नई दिल्ली | 23 सितंबर 2026
भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और इसके साथ देश के रेलवे नेटवर्क में कई ऐसी हाई-स्पीड तकनीकों को शामिल किया जा रहा है, जिनका इस्तेमाल पारंपरिक रेल नेटवर्क में सामान्य रूप से नहीं होता। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में ट्रेनें अधिकतम 320 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने के लिए डिजाइन की गई हैं। ऐसे में सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक है—इतनी तेज रफ्तार में ट्रेन को एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर सुरक्षित और आरामदायक तरीके से ले जाना।
इसी चुनौती से निपटने के लिए हाई-स्पीड रेल सिस्टम में विशेष कैंटेड टर्नआउट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह ऐसी ट्रैक-स्विचिंग व्यवस्था है जिसमें ट्रेन के ट्रैक बदलने वाले हिस्से में भी ट्रैक का आवश्यक झुकाव यानी कैंट बनाए रखा जाता है। इससे तेज गति से गुजरने वाली ट्रेन पर अचानक लगने वाले पार्श्व बलों और कंपन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
आखिर क्या होता है कैंटेड टर्नआउट?
सबसे पहले समझना जरूरी है कि टर्नआउट रेलवे ट्रैक का वह हिस्सा होता है, जहां ट्रेन को एक पटरी से दूसरी पटरी पर जाने का रास्ता मिलता है।
सामान्य रेल ट्रैक में जब ट्रेन किसी घुमावदार हिस्से से गुजरती है तो बाहरी रेल को अंदर वाली रेल की तुलना में थोड़ा ऊंचा रखा जाता है। ट्रैक के इस झुकाव को कैंट या बैंकिंग कहा जाता है।
तेज रफ्तार से कर्व पर चलने वाली ट्रेन में यह झुकाव ट्रेन पर लगने वाले पार्श्व बलों को संतुलित करने में मदद करता है।
कैंटेड टर्नआउट की खासियत यह है कि जब ट्रेन ट्रैक बदलती है, तब भी ट्रैक का यह झुकाव उपयुक्त तरीके से जारी रहता है। इससे ट्रेन को अचानक सपाट ट्रैक और फिर घुमावदार ट्रैक के बीच बदलाव का सामना नहीं करना पड़ता।
इतनी तेज रफ्तार में ट्रैक बदलना क्यों मुश्किल है?
320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही ट्रेन में छोटी-सी ट्रैक अनियमितता या दिशा में अचानक बदलाव भी सामान्य ट्रेन की तुलना में कहीं ज्यादा प्रभाव पैदा कर सकता है।
पारंपरिक टर्नआउट में ट्रैक बदलते समय पहियों को अलग-अलग रेल ज्योमेट्री और क्रॉसिंग हिस्सों से गुजरना पड़ता है। तेज गति पर इससे कंपन, गतिशील बल और यात्रियों को महसूस होने वाली असुविधा बढ़ सकती है।
इसी वजह से हाई-स्पीड रेल में ट्रैक स्विचिंग सिस्टम को सामान्य रेलवे से कहीं ज्यादा सटीक तरीके से डिजाइन करना पड़ता है।
कैंटेड टर्नआउट यात्रियों के लिए कैसे मददगार?
जब ट्रेन तेज गति से एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर जाती है तो उसके पहियों और ट्रैक के बीच बलों में बदलाव होता है।
कैंटेड टर्नआउट में ट्रैक का झुकाव इस तरह डिजाइन किया जाता है कि इस बदलाव को अधिक सहज बनाया जा सके। इससे ट्रेन के गुजरने के दौरान अचानक कंपन और पार्श्व झटके कम करने में मदद मिलती है।
यही वजह है कि हाई-स्पीड ट्रेन में यात्रियों को ट्रैक बदलते समय यात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा आरामदायक महसूस हो सकती है।
हालांकि, यह कहना अधिक सटीक होगा कि तकनीक झटकों और कंपन को कम करने के लिए डिजाइन की गई है, न कि यह गारंटी देती है कि यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में बिल्कुल कोई झटका महसूस नहीं होगा।
सिर्फ कैंटेड टर्नआउट ही नहीं, मूवेबल क्रॉसिंग भी खास
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में हाई-स्पीड टर्नआउट सिस्टम का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा मूवेबल क्रॉसिंग या स्विंग-नोज क्रॉसिंग है।
पारंपरिक फिक्स्ड क्रॉसिंग में उस स्थान पर रेल की सतत सतह में एक गैप होता है, जहां पहिया क्रॉसिंग से गुजरता है। तेज गति पर यह गैप पहिया-रेल संपर्क में अतिरिक्त प्रभाव, कंपन और घिसावट पैदा कर सकता है।
मूवेबल क्रॉसिंग में क्रॉसिंग का नोज वाला हिस्सा ट्रेन के चुने गए मार्ग के अनुसार अपनी स्थिति बदलता है। इससे पहिए के लिए ज्यादा लगातार रेल सतह उपलब्ध होती है और क्रॉसिंग से गुजरते समय गतिशील प्रभाव कम करने में मदद मिलती है।
दो पॉइंट मशीनें करेंगी महत्वपूर्ण काम
हाई-स्पीड टर्नआउट में केवल पटरी का डिजाइन ही महत्वपूर्ण नहीं है। इसे सही दिशा में ले जाने और सुरक्षित रूप से लॉक करने के लिए पॉइंट मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के हाई-स्पीड टर्नआउट में दो स्वतंत्र पॉइंट मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें एक मशीन स्विच रेल को संचालित और लॉक करती है, जबकि दूसरी मूवेबल क्रॉसिंग नोज को संचालित और लॉक करती है।
ट्रेन को टर्नआउट से गुजरने की अनुमति तब दी जाती है, जब सिस्टम यह पुष्टि कर ले कि संबंधित हिस्से सही स्थिति में पहुंच चुके हैं और सुरक्षित रूप से लॉक हैं।
सिग्नलिंग सिस्टम भी करेगा स्थिति की जांच
हाई-स्पीड ट्रेन के मामले में केवल यांत्रिक लॉक पर्याप्त नहीं है। टर्नआउट की स्थिति को सिग्नलिंग और इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ जोड़ा जाता है।
यानी ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति देने से पहले सिस्टम यह जांच सकता है कि ट्रैक का मार्ग सही तरीके से सेट है और आवश्यक घटक अपनी निर्धारित स्थिति में लॉक हैं।
अगर स्थिति अपेक्षित नहीं हो तो ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाती। यह व्यवस्था हाई-स्पीड ऑपरेशन में सुरक्षा की अतिरिक्त परत उपलब्ध कराती है।
भारत में पहली बार क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक?
