Tuesday, January 26News That Matters

कैसे बढ़ाएं PSU का वैल्यूएशन:वित्त मंत्री को BJP ने दिए तीन सुझाव, पूंजी बाजार के खिलाड़ियों से लिया था फीडबैक

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शेयर बाजार कोविड-19 के चलते आई गिरावट से उबर कर काफी ऊपर आ चुका है लेकिन इस दौरान सरकारी कंपनियों के वैल्यूएशन में काफी उतार-चढ़ाव आया है। ऐसे में विनिवेश या स्ट्रैटेजिक सेल के लिए उनकी वैल्यू बढ़ाने को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बीजेपी ने तीन सूत्री रणनीति अपनाने का सुझाव दिया है। बीजेपी ने पिछले महीने और इस महीने की शुरुआत में बजट से पहले की बातचीत में कैपिटल मार्केट पार्टिसिपेंट से फीडबैक जुटाए थे। पार्टी ने सरकारी कंपनियों का वैल्यूएशन बढ़ाने के लिए फाइनेंस मिनिस्टर के पास प्रेजेंटेशन भी दिया था।

कंपनियों की संपत्ति बेचनी चाहिए और कॉरपोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाना चाहिए

बीजेपी के आर्थिक मामलों के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा, ‘हमें जो फीडबैक मिला है उसके आधार पर हमने सरकारी कंपनियों का वैल्यूएशन बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री को कई तरीके अपनाने के सुझाव दिए हैं। उसमें पहला है कंपनियों की संपत्तियों को बेचना और दूसरा है, उनके कॉरपोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाना।’ अग्रवाल ने कहा, ‘तीसरा सुझाव यह था कि सरकार बजट में यह बताने से परहेज करे कि नए वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिए कितनी रकम जुटानी है। क्योंकि लक्ष्य की घोषणा किए जाने से कंपनियों के वैल्यूएशन पर गहरा असर होता है। अब देखने वाली बात यह है कि सरकार हमारी सिफारिशें किस हद तक मानती है।’

बजट में विनिवेश के लक्ष्य के एलान से बाजार में शेयरों की सप्लाई बढ़ने का दबाव बनता है

अग्रवाल ने सुझावों के पीछे की दलील समझाते हुए कहा कि टारगेट हासिल करने की हड़बड़ी दिखाना सही नहीं होता। उन्होंने कहा, ‘घाटे में चल रही कंपनी को मार्केट क्यों भाव देगा? जरा अहम शेयर सूचकांकों का स्तर और सरकारी कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन की तुलना करके देखिए।’

एसेट मॉनेटाइजेशन, कॉरपोरेट गवर्नेंस से बने विनिवेश को लेकर समग्रता वाली रणनीति

उन्होंने कहा कि सरकार को एसेट मॉनेटाइजेशन और कॉरपोरेट गवर्नेंस के जरिए विनिवेश को लेकर समग्रता वाली रणनीति अपनानी चाहिए। इसके अलावा बजट में विनिवेश के लक्ष्य का एलान नहीं किया जाना चाहिए। बजट में विनिवेश के लक्ष्य का एलान नहीं करने के सुझाव पर अग्रवाल ने कहा कि इससे बाजार में शेयरों की सप्लाई बढ़ने का दबाव बनता है। इसके अलावा विनिवेश प्रक्रिया में समय और जरूरत के हिसाब से बदलाव करने की सहूलियत खत्म हो जाती है।