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गुरुग्राम के द्वारका एक्सप्रेसवे पर SUV Stunt का मामला, पुलिस ने शुरू की जांच

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गुरुग्राम के द्वारका एक्सप्रेसवे पर SUV Stunt का मामला, पुलिस ने शुरू की जांच

18 मई 2026 | गुरुग्राम, हरियाणा

हरियाणा के गुरुग्राम स्थित Dwarka Expressway पर कुछ युवकों द्वारा SUVs से खतरनाक stunts करने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वीडियो में कई SUVs तेज रफ्तार में expressway पर zigzag driving, sudden braking और sunroof व windows से बाहर निकलकर stunt करते दिखाई दे रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह घटना public safety के लिए गंभीर खतरा बन सकती थी। मामले में involved वाहनों और युवकों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।


📍 घटना कहां हुई?

यह घटना:

Dwarka Expressway

पर हुई।

Dwarka Expressway देश के सबसे busy और high-speed expressways में गिना जाता है। इस route पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में vehicles गुजरते हैं।


🚗 SUVs द्वारा किए गए खतरनाक स्टंट

प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के अनुसार कई SUVs expressway पर बेहद खतरनाक तरीके से चलाई जा रही थीं।

वीडियो में दिखाई गई activities:

  • high-speed driving
  • zigzag lane changing
  • sudden braking
  • dangerous overtaking
  • road blocking style driving
  • windows और sunroof से बाहर निकलना

कुछ युवक moving SUVs के windows और sunroof से आधा शरीर बाहर निकालकर video recording करते भी दिखाई दिए।


⚠️ बाकी वाहन चालकों को हुई परेशानी

इन stunts की वजह से expressway पर चल रहे अन्य वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:

  • कई cars को अचानक speed कम करनी पड़ी
  • कुछ drivers panic में आ गए
  • accident risk काफी बढ़ गया
  • highway पर traffic flow प्रभावित हुआ

बताया जा रहा है कि SUVs कई किलोमीटर तक इसी तरह dangerous driving करती रहीं।


🕵️ गुरुग्राम पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

मामले का वीडियो सामने आने के बाद:

Gurugram Police

ने जांच शुरू कर दी है।

पुलिस द्वारा:

  • HD cameras की footage खंगाली जा रही है
  • viral videos analyse किए जा रहे हैं
  • involved SUVs की पहचान की जा रही है
  • route surveillance data check किया जा रहा है

एक senior police officer ने कहा कि vehicles की पहचान होते ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


🔍 नंबर प्लेट्स में छेड़छाड़ की आशंका

प्रारंभिक reports के अनुसार कुछ SUVs की number plates allegedly tampered बताई जा रही हैं।

पुलिस इस angle की भी जांच कर रही है कि:

  • क्या पहचान छुपाने की कोशिश की गई थी
  • क्या stunt activity पहले से planned थी
  • क्या videos social media recording के उद्देश्य से बनाए गए थे

अगर number plate tampering साबित होती है तो आरोपियों पर अतिरिक्त धाराएं लगाई जा सकती हैं।


🚧 Expressway Safety को लेकर बढ़ी चिंता

इस घटना के बाद road safety experts ने expressways पर बढ़ती reckless driving को लेकर चिंता जताई है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • high-speed roads पर ऐसे stunts बेहद खतरनाक होते हैं
  • एक छोटी गलती भी बड़ा हादसा बना सकती है
  • public roads को stunt zones की तरह इस्तेमाल करना गंभीर अपराध माना जा सकता है

उन्होंने strict enforcement और continuous monitoring की जरूरत बताई।


📱 Luxury SUVs और Highway Stunt Culture पर चर्चा

हाल के वर्षों में कई highways और expressways पर luxury SUVs से dangerous driving के मामले सामने आते रहे हैं।

पहले भी:

  • Thar stunt videos
  • Fortuner racing clips
  • Scorpio convoy driving
  • sunroof stunt videos
  • alcohol reels on highways

जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

कई मामलों में पुलिस ने:

  • भारी challans जारी किए
  • driving licenses suspend किए
  • reckless driving cases दर्ज किए

🚨 Road Safety Experts ने क्या कहा?

Traffic safety experts का कहना है कि:

  • expressways पर stunt driving से innocent लोगों की जान खतरे में पड़ती है
  • speeding और zigzag driving multi-vehicle accidents का कारण बन सकती है
  • sudden braking chain collisions पैदा कर सकती है

उन्होंने surveillance systems और strict penalties बढ़ाने की मांग की है।


🎥 CCTV और HD Surveillance की मदद से जांच

Dwarka Expressway पर कई जगह advanced surveillance cameras लगे हुए हैं। पुलिस अब:

  • toll data
  • expressway cameras
  • HD traffic footage
  • vehicle movement records

की मदद से SUVs की tracking कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही involved लोगों की पहचान कर ली जाएगी।


⚖️ किन धाराओं में कार्रवाई संभव?

अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपियों पर:

  • dangerous driving
  • reckless endangerment
  • traffic violations
  • public safety risk
  • number plate tampering

से जुड़ी धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।

इसके अलावा vehicles को seize भी किया जा सकता है।


📌 मुख्य तथ्य एक नजर में

Point Information
स्थान Dwarka Expressway, Gurugram
राज्य Haryana
वाहन SUVs
गतिविधियां Zigzag driving, speeding, sudden brakes
अन्य स्टंट Sunroof/window से बाहर निकलना
पुलिस कार्रवाई CCTV और HD footage जांच
Suspicious Detail Alleged tampered number plates
मुख्य चिंता Public safety risk
जांच एजेंसी Gurugram Police
तारीख 18 मई 2026




डेनमार्क में सरकार गठन पर गतिरोध, एक महीने बाद भी नई सरकार नहीं बनी

 24 अप्रैल, 2026

डेनमार्क में सरकार गठन पर गतिरोध जारी, एक महीने बाद भी नहीं बन पाई नई सरकार

डेनमार्क में आम चुनाव के एक महीने बाद भी नई सरकार का गठन नहीं हो सका है, जिससे देश में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। कार्यवाहक प्रधानमंत्री Mette Frederiksen लगातार विभिन्न दलों के साथ बातचीत कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

बहुमत के बिना अधर में सरकार

24 मार्च 2026 को हुए संसदीय चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। Social Democratic Party सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे 179 में से केवल 38 सीटें ही मिलीं, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। फ्रेडरिक्सन को “रॉयल मैंडेट” के तहत सरकार गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गठबंधन वार्ता में अड़चन

सरकार बनाने की कोशिशों में विचारधारात्मक मतभेद सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। Moderates Party और Liberal Party ने वामपंथी समर्थन वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। वहीं Conservative Party ने नेतृत्व बदलने तक की मांग कर दी है।

आर्थिक नीतियां बनीं विवाद की वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की आर्थिक नीतियां भी गतिरोध का कारण बन रही हैं। चुनाव के दौरान अमीर वर्ग पर “वेल्थ टैक्स” लगाने का प्रस्ताव कई दलों को स्वीकार्य नहीं है। ऐसे में फ्रेडरिक्सन को या तो अपनी नीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है या फिर नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति बन सकती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर

इस राजनीतिक अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ रहा है। खासतौर पर ग्रीनलैंड को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ पहले से ही संवेदनशील माहौल बना हुआ है। ऐसे समय में एक मजबूत सरकार का न होना स्थिति को और जटिल बना रहा है।

नीतिगत फैसलों पर ब्रेक

सरकार गठन में देरी के चलते कई महत्वपूर्ण निर्णय प्रभावित हो रहे हैं। बड़े आर्थिक फैसले टल रहे हैं, कूटनीतिक मामलों में स्पष्ट रुख नहीं बन पा रहा और प्रशासन सीमित दायरे में काम कर रहा है।

आगे के संभावित विकल्प

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आगे तीन रास्ते सामने आ सकते हैं—

  • फ्रेडरिक्सन नीतियों में समझौता कर बहुमत जुटाएं
  • किसी अन्य नेता को वार्ता की जिम्मेदारी दी जाए
  • या फिर देश में दोबारा चुनाव कराए जाएं

हालांकि, फिलहाल किसी भी विकल्प पर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है।

निष्कर्ष

डेनमार्क में सरकार गठन में हो रही देरी वहां की राजनीति में बढ़ती जटिलताओं और विभाजन को दर्शाती है। यह स्थिति न केवल देश के अंदर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी असर डाल सकती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या फ्रेडरिक्सन इस गतिरोध को तोड़ पाती हैं या देश को फिर से चुनाव का सामना करना पड़ेगा।

 


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बंगाल चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज: भाजपा जारी करेगी संकल्प पत्र, AIMIM ने AJUP से तोड़ा गठबंधन

कोलकाता। 10 अप्रैल, 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी अपने चुनावी संकल्प पत्र को जारी करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने बड़ा फैसला लेते हुए आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भाजपा का संकल्प पत्र पश्चिम बंगाल को तृणमूल कांग्रेस के “भय और भ्रष्टाचार के राज” से मुक्त कराने का रोडमैप होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और आम लोगों में डर का माहौल है।