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है। इसकी लंबाई लगभग 508 किलोमीटर है और इसे अधिकतम 320 किमी/घंटा की गति के लिए तैयार किया जा रहा है।
ऐसी गति पर ट्रेन के हर महत्वपूर्ण हिस्से—ट्रैक, सिग्नलिंग, पॉइंट मशीन, क्रॉसिंग और रोलिंग स्टॉक—को बहुत सटीक इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप काम करना पड़ता है।
इसी वजह से हाई-स्पीड टर्नआउट तकनीक इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ट्रैक और पहियों की घिसावट भी हो सकती है कम
हाई-स्पीड ट्रैक पर लगातार कंपन और गतिशील प्रभाव केवल यात्रियों की सुविधा को प्रभावित नहीं करते, बल्कि रेल और पहियों पर भी अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।
कैंटेड टर्नआउट और मूवेबल क्रॉसिंग जैसी तकनीकों का उद्देश्य ट्रैक बदलने के दौरान इन प्रभावों को कम करना है। इससे रेल, पहियों और अन्य उपकरणों की घिसावट कम करने तथा रखरखाव की जरूरतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की स्पीड कितनी होगी?
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 320 किमी/घंटा निर्धारित है।
NHSRCL के अनुसार लगभग 508 किमी लंबे पूरे कॉरिडोर पर सीमित स्टॉप के साथ यात्रा का समय करीब 2 घंटे 7 मिनट रखा गया है। कॉरिडोर में मुंबई क्षेत्र से शुरू होकर गुजरात के कई प्रमुख शहरों को जोड़ा जाएगा और यात्रा साबरमती तक जाएगी।
320 km/h पर यात्रियों को क्या फायदा होगा?
इस पूरी तकनीकी व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य सिर्फ ट्रेन को तेज चलाना नहीं है। हाई-स्पीड रेल में सुरक्षा, स्थिरता और यात्री आराम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
टर्नआउट के दौरान ट्रैक की ज्योमेट्री को नियंत्रित रखना, मूवेबल क्रॉसिंग से सतत रेल संपर्क उपलब्ध कराना और पॉइंट मशीनों तथा इंटरलॉकिंग से सही स्थिति की पुष्टि करना—ये सभी व्यवस्थाएं मिलकर हाई-स्पीड ट्रैक स्विचिंग को अधिक नियंत्रित बनाती हैं।
बुलेट ट्रेन परियोजना कब शुरू होगी?
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। हालिया जानकारी के अनुसार शुरुआती सेक्शन पर ट्रायल की तैयारी की जा रही है और परियोजना को चरणों में परिचालन के लिए तैयार किया जा रहा है।
पूरे कॉरिडोर को 320 किमी/घंटा की अधिकतम परिचालन गति के लिए विकसित किया जा रहा है।

BRICS Summit: भारत की नई कूटनीतिक चाल, अजरबैजान के साथ INSTC पर बढ़ेगा सहयोग
नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026।
भारत की मेजबानी में होने जा रहे BRICS शिखर सम्मेलन के बीच भारत-अजरबैजान संबंधों को लेकर भी कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। खासतौर पर इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC को लेकर अजरबैजान की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव की पहली मुलाकात हाल ही में 1 सितंबर को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO Summit के दौरान हुई थी।
अब BRICS के मंच और उससे जुड़े कूटनीतिक संपर्कों के बीच भारत और अजरबैजान के बीच आर्थिक तथा कनेक्टिविटी सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अजरबैजान की भौगोलिक स्थिति INSTC के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कॉरिडोर भारत को ईरान, रूस और आगे यूरोपीय बाजारों से जोड़ने की क्षमता रखता है।
पहली मुलाकात बिश्केक में, अब BRICS के बीच बढ़ी अहमियत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव की पहली आमने-सामने मुलाकात 1 सितंबर 2026 को बिश्केक में SCO Summit के दौरान हुई थी। अजरबैजान के राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय एजेंडे पर विचारों का आदान-प्रदान किया था।
यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि भारत और अजरबैजान के संबंधों में पिछले कुछ समय से कुछ संवेदनशील राजनीतिक मुद्दे रहे हैं। अजरबैजान के पाकिस्तान के साथ करीबी संबंधों को भारत की रणनीतिक नजर से भी देखा जाता रहा है।
इसके बावजूद अब दोनों देशों के बीच बातचीत के नए रास्ते खुलते दिखाई दे रहे हैं। खासतौर पर व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय संपर्क के मुद्दे दोनों देशों को व्यावहारिक सहयोग की दिशा में आगे ले जा सकते हैं।
अजरबैजान क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?
