आस्था और संस्कृति

31 मई से फिर खुलेंगे भीमाशंकर मंदिर के द्वार, पुनर्विकास और सुरक्षा कार्य अंतिम चरण में

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31 मई से फिर खुलेंगे भीमाशंकर मंदिर के द्वार, पुनर्विकास और सुरक्षा कार्य अंतिम चरण में

10 मई 2026 | पुणे, महाराष्ट्र

Bhimashankar Temple को आगामी 31 मई 2026 से श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोलने की घोषणा की गई है। मंदिर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने बताया कि मंदिर परिसर में चल रहे संरक्षण, पुनर्विकास और आधारभूत संरचना उन्नयन कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल भीमाशंकर मंदिर जनवरी 2026 के पहले सप्ताह से बंद था। लगभग चार महीनों तक श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था बंद रखी गई थी ताकि बड़े स्तर पर विकास और सुरक्षा संबंधी कार्य पूरे किए जा सकें।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए किए गए विकास कार्य

अधिकारियों के अनुसार मंदिर क्षेत्र में तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या और आगामी 2027 नासिक कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया गया है।

प्रशासन को उम्मीद है कि कुंभ मेले के दौरान Trimbakeshwar Temple आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी भीमाशंकर पहुंचेंगे। इसी कारण भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

मंदिर परिसर में किए गए प्रमुख कार्य

पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इनमें:

  • तीर्थ मार्गों की मरम्मत और मजबूतीकरण
  • नए viewing corridors का निर्माण
  • विश्राम स्थलों और सुविधा केंद्रों का विकास
  • प्रवेश और निकास प्रबंधन प्रणाली
  • मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण और उन्नयन

जैसे कार्य शामिल हैं।

नया भव्य सभामंडप बनाया जा रहा

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में एक नया भव्य सभामंडप भी विकसित किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इससे बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा।

पर्यावरणीय संतुलन पर विशेष ध्यान

भीमाशंकर मंदिर पश्चिमी घाट के संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित है। इसी कारण विकास कार्यों के दौरान पर्यावरणीय संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार परियोजना में प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने और वन क्षेत्र पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय परिवारों पर पड़ सकता है असर

पुनर्विकास योजना के चलते लगभग 103 स्थानीय परिवार प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन ने मंदिर से करीब 500 मीटर दूर पुनर्वास के लिए जमीन चिन्हित की है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों को विश्वास में लेकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

₹288 करोड़ से अधिक की विकास योजना

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार भीमाशंकर विकास योजना की कुल लागत ₹288 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन, सुरक्षा और सुविधाओं को आधुनिक स्तर तक पहुंचाना है।

स्थानीय व्यापारियों और किसानों पर असर

मंदिर बंद रहने का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। आसपास के आदिवासी किसान, स्ट्रॉबेरी विक्रेता और छोटे दुकानदार श्रद्धालुओं की संख्या कम होने से आर्थिक रूप से प्रभावित हुए।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि मंदिर खुलने के बाद क्षेत्र में फिर से व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी

Forest Department Maharashtra ने मंदिर क्षेत्र के आसपास कई अवैध निर्माण हटाए हैं और रास्तों को साफ कराया है ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही और विकास कार्यों में बाधा न आए।

महाशिवरात्रि पर भी बंद रहा मंदिर

इस वर्ष महाशिवरात्रि 2026 के दौरान भी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद रखा गया था क्योंकि निर्माण और सुरक्षा संबंधी कार्य जारी थे। हालांकि स्थानीय चर्चाओं और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मंदिर तक जाने वाले रास्ते खुले रहे और लोग ट्रैकिंग तथा राइडिंग के लिए क्षेत्र तक पहुंचते रहे।

धार्मिक विरासत और सुरक्षा पर फोकस

भीमाशंकर मंदिर से जुड़ी यह परियोजना धार्मिक विरासत संरक्षण, तीर्थयात्री सुरक्षा, कुंभ तैयारी, पर्यावरण संतुलन और स्थानीय आजीविका जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़ी हुई है। प्रशासन का कहना है कि मंदिर खुलने के बाद श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था उपलब्ध होगी।


Kharmas 2024: खरमास कब होगा समाप्त? इस पूरे 1 महीने भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, होगा अशुभ, इन कार्यों को करने से मिलेगा शुभ फल

Kharmas 2024: इस साल खरमास 15 दिसंबर से शुरू हो चुका है. खरमास में कोई भी शुभ कार्य करने से मनाही होती है. इस साल 15 दिसंबर से लेकर 14 जनवरी 2025 को खरमास समाप्त होगा. तब तक कोई भी मांगलिक कार्य जैसे शादी-ब्याह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि नहीं की जाती है. अगर कोई करता है, तो उसे शुभ नहीं अशुभ फल की प्राप्ति हो सकती है. आप चाहते हैं कि आपके साथ कोई अनहोनी ना हो तो जान लें कि खरमास में क्या करना चाहिए और क्या करने से बचना चाहिए.

