बेंगलुरु, 26 अगस्त 2026।
भारतीय क्रिकेट के युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दलीप ट्रॉफी 2026-27 में ईस्ट जोन की ओर से खेल रहे वैभव का बल्ला भले ही क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बड़ी पारी नहीं खेल सका, लेकिन उन्होंने गेंदबाजी में ऐसा धमाल मचाया कि हर कोई उनकी बहुमुखी प्रतिभा की चर्चा करने लगा।
बेंगलुरु स्थित BCCI Centre of Excellence में खेले गए मुकाबले में ईस्ट जोन ने नॉर्थ ईस्ट जोन को एक पारी और 210 रन से हराकर दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में शानदार एंट्री कर ली। इस मैच में वैभव सूर्यवंशी ने बल्ले से सिर्फ 8 रन बनाए, लेकिन बाद में गेंद संभालते ही उन्होंने एक ही ओवर में दो महत्वपूर्ण विकेट झटककर अपनी टीम के प्रदर्शन में अहम योगदान दिया।
बल्ले से जल्दी आउट हुए वैभव
वैभव सूर्यवंशी से फैंस को उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी के कारण बड़ी उम्मीदें थीं। टी20 और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बना चुके इस युवा खिलाड़ी के सामने दलीप ट्रॉफी में रेड बॉल क्रिकेट की अलग चुनौती थी।
हालांकि नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में वैभव बड़ी पारी नहीं खेल सके और केवल 8 रन बनाकर आउट हो गए। इससे एक बार फिर यह चर्चा शुरू हुई कि विस्फोटक बल्लेबाजी के साथ-साथ उन्हें लंबे प्रारूप में धैर्य और तकनीक के मामले में अभी और अनुभव हासिल करना है।
बल्ले से नहीं तो गेंद से किया कमाल
बल्लेबाजी में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद वैभव ने गेंदबाजी में शानदार जवाब दिया। उन्होंने सिर्फ चार गेंदों के अंतराल में दो विकेट हासिल किए और विपक्षी बल्लेबाजी क्रम पर दबाव बढ़ा दिया।
रिपोर्टों के अनुसार वैभव ने अपने एक ओवर में दो महत्वपूर्ण विकेट चटकाए और कुल तीन ओवर में 11 रन देकर दो सफलताएं हासिल कीं। उनके इस प्रदर्शन ने साबित किया कि वह सिर्फ बल्लेबाज के रूप में ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर टीम के लिए उपयोगी गेंदबाज भी साबित हो सकते हैं।
ईस्ट जोन की बड़ी जीत
ईस्ट जोन ने इस मुकाबले में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया। टीम ने पहली पारी में मजबूत स्कोर खड़ा किया, जिसमें सुदीप कुमार घरामी ने 146 रन बनाए, जबकि शाहबाज अहमद ने भी शानदार शतक जड़ा।
इसके बाद गेंदबाजों ने नॉर्थ ईस्ट जोन को दोनों पारियों में बड़ा स्कोर बनाने का मौका नहीं दिया। नतीजा यह रहा कि ईस्ट जोन ने मुकाबला एक पारी और 210 रन से अपने नाम कर लिया और सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया।
वैभव के सामने रेड बॉल क्रिकेट की बड़ी परीक्षा
वैभव सूर्यवंशी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहले ही क्रिकेट जगत में खास पहचान बना चुके हैं। आईपीएल 2026 में भी उन्होंने विस्फोटक प्रदर्शन किया था। लेकिन दलीप ट्रॉफी उनके लिए एक अलग तरह की चुनौती है, क्योंकि रेड बॉल क्रिकेट में बल्लेबाज को लंबे समय तक क्रीज पर टिकने, परिस्थितियों को समझने और धैर्य के साथ खेल बनाने की जरूरत होती है।
दलीप ट्रॉफी से पहले वैभव ने रेड बॉल क्रिकेट की तैयारी के लिए अपने बचपन के कोच मनीष ओझा के साथ विशेष अभ्यास भी किया था। इस दौरान उनकी तैयारी का मुख्य फोकस लंबे समय तक बल्लेबाजी करने और 90 ओवर तक टिकने की मानसिकता विकसित करने पर था।
अब सेमीफाइनल में नई चुनौती
क्वार्टर फाइनल जीतने के बाद ईस्ट जोन सेमीफाइनल में पहुंच गया। टूर्नामेंट के अगले चरण में वैभव सूर्यवंशी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई।