अजरबैजान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत उसकी भौगोलिक स्थिति है। यह देश कैस्पियन क्षेत्र में स्थित है और यूरोप तथा एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु बन सकता है।
भारत लंबे समय से ऐसे वैकल्पिक व्यापार मार्गों पर काम कर रहा है, जिनसे समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम की जा सके और रूस तथा यूरोपीय बाजारों तक माल पहुंचाने में समय और लागत दोनों को कम किया जा सके।
यहीं पर INSTC की भूमिका सामने आती है।
क्या है INSTC?
International North-South Transport Corridor यानी INSTC एक बहु-देशीय परिवहन नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य भारत को ईरान, रूस और आगे यूरोप के बाजारों से जोड़ना है।
इस कॉरिडोर में समुद्री, रेल और सड़क मार्गों का संयोजन शामिल है। इसका उद्देश्य पारंपरिक व्यापार मार्गों के मुकाबले सामान की आवाजाही को अधिक तेज और प्रभावी बनाना है।
अजरबैजान इस नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्से में स्थित है। इसलिए भारत-अजरबैजान सहयोग INSTC की कुछ अधूरी कड़ियों को मजबूत करने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार अजरबैजान के साथ बेहतर तालमेल से कॉरिडोर की कनेक्टिविटी और व्यापारिक क्षमता को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
रूस तक पहुंच के लिए अजरबैजान की भूमिका अहम
भारत और रूस के बीच व्यापारिक संबंध लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में भारत के लिए रूस तक बेहतर और वैकल्पिक कनेक्टिविटी तैयार करना रणनीतिक प्राथमिकता है।
INSTC इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत से सामान ईरान के रास्ते कैस्पियन क्षेत्र तक और वहां से अजरबैजान होते हुए रूस तक पहुंचाया जा सकता है।
इससे भारत-रूस व्यापार को एक वैकल्पिक लॉजिस्टिक नेटवर्क मिल सकता है। साथ ही मध्य एशिया और यूरोप के कुछ बाजारों तक पहुंच भी आसान हो सकती है।
मोदी-पुतिन मुलाकात में भी INSTC पर चर्चा की संभावना
BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। पुतिन 11 सितंबर को नई दिल्ली पहुंच चुके हैं और BRICS Summit में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय चर्चा करेंगे।
भारत-रूस बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, निवेश और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों के साथ कनेक्टिविटी भी अहम विषय हो सकता है।
ऐसे में INSTC को आगे बढ़ाने के लिए अजरबैजान की भूमिका पर भी चर्चा की संभावना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पाकिस्तान और तुर्की से करीबी के बावजूद भारत के साथ संवाद
अजरबैजान के पाकिस्तान और तुर्की के साथ करीबी संबंध रहे हैं। यही कारण है कि भारत-अजरबैजान संबंधों में होने वाला कोई भी नया बदलाव रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में देशों के संबंध हमेशा किसी एक धड़े तक सीमित नहीं रहते। आर्थिक हित, व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय जरूरतें देशों को नए सहयोग के रास्ते तलाशने के लिए प्रेरित करती हैं।
भारत भी इसी व्यावहारिक दृष्टिकोण के तहत अजरबैजान के साथ संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
BRICS Summit के लिए दिल्ली में जुट रहे बड़े नेता
भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। भारत ने इस वर्ष BRICS के लिए विकास, मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित थीम तय की है।
BRICS में इस समय 11 सदस्य देश हैं—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात। समूह वैश्विक आबादी, अर्थव्यवस्था और व्यापार में बड़ी हिस्सेदारी रखता है।
ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन सिर्फ BRICS देशों की बैठक तक सीमित नहीं है। इसके दौरान अलग-अलग देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रही है।
भारत की नजर सिर्फ BRICS पर नहीं, कनेक्टिविटी पर भी
भारत की रणनीति अब केवल राजनीतिक समूहों में भागीदारी तक सीमित नहीं दिखाई देती। व्यापार मार्ग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, सप्लाई चेन और परिवहन कनेक्टिविटी भी विदेश नीति के महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं।
INSTC इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अगर भारत-अजरबैजान सहयोग के जरिए इस कॉरिडोर की कनेक्टिविटी मजबूत होती है तो भारत के लिए रूस और मध्य एशिया तक माल पहुंचाने के नए विकल्प खुल सकते हैं।
इसका फायदा केवल बड़े व्यापारिक समझौतों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह, रेल परिवहन और क्षेत्रीय व्यापार को भी मिल सकता है।
BRICS के बीच भारत की संतुलित कूटनीति
नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit के दौरान भारत के सामने एक बड़ी चुनौती अलग-अलग देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों में संतुलन बनाए रखने की भी होगी।
एक तरफ रूस भारत का लंबे समय से महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, दूसरी तरफ चीन के साथ संबंधों में कई जटिलताएं हैं। वहीं पश्चिमी देशों के साथ भारत के आर्थिक और रणनीतिक संबंध भी लगातार मजबूत हुए हैं।
ऐसे माहौल में अजरबैजान जैसे देशों के साथ कनेक्टिविटी और व्यापार पर आधारित सहयोग भारत की बहुस्तरीय विदेश नीति को मजबूत कर सकता है।
आने वाले दिनों में क्या होगा अहम?
