ट्रंप की अपनी ही सेना पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: आर्मी चीफ रैंडी जॉर्ज को किया फायर, ईरान जंग के बीच बड़ी कार्रवाई
वाशिंगटन | 3 अप्रैल, 2026 ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी सेना प्रमुख (Army Chief of Staff) जनरल रैंडी जॉर्ज को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। पेंटागन द्वारा जारी आदेश में उन्हें ‘रिटायर’ होने को कहा गया है। इसे सेना के भीतर ट्रंप की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ माना जा रहा है, जिसका सीधा असर ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य रणनीति पर पड़ेगा।
क्यों हटाए गए आर्मी चीफ?
हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई विशेष कारण नहीं बताया गया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे गहरी रणनीतिक वजहें हैं:
-
व्हाइट हाउस बनाम पेंटागन: ट्रंप प्रशासन यह संदेश देना चाहता है कि युद्ध ‘पेंटागन’ की पुरानी नीतियों से नहीं, बल्कि ‘व्हाइट हाउस’ की नई मर्जी से लड़ा जाएगा।
-
विजन का टकराव: रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ऐसे नेतृत्व को चाहते हैं जो राष्ट्रपति ट्रंप के “युद्ध जीतने के आक्रामक विजन” को बिना किसी हिचकिचाहट के लागू कर सके।
-
बड़ा फेरबदल: रैंडी जॉर्ज अकेले नहीं हैं; हेगसेथ अब तक एक दर्जन से अधिक जनरल और एडमिरल को हटा चुके हैं ताकि सेना की कमान पूरी तरह उनके भरोसेमंद अधिकारियों के हाथ में हो।
कौन लेगा उनकी जगह?
पेंटागन ने जनरल रैंडी जॉर्ज की जगह जनरल क्रिस्टोफर ला नेव (Gen. Christopher LaNeve) को कार्यवाहक सेना प्रमुख नियुक्त किया है।
-
भरोसेमंद कमांडर: ला नेव को रक्षा सचिव हेगसेथ का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है।
-
बैटल टेस्टेड: वे ’82nd एयरबोर्न डिवीजन’ के कमांडर रह चुके हैं और उन्हें ऑपरेशंस का लंबा अनुभव है।
ईरान वॉर पर क्या होगा असर?
इस बदलाव का समय सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है, क्योंकि अमेरिका इस समय ईरान के साथ सीधे संघर्ष में उलझा हुआ है।
-
आक्रामक रुख: नए नेतृत्व के साथ उम्मीद की जा रही है कि अमेरिका ईरान पर और भी ज्यादा घातक हवाई हमले (Airstrikes) कर सकता है।
-
नेतृत्व में बदलाव: ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ‘लीडरशिप चेंज’ से सेना में नई ऊर्जा आएगी और युद्ध को जल्दी अंजाम तक पहुँचाया जा सकेगा।
-
अस्थिरता का खतरा: कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि युद्ध के बीच टॉप कमांडर्स को हटाना सेना के मनोबल और स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
रियाद/इस्लामाबाद | 19 मार्च, 2026
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब सऊदी अरब की दहलीज तक पहुँच गया है। बुधवार को जब रियाद में एक उच्चस्तरीय क्षेत्रीय सुरक्षा बैठक चल रही थी, तभी ईरान ने सऊदी की राजधानी को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस हमले के बाद सऊदी अरब ने ईरान को “अल्टीमेटम” देते हुए सीधी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।
रियाद हमले की बड़ी बातें
-
हमले का समय: बुधवार शाम को जब तुर्की, कतर और यूएई सहित दर्जन भर देशों के विदेश मंत्री रियाद में जुटे थे।
-
नुकसान: सऊदी एयर डिफेंस ने 4 मिसाइलों को बीच हवा में मार गिराया, लेकिन उनके मलबे से 4 लोग घायल हो गए और आवासीय इमारतों को नुकसान पहुंचा।
-
ईरान का रुख: ईरान ने इन हमलों को अमेरिका-इजरायल द्वारा उसके साउथ पार्स गैस फील्ड (South Pars Gas Field) पर किए गए हमलों का बदला बताया है।
सऊदी का अल्टीमेटम: ‘धैर्य की सीमा खत्म’
सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कड़े लहजे में कहा कि सऊदी अरब की सहनशीलता “सीमित” है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अपने “गलत अनुमान” (Miscalculation) बंद नहीं किए, तो सऊदी अरब अपनी पूरी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। रियाद ने अब अमेरिका से ईरान के खिलाफ और अधिक आक्रामक रुख अपनाने की अपील की है।
क्या जंग में कूदेगा पाकिस्तान?