इधर, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP के साथ अपना गठबंधन खत्म करने का ऐलान किया है। दोनों दलों ने 25 मार्च को साथ मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, लेकिन अब AIMIM ने अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है।

AIMIM ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि हुमायूं कबीर के हालिया बयानों से यह संकेत मिलता है कि बंगाल में मुसलमानों की स्थिति और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह ऐसे किसी भी बयान या विचारधारा से खुद को नहीं जोड़ सकती, जो समुदाय की निष्ठा और ईमानदारी पर सवाल उठाती हो।

पार्टी ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के मुसलमान देश के सबसे गरीब और उपेक्षित वर्गों में शामिल हैं, और दशकों तक तथाकथित धर्मनिरपेक्ष सरकारों के बावजूद उनके लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM और AJUP के गठबंधन टूटने से राज्य के चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

इस बीच भाजपा का संकल्प पत्र और विभिन्न दलों की रणनीतियां यह तय करेंगी कि पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला किस दिशा में जाएगा। आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और भी गर्माने की संभावना है।

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ई-रिक्शा की आड़ में ‘देशद्रोह’ का नेटवर्क: मथुरा की मीरा ठाकुर कैसे बनी पाकिस्तानी जासूस?

मथुरा/लखनऊ | 25 मार्च, 2026

मथुरा के कृष्णा नगर इलाके से गिरफ्तार 32 वर्षीय मीरा ठाकुर उर्फ हरिया आज सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर है। पुलिस रिकॉर्ड में पहले एक मामूली अपराधी रही मीरा अब ‘हनीट्रैप’ और ‘डाटा स्मगलिंग’ (Data Smuggling) के बड़े खेल की मुख्य मोहरा बनकर उभरी है।

1. शुरुआती जीवन: असलहा तस्करी और मैकेनिक का काम

मीरा ठाकुर का अपराधी बनने का सफर काफी पहले शुरू हो गया था।

  • मल्टी-टास्किंग अपराधी: मीरा शुरुआत में छोटे-मोटे अपराधों में लिप्त थी। वह एक कुशल मैकेनिक थी और गाड़ियों की मरम्मत के बहाने अवैध असलहा (कट्टे और पिस्तौल) की तस्करी में शामिल हो गई।

  • पहचान का संकट: वह अक्सर पुरुषों जैसे कपड़े पहनती और ‘हरिया’ के नाम से जानी जाती थी, ताकि पुलिस की नजरों से बच सके।

2. ई-रिक्शा चालक का ‘परफेक्ट कवर’

जेल से छूटने के बाद उसने मथुरा की गलियों में ई-रिक्शा चलाना शुरू किया।

  • जासूसी का अड्डा: ई-रिक्शा चलाना उसके लिए सबसे बड़ा ‘कवर’ (Cover) साबित हुआ। इसके जरिए वह मथुरा और वृंदावन के सैन्य क्षेत्रों (Cantonment Area) और संवेदनशील इलाकों के पास बिना किसी शक के घूम सकती थी।

  • नेटवर्क: रिक्शा चलाते समय वह सेना के जवानों और उनके परिवारों की गतिविधियों पर नजर रखती थी।

3. ‘हनीट्रैप’ और पाकिस्तानी हैंडलर से मुलाकात

मीरा ठाकुर के जासूस बनने की असली शुरुआत सोशल मीडिया के जरिए हुई।

  • फेसबुक और टेलीग्राम: वह सोशल मीडिया पर एक्टिव थी, जहाँ उसकी मुलाकात ‘समीर’ नाम के एक व्यक्ति से हुई, जो असल में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का हैंडलर था।

  • लालच और ट्रेनिंग: समीर ने उसे पैसों का लालच दिया और धीरे-धीरे उसे संवेदनशील जानकारी भेजने के लिए तैयार किया। मीरा ने अपनी पहचान छिपाकर कई भारतीय सिम कार्ड्स खरीदे और उन्हें पाकिस्तानी हैंडलर्स को ‘OTP’ के जरिए एक्टिवेट करके दिया।

4. क्या भेजती थी पाकिस्तान?

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, मीरा ठाकुर ने पिछले 6 महीनों में:

  • मथुरा मिलिट्री स्टेशन की तस्वीरें और वीडियो भेजे।

  • सेना के काफिलों (Convoys) की आवाजाही का समय और रूट चार्ट साझा किया।

  • फर्जी सिम कार्ड्स के जरिए पाकिस्तानी एजेंटों को भारतीय डिजिटल स्पेस में घुसपैठ कराई।

5. कैसे हुई गिरफ्तारी?