अब नजर BRICS Summit के दौरान होने वाली द्विपक्षीय बैठकों और उनके नतीजों पर रहेगी। खासतौर पर भारत-रूस बातचीत और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दों पर किसी ठोस प्रगति को महत्वपूर्ण माना जाएगा।
भारत-अजरबैजान संबंधों में भी यह देखना अहम होगा कि बिश्केक में हुई मोदी-अलीयेव मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक और कनेक्टिविटी सहयोग किस दिशा में आगे बढ़ता है।
अगर INSTC से जुड़े लंबित कनेक्टिविटी मुद्दों पर प्रगति होती है तो इसका असर भारत-ईरान-रूस व्यापार मार्ग पर भी पड़ सकता है।

असम में भीषण सड़क हादसा, बस-ट्रक की आमने-सामने टक्कर में 6 की मौत
सोनापुर, असम | 31 अगस्त 2026।
असम में रविवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। सोनापुर के पास NH-27 पर एक यात्री मिनीबस और ट्रक की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसा इतना भीषण था कि इसमें छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई यात्री घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
NH-27 पर हुआ भीषण हादसा
जानकारी के मुताबिक हादसा सोनापुर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर रविवार शाम हुआ। एक यात्री मिनीबस यात्रियों को लेकर जा रही थी, इसी दौरान सामने से आ रहे ट्रक से उसकी सीधी टक्कर हो गई।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मिनीबस को भारी नुकसान पहुंचा। हादसे के बाद सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को घटना की सूचना दी।
छह लोगों की मौके पर गई जान
इस दुर्घटना में छह लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है। हादसे में घायल यात्रियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
घायलों में कुछ लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से घायलों को जरूरी उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए राहत कार्य शुरू किया गया।
पुलिस ने घटना से जुड़े तथ्यों को जुटाना शुरू कर दिया है। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।
कैसे हुई टक्कर?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मिनीबस और ट्रक के बीच आमने-सामने की टक्कर हुई। हालांकि, दोनों वाहनों की गति कितनी थी और दुर्घटना के पीछे चालक की गलती, सड़क की स्थिति या कोई अन्य कारण था या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
हादसे के बाद सड़क पर मची अफरा-तफरी
टक्कर के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। क्षतिग्रस्त मिनीबस से यात्रियों को बाहर निकालने के लिए स्थानीय लोगों ने भी मदद की।
हादसे के चलते कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित होने की स्थिति भी बनी। पुलिस ने मौके पर व्यवस्था संभालते हुए राहत कार्य को आगे बढ़ाया।
घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया
हादसे में घायल हुए यात्रियों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में ले जाया गया। स्वास्थ्यकर्मियों को घायलों के उपचार के लिए तैयार रखा गया।
प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना रही।
हादसे की जांच जारी
पुलिस अब दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है। दुर्घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ-साथ प्रत्यक्षदर्शियों से भी जानकारी ली जा सकती है।
यह भी पता लगाया जा रहा है कि हादसे के समय दोनों वाहनों की स्थिति क्या थी और टक्कर किन परिस्थितियों में हुई।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
असम में सामने आए इस हादसे ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेज रफ्तार, लापरवाही से ड्राइविंग, खराब मौसम, सड़क की स्थिति और वाहनों की तकनीकी खराबी जैसे कई कारण सड़क हादसों के पीछे हो सकते हैं। हालांकि, इस विशेष दुर्घटना में वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
परिवारों में पसरा मातम
हादसे में छह लोगों की मौत की खबर सामने आने के बाद मृतकों के परिवारों में मातम छा गया है। परिजनों को हादसे की सूचना दिए जाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।
प्रशासन की नजर स्थिति पर
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया। दुर्घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य पूरा करने के साथ यातायात व्यवस्था को सामान्य करने की कोशिश की गई।
अधिकारियों की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे दुर्घटनास्थल पर अनावश्यक भीड़ न लगाएं, ताकि राहत कार्य में परेशानी न हो।
आगे क्या होगा?
अब पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ। दुर्घटना में शामिल दोनों वाहनों की जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता घायलों का इलाज और उनके स्वास्थ्य की स्थिति है।
निष्कर्ष
असम के सोनापुर में NH-27 पर मिनीबस और ट्रक की आमने-सामने हुई टक्कर में छह लोगों की मौत हो गई और कई यात्री घायल हुए। हादसा रविवार शाम हुआ और घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस एवं प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव अभियान चलाया।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है। इस दर्दनाक दुर्घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की जरूरत को सामने ला दिया है।

जहां आतंकियों ने बरपाया था कहर, अब वहां पहुंचेगी सड़क; बैसरन घाटी में शुरू हुआ बड़ा विकास कार्य
श्रीनगर/पहलगाम, 17 अगस्त 2026।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की खूबसूरत बैसरन घाटी, जो 22 अप्रैल 2025 के भयावह आतंकी हमले के बाद देशभर में चर्चा में आई थी, अब विकास की नई राह पर आगे बढ़ रही है। जिस इलाके में कभी पर्यटकों पर आतंकियों ने गोलियां बरसाई थीं, वहां अब पक्की सड़क बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है।
