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भारतीय सेना दिवस’— अदम्य साहस और बलिदान की दास्तां

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भारतीय सेना दिवस’— अदम्य साहस और बलिदान की दास्तां

आज पूरा भारत 78वां सेना दिवस (Army Day) मना रहा है। यह दिन उन वीर जवानों को समर्पित है जो बर्फीली चोटियों से लेकर तपते रेगिस्तान तक देश की सरहदों की रक्षा करते हैं। आज ही के दिन भारतीय सेना को अपना पहला भारतीय ‘कमांडर-इन-चीफ’ मिला था।

1. 15 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं?

यह तारीख बहुत ऐतिहासिक है। 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने ब्रिटिश जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी। उस दिन करियप्पा भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ बने थे। इसी जीत और सम्मान की याद में हर साल ‘सेना दिवस’ मनाया जाता है।

2. दुनिया की सबसे ऊँची जंग की जगह

भारतीय सेना दुनिया की सबसे ऊँची और ठंडी युद्धभूमि ‘सियाचिन ग्लेशियर’ की रक्षा करती है। यह समुद्र तल से लगभग 5000 मीटर से भी ज्यादा ऊँचाई पर है, जहाँ तापमान -50°C तक चला जाता है। यहाँ रहना ही अपने आप में एक मिसाल है।

3. ‘सेवा परमो धर्म:’

भारतीय सेना का आदर्श वाक्य (Motto) है— “सेवा परमो धर्म:”। इसका मतलब है ‘सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है’। चाहे सरहद पर दुश्मन से लड़ना हो या देश में बाढ़-भूकंप जैसी मुसीबत आना, हमारी सेना सबसे पहले मदद के लिए पहुँचती है।

4. जंगल में लड़ने के एक्सपर्ट

क्या आप जानते हैं? भारतीय सेना को ‘जंगल वॉरफेयर’ (जंगलों में लड़ाई) में दुनिया की सबसे बेहतरीन सेना माना जाता है। अमेरिका, ब्रिटेन और रूस जैसे बड़े देशों के सैनिक भी भारत के मिजोरम में स्थित ‘काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वॉरफेयर स्कूल’ में ट्रेनिंग लेने आते हैं।

5. बिना भेदभाव की सेवा

भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए जाति, धर्म या क्षेत्र का कोई कोटा नहीं होता। यहाँ सिर्फ काबिलियत और देशप्रेम देखा जाता है। सेना में सब बराबर हैं और सबका एक ही मकसद है— तिरंगे की शान

MP में 18 हजार स्क्वेयर फीट में बन रही विश्व की सबसे बड़ी स्वामी विवेकानंद जी की 3-डी रंगोली

मध्यप्रदेश के विकास में युवाओं की व्यापक क्षमताओं का उपयोग करने के उद्देश्य से डिजाइन किये गए इस मिशन का नामकरण युवाओं के आदर्श स्वामी विवेकानंद के नाम पर किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 12 जनवरी यानि की युवा दिवस के शुभ अवसर से प्रदेश व्यापी स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन शुभारंभ करने जा रहे हैं।

भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को मिशन के रूप में लागू करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ध्येय मंत्र GYAN पर ध्यान (ग़रीब, युवा, अन्नदाता और नारी) के सशक्तिकरण पर रहा है। उनके सशक्त एवं विजनरी नेतृत्व में प्रदेश सरकार का विशेष फोकस युवाओं के सशक्तिकरण पर है।

मुख्यमंत्री यादव लॉन्‍च करेंगे प्रदेश व्यापी युवा शक्ति मिशन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर प्रधानमंत्री श्री मोदी के ध्येय मंत्र को धरातल पर लाने के उद्देश्य से प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने, उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित कर उनकी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देने के लिये “स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन” प्रारंभ किया जा रहा है।

18 हजार स्क्वेयर फीट में बन रही, विश्व की सबसे बड़ी स्वामी विवेकानंद जी की 3-डी रंगोली

  • युवा शक्ति मिशन युवाओं के लिए तो विशेष है ही यह मध्यप्रदेश को भी गौरवांवित करने वाला है। इस दिन मध्य प्रदेश के नाम एक और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनने जा रहा है।
  • स्वामी विवेकानंद जयंती यानी 12 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं के लिए मिशन लॉन्च करेंगे, इसके साथ ही भोपाल के शौर्य स्मारक में विश्व की सबसे बड़ी 3-D रंगोली भी आकर्षण का केंद्र होगी।
  • स्वामी विवेकानंद जी की यह रंगोली 18 हजार स्क्वेयर फीट में बनाई जा रही है। इसका आकार 225X80 है। इसे बनाने में 4 हजार किलो रंगों का इस्तेमाल किया गया है।
  • रंगोली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी दिखाई देंगे।
  • इस रंगोली को बनवाने के पीछे सीएम डॉ. यादव का उद्देश्य युवाओं को हर प्रकार से प्रेरित करना है। वे इस रंगोली से युवाओं को संवाद, सामर्थ्य और समृद्धि का संदेश देंगे।

इंदौर की शिखा और उनकी टीम बना रही रंगोली

  • इस 3-डी रंगोली को बनाने में 48 घंटे का समय लगा है, इस रंगोली को इंदौर की जानी-मानी कलाकार शिखा शर्मा जोशी और उनकी टीम तैयार कर रही है।
  • शिखा शर्मा देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की ब्रांड एंबेसेडर हैं। वे नेपाल और थाईलैंड में उत्कृष्टता पुरस्कार जीत चुकी हैं।
  • जयपुर के इंटरनेशनल यूथ फेस्टिवल में भी उन्हें गोल्ड मेडल मिला था।
  • शिखा दसवीं क्लास से बच्चों को कला सिखा रही हैं. वे विश्व के करीब 70 हजार बच्चों को कला सिखा चुकी हैं। इन्हें रंगोली क्वीन के नाम से जाना जाता है।

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