UP ATS को लंबे समय से मथुरा क्षेत्र से डेटा लीक होने की सूचना मिल रही थी। जब संदिग्ध मोबाइल नंबर्स की लोकेशन ट्रेस की गई, तो वह मीरा ठाकुर के ई-रिक्शा रूट से मेल खाती मिली। गिरफ्तारी के समय उसके पास से दो स्मार्टफोन, कई फर्जी पहचान पत्र और विदेशी मुद्रा के लेनदेन के सबूत मिले हैं।


अमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग 8वें दिन भी जारी: 5000 से अधिक बम गिरे, 1200 से ज्यादा लोगों की मौत

07 मार्च 2026

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जंग का आज आठवां दिन है। पिछले आठ दिनों में तनावपूर्ण स्थिति ने खाड़ी क्षेत्र और मध्य पूर्व के राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है।

हमले और नुकसान

ईराइली और अमेरिकी सेनाओं ने शुक्रवार को ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। इसके अलावा, खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों पर भी हमले जारी रहे। अधिकारियों के मुताबिक, 28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग में अब तक कुल 5000 से अधिक बम गिराए जा चुके हैं।

ईरानी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस हमले में 1200 से अधिक लोग मारे गए हैं, जबकि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतकों में आम नागरिक, सैन्य कर्मी और आपात सेवाओं से जुड़े लोग शामिल हैं।

ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत और प्रतिक्रिया

जंग की शुरुआत में ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामनेई की मौत हो गई थी, जिससे देश में भारी आक्रोश और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। खामनेई की मौत के बाद ईरानी जनता और शिया समुदाय में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ गुस्से का माहौल बना।

ईरानी सेना ने भी जवाबी कार्रवाई में मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने खाड़ी देशों और इजराइल के रणनीतिक ठिकानों पर कई हमले किए, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया।

अंतरराष्ट्रीय तनाव और कूटनीतिक कोशिशें

संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन और देश इस युद्धविस्तार को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका और इजराइल ने बताया कि उनका लक्ष्य ईरानी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना है, जबकि ईरान ने इन हमलों को “अंतरराष्ट्रीय आक्रमण” करार दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संघर्ष जारी रहा तो खाड़ी देशों में तेल आपूर्ति और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

नागरिकों की स्थिति

ईरान में नागरिक जीवन अस्त-व्यस्त है। लोग अपने घरों और शरण स्थलों में सुरक्षित रहने के लिए मजबूर हैं। अस्पतालों और मेडिकल सुविधाओं पर भारी दबाव है। कई शहरों में आपातकालीन हालात घोषित किए गए हैं।

इस बीच, अमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग के आठवें दिन भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और वार्ता के जरिए तनाव कम करने की अपील की है।


मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य हलचल तेज: 50 से अधिक फाइटर जेट तैनात, ईरान को चेतावनी के संकेत

18 फरवरी 2026

अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज करते हुए पिछले 24 घंटों के भीतर 50 से ज्यादा उन्नत लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। स्वतंत्र फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और सैन्य एविएशन मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म्स के अनुसार कई अत्याधुनिक स्टील्थ और मल्टीरोल फाइटर जेट्स को मिडिल ईस्ट की ओर जाते हुए रिकॉर्ड किया गया है। यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनावपूर्ण वार्ता जारी है।

मंगलवार को जिनेवा में दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई, लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक इंटरव्यू में कहा कि वार्ता के कुछ हिस्से सकारात्मक जरूर रहे, मगर ईरान अभी तक उन शर्तों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तय की हैं। उन्होंने Fox News से बातचीत में संकेत दिया कि यदि कूटनीतिक रास्ता सफल नहीं होता, तो अमेरिका के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में फाइटर जेट्स की तैनाती केवल सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश भी हो सकती है। यह कदम ईरान को स्पष्ट संदेश देता है कि अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु मुद्दे पर किसी भी संभावित खतरे के लिए तैयार है।

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, वार्ता अभी नाजुक चरण में है और दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बना हुआ है। अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी और प्रतिबंधों की मांग करता रहा है, जबकि ईरान अपने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता है। ऐसे में सैन्य गतिविधियों में अचानक बढ़ोतरी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है और क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


नई दिल्ली: 17 जनवरी, 2026 

भारतीय जनता पार्टी ने अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण ने शुक्रवार को चुनाव कार्यक्रम (Schedule) जारी कर दिया। इस प्रक्रिया के तहत नितिन नबीन, जो वर्तमान में कार्यकारी अध्यक्ष हैं, उनका निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है।