बैसरन घाटी तक फिलहाल मुख्य रूप से पैदल या घोड़ों के जरिए पहुंचा जाता है। सड़क संपर्क नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों, पर्यटकों और सुरक्षा बलों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब यहां पक्की सड़क बनने से इलाके की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
आतंकी हमले के बाद सामने आई थी सड़क की कमी
22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में पर्यटकों को निशाना बनाकर आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी सामने आई कि घटनास्थल तक सुरक्षाबलों को पहुंचने में काफी समय लगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क संपर्क नहीं होने के कारण सुरक्षा बलों को बैसरन घाटी तक पहुंचने के लिए पैदल रास्ते का सहारा लेना पड़ा। बताया गया कि सुरक्षाबलों को मौके तक पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लगा, तब तक हमलावर वारदात को अंजाम देकर वहां से निकल चुके थे।
अब मैदान तक पहुंचेगी पक्की सड़क
आतंकी हमले के बाद इलाके की सुरक्षा और कनेक्टिविटी को लेकर सड़क की जरूरत पर जोर दिया गया। अब बैसरन के मैदान तक पक्की सड़क बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।
इस सड़क के बनने से स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए आवागमन आसान होगा। इसके साथ ही आपात स्थिति में पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा बलों को भी घटनास्थल तक तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी।
पहलगाम विधायक ने फैसले का स्वागत किया
पहलगाम के विधायक ने बैसरन में सड़क निर्माण के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि 2025 के आतंकी हमले के बाद हुई जांच में भी इलाके में सड़क कनेक्टिविटी की कमी एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आई थी।
विधायक के मुताबिक, बैसरन एक बेहद प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, लेकिन यहां पहुंचने के लिए लोगों को पैदल या घोड़ों का सहारा लेना पड़ता है। सड़क बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी फायदा होगा।
पर्यटन के साथ सुरक्षा भी होगी मजबूत
बैसरन घाटी पहलगाम से करीब 5 से 7 किलोमीटर दूर स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। लगभग 8,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह इलाका अपनी प्राकृतिक सुंदरता और देवदार के जंगलों के लिए जाना जाता है।
सड़क बनने के बाद इस इलाके में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वहीं सुरक्षा के नजरिए से भी यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। किसी आपात स्थिति में सुरक्षा बलों और राहत एजेंसियों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना पहले की तुलना में आसान हो सकता है।
गंडोला सेवा शुरू करने की भी तैयारी
बैसरन में सड़क के अलावा पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने की भी योजना है। पहलगाम विधायक के अनुसार, इलाके में गंडोला सेवा शुरू करने का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा।
इससे बैसरन घाटी तक पर्यटकों की पहुंच और आसान हो सकती है तथा क्षेत्र में पर्यटन के बुनियादी ढांचे को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
आतंक की घटना के बाद विकास का नया अध्याय
बैसरन घाटी लंबे समय से कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल रही है, लेकिन 22 अप्रैल 2025 के आतंकी हमले ने इसकी पहचान को एक दर्दनाक घटना से जोड़ दिया। अब सड़क निर्माण और बेहतर कनेक्टिविटी की पहल को इलाके में सुरक्षा और पर्यटन—दोनों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुंबई में मॉनसून बना मौत का कारण, इमारत गिरने से 6 की जान गई
मुंबई | 6 जुलाई 2026
मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच रविवार देर रात एक बड़ा हादसा हो गया। पूर्वी मुंबई के मानखुर्द स्थित जनता नगर इलाके में एक तीन मंजिला चॉल (आवासीय इमारत) अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। मृतकों में पांच बच्चे और एक महिला शामिल हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भारी बारिश के कारण इमारत पहले से ही कमजोर हो चुकी थी। रविवार रात अचानक तेज आवाज के साथ इमारत का बड़ा हिस्सा ढह गया और आसपास की झोपड़ियों पर भी मलबा गिर गया। हादसे के समय कई लोग अपने घरों में सो रहे थे, जिससे कई लोग मलबे में दब गए।
सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड, बीएमसी, पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और अन्य राहत एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं। जेसीबी मशीनों और आधुनिक उपकरणों की मदद से कई घंटे तक राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन छह लोगों को बचाया नहीं जा सका।
प्रशासन ने आशंका जताई है कि लगातार बारिश और इमारत की जर्जर हालत हादसे की प्रमुख वजह हो सकती है। अधिकारियों ने आसपास की अन्य पुरानी और खतरनाक इमारतों का भी निरीक्षण शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
मुंबई में लगातार हो रही बारिश के कारण केवल यह हादसा ही नहीं, बल्कि शहर के कई हिस्सों में जलभराव, पेड़ गिरने, सड़क और रेल यातायात बाधित होने जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है और लोगों से अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।
स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के बेहतर इलाज का भरोसा दिलाया है। साथ ही संवेदनशील और जर्जर इमारतों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है।

हुगली में भारी हंगामा: पूर्व TMC विधायक रामेंदु सिन्हा राय पर फूटा जनता का गुस्सा, थाने के बाहर फेंके अंडे; ‘चोर-चोर’ के नारों से गूंजा परिसर