इस पूरे संकट में सबसे बड़ा सवाल पाकिस्तान को लेकर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सऊदी अरब युद्ध में उतरता है, तो पाकिस्तान चाहकर भी तटस्थ (Neutral) नहीं रह पाएगा।
-
डिफेंस पैक्ट (SMDA): सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक ‘रणनीतिक सैन्य रक्षा समझौता’ हुआ था। इस समझौते के तहत किसी भी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा।
-
न्यूक्लियर अंब्रेला (Nuclear Umbrella): अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते में एक गुप्त “परमाणु सुरक्षा कवच” की बात भी शामिल है। इसका मतलब है कि सऊदी की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों की ताकत का इस्तेमाल कर सकता है।
-
पाक सेना प्रमुख की भूमिका: हाल ही में सऊदी रक्षा मंत्री और पाकिस्तानी सेना प्रमुख (COAS) के बीच हुई मुलाकातों ने इन कयासों को और पुख्ता कर दिया है कि पाकिस्तान अपनी फौज या तकनीकी सहायता सऊदी अरब भेज सकता है।
वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा
ईरान ने न केवल सऊदी, बल्कि कतर के रास लफान (Ras Laffan)—जो दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी हब है—को भी निशाना बनाया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। जानकारों का कहना है कि अगर यह जंग बढ़ी, तो तेल की कीमतें $150 से $200 तक जा सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया में भारी मंदी आ सकती है।
दावा: इजराइली हमले में मुजतबा खामेनेई घायल, एक दिन पहले ही बने थे ईरान के सुप्रीम लीडर
09 मार्च 2026
मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच बड़ा दावा सामने आया है। ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई के इजराइली हमले में घायल होने की खबर है। इजराइली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा युद्ध के दौरान हुए एक हमले में वे जख्मी हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के सरकारी टीवी ने मुजतबा खामेनेई को “जानबाज” बताया है, जिसका अर्थ है कि वे दुश्मन के हमले में घायल हुए हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वे किस स्थान या किस हमले में घायल हुए।
हाल ही में बने थे नए सुप्रीम लीडर
बताया जा रहा है कि युद्ध के बीच ही मुजतबा खामेनेई को बीती रात ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया था। यह फैसला उस समय लिया गया जब उनके पिता अली खामेनेई की मौत के बाद देश में नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी।
सूत्रों के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से मुजतबा सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं और सुरक्षा कारणों से उनका ठिकाना गुप्त रखा गया है।
परिवार को भी झेलना पड़ा नुकसान
रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को हुए हमलों में मुजतबा खामेनेई के परिवार को भी बड़ा नुकसान हुआ था। उस घटना में उनकी पत्नी, बेटी और उनके पिता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान में राजनीतिक और सैन्य हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए।
इजराइल और अमेरिका की चेतावनी
अली खामेनेई की मौत के बाद इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। दोनों देशों ने कहा था कि ईरान अगर नया सुप्रीम लीडर चुनता है तो उसे भी निशाना बनाया जा सकता है।
इजराइल की ओर से यह भी कहा गया था कि जो भी ईरान का नया सर्वोच्च नेता बनेगा, उसे ढूंढकर खत्म कर दिया जाएगा, चाहे वह कहीं भी छिपा हो।
युद्ध के बीच बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व में जारी इस संघर्ष ने क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर संकट में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान के नए सुप्रीम लीडर के घायल होने की खबर सही साबित होती है, तो इससे युद्ध और अधिक उग्र हो सकता है।
फिलहाल ईरान की ओर से मुजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
अमेरिकी संसद में ट्रम्प का लंबा संबोधन: भारत-पाक तनाव, गाजा युद्धविराम और ईरान पर लगाए गंभीर आरोप
वॉशिंगटन डीसी | 25 फरवरी 2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार सुबह अमेरिकी संसद यूनाइटेड स्टेट्स कांग्रेस को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर कई बड़े दावे और बयान दिए। करीब 1 घंटा 50 मिनट तक चले इस भाषण में उन्होंने वैश्विक सुरक्षा, युद्धविराम प्रयासों और अमेरिका की विदेश नीति को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
