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Delhi SIR: वोटर लिस्ट से नाम कटने की शिकायतों पर सुनवाई 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में

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नई दिल्ली | 18 सितंबर 2026

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और हजारों मतदाताओं को नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 21 सितंबर 2026 को सुनवाई करेगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं, ने गुरुवार को मामले को सोमवार के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। इस दौरान अदालत के सामने दिल्ली SIR से जुड़े अन्य मामले भी आने हैं।

47 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने का मुद्दा

इस मामले का सबसे बड़ा मुद्दा दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नामों के शामिल नहीं होने से जुड़ा है।

31 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम बाहर रह गए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या दिल्ली की पिछली मतदाता सूची में दर्ज करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं की तुलना में काफी बड़ी है।

चुनाव प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, उनके लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। ऐसे मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

33 लाख मतदाताओं को नोटिस का दावा

सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर हुई चर्चा के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि ड्राफ्ट सूची से करीब 47 लाख नाम बाहर होने के अलावा लगभग 33 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।

इन नोटिसों में दो प्रमुख श्रेणियों का उल्लेख किया गया है—

  • No Mapping
  • Logical Discrepancies

याचिकाकर्ताओं की ओर से सवाल उठाया गया है कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और उन्हें नोटिस दिए जाने के सटीक कारण सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए।

‘Logical Discrepancies’ को लेकर क्या सवाल?

याचिका में ‘Logical Discrepancies’ की श्रेणी को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी मतदाता के रिकॉर्ड में कोई विसंगति पाई गई है, तो उसे यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि आखिर उसके रिकॉर्ड में समस्या क्या है।

उदाहरण के तौर पर नाम, उम्र, माता-पिता की जानकारी या पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी किसी जानकारी में अंतर होने पर संबंधित मतदाता को उस विसंगति की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वह संबंधित निर्वाचन अधिकारी के सामने अपना पक्ष रख सके।

याचिका में इसी प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की गई है।

नोटिस पाने वालों की सूची सार्वजनिक करने की मांग

याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह मांग रखी गई है कि SIR के दौरान नोटिस पाने वाले सभी मतदाताओं की एक समेकित और सर्च योग्य सूची उपलब्ध कराई जाए।

इस सूची में मतदाता का नाम, पता और उसे नोटिस जारी करने का कारण या संबंधित श्रेणी बताने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि किसी व्यक्ति को यह जानकारी ही नहीं होगी कि उसके रिकॉर्ड में किस तरह की विसंगति बताई गई है, तो वह नोटिस का प्रभावी तरीके से जवाब कैसे देगा।

चुनाव आयोग और दिल्ली CEO से जुड़ा है मामला

याचिका में भारत निर्वाचन आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से नोटिस प्रक्रिया में पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से नोटिस पाने वाले मतदाताओं की जानकारी और ‘Logical Discrepancies’ तथा ‘No Mapping’ जैसी श्रेणियों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे मानदंड स्पष्ट करने की मांग की है।

हालांकि, ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है।

याचिका में संविधान के कई अनुच्छेदों का हवाला

यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है। इसमें मौलिक अधिकारों से जुड़े अनुच्छेद 14, 19 और 21 तथा चुनाव से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों अनुच्छेद 325 और 326 का भी हवाला दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी मांग की है कि ऐसे नोटिस, जिनमें संबंधित मतदाता को विसंगति की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई है, उनके आधार पर मतदाता का नाम हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

31 अगस्त को जारी हुई थी ड्राफ्ट मतदाता सूची

दिल्ली SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित की गई थी।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 47.56 लाख मतदाता ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की बताई गई जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या एक से अधिक जगह दर्ज होने जैसी श्रेणियों से जोड़ा गया है।

निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार, ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं मिलने वाले लोगों को निर्धारित समय के भीतर दावा दाखिल करने का अवसर दिया गया है।

अब 21 सितंबर को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 21 सितंबर 2026 के लिए रखा है। इस दिन दिल्ली SIR से संबंधित अन्य याचिकाएं भी अदालत के सामने सूचीबद्ध हैं।

अगली सुनवाई में अदालत के सामने मुख्य रूप से यह मुद्दा आ सकता है कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं को किस तरह की जानकारी दी जा रही है और SIR के दौरान इस्तेमाल की जा रही संबंधित श्रेणियों के मानदंड कितने स्पष्ट हैं।

