कारण वहां कारोबार करने वाले लोगों को भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। प्रशासन की ओर से सरकारी जमीन पर किसी भी तरह के अवैध निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाया गया।
सरकारी जमीन पर कब्जे के खिलाफ अभियान
इंदौर में सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। प्रशासन द्वारा ऐसे स्थानों की पहचान की जा रही है, जहां सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन सार्वजनिक संपत्ति है और उस पर किसी व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण करना नियमों के खिलाफ है। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
कार्रवाई से पहले की गई थी प्रक्रिया
सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के मामलों में प्रशासन द्वारा संबंधित रिकॉर्ड और जमीन की स्थिति की जांच की जाती है। इसके बाद अतिक्रमण की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
इंदौर की इस कार्रवाई में भी सरकारी भूमि की कीमत और उस पर किए गए निर्माणों का आकलन किया गया। इसके बाद अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा।
प्रशासन ने सरकारी संपत्ति को लेकर अपनाया सख्त रुख
43 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन सख्ती बरत रहा है।
अतिक्रमण हटाने के बाद अब प्रशासन की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की होगी कि मुक्त कराई गई जमीन पर दोबारा कब्जा न हो। इसके लिए जमीन की निगरानी और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
बड़ी कार्रवाई से सामने आया सरकारी जमीन की सुरक्षा का मुद्दा
इंदौर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में सरकारी जमीन की कीमत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता है। करोड़ों रुपये की जमीन पर दुकान, गोडाउन और मकान बन जाने से सरकारी संपत्ति का उपयोग प्रभावित होता है।
इसी वजह से समय-समय पर प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है। 43 करोड़ रुपये की जमीन से अतिक्रमण हटाने की ताजा कार्रवाई भी इसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।
आगे भी जारी रह सकती है कार्रवाई
इस कार्रवाई के बाद प्रशासन की नजर अन्य सरकारी जमीनों पर भी हो सकती है। जहां भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे या निर्माण पाए जाएंगे, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
45 दुकान-गोडाउन और 2 मकानों को हटाए जाने के बाद अब करीब 43 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन अतिक्रमण से मुक्त हो गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की दिशा में बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

शहडोल में बाणसागर बांध के गेट खोले गए, तेजी से बढ़ा जलस्तर; निचले इलाकों में अलर्ट
शहडोल, मध्य प्रदेश | 31 अगस्त 2026।
मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में लगातार हो रही बारिश के बीच शहडोल के बाणसागर बांध में पानी की आवक अचानक तेजी से बढ़ गई। बांध में बढ़ते जलस्तर और पानी के दबाव को देखते हुए रविवार दोपहर 6 गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। इसके बाद प्रशासन ने बांध के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
बारिश के कारण शहडोल के साथ-साथ रीवा, सीधी, उमरिया, अनूपपुर, डिंडौरी और आसपास के जिलों में भी नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे आने वाले दिनों में जलाशयों और नदियों का जलस्तर और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
बाणसागर बांध में तेजी से बढ़ी पानी की आवक
लगातार बारिश का सबसे बड़ा असर बाणसागर बांध पर दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक बांध में पानी की आवक पहले 808.64 घन मीटर प्रति सेकंड थी, जो महज 12 घंटे के भीतर बढ़कर 2677.29 घन मीटर प्रति सेकंड हो गई।
पानी की आवक में इस अचानक बढ़ोतरी के बाद बांध प्रबंधन को जलस्तर नियंत्रित करने के लिए गेट खोलने का फैसला लेना पड़ा। रविवार दोपहर करीब 12 बजे बांध के 6 गेट खोले गए।
पिछले साल से 13 सेंटीमीटर ज्यादा जलस्तर
बाणसागर बांध का जलस्तर इस साल पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 13 सेंटीमीटर अधिक बताया गया है। लगातार हो रही बारिश और कैचमेंट क्षेत्र से आ रहे पानी के कारण बांध में जलभराव तेजी से बढ़ा।
बांध के गेट खोले जाने के बाद नीचे की ओर बहने वाले पानी को लेकर प्रशासन ने आसपास के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। लोगों को नदी और जलाशय के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है।
निचले इलाकों में बढ़ाई गई सतर्कता