दिनांक: 22 जून, 2026
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से एक बेहद सनसनीखेज और हाई-वोल्टेज ड्रामे की खबर सामने आई है। तारकेश्वर विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक रामेंदु सिन्हा राय के खिलाफ स्थानीय जनता का गुस्सा इस कदर फूटा कि पुलिस कस्टडी में ही उन पर अंडों से हमला कर दिया गया।
हुगली जिला पुलिस की एक विशेष टीम जब आरोपी पूर्व विधायक को कर्नाटक के बेलगावी (बेलगांव) से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर धानियाखाली थाने लेकर पहुंची, तो वहां पहले से ही घात लगाए बैठी आक्रोशित भीड़ ने उन्हें घेर लिया। भीड़ ने न सिर्फ पूर्व विधायक पर ताबड़तोड़ अंडे बरसाए, बल्कि उनके खिलाफ ‘चोर-चोर’ के गगनभेदी नारे भी लगाए।
सरकारी राहत सामग्री चोरी और अवैध हथियार चमकाने का है आरोप
हुगली ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP) कुंवर भूषण सिंह ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पूर्व विधायक रामेंदु सिन्हा राय के खिलाफ यह पूरी कार्रवाई एक गंभीर आपराधिक मामले के तहत की गई है:
-
लॉड शेडिंग का उठाया फायदा: बीती 11 जून की शाम करीब 7 बजे, जब धानियाखाली थाना क्षेत्र के कोटालपुर स्थित विवेकानंद टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में बिजली गुल (लोड शेडिंग) थी, तब पूर्व विधायक अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कॉलेज परिसर से एक मोटर वैन में भारी मात्रा में सरकारी राहत सामग्री (तिरपाल, डस्टबिन, कंबल आदि) अवैध रूप से बाहर भिजवा रहे थे।
-
हथियार दिखाकर दी धमकी: जब स्थानीय ग्रामीणों और भाजपा समर्थकों ने इस संदिग्ध गतिविधि को देखा, तो उन्होंने गाड़ी को रोककर कड़ा विरोध दर्ज कराया। खुद को घिरता देख पूर्व विधायक रामेंदु सिन्हा राय ने अपनी जेब से अवैध छोटा हथियार (पिस्तौल) निकालकर प्रदर्शनकारियों को जान से मारने की धमकी दी और वहां से फरार हो गए।
पुलिस ने अगले दिन 12 जून को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 303(2), 352, 61(2) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। कॉलेज के दो कमरों से भारी मात्रा में चोरी की गई राहत सामग्री बरामद की गई थी।
कर्नाटक में छिपे थे नेताजी, पुलिस ने दबोचा
मामला दर्ज होने के बाद से ही पूर्व विधायक गिरफ्तारी से बचने के लिए राज्य छोड़कर भाग गए थे। हुगली पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से उनका पीछा किया और रविवार सुबह कर्नाटक के बेलगावी से उन्हें और उनके एक सहयोगी को धर दबोचा। वहां की स्थानीय अदालत से ट्रांजिट रिमांड हासिल करने के बाद पुलिस टीम रविवार देर शाम उन्हें लेकर बंगाल पहुंची थी।
बंगाल में थम नहीं रहा ‘एग ट्रीटमेंट’ का दौर
थाने के बाहर हुई इस घटना पर भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने चुटकी लेते हुए इसे ‘जनता का गुस्सा’ और ‘अंडे वाली डेमोक्रेसी’ करार दिया है। गौरतलब है कि पिछले डेढ़ महीने में बंगाल के भीतर भ्रष्टाचार और धांधली के आरोपी टीएमसी नेताओं पर जनता द्वारा अंडे फेंकने का यह छठा बड़ा मामला है। इससे पहले कुणाल घोष और अभिषेक बनर्जी जैसे शीर्ष नेताओं को भी ऐसे ही विरोध का सामना करना पड़ा था।
फिलहाल, पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद पूर्व विधायक को भीड़ से बचाया और सुरक्षा घेरे में लेकर कोर्ट में पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है। इलाके में तनाव को देखते हुए थाने के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शक्ति प्रदर्शन, अभिजीत दीपके ने समर्थकों को किया संबोधित
नई दिल्ली | 6 जून 2026
युवाओं के मुद्दों को लेकर चर्चा में आए अभिजीत दीपके शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे, जहां उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग और समर्थक जुटे। प्रशासन की ओर से प्रदर्शन के लिए शाम 5 बजे तक अनुमति दी गई है।
सुबह से ही जंतर-मंतर क्षेत्र में समर्थकों का पहुंचना शुरू हो गया था। प्रदर्शन स्थल पर युवाओं, छात्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी देखने को मिली। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया है।
अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर समर्थकों का अभिवादन किया और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य युवाओं से जुड़े मुद्दों को सरकार और समाज के सामने प्रभावी ढंग से रखना है।
प्रदर्शन के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने रोजगार, भर्ती परीक्षाओं, शिक्षा और युवाओं से जुड़े अन्य विषयों पर अपनी बात रखी। आयोजकों ने दावा किया कि देश के कई राज्यों से लोग इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हैं।
दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं। अधिकारियों ने कहा कि प्रदर्शन निर्धारित समय और नियमों के अनुसार आयोजित किया जा रहा है।
शाम 5 बजे तक प्रदर्शन की अनुमति होने के कारण कार्यक्रम को उसी समयावधि में संपन्न कराया जाएगा। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
फिलहाल जंतर-मंतर पर माहौल शांतिपूर्ण बना हुआ है और पुलिस स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।

CBSE Class 12 Result 2026 घोषित, Overall Pass Percentage घटा
15 मई 2026
पेट्रोल पंपों पर भी मिलेगा केरोसिन: केंद्र का बड़ा फैसला, हर जिले में 2 पंपों को मिलेगी अनुमति
नई दिल्ली | 30 मार्च, 2026
ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब राशन दुकानों के साथ-साथ चयनित पेट्रोल पंपों पर भी केरोसिन (मिट्टी का तेल) उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का यह कदम मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के मद्देनजर उठाया गया है।