अदालत इस मामले में याचिकाकर्ताओं की दलीलों और संबंधित पक्षों के जवाब सुनने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी।


सत्य निकेतन में इमारत गिरते ही मची चीख-पुकार, महिला चिल्लाई- “बचा लो उनको, बचाओ…”

नई दिल्ली | 7 सितंबर 2026

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग मलबे में तब्दील हो गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरने के बाद मलबे के अंदर से लोगों के मदद के लिए चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं। एक महिला का रो-रोकर बुरा हाल था और वह लगातार चिल्ला रही थी—“बचा लो उनको, बचाओ…”। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। citeturn0search5turn0search7

अचानक भरभराकर गिरी बहुमंजिला इमारत

यह हादसा रविवार, 6 सितंबर 2026 को दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में दोपहर करीब डेढ़ बजे हुआ। बताया जा रहा है कि इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट यानी पीजी के रूप में किया जा रहा था। यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज के आसपास स्थित है, जहां बड़ी संख्या में छात्र किराए के कमरों और पीजी में रहते हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इमारत गिरने के समय इतनी तेज आवाज हुई, जैसे भूकंप आ गया हो। कुछ ही सेकंड में धूल का गुबार छा गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। citeturn0search3turn0search7

मलबे के नीचे फंसे लोगों ने मांगी मदद

इमारत गिरने के बाद शुरुआती तौर पर 25 से 30 छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई थी। कुछ लोगों ने मलबे के अंदर से फोन कर मदद मांगी। बचाव दल को अंदर से “बचाओ-बचाओ” की आवाजें भी सुनाई दीं। इसके बाद रेस्क्यू टीमों ने बेहद सावधानी के साथ मलबा हटाने का काम शुरू किया।

मौके पर दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ, एमसीडी, कैट्स और सिविल डिफेंस की टीमें पहुंचीं। रातभर चले अभियान में मलबे के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए आधुनिक उपकरणों और ऑक्सीजन सिलेंडरों का इस्तेमाल किया गया। citeturn0news2turn0search1

अब तक 6 लोगों की मौत, 11 को निकाला गया

ताजा जानकारी के मुताबिक, सत्य निकेतन इमारत हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। रेस्क्यू टीमों ने 11 लोगों को मलबे से बाहर निकाला। इनमें से कुछ लोगों को अस्पताल ले जाया गया, जहां एक घायल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे के बाद मृतकों और घायलों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी रही।

बचाव अभियान के दौरान प्रशासन की ओर से लगातार यह कोशिश की गई कि मलबे में कोई और व्यक्ति फंसा न रह जाए। घटनास्थल पर एंबुलेंस और मेडिकल टीमें भी तैनात रहीं। citeturn0search1turn0news8

महिला की चीखों ने लोगों को झकझोर दिया

हादसे के बाद घटनास्थल पर मौजूद एक महिला अपने परिजनों या परिचितों के मलबे में फंसे होने की आशंका से बुरी तरह टूट गई। वह रोते हुए बार-बार लोगों से उन्हें बचाने की अपील कर रही थी। उसकी चीखें सुनकर आसपास मौजूद लोग भी भावुक हो गए।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इमारत गिरने के बाद कई परिवार अपने बच्चों और परिचितों की जानकारी लेने के लिए मौके पर पहुंचे। कुछ लोग फोन पर लगातार संपर्क करने की कोशिश करते रहे, जबकि कुछ लोग बचाव दल से अपने परिजनों के बारे में जानकारी मांगते नजर आए।

बेसमेंट में चल रहा था निर्माण कार्य

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत का काम चल रहा था। आशंका जताई जा रही है कि काम के दौरान ढांचा कमजोर हुआ होगा, जिसके कारण पूरी इमारत गिर गई। हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह अभी जांच का विषय है।

रिपोर्टों के अनुसार, यह इमारत काफी पुरानी थी और इसमें छात्रों को पीजी के रूप में ठहराया जा रहा था। इमारत की संरचनात्मक मजबूती, निर्माण नियमों और बेसमेंट में किए जा रहे काम की जांच की जा रही है। citeturn0news24turn0search1

