Sunday, May 16News That Matters

ज्यादा हिंसक हो सकता है बंगाल चुनाव का आखिरी दौर:छठें फेज में BJP सांसदों और TMC विधायकों के बीच वर्चस्व की लड़ाई; इसलिए हिंसक भिड़ंत की आशंका; पिछले साल भी 57 की मौत

Share

बंगाल में चौथे चरण में कूचबिहार में हुई हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद माना जा रहा था कि बाकी के चरणों में हिंसक घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन 5वें चरण में पहले के मुकाबले चीजें कंट्रोल में रहीं और कोई बड़ी हिंसक घटना नहीं हुईं। हालांकि अभी भी तीन चरणों की वोटिंग बाकी है। इसलिए चुनाव आयोग खासी सतर्कता बरत रहा है। दरअसल, अब तक हिंसा के मामलों में ज्यादातर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता आमने-सामने हुए हैं। छठे चरण में चार जिलों की 43 सीटों पर मतदान होना है। खास बात ये है कि इन जिलों में आने वाली लोकसभा की ज्यादातर सीटों पर भाजपा का कब्जा है, जबकि ज्यादातर सीटों पर सिटिंग विधायक तृणमूल कांग्रेस के हैं। ऐसे में हिंसक झड़प की आशंका बनी हुई है।

चार जिलों की 43 सीटों पर होनी है वोटिंग

22 अप्रैल को उत्तर दिनाजपुर जिले की सभी 9 सीटों, नदिया जिले की 17 में से 9 सीटों, उत्तर चौबीस परगना की 33 में से 17 सीटों और बर्धमान जिले की 24 में 8 सीटों पर चुनाव होगा। इन जिलों का समीकरण देखें तो उत्तर दिनाजपुर जिले में लोकसभा की तीन सीटें दार्जिलिंग, रायगंज और बालुरघाट आती हैं। तीनों पर भाजपा के सांसद हैं। जबकि 9 विधानसभा सीटों में 6 पर तृणमूल, एक पर CPM, एक पर फॉरवर्ड ब्लॉक और एक पर कांग्रेस का विधायक है।

कूचबिहार में हिंसा के बाद CM ममता बनर्जी मृतकों के परिजनों से मिलने पहुंची थीं। उन्होंने इसके लिए BJP को जिम्मेदार ठहराया था।
कूचबिहार में हिंसा के बाद CM ममता बनर्जी मृतकों के परिजनों से मिलने पहुंची थीं। उन्होंने इसके लिए BJP को जिम्मेदार ठहराया था।

लोकसभा में भाजपा तो विधानसभा में TMC आगे

नदिया जिले की दो लोकसभा सीटों में से एक पर भाजपा और एक पर तृणमूल का सांसद है। जबकि यहां की 17 विधानसभा सीटों में तृणमूल के 13, कांग्रेस के 2 और भाजपा व लेफ्ट का एक-एक विधायक है। उत्तर 24 परगना की दो लोकसभा सीटों में से एक पर तृणमूल और एक पर भाजपा का सांसद है। विधानसभा की 12 सीटों में से 9 पर तृणमूल के विधायक हैं। 2 पर CPM और एक पर भाजपा का विधायक है। पूर्व बर्धमान की सीट से तृणमूल का सांसद है, जबकि यह सीट जिस बर्धमान जिले का हिस्सा है उसकी बाकी दो सीटों पर भाजपा का सांसद है। 22 अप्रैल को पूर्व बर्धमान की जिन 8 सीटों पर चुनाव है, उनमें से 7 पर तृणमूल के विधायक हैं और एक पर लेफ्ट का।

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक बंगाल में जैसे-जैसे मतदान समाप्ति की ओर बढ़ेगा, वैसे-वैसे खून खराबा भी बढ़ता जाएगा। अभी तक जितनी भी हिंसक वारदातें हुई हैं, उनमें तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के समर्थक आमने-सामने दिखे हैं। इससे जाहिर है, दोनों दलों में मुख्य चुनावी मुकाबला है और सत्ता पर काबिज होने के लिए उन्हें खूनी खेल से भी परहेज नहीं है। राज्य में चुनाव के दौरान राजनीतिक हिंसा कोई नई बात नहीं है। वाममोर्चा के लंबे शासन में चुनाव के दौरान जब राजनीतिक हिंसा होती थी तो ममता बनर्जी अधिक से अधिक केंद्रीय बल तैनात करने की मांग करती थीं। आज वही ममता केंद्रीय बलों पर पक्षपात करने का आरोप लगा रही हैं।

आने वाले चरणों में हिंसक घटनाएं न हों, इसको लेकर चुनाव आयोग सख्ती बरत रहा है। हर इलाके में सुरक्षाबल के जवानों की तैनाती की गई है।
आने वाले चरणों में हिंसक घटनाएं न हों, इसको लेकर चुनाव आयोग सख्ती बरत रहा है। हर इलाके में सुरक्षाबल के जवानों की तैनाती की गई है।

नदिया के रानाघाट, उत्तर 24 परगना के बैरकपुर व बनगांव भाजपा सांसदों के प्रभाव वाले क्षेत्र हैं। इसके अतिरिक्त हुगली, बर्दवान, दुर्गापुर और आसनसोल का शिल्पांचल भी भाजपा सांसदों के प्रभाव वाला क्षेत्र है। इन क्षेत्रों में भले ही विधानसभा क्षेत्र तृणमूल कांग्रेस के कब्जे में हों, लेकिन लोकसभा भाजपा के नियंत्रण में होने के कारण शेष चरण के मतदान में भाजपा और तृणमूल में जबर्दस्त टक्कर होगी।

लोकसभा और पंचायत चुनाव में बड़े लेवल पर हुई थी हिंसक घटनाएं

गृह मंत्रालय के मुताबिक पिछले साल बंगाल में राजनीतिक हिंसा के कुल 663 मामले सामने आए थे और कुल 57 लोगों की मौत हुई। 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान बंगाल में हिंसा के कुल 693 मामले दर्ज किए गए और 11 लोगों की मौत हुई। इसके बाद 1 जून 2019 से 31 दिसंबर 2019 तक राजनीतिक हिंसा के कुल 852 मामले दर्ज किए गए थे और 61 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, 2018 के पंचायत चुनावों में 23 लोगों की मौत हुई थी। BJP दावा करती है कि राजनीतिक हिंसा में उसके 130 कार्यकर्ताओं की मौत हुई है, जिसके लिए TMC जिम्मेदार है, जबकि TMC बंगाल में हिंसा फैलाने का आरोप BJP पर लगाती है।