भारत-पाक तनाव रोकने का फिर दावा
ट्रम्प ने एक बार फिर कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष को रुकवाया था। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का हवाला देते हुए कहा कि यदि तनाव बढ़ता तो परमाणु युद्ध की स्थिति में करोड़ों लोगों की जान जा सकती थी। हालांकि भारत पहले भी ऐसे दावों को खारिज करता रहा है और कहता है कि द्विपक्षीय मुद्दे सीधे बातचीत से सुलझाए जाते हैं।
ईरान पर गंभीर आरोप
अपने भाषण में ट्रम्प ने ईरान पर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने पिछले वर्ष एक सैन्य कार्रवाई में उसके परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचाया। साथ ही उन्होंने कहा कि महंगाई के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान ईरानी शासन ने हजारों प्रदर्शनकारियों को मार दिया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है और ईरान की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
गाजा युद्धविराम को बताया उपलब्धि
राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में युद्धविराम को अपनी कूटनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि इज़राइल और हमास के बीच संघर्ष विराम कराने में अमेरिकी भूमिका अहम रही। ट्रम्प के अनुसार यह समझौता क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम है।
वेनेजुएला को बताया नया साझेदार
भाषण के अंत में ट्रम्प ने वेनेजुएला को अमेरिका का “नया दोस्त” बताया और कहा कि वहां तेल उत्पादन में हाल के समय में वृद्धि हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिरता मिल सकती है।
राजनीतिक और कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं संभव
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प के कई दावे विवादित हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं। खासतौर पर भारत-पाक संबंध, ईरान नीति और मध्य-पूर्व की स्थिति को लेकर उनके बयान आने वाले दिनों में कूटनीतिक बहस को तेज कर सकते हैं।
बांग्लादेश चुनाव में BNP की ऐतिहासिक जीत, तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की राह साफ—35 साल बाद देश को मिलेगा पुरुष पीएम
ढाका | 13 फरवरी 2026
बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सत्ता में वापसी कर ली है। गुरुवार को घोषित नतीजों के अनुसार पार्टी ने 299 में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया, जबकि बहुमत के लिए 150 सीटों की आवश्यकता थी। अब तक 286 सीटों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं और रुझानों से साफ है कि BNP सरकार बनाने की स्थिति में है। यह जीत पार्टी की लगभग 20 साल बाद सत्ता में वापसी मानी जा रही है।
विपक्षी गठबंधन के रूप में चुनाव लड़ रहे जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को अब तक 70 सीटें मिली हैं। गठबंधन के प्रमुख शफीकुर रहमान ने ढाका-15 सीट से जीत हासिल की है। चुनाव परिणामों ने बांग्लादेश की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी है, क्योंकि पिछले लंबे समय से सत्ता में काबिज आवामी लीग को करारी हार का सामना करना पड़ा है। यह पार्टी 2008 से 2024 तक लगातार सत्ता में रही और इसकी अगुवाई पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना कर रही थीं।
इस जीत के साथ ही BNP अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। वे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं और इस चुनाव में दो सीटों से उम्मीदवार थे, जहां उन्होंने दोनों जगह जीत दर्ज की। तारिक रहमान पिछले साल दिसंबर में 17 साल के लंबे अंतराल के बाद देश लौटे थे, जिसके बाद उनकी सक्रिय राजनीति में वापसी ने पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भर दिया था।