बिल्डिंग मालिक समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर

सत्य निकेतन हादसे के मामले में पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला साउथ कैंपस थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इमारत में निर्माण या मरम्मत का काम किसकी अनुमति से चल रहा था और सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं। दोषियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए बिल्डिंग के दस्तावेज, निर्माण अनुमति और मौके की स्थिति की जांच की जा रही है। citeturn0search1

आसपास की इमारतें भी जांच के घेरे में

हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाया है। हादसे से सटी एक इमारत को एहतियात के तौर पर खाली कराया गया। एमसीडी ने भवन संख्या 13 को जर्जर और खतरनाक बताते हुए उसे खाली करने का नोटिस जारी किया है।

प्रशासन ने चार मंजिल से अधिक की अवैध निर्माण वाली इमारतों को लेकर भी सख्ती के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी अन्य जर्जर या नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारत में रहने वाले लोगों की जान खतरे में न पड़े। citeturn0search1

मुख्यमंत्री ने दिए राहत-बचाव तेज करने के निर्देश

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे पर चिंता जताते हुए कहा कि सभी संबंधित एजेंसियां युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस, एमसीडी, कैट्स और सिविल डिफेंस की टीमें मिलकर काम कर रही हैं।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। साथ ही, आसपास की इमारतों को लेकर भी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। citeturn0search7

हादसे ने फिर उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में पुराने भवनों, अवैध निर्माण, पीजी संचालन और भवन सुरक्षा नियमों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र बहुल इलाकों में कई इमारतों का इस्तेमाल व्यावसायिक तरीके से किया जाता है, लेकिन उनमें सुरक्षा मानकों, आपातकालीन निकासी और संरचनात्मक मजबूती की नियमित जांच कितनी होती है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती हादसे की सही वजह सामने लाने, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की है। इस हादसे ने यह भी दिखा दिया है कि जर्जर या असुरक्षित इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।


कर्नाटक मंदिर में VVIP कल्चर का विवाद: विधायक की बेटी पर महिला PSI को थप्पड़ मारने का आरोप, भीमा अमावस्या पर मचा हंगामा

श्रीरंगपट्टनम/मांड्या। 24 अगस्त 2026

कर्नाटक के मांड्या जिले के श्रीरंगपट्टनम तालुक स्थित आरती उक्कड़ा मंदिर में भीमा अमावस्या के दौरान दर्शन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि तुमकुरु ग्रामीण सीट से BJP विधायक बी. सुरेश गौड़ा की बेटी ऐश्वर्या और मंदिर में ड्यूटी पर तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर सविता बी. पाटिल के बीच कहासुनी के बाद मारपीट हो गई। पुलिस अधिकारी की शिकायत के अनुसार, ऐश्वर्या ने कथित तौर पर उन्हें थप्पड़ मारा और ड्यूटी में बाधा पहुंचाई।

दर्शन में इंतजार को लेकर शुरू हुआ विवाद

12 अगस्त को भीमा अमावस्या के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। मांड्या महिला पुलिस स्टेशन में तैनात PSI सविता पाटिल भी मंदिर में ड्यूटी पर थीं।

शिकायत के मुताबिक, विधायक की बेटी ऐश्वर्या मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचीं और गर्भगृह की ओर जाने की कोशिश की। पुलिस अधिकारी ने उन्हें कुछ समय इंतजार करने और निर्धारित व्यवस्था का पालन करने के लिए कहा। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।

विधायक की बेटी पर थप्पड़ मारने का आरोप

पुलिस अधिकारी की शिकायत के अनुसार, बहस बढ़ने के बाद ऐश्वर्या ने कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और थप्पड़ मारा। आरोप यह भी है कि उन्होंने महिला अधिकारी को सरकारी ड्यूटी करने से रोकने और धमकी देने की कोशिश की।

मामले के सामने आने के बाद यह विवाद इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि आरोपी ऐश्वर्या तुमकुरु ग्रामीण क्षेत्र से BJP विधायक बी. सुरेश गौड़ा की बेटी हैं। इसी वजह से मामले को VVIP ट्रीटमेंट और रसूख के इस्तेमाल से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आरोपों की अंतिम पुष्टि होगी।

CCTV फुटेज भी आया सामने

25 अगस्त को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, मंदिर के अंदर का CCTV फुटेज भी सामने आया है। फुटेज में दोनों के बीच तीखी बहस होती दिखाई देती है। इसके बाद ऐश्वर्या के महिला पुलिस अधिकारी को थप्पड़ मारने का दृश्य दिखाई देने का दावा किया गया है। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि बाद में दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हुई और मौके पर मौजूद लोगों ने दोनों को अलग किया।