खरमास क्या है? (What is Kharmas)
ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव कहते हैं कि सूर्य देव जब धनु राशि में प्रवेश करते हैं तब धनु संक्रांति होती है. इसी राशि परिवर्तन और धनु संक्रांति पड़ने से खरमास महीने की शुरुआत हो जाती है. इस दौरान भगवान सूर्य धनु राशि में ही रहते हैं. इसी के बाद मकर संक्रांति मनाई जाएगी. खरमास के समाप्त होते ही आप सभी मांगलिक और शुभ कार्यों को कर सकते हैं. शादी-ब्याह भी की जाएगी. जब धनु राशि से मकर राशि में भगवान सूर्य प्रवेत करते हैं तो मकर संक्रांति सेलिब्रेट किया जाता है.

खरमास में क्या करना चाहिए (kharmas me kya karna chahiye)

खरमास के महीने में पूजा-पाठ प्रतिदिन करते रहना चाहिए. मंत्रों का जाप करना चाहिए. इन शुभ कार्यों को करने से आपको कई लाभ हो सकते हैं. प्रतिदिन सूरज भगवान की पूजा करने से विशेष लाभ होगा. जल से अर्घ्य दें, सूर्य मंत्रों का जाप करें. इस पूरे महीने आप कृष्ण भगवान, विष्णु भगवान की भी पूजा करनी चाहिए. आपके जीवन में मौजूद सभी दुख-दर्द, परेशानी दूर होंगी और इच्छाओं की पूर्ति होगी. बृहस्पति ग्रह का प्रभाव कम होने से आप इनकी भी पूजा और मंत्रों का जाप कर सकते हैं. आपके बिगड़े कार्य होंगे पूरे. यदि आप खरमास में तुलसी मां की पूजा करें और शाम में तुलसी पौधे के पास दीपक जलाते हैं तो घर में सुख-समृद्धि आती है. घर में शांति बरकरार रहती है. इस पूरे महीने आपको बिस्तर का त्याग कर देना चाहिए और फर्श पर गद्दे बिछाकर सोएं. स्टील, कांच आदि बर्तनों में भोजन करने की बजाय पत्तलों में खाना भी शुभ माना गया है.

खरमास में क्या नहीं करना चाहिए? ( kharmas me kya nahi karna chahiye)

– आप चाहते हैं कि आपके घर सुख-समृद्धि आए, बरकत हो, तरक्की हासिल हो तो आप खरमास महीने में कोई भी शुभ कार्य करने से बचें. कोई भी नए व्यापार की शुरुआत न करें. किसी से बिजनेस डील न करें. शादी-ब्याह, घर खरीदना, गृह प्रवेश, मुंडन, जमीन, वाहन, रत्न, गहने, कपड़े आदि खरीदने से परहेज करें.

– जनेऊ संस्कार से भी बचना चाहिए. यदि आप शादी-ब्याह कर लेते हैं तो हो सकता है कि आगे चलकर आपके जीवन में परेशानियां उत्पन्न हो जाएं. आपके रिश्ते में खटास आ जाए. दांपत्य जीवन में नेगेटिव प्रभाव देखने को मिल पाता है. बेहतर है कि आप कोई भी मांगलिक कार्य खरमास समाप्त होने के बाद ही करें.

– खरमास के दौरान तामसिक भोजन भी नहीं करना चाहिए. ऐसे में मांस-मछली, प्याज, लहसुन, शराब, धूम्रपान करने से बिल्कुल भी परहेज करें.

– बेटी की शादी हुई है और खरमास पड़ गया है तो उसे इस दौरान अपने घर से विदा करने से भी बचना चाहिए. विदाई का शुभ कार्य खरमास लगने से पूर्व या समाप्त होने के बाद ही करें.

-यदि आपके घर कोई दुखियारा, गरीब, जरूतमंद या भिखारी आकर कुछ मांगता है तो उसे बुरा और अपशब्द करने से भी बचना चाहिए. डांटकर भगाने से बचें. ऐसा करना आपके लिए अशुभ होगा.

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