यह चुनाव परिणाम इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि बांग्लादेश को करीब 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। इससे पहले 1988 में काजी जफर अहमद देश के प्रधानमंत्री बने थे। उसके बाद 1991 से 2024 तक बांग्लादेश की राजनीति मुख्यतः दो महिला नेताओं—शेख हसीना और खालिदा जिया—के इर्द-गिर्द ही घूमती रही और दोनों ही अलग-अलग कार्यकाल में प्रधानमंत्री पद संभालती रहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BNP की यह जीत बांग्लादेश की घरेलू राजनीति, आर्थिक नीतियों और विदेश संबंधों में बदलाव का संकेत हो सकती है। खासकर दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति पर भी इसके असर की संभावना जताई जा रही है। अब देश-विदेश की नजरें नई सरकार के गठन और उसके पहले फैसलों पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में बांग्लादेश की दिशा तय करेंगे।
पाकिस्तानियों के अमेरिका में बसने पर ‘ब्रेक’, 21 जनवरी से बदल जाएंगे नियम
वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: 15 जनवरी, 2026
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पद संभालते ही सख्त फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान समेत दुनिया के 75 देशों के नागरिकों के लिए ‘इमिग्रेंट वीजा’ (Immigrant Visa) यानी अमेरिका में स्थायी रूप से बसने की प्रक्रिया पर अनिश्चित काल के लिए रोक लगा दी है।
खबर के मुख्य बिंदु:
- बसने पर रोक, घूमने पर नहीं: यह बैन सिर्फ उन लोगों के लिए है जो अमेरिका में स्थायी निवास (Green Card) या वहां जाकर बसना चाहते हैं। टूरिस्ट वीजा या बिजनेस के लिए जाने वालों पर फिलहाल यह रोक लागू नहीं है।
- ‘पब्लिक चार्ज’ का तर्क: ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वे उन देशों के प्रवासियों को नहीं आने देंगे जो अमेरिका पर ‘बोझ’ (Public Charge) बन सकते हैं। अमेरिका चाहता है कि आने वाले लोग आर्थिक रूप से मजबूत हों और सरकारी सुविधाओं (Welfare Schemes) पर निर्भर न रहें।
- लिस्ट में पाकिस्तान का नाम: हैरानी की बात यह है कि इस लिस्ट में पाकिस्तान का नाम भी शामिल है, जिसे ‘हाई रिस्क’ देशों की श्रेणी में रखा गया है।
मुनीर से दोस्ती, फिर पाकिस्तान पर सख्ती क्यों?
अभी कुछ समय पहले ही ट्रंप ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर की तारीफ की थी और उन्हें अपना ‘पसंद का जनरल’ बताया था। लेकिन जानकारों का कहना है कि ट्रंप की निजी दोस्ती एक तरफ है और उनकी ‘America First’ (अमेरिका सबसे पहले) नीति दूसरी तरफ। ट्रंप अमेरिका की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को लेकर किसी भी देश को रियायत देने के मूड में नहीं हैं।
पाकिस्तान में मची खलबली:
इस फैसले के बाद पाकिस्तान की शहबाज सरकार और वहां की जनता में चिंता का माहौल है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वे इस मामले पर अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं और उन्हें उम्मीद है कि यह रोक जल्द हटा ली जाएगी।
ओडिशा विधानसभा में में हंगामा, आपस में भिड़े विधायक
ओडिशा विधानसभा में मंगलवार को जमकर बवाल हुआ. प्रश्नकाल के दौरान बीजेपी विधायक जयनारायण मिश्रा और कांग्रेस विधायक तारा प्रसाद बहिनीपति के बीच तीखी नोकझोंक हो गई. सूत्रों के मुताबिक, यह मौखिक विवाद देखते ही देखते हाथापाई में बदल गया, जिससे सदन में मौजूद अन्य सदस्य सदमे में आ गए. कांग्रेस विधायक बहिनीपति ने आरोप लगाया कि जयनारायण मिश्रा ने पहले उनका कॉलर पकड़ा, लेकिन बाद में उनकी ओर से कोई टिप्पणी नहीं मिल सकी.
इस घटना से ओडिशा विधानसभा में अफरा-तफरी मच गई, जिसके चलते स्पीकर को हस्तक्षेप कर व्यवस्था बहाल करनी पड़ी. हालांकि, हंगामा जारी रहने की वजह से सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी. इस घटना पर नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. कई नेताओं ने इस अराजक व्यवहार की आलोचना की है. इस बीच, विधानसभा अधिकारियों की ओर से इस मामले को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
बहिनीपति ने सदन के बाहर मीडिया से कहा कि बीजेपी विधायक ने उनके शर्ट का कॉलर पकड़कर उनको धक्का दिया. वह मंत्री महापात्र से हाथ जोड़कर निवेदन कर रहे थे कि जब सदन में व्यवस्था नहीं है तो वह जवाब न दें. लेकिन अचानक मिश्रा आए और उनका कॉलर पकड़ लिया. बाद में, सत्ता पक्ष और कांग्रेस के अन्य सदस्यों के बीच भी धक्का-मुक्की शुरू हो गई जिसके बाद अध्यक्ष पाढ़ी ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. सदन में हंगामा खड़ा हो गया और बीजेपी और कांग्रेस के सदस्य एक-दूसरे को धक्का देते दिखे. बीजू जनता दल (बीजद) के सदस्य भी उसी जगह मौजूद थे, लेकिन वे इससे दूर रहे