महिला PSI की शिकायत पर FIR

घटना के बाद PSI सविता पाटिल ने क्याथनहल्ली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने ऐश्वर्या के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की। इनमें सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए हमला, चोट पहुंचाने, अपमान करने और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएं शामिल हैं।

विधायक की बेटी ने भी दर्ज कराई काउंटर शिकायत

मामले में दूसरा पक्ष भी सामने आया है। ऐश्वर्या की ओर से भी महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ काउंटर शिकायत दर्ज कराई गई है। उनकी तरफ से आरोप लगाया गया है कि पुलिस अधिकारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया था।

रिपोर्टों के अनुसार, ऐश्वर्या अपने बच्चों के साथ मंदिर पहुंची थीं और उन्होंने कुछ समय के लिए गर्भगृह में जाने की अनुमति मांगी थी। उनके पक्ष का कहना है कि बच्चों को ज्यादा देर लाइन में खड़ा रखने में परेशानी हो सकती थी। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच कर रही है।

विधायक सुरेश गौड़ा ने क्या कहा?

विधायक बी. सुरेश गौड़ा ने अपनी बेटी के व्यवहार पर खेद जताते हुए कहा कि यदि उनकी बेटी ने पुलिस अधिकारी को थप्पड़ मारा है तो यह गलत है और इसके लिए वह माफी मांगते हैं।

हालांकि विधायक ने यह भी दावा किया कि उनकी बेटी के साथ पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया था। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने गर्भगृह में जाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उसे अनुमति नहीं दी गई, जबकि एक अन्य पुलिस अधिकारी को अंदर जाने दिया गया था।

महिला आयोग ने भी मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट

मामला सामने आने के बाद कर्नाटक राज्य महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया। आयोग ने मांड्या के पुलिस अधीक्षक से मामले की जानकारी और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी तथा पीड़ित महिला पुलिस अधिकारी को दी गई सुरक्षा व्यवस्था का विवरण भी मांगा।

VVIP दर्शन व्यवस्था पर भी उठे सवाल

इस घटना ने मंदिरों में VVIP और आम श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग दर्शन व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। विधायक सुरेश गौड़ा ने भी कथित तौर पर मंदिरों में VIP व्यवस्था के बजाय सभी श्रद्धालुओं के लिए समान कतार व्यवस्था की वकालत की है।

फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। इस घटना ने धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था, पुलिसकर्मियों के साथ व्यवहार और VVIP संस्कृति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।


देश में कोविड के नए मामले, प्रशासन ने लोगों से बरतने को कहा एहतियात

मुंबई | 13 जुलाई 2026

देश के कुछ हिस्सों में कोविड-19 के नए मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। आंध्र प्रदेश में हाल ही में दो लोगों की मौत और सक्रिय मामलों की पुष्टि के बाद अब मुंबई सहित कुछ अन्य शहरों में भी नए मरीज मिलने से स्वास्थ्य एजेंसियां निगरानी बढ़ा रही हैं। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है।

आंध्र प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या बढ़ने के बाद संक्रमित नमूनों को वैरिएंट की पहचान के लिए जांच हेतु भेजा गया है। प्रशासन ने अस्पतालों को सतर्क रहने और आवश्यक तैयारियां बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर कोविड संबंधी दिशा-निर्देश फिर से लागू किए जा सकते हैं।

मुंबई में भी हाल के दिनों में कुछ नए संक्रमण के मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग संक्रमित मरीजों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, निगरानी और आवश्यक चिकित्सकीय प्रबंधन कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश मरीजों में हल्के लक्षण पाए गए हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और समय-समय पर नए मामले सामने आ सकते हैं। इसलिए बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

  • बार-बार साबुन या सैनिटाइज़र से हाथ साफ करें।
  • खांसी-जुकाम या बुखार होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
  • यदि श्वसन संबंधी लक्षण हों तो मास्क पहनें।
  • बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के संपर्क में अतिरिक्त सावधानी रखें।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार कोविड टीकाकरण और बूस्टर डोज़ अपडेट रखें।
  • लक्षण दिखने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सतर्क रहना और सामान्य स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करना आवश्यक है।