बाणसागर बांध से पानी छोड़े जाने के बाद सोन नदी और उसके आसपास के निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय अमले को अलर्ट रखा गया है।
लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे न जाएं और बढ़े हुए पानी को पार करने की कोशिश न करें। विशेष रूप से निचले क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को पानी के बढ़ते स्तर पर नजर रखने के लिए कहा गया है।
इससे पहले भी 24 अगस्त को बांध के तीन गेट खोले गए थे। उस समय जलस्तर 340.64 मीटर और पानी की आवक 2076 क्यूमेक्स दर्ज की गई थी। तब तीन गेटों से करीब 304 क्यूमेक्स पानी सोन नदी में छोड़े जाने की जानकारी दी गई थी।
पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट
बाणसागर बांध में पानी बढ़ने के पीछे पूर्वी मध्य प्रदेश में सक्रिय बारिश का सिस्टम प्रमुख कारण है। मौसम विभाग ने रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
इन इलाकों में बारिश जारी रहने से नदियों और नालों में पानी का स्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन को बाढ़ संभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सिर्फ शहडोल ही नहीं, कई जिलों में बिगड़े हालात
मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अगस्त के आखिरी दिनों में बारिश ने एक बार फिर जोर पकड़ा है। सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर करीब 30 फीट तक पहुंच गया। वहीं तेज बहाव के कारण रामघाट का बड़ा पुल भी प्रभावित हुआ।
चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित इलाकों का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जायजा लिया और राहत शिविरों में रह रहे लोगों से मुलाकात की। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने का काम भी किया गया।
सितंबर की शुरुआत में भी बारिश का खतरा
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार बारिश का दौर अगस्त के साथ खत्म होने वाला नहीं है। सितंबर के शुरुआती दिनों में भी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
सीधी, उमरिया, मंडला, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, दमोह, नरसिंहपुर और नर्मदापुरम समेत कई जिलों में भारी बारिश का अनुमान है। ऐसे में पहले से ही जलभराव और बाढ़ का सामना कर रहे क्षेत्रों में प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
बांधों में तेजी से बढ़ रहा जलभराव
लगातार बारिश के चलते मध्य प्रदेश के कई बांधों और जलाशयों में पानी तेजी से बढ़ा है। राज्य के अधिकांश प्रमुख जलाशयों में जलभराव 70 प्रतिशत से अधिक पहुंचने की जानकारी सामने आई है और कई बांधों के गेट खोले जा चुके हैं।
राजधानी भोपाल का बड़ा तालाब भी पूर्ण जलभराव स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है। इसके पूरी तरह भरने के बाद भदभदा बांध के गेट खोले जाने की संभावना जताई गई है।
प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने को कहा
बाणसागर बांध के गेट खुलने के बाद प्रशासन का मुख्य फोकस निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर है। अधिकारियों की ओर से लोगों को नदी, बांध और तेज बहाव वाले जलस्रोतों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को नदी-नालों के आसपास नहीं जाने देने की अपील की गई है। बारिश के दौरान जलस्तर अचानक बढ़ने की संभावना को देखते हुए ग्रामीणों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
सोन नदी के जलस्तर पर भी नजर
बाणसागर बांध सोन नदी पर स्थित है और यहां से पानी छोड़े जाने के बाद सोन नदी के जलस्तर पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि बांध के गेट खोलने के साथ-साथ नदी के निचले क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई गई है।
अधिकारियों की नजर बांध में पानी की आवक, जलस्तर और गेटों से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा पर बनी हुई है।
बाणसागर बांध क्यों है महत्वपूर्ण?
बाणसागर बांध मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के देवलोंद क्षेत्र में सोन नदी पर बना एक महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय बांध है। यह परियोजना मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए भी सिंचाई और जल संसाधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
बारिश के मौसम में बांध का जलस्तर लगातार निगरानी में रखा जाता है। जब पानी निर्धारित स्तर तक पहुंचने लगता है या आवक तेजी से बढ़ती है, तो जल प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से गेट खोलकर नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ा जाता है।
अभी क्या है स्थिति?