हर जिले में 2 पेट्रोल पंपों पर सुविधा
सरकार के निर्देशानुसार, प्रत्येक जिले में अधिकतम 2 पेट्रोल पंपों को केरोसिन वितरण के लिए चयनित किया जाएगा। इन पंपों का चयन राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाएगा।
5 हजार लीटर तक स्टॉक रखने की अनुमति
सरकारी तेल कंपनियों को इन चयनित पेट्रोल पंपों पर अधिकतम 5,000 लीटर केरोसिन स्टॉक रखने की अनुमति दी गई है। इससे आपूर्ति में लचीलापन आएगा और जरूरतमंदों तक ईंधन आसानी से पहुंच सकेगा।
PDS नियमों में 60 दिनों की ढील
सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के नियमों में 60 दिनों के लिए ढील दी है। इसका उद्देश्य आपूर्ति प्रक्रिया को सरल बनाना और किसी भी संभावित कमी से निपटना है, ताकि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को समय पर केरोसिन मिल सके।
अंतरराष्ट्रीय हालात का असर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, खासकर ईरान से जुड़े तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है, जहां गैस, पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ा है।
आम जनता को राहत देने की कोशिश
सरकार का कहना है कि इस फैसले से ग्रामीण और गरीब परिवारों को राहत मिलेगी, जो अभी भी केरोसिन पर निर्भर हैं। साथ ही, आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत कर संकट की स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी।
निगरानी और नियंत्रण पर जोर
प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि केरोसिन वितरण में पारदर्शिता बनाए रखी जाए और जमाखोरी या कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाए।
हिमाचल में 8 महीने से CIC-IC पद खाली: 1300 से अधिक अपीलें लंबित, पूर्व सूचना आयुक्त बोले- RTI व्यवस्था हो रही कमजोर
05 मार्च 2026
हिमाचल प्रदेश में पिछले आठ महीनों से चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (CIC) और इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (IC) के पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर नियुक्ति नहीं होने से सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत दायर अपीलों का निस्तारण प्रभावित हो रहा है। राज्य सूचना आयोग में 1300 से अधिक अपीलें लंबित बताई जा रही हैं, जिससे आवेदकों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा।
अपीलों का बढ़ता बोझ
सूत्रों के अनुसार आयोग में नई अपीलें लगातार आ रही हैं, लेकिन प्रमुख पद रिक्त होने के कारण सुनवाई प्रक्रिया ठप पड़ी है। CIC और IC की अनुपस्थिति में द्वितीय अपीलों और शिकायतों का निराकरण संभव नहीं हो पा रहा, जिससे आम नागरिकों को सूचना प्राप्त करने में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
पूर्व सूचना आयुक्त की टिप्पणी
राज्य के पूर्व सूचना आयुक्तों में से एक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि नियुक्तियों में देरी से RTI की भावना कमजोर हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की निष्क्रियता से पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि सूचना आयोग लोकतांत्रिक ढांचे का अहम स्तंभ है और इसे खाली रखना नागरिक अधिकारों के साथ अन्याय है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आयोग के शीर्ष पदों को लंबे समय तक खाली रखना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उनका कहना है कि सूचना आयोग की निष्क्रियता से आम लोगों की शिकायतों और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है।
सरकार की ओर से क्या कहा गया
सरकारी सूत्रों का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुसार चल रही है और जल्द ही नए CIC व IC की नियुक्ति की जाएगी। हालांकि, अब तक औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
RTI कानून का महत्व
सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सूचना आयोग के पदों पर समय पर नियुक्ति न होने से इस कानून की प्रभावशीलता पर असर पड़ सकता है।
राज्य में लंबित अपीलों का बढ़ता आंकड़ा प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार कब तक इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति कर लंबित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को गति देती है।
भारत के हेल्थ सेक्टर में AI की बड़ी छलांग: सुंदर पिचाई ने Google–AIIMS सहयोग की घोषणा की
नई दिल्ली | 18 फरवरी 2026
नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत के हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए एक अहम घोषणा सामने आई है। सुंदर पिचाई ने बताया कि Google और उसकी पैरेंट कंपनी Alphabet ने देश के प्रमुख सरकारी अस्पताल AIIMS के साथ रणनीतिक साझेदारी करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इलाज की प्रक्रिया को तेज, सटीक और अधिक प्रभावी बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग भारत के डिजिटल हेल्थकेयर सिस्टम को नई दिशा दे सकता है।
समिट, जो भारत मंडपम में आयोजित हो रहा है, में भाग लेने पहुंचे पिचाई ने इस दौरान नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच एआई तकनीक, डिजिटल इनोवेशन, स्टार्टअप सहयोग और तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, बातचीत में भारत में एआई आधारित समाधान विकसित करने और टेक्नोलॉजी निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