10 दिन की देरी के बाद उत्तराखंड पहुंचा मानसून, IMD ने जारी किया चेतावनी अलर्ट

देहरादून (उत्तराखंड) |1 जुलाई 2026

उत्तराखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार दस्तक दे दी है। सामान्य तिथि से लगभग 10 दिन की देरी से पहुंचे मानसून के बाद राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो गया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, पिथौरागढ़, टिहरी गढ़वाल, नैनीताल और देहरादून समेत कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और चट्टानें गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों और यात्रियों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी है।

चारधाम यात्रा मार्गों पर भी प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमें तैनात कर दी गई हैं। श्रद्धालुओं और पर्यटकों से मौसम की ताजा जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की अपील की गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून सक्रिय होने के बाद राज्य के अधिकांश हिस्सों में तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी और लंबे समय से जारी गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बन सकती है।

प्रशासन ने पहाड़ी मार्गों पर अनावश्यक यात्रा से बचने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सतर्क रहने तथा खराब मौसम के दौरान नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी है। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के सक्रिय होने से राज्य में बारिश की कमी काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद है। वहीं कृषि क्षेत्र को भी इसका लाभ मिलेगा, लेकिन पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को अगले कुछ दिनों तक अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।


नेपाल में हुई मौत पर बिहार की राजनीति गरमाई, तेज प्रताप ने लगाए गंभीर आरोप

पटना/विराटनगर (नेपाल), 15 जून 2026

बिहार के चर्चित कोचिंग विवाद से जुड़े ज्ञान बिंदु एकेडमी के निदेशक रोशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। प्रिंस का शव नेपाल के विराटनगर स्थित एक होटल के कमरे से बरामद हुआ, जिसके बाद मौत को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्रिंस यादव खान ग्लोबल स्टडीज (खान सर) से जुड़े विवाद और दर्ज एफआईआर के बाद फरार चल रहे थे। बताया जा रहा है कि वह नेपाल के विराटनगर में ठहरे हुए थे। वहीं होटल में उनकी तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली और बाद में उनकी मौत हो गई। कुछ रिपोर्टों में प्रारंभिक कारण ब्रेन हेमरेज बताया गया है, लेकिन आधिकारिक जांच अभी जारी है।

मौत पर उठे सवाल

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब बिहार के पूर्व मंत्री Tej Pratap Yadav ने सार्वजनिक रूप से खान सर (फैजल खान) की भूमिका की जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और मौत के पीछे की सच्चाई सामने आनी चाहिए। हालांकि अभी तक इन आरोपों की पुष्टि किसी जांच एजेंसी ने नहीं की है।

वहीं, खान सर ने प्रिंस यादव की मौत पर दुख जताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटना की परिस्थितियां कई सवाल खड़े करती हैं और सच्चाई सामने आनी चाहिए।

क्या किसी को जिम्मेदार ठहराया गया है?

फिलहाल नेपाल पुलिस या बिहार पुलिस ने किसी व्यक्ति को प्रिंस यादव की मौत का जिम्मेदार नहीं ठहराया है। जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों का इंतजार किया जा रहा है। इसलिए यह कहना कि मौत के लिए कौन जिम्मेदार है, अभी जल्दबाजी होगी।

कोचिंग विवाद से जुड़ा था मामला

प्रिंस यादव का नाम उस मामले में सामने आया था जिसमें पटना स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग पर हमला और तोड़फोड़ का आरोप लगा था। इस केस में रोशन आनंद और प्रिंस यादव के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई थी। घटना के बाद से प्रिंस पुलिस की नजर से दूर थे और नेपाल में रह रहे थे।

जांच पर टिकी नजरें

इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रिंस यादव की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, किसी बीमारी की वजह से हुई या फिर इसके पीछे कोई और कारण है। जब तक नेपाल पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक किसी व्यक्ति या संगठन को जिम्मेदार ठहराना संभव नहीं है।


दिल्ली में बड़ा आतंकी प्लान फेल, 18 खतरनाक हथियार बरामद

नई दिल्ली, 28 अप्रैल 2026।

राजधानी New Delhi में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया। इस संयुक्त ऑपरेशन में 18 अत्याधुनिक हथियार बरामद किए गए हैं और करीब 9 संदिग्धों की पहचान की गई है। शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि यह मामला केवल स्थानीय आपराधिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।