फिलहाल शहडोल और आसपास के इलाकों में बारिश का दौर जारी है। बाणसागर बांध में पानी की आवक बढ़ने के कारण गेट खोले गए हैं और निचले क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है।
मौसम विभाग के भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए आने वाले दिनों में बांध और नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी रहेगी। लोगों से अपील है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
निष्कर्ष
शहडोल में लगातार बारिश के कारण बाणसागर बांध में पानी की आवक तेजी से बढ़ी, जिसके बाद रविवार को 6 गेट खोले गए। पानी की आवक 808.64 से बढ़कर 2677.29 घन मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच गई और जलस्तर पिछले साल की तुलना में करीब 13 सेंटीमीटर अधिक बताया गया।
गेट खुलने के बाद निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है। वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश के 11 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी होने के कारण आने वाले दिनों में भी बाढ़ और जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

PM मोदी की लाल किले से घोषणा के बाद MP में बड़ा एक्शन, 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग और फ्री ऑनलाइन कोचिंग
भोपाल | 19 अगस्त 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नई दिल्ली के लाल किले से युवाओं, शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और खेलों को लेकर कई बड़े संकल्पों की घोषणा की थी। अब इन घोषणाओं को मध्य प्रदेश में जमीन पर उतारने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने अगले पांच वर्षों में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में 492 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट लागू करने का फैसला किया है। इसके साथ ही अगले वर्ष एक करोड़ से अधिक युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI स्किल्स की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य तय किया गया है।
1 करोड़ से ज्यादा युवाओं को AI की ट्रेनिंग
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक मध्य प्रदेश में युवाओं को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार अगले साल एक करोड़ से अधिक युवाओं को AI से जुड़ी स्किल्स की ट्रेनिंग देने की योजना पर काम करेगी।
इसका उद्देश्य युवाओं को तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी और रोजगार के नए अवसरों के लिए तैयार करना है। AI को आने वाले समय की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है और इसी वजह से राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर AI स्किलिंग का लक्ष्य रखा है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग
युवाओं और विद्यार्थियों के लिए कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
इस कदम से खास तौर पर उन विद्यार्थियों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जो महंगी कोचिंग का खर्च वहन नहीं कर पाते। ऑनलाइन माध्यम से गुणवत्तापूर्ण तैयारी की सुविधा अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
विज्ञान और तकनीक पर 492 करोड़ रुपये से ज्यादा का फोकस
मध्य प्रदेश सरकार अगले पांच सालों में विज्ञान और तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर 492 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की योजना बना रही है।
PWD मंत्री राकेश सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री ने विज्ञान और तकनीक को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार का दावा है कि इस निवेश से राज्य में विज्ञान और तकनीक का परिदृश्य बदलने में मदद मिलेगी।
गांव-गांव और स्कूल-स्कूल होगी खेल प्रतिभाओं की तलाश
कैबिनेट ने 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में खेल प्रतिभाओं की खोज के लिए गांव-गांव और स्कूल-स्कूल अभियान चलाने का फैसला भी किया है।
इस अभियान के दौरान प्रतिभाशाली बच्चों का चयन किया जाएगा और उन्हें बेहतर खिलाड़ी तथा एथलीट बनने के लिए विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का लक्ष्य शुरुआती स्तर पर ही खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है।
डिंडोरी के मॉडल को दूसरे जिलों में लागू करने की तैयारी
कैबिनेट बैठक में डिंडोरी जिले की उपलब्धि का भी उल्लेख किया गया। मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि डिंडोरी ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने में देश में पहला स्थान हासिल किया है।
मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों ने इस उपलब्धि के लिए डिंडोरी जिला प्रशासन को बधाई दी। साथ ही डिंडोरी के सफल मॉडल को मध्य प्रदेश के दूसरे जिलों में भी अपनाने की बात कही गई, ताकि वहां भी योजना का बेहतर क्रियान्वयन किया जा सके।
PM मोदी की घोषणा से MP के फैसलों तक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग देने, विद्यार्थियों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और विज्ञान-तकनीक पर विशेष जोर देने जैसे मुद्दों पर घोषणाएं की थीं।
इसके कुछ ही दिनों बाद मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में इन क्षेत्रों से जुड़े फैसलों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इस तरह AI स्किलिंग, ऑनलाइन शिक्षा, खेल प्रतिभा खोज और विज्ञान-तकनीक में निवेश को राज्य की आगामी योजनाओं से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
यानी 15 अगस्त को लाल किले से हुआ ऐलान और 19 अगस्त को भोपाल में कैबिनेट का एक्शन—मध्य प्रदेश में युवाओं और टेक्नोलॉजी पर सरकार के नए फोकस की तस्वीर साफ दिखाई देती है।