Google–AIIMS साझेदारी के तहत ऐसे उन्नत एआई टूल विकसित किए जाएंगे जो डॉक्टरों को बीमारियों की पहचान, मेडिकल इमेज एनालिसिस, डेटा मैनेजमेंट और उपचार योजना बनाने में सहायता करेंगे। इससे इलाज की सटीकता बढ़ेगी, मरीजों को जल्दी निदान मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। खासतौर पर ग्रामीण और संसाधन-सीमित क्षेत्रों में यह तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विशाल आबादी वाले देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए एआई आधारित समाधान अब अनिवार्य होते जा रहे हैं। इस सहयोग से मेडिकल रिसर्च, क्लिनिकल डेटा विश्लेषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं खुलेंगी। इसे भारत के हेल्थ-टेक सेक्टर में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जो भविष्य में वैश्विक स्तर पर भी उदाहरण बन सकता है।

नई दिल्ली | 26 जनवरी 2026
गणतंत्र दिवस के मौके पर हर भारतीय का मन परेड देखने और तिरंगे के शान में शरीक होने का होता है। लेकिन सुरक्षा और सीमित सीटों की वजह से हर कोई कर्तव्य पथ (राजपथ) नहीं पहुँच पाता। अगर आपके पास परेड का टिकट या पास नहीं है, तो दिल्ली की इन ऐतिहासिक और खूबसूरत जगहों पर आप परिवार के साथ जश्न मना सकते हैं:
1. नेशनल वॉर मेमोरियल (राष्ट्रीय समर स्मारक)
कर्तव्य पथ के पास स्थित यह स्मारक देश के शहीदों को समर्पित है। यहाँ की अमर चक्र ज्योति और शहीदों के नाम वाली दीवारें आपको गर्व से भर देंगी। शाम के समय यहाँ का नजारा और भी भव्य होता है।
2. इंडिया गेट और कर्तव्य पथ का भ्रमण
भले ही परेड के दौरान एंट्री सीमित हो, लेकिन परेड खत्म होने के बाद और शाम के समय इंडिया गेट का पूरा इलाका तिरंगे की रोशनी से जगमगा उठता है। यहाँ की लाइटिंग और फव्वारे देखने लायक होते हैं।
3. लाल किला (Red Fort)
आजादी का प्रतीक लाल किला गणतंत्र दिवस पर विशेष महत्व रखता है। यहाँ न केवल आप इतिहास को करीब से देख सकते हैं, बल्कि शाम को होने वाला ‘लाइट एंड साउंड शो’ देशभक्ति के जज्बे को दोगुना कर देता है।
4. वेस्ट टू वंडर पार्क (Waste to Wonder Park)
सराय काले खां स्थित इस पार्क में दुनिया के सात अजूबों की प्रतिकृतियां कबाड़ (वेस्ट) से बनाई गई हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर यहाँ विशेष सजावट की जाती है, जो बच्चों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए बेहतरीन जगह है।
5. कनॉट प्लेस और सेंट्रल पार्क
दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस (CP) के सेंट्रल पार्क में लगा विशाल तिरंगा हर किसी को आकर्षित करता है। यहाँ आसपास के शोरूम और रेस्टोरेंट्स में भी उत्सव का माहौल रहता है और कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
पर्यटकों के लिए विशेष सलाह:
-
मेट्रो का उपयोग करें: सुरक्षा कारणों से कई रास्तों पर डायवर्जन हो सकता है, इसलिए दिल्ली मेट्रो सफर के लिए सबसे अच्छा विकल्प है।
-
समय का ध्यान रखें: भीड़ से बचने के लिए सुबह जल्दी या दोपहर के बाद निकलना बेहतर होगा।
-
आईडी कार्ड साथ रखें: सुरक्षा जांच के लिए अपना पहचान पत्र साथ रखना न भूलें।
निष्कर्ष: गणतंत्र दिवस सिर्फ परेड देखने का नाम नहीं, बल्कि देश के प्रति सम्मान प्रकट करने का दिन है। इन जगहों पर जाकर आप न केवल अपनी छुट्टियां बिता सकते हैं, बल्कि भारतीय होने के गौरव का भी अनुभव कर सकते हैं।
हनीमून के लिए शिलॉन्ग ( Shillong) जाने वाले इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड (Raja Raghuvanshi murder case) में पुलिस (Shillong Police) और राजा के परिवार वालों ने जो खुलासे किए हैं, उससे जाहिर होता है कि सोनम ने पहले पूरी प्लानिंग कर राजा को अपने जाल में फंसाया. इससे पता चलता है कि सोनम ने बड़े ही शातिराना तरीके से अपने पति की हत्या की साजिश रची थी.
बताया जाता है कि सोनम का अपने पिता की फैक्ट्री में काम करने वाले राज कुशवाहा नामक युवक से अफेयर था. हत्या में राज कुशवाहा के शामिल होने की भी आशंका है. आरोप है कि सोनम रघुवंशी हत्यारों को लगातार अपना लोकेशन शेयर कर रही थी. इसके अलावा, वह राज कुशवाहा से लम्बी बातचीत भी करती थी. अब तक के खुलासे में ये भी सामने आया है कि सोनम ने दो अलग-अलग फोन रखे हुए थी. एक फोन का इस्तेमाल सिर्फ इस षड्यंत्र को अंजाम देने के लिए कर रही थी.
सोनम ने ही बनाया था टूर का प्लान
राजा रघुवंशी की मां के मुताबिक सोनम ने ही टूर का प्लान, फ्लाइट और होटल की व्यवस्था की थी. इसके बाद वह शादी का पूरा गोल्ड पहन कर हनीमून के लिए शिलॉन्ग निकली थी, तो राजा की मां ने गोल्ड ले जाने पर सवाल भी उठाया था. इसके साथ ही सोनम ने राजा को भी गोल्ड लेकर जाने को मजबूर किया था. राजा भी करीब 10 लाख के गहने के साथ गया था. इस दौरान सोनम ने राजा के साथ बैंक ट्रांजेक्शन भी किए थे. राजा के साथ हेवी बैंक ट्रांजेक्शन के संकेत मिले हैं.
ऐसे हुआ सोनम का ‘राज’फाश !
पुलिस सूत्रों के मुताबिक इंदौर पुलिस ने सोनम-राजा की कॉल पर फोकस किया. इस दौरान इस बात की जांच की गई कि वह किससे सबसे ज्यादा बात हुई. इस दौरान राज कुशवाहा से सोनम की लंबी बात के प्रमाण मिले. वहीं, मेघालय पुलिस ने CCTV और गाइड पर फोकस किया. इसमें मध्य प्रदेश के ही 3 से 4 लोगों की पहचान की गई. मेघालय पुलिस ने इंदौर पुलिस से जानकारी साझा की. इसी के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तारी शुरू की. साथियों की गिरफ्तारी से सोनम के सभी संपर्क टूट गए. सोनम के पास आखिरी रास्ता अपना परिवार बचा. लिहाजा, इसी के बाद सोनम ने अपने भाई गोविंद से संपर्क किया और हत्या को हादसे का रूप देने की योजना बनाई.
सोनम रविवार की रात 1 बजे आतिशपुर के ढाबे पर अकेले पहुंची. सोनम ने ढाबे के मालिक साहिल यादव से कहा कि भैया घर पर कॉल करना है. उन्होंने अपना मोबाइल दिया, तो सोनम ने अपने भाई गोविंद को कॉल किया. इसके बाद भाई ने फिर ढाबे वाले से बात की और कहा कि ये मेरी बहन सोनम है. इसे कहीं जाने मत देना. मैं पुलिस को सूचना दे रहा हूं. इस बीच ढाबा मालिक भी इस खबर से वाकिफ होने की वजह से उसे पहचान गया. इसके बाद सोनम को रात में ही पुलिस लेकर चली गई.