चुनाव कार्यक्रम की मुख्य तिथियां:

  • 19 जनवरी 2026 (सोमवार): दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे।

  • 19 जनवरी (शाम): नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) और नाम वापसी की प्रक्रिया होगी।

  • 20 जनवरी 2026 (मंगलवार): यदि आवश्यक हुआ तो मतदान होगा, अन्यथा इसी दिन नए अध्यक्ष के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा।

इस चुनाव की 3 बड़ी बातें:

  1. इतिहास का सबसे बड़ा निर्वाचक मंडल: इस बार राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए कुल 5,708 वोटर (Electorals) हिस्सा लेंगे। यह भाजपा के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।

  2. आडवाणी-जोशी वोटर लिस्ट से बाहर: पहली बार पार्टी के मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का नाम मतदाता सूची में नहीं है। इसका तकनीकी कारण दिल्ली प्रदेश संगठन के चुनावों का लंबित होना बताया गया है।

  3. सबसे युवा अध्यक्ष: 46 वर्षीय नितिन नबीन अगर अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो वे भाजपा के इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे।

पीएम मोदी बनेंगे प्रस्तावक

सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन के नामांकन के लिए तीन सेट दाखिल किए जाएंगे। एक सेट में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर करेंगे। 20 जनवरी को भाजपा मुख्यालय में एक भव्य कार्यक्रम में जे.पी. नड्डा अपनी जिम्मेदारी नए अध्यक्ष को सौंपेंगे।


दुनिया में चमत्कार की कई कहानियों ने लोगों को खूब चौंकाया है. चमत्कार की हर कहानी एक-दूसरे से परे होती है. कोई चमत्कार किसी से कम नहीं होता लेकिन अहमदाबाद विमान हादसे में बच गए रमेश कुमार विश्वास का जीवित बच जाने से आज चमत्कार भी मानो चकित है. कहावत पुरानी है- जाको राखे साइयां मार सके न कोय… आदि आदि. लेकिन जिसका जीवन चमत्कार में बच जाय, वह पुनर्जीवन से कम नहीं. यमराज के चंगुल से यूं छूट जाना, जैसे हनुमान ने सुरसा को चकमा दे दिया था.

रमेश विश्वास का फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे पहले क्रैश साइट पर पहुंचे और घायलों से मिलने, उनका हाल जानने गए. इसी दौरान उन्होंने भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक रमेश कुमार विश्वास से मुलाकात की. इसके बाद मीडिया रिपोर्ट्स में रमेश विश्वास ने जो आंखों देखा हाल सुनाया, वह भयानक था. इन्हीं भावों को व्यक्त करती एक स्वरचित कविता:-

 

चमत्कार में विश्वास

जिस पर विश्वास ना हो

वह चमत्कार है

जो दिखाई न दे वह जादू है

लेकिन ये कायनात है

यहां कभी-कभी चमत्कार भी चकित रह जाता है

जादू के साथ भी जादूगरी हो जाती है

रमेश विश्वास अब इसी चमत्कार का दूसरा नाम हैं

चमत्कार पूछ रहा है- तुम जादू हो या चमत्कार

तुम कूची, कैनवस हो या कि कलाकार

या तुम चमत्कार का कोई नया वैरियंट हो!

चमत्कार के इस वैरियंट को क्या नाम दें!

गोया कि लोग चमत्कार को नमस्कार करते हैं

अगरचे चमत्कार महज एक मुहावरा भी है

बाजार में चमत्कार एक मुकम्मल मसखरा है

लेकिन ये कहानी चमत्कार में विश्वास की है

या विश्वास के चमत्कार की-

इसकी तफसील अब जरूरी है

विश्वास को भरोसा नहीं हो रहा

वह लाशों के ढेर पर चला था

विश्वास को यकीन नहीं हो रहा

आंखों के आगे वोल्कैनो-सा फटा था

विश्वास को समझ नहीं आ रहा

वह विमान में था या यमराज की गोद में

विश्वास को देख दुनिया दंग है

जहां सैकड़ों इंसान राख का ढेर बन गए

वहां विश्वास काल के आगे बिजूका कैसे बन गए!

कुछ भी कहिए इस हौलनाक कहानी से

विश्वास को यकीनी मजबूती मिली है,

चमत्कार में सबको विश्वास हो ना हो

विश्वास का चमत्कार दुनिया का भरोसा है।

editor@esuvidha

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