🔍 ऑपरेशन कैसे हुआ

खुफिया इनपुट मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में समन्वित कार्रवाई की। इस दौरान बड़ी मात्रा में एडवांस हथियार जब्त किए गए, जिनका इस्तेमाल संभावित रूप से बड़े हमलों या टारगेटेड अटैक में किया जा सकता था।

एजेंसियों का मानना है कि अगर यह ऑपरेशन समय पर न होता, तो राजधानी में बड़ा खतरा पैदा हो सकता था।


🧩 नेटवर्क की परतें

जांच में सामने आया है कि इस मॉड्यूल में शामिल लोग अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रहे थे।
कुछ सदस्य हथियारों की सप्लाई से जुड़े थे, जबकि अन्य को रेकी और संभावित टारगेट की पहचान का काम सौंपा गया था।

यह नेटवर्क धीरे-धीरे अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था और कई राज्यों तक फैला हुआ था।


🌐 अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

मामले की सबसे गंभीर बात इसका सीमा पार कनेक्शन है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के लिंक Pakistan, Bangladesh और Nepal तक जुड़े हुए हैं।

इससे यह साफ होता है कि नेटवर्क को विदेशी स्तर पर सपोर्ट मिल रहा था, जिसमें फंडिंग और लॉजिस्टिक सहायता शामिल हो सकती है।


🔫 हथियार सप्लाई की रणनीति

हथियारों की सप्लाई के लिए Munger को एक ट्रांजिट पॉइंट के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई थी।

इसके जरिए हथियारों को देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाकर बड़े स्तर पर अस्थिरता फैलाने की साजिश रची जा रही थी।


⚠️ आपराधिक नेटवर्क से कनेक्शन

जांच में Shahbaz Ansari का नाम सामने आया है, जो पहले से चर्चित हथियार तस्करी मामलों में वांटेड बताया जाता है।

यह कड़ी दिखाती है कि आतंकी नेटवर्क और संगठित अपराध के बीच तालमेल बढ़ रहा है।


🕵️ विदेशी हैंडलर्स की भूमिका

एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क को Inter-Services Intelligence से जुड़े ऑपरेटिव संचालित कर रहे थे।

कुछ विदेशी हैंडलर्स के नाम भी सामने आए हैं, जो फंडिंग और ऑपरेशन की रणनीति तय करने में शामिल थे।


📱 डिजिटल प्लेटफॉर्म से भर्ती

इस नेटवर्क ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर युवाओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश की।
ऑनलाइन माध्यम से उन्हें प्रभावित कर धीरे-धीरे आतंकी गतिविधियों में शामिल करने की योजना बनाई गई थी।

यह ट्रेंड दिखाता है कि आधुनिक आतंकवाद अब डिजिटल माध्यमों पर भी तेजी से निर्भर हो रहा है।


🎯 संभावित टारगेट

जांच के मुताबिक, हमलों के लिए कई संभावित लक्ष्य तय किए गए थे:

• भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थान
• बड़े शहरों के संवेदनशील क्षेत्र
• चुनिंदा व्यक्तियों पर टारगेटेड हमले

इसके लिए पहले से रेकी और प्लानिंग भी की जा रही थी।


💰 लालच देकर फंसाने की कोशिश

युवाओं को इस नेटवर्क में शामिल करने के लिए पैसों का लालच दिया जा रहा था।
उन्हें विदेश भेजने के झूठे वादे भी किए गए, जिससे वे इस जाल में फंस सकें।


🔗 हाल की घटनाओं से जुड़ाव

यह मामला हाल की कई घटनाओं से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह के नेटवर्क्स के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां पहले से ज्यादा सतर्क हैं।


🛡️ सुरक्षा रणनीति मजबूत

भारत ने आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी रणनीति को और सख्त किया है।
बेहतर इंटेलिजेंस शेयरिंग, तकनीकी निगरानी और एजेंसियों के बीच समन्वय से ऐसे कई खतरों को पहले ही रोका जा रहा है।


🔎 निष्कर्ष

दिल्ली में नाकाम की गई यह साजिश दिखाती है कि आतंकी खतरे अब पहले से ज्यादा जटिल और संगठित हो चुके हैं।

हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से एक बड़ा हमला टल गया, लेकिन यह भी साफ है कि भविष्य में ऐसे हाइब्रिड नेटवर्क्स से निपटने के लिए और मजबूत रणनीति की जरूरत होगी।

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