लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष
खरगे के आवास पर हुई अहम बैठक, रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे विपक्षी दल
नई दिल्ली |09 फरवरी 2026
लोकसभा में विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होता नजर आ रहा है और जल्द ही लोकसभा में प्रस्ताव पेश किया जा सकता है।
मिली जानकारी के अनुसार, संसद सत्र के दौरान कार्यवाही के संचालन को लेकर विपक्ष लंबे समय से असंतोष जता रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर सदन में सरकार के पक्ष में पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहे हैं और विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया जा रहा।
खरगे के घर हुई रणनीतिक बैठक
सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले आज कई प्रमुख विपक्षी नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर पहुंचे। यहां विपक्षी दलों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें मौजूदा राजनीतिक हालात, संसद की कार्यवाही और स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति पर चर्चा की गई।
बैठक में कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी बताई जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में प्रस्ताव के समय, समर्थन जुटाने और आगे की संसदीय रणनीति पर विचार किया गया।
क्या है विपक्ष का आरोप
विपक्षी दलों का कहना है कि—
सदन में विपक्षी सांसदों को बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही
सरकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा से बचा जा रहा
बार-बार विपक्षी सदस्यों को निलंबित किया जा रहा है
इन्हीं कारणों से विपक्ष स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।
सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल सरकार या लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि सत्तारूढ़ दल पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है और स्पीकर के फैसलों को संविधान व संसदीय नियमों के अनुरूप बताता रहा है।
संसद में बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव
यदि विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाता है, तो आने वाले दिनों में संसद में राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है। यह कदम न केवल संसदीय कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है, बल्कि सियासी माहौल को भी और गर्मा सकता है।
चेन्नई/करूर | 12 जनवरी, 2026
तमिल सुपरस्टार और ‘तमिझगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के अध्यक्ष थलापति विजय की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। करूर में आयोजित एक विशाल राजनीतिक रैली के दौरान हुई भगदड़ और उसमें हुई मौतों के मामले में CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने विजय से गहन पूछताछ शुरू कर दी है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि जब रैली में अव्यवस्था फैली, तो उसे समय रहते रोका क्यों नहीं गया?
CBI की पूछताछ के 5 बड़े सवाल
जांच एजेंसी ने विजय और उनकी पार्टी के आयोजनकर्ताओं के सामने कुछ तीखे सवाल रखे हैं:
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भाषण क्यों नहीं रोका?: चश्मदीदों के मुताबिक, जब लोग गर्मी और भीड़ की वजह से बेहोश हो रहे थे, तब भी मंच से संबोधन जारी था। CBI ने पूछा- “क्या भीड़ को काबू करने के बजाय शक्ति प्रदर्शन को प्राथमिकता दी गई?”
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भीड़ का गलत अनुमान: क्या रैली के लिए जितनी अनुमति ली गई थी, उससे कहीं ज्यादा भीड़ बुलाई गई?
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सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन: पुलिस के साथ हुए समझौते के अनुसार सुरक्षा घेरा (Barricading) क्यों नहीं बनाया गया?
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इमरजेंसी एग्जिट: भगदड़ के समय लोगों के निकलने के लिए पर्याप्त रास्ते क्यों नहीं थे?
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मेडिकल सुविधाएं: क्या आयोजन स्थल पर एम्बुलेंस और डॉक्टरों की तैनाती नियमों के मुताबिक थी?
रैली की प्लानिंग और पुलिस का समझौता
CBI की जांच में यह बात सामने आई है कि आयोजन समिति और स्थानीय पुलिस के बीच हुए MOU (समझौता ज्ञापन) की शर्तों का उल्लंघन किया गया। शुरुआती जांच के मुताबिक:
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अनुमति 50,000 लोगों की थी, जबकि मौके पर करीब 1.5 लाख से ज्यादा लोग मौजूद थे।
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भीड़ नियंत्रण (Crowd Control) के लिए तैनात किए गए निजी बाउंसरों के पास ऐसे आयोजनों का कोई अनुभव नहीं था।
“हम इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence) थी।” – CBI सूत्र
थलापति विजय का पक्ष
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान विजय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह मंच पर थे और उन्हें मैदान के पिछले हिस्से में हो रही हलचल का अंदाजा नहीं था। उन्होंने इसे विरोधियों की साजिश करार दिया है। हालांकि, CBI इस दलील से संतुष्ट नजर नहीं आ रही है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
इस पूछताछ ने तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल ला दिया है। समर्थक इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल विजय पर गैर-जिम्मेदार होने का आरोप लगा रहे हैं।
अगला कदम: CBI अब रैली के वीडियो फुटेज और पार्टी के फंड्स की भी जांच कर सकती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि भीड़ को जुटाने के लिए किन संसाधनों का उपयोग किया गया था।
अमित शाह ने इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 किया पेश, 4 पुराने कानून समाप्त होंगे
गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया, जिसका मकसद भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है. इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 के कानून रूप लेने के बाद भारत के आव्रजन और विदेशी नागरिकों से जुड़े चार पुराने कानूनों को समाप्त कर दिया जाएगा. इनमें फॉरेनर्स एक्ट 1946, पासपोर्ट एक्ट 1920, रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स एक्ट 1939 और इमिग्रेशन एक्ट 2000 शामिल हैं.
यह बिल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को प्राथमिकता देते हुए विदेशी नागरिकों के प्रवेश और निवास को कड़े नियमों के दायरे में लाने का प्रस्ताव करता है. इसमें प्रावधान किया गया है कि अगर किसी व्यक्ति की मौजूदगी देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनती है या फिर वह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में अवैध रूप से नागरिकता प्राप्त करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा, अगर किसी विदेशी नागरिक के प्रवेश से भारत के किसी अन्य देश के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं, तो उसे देश में आने से रोका जा सकता है.
इस प्रस्तावित कानून के तहत, आव्रजन अधिकारी के निर्णय को अंतिम और बाध्यकारी माना जाएगा. पहले भी सरकार को विदेशी नागरिकों को भारत में प्रवेश से रोकने का अधिकार था, लेकिन किसी कानून में इस प्रावधान का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था. अब यह विधेयक इस प्रक्रिया को और अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाने का प्रयास करेगा.
यह प्रावधान किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के भारत में प्रवेश करता है, तो उसे पांच साल की कैद या 5 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है. वहीं, अगर कोई जाली दस्तावेजों का उपयोग करता है या धोखाधड़ी से पासपोर्ट प्राप्त करता है, तो उसके खिलाफ दो साल से लेकर सात साल तक की कैद की सजा का प्रावधान होगा. इसके अलावा, ऐसे मामलों में कम से कम 1 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
जो विदेशी नागरिक वीजा अवधि समाप्त होने के बावजूद भारत में अवैध रूप से रुकते हैं, उनके खिलाफ भी कड़े प्रावधान किए गए हैं. इस स्थिति में उन्हें तीन साल तक की कैद और 3 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.
सरकार इस बिल को भारत की सुरक्षा और संप्रभुता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रही है. इसके जरिए उन विदेशी नागरिकों पर शिकंजा कसा जाएगा, जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं या फिर सुरक्षा के लिहाज से किसी खतरे की आशंका पैदा कर सकते हैं. इस बिल पर संसद में चर्चा के बाद इसे कानून का रूप देने की प्रक्रिया शुरू होगी.