सेमीफाइनल में ईशान किशन के चोटिल होने के बाद वैभव को ईस्ट जोन की कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ी। महज 15 साल की उम्र में सीनियर फर्स्ट क्लास क्रिकेट के इतने बड़े मुकाबले में टीम का नेतृत्व करना उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
कप्तानी में भी दिखाई शानदार समझ
सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल के दौरान वैभव की कप्तानी भी चर्चा का विषय बनी। एक अहम मौके पर उन्होंने तेजी से DRS लेने का फैसला किया, जो सफल रहा और बल्लेबाज आर्यन जुयाल को आउट घोषित किया गया।
इस फैसले ने वैभव की मैच की परिस्थितियों को समझने और दबाव में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को सामने रखा।
कम उम्र, लेकिन बड़ी जिम्मेदारी
वैभव सूर्यवंशी पहले ही ईस्ट जोन की टीम के उपकप्तान बनाए जा चुके थे। जुलाई 2026 में उन्हें ईशान किशन की अगुआई वाली टीम का उपकप्तान नियुक्त किया गया था।
अब चोट के कारण ईशान के मैदान से बाहर होने पर वैभव को कप्तानी की जिम्मेदारी मिलना उनके प्रति टीम प्रबंधन के भरोसे को भी दिखाता है।
क्या अब बल्ले से आएगी बड़ी पारी?
वैभव के फैंस की नजर अब उनकी बल्लेबाजी पर है। क्वार्टर फाइनल में 8 रन पर आउट होने के बाद उनसे आने वाले मुकाबलों में बड़ी पारी की उम्मीद की जा रही है।
उनकी आक्रामक बल्लेबाजी क्षमता पर किसी को संदेह नहीं है, लेकिन रेड बॉल क्रिकेट में उनकी असली परीक्षा यह होगी कि वह परिस्थितियों के अनुसार अपनी स्वाभाविक आक्रामकता और धैर्य के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।
टीम इंडिया के भविष्य के लिए भी अहम खिलाड़ी
सिर्फ 15 साल की उम्र में दलीप ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में खेलना और फिर टीम की कप्तानी संभालना वैभव सूर्यवंशी की तेजी से बढ़ती क्रिकेट यात्रा को दिखाता है।
क्रिकेट विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि वह सीमित ओवरों की सफलता को फर्स्ट क्लास और रेड बॉल क्रिकेट में कितनी तेजी से दोहरा पाते हैं।
निष्कर्ष
दलीप ट्रॉफी 2026 में वैभव सूर्यवंशी के लिए क्वार्टर फाइनल मुकाबला बल्ले से उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और वह सिर्फ 8 रन बना सके। हालांकि उन्होंने गेंदबाजी में शानदार वापसी करते हुए एक ओवर में दो विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की।
ईस्ट जोन ने नॉर्थ ईस्ट जोन को एक पारी और 210 रन से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इसके बाद वैभव की कहानी ने नया मोड़ लिया, जब उन्हें ईशान किशन की अनुपस्थिति में टीम की कप्तानी संभालने का मौका मिला।
अब फैंस को इंतजार है कि यह युवा खिलाड़ी दलीप ट्रॉफी के आगामी मुकाबलों में बल्ले से भी कोई बड़ी और यादगार पारी खेलकर अपनी प्रतिभा का नया परिचय देगा।

मेसी नंबर-1, लेकिन एम्बाप्पे की दस्तक तेज; विश्व कप में रिकॉर्ड की जंग
नई दिल्ली | 24 जून 2026
फुटबॉल की दुनिया में जब महानतम खिलाड़ियों की बात होती है, तो आज भी सिंहासन पर एक ही नाम बैठा दिखाई देता है—Lionel Messi। लेकिन अब इस सिंहासन की ओर सबसे तेज कदमों से बढ़ रहे हैं फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर Kylian Mbappé, जिन्होंने FIFA World Cup 2026 में अपने शानदार प्रदर्शन से एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान के भी सबसे बड़े सितारों में शामिल हैं।
मेसी ने हाल ही में विश्व कप इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। अर्जेंटीना के कप्तान ने ऑस्ट्रिया के खिलाफ दो गोल दागकर अपने कुल विश्व कप गोलों की संख्या 18 पहुंचा दी और जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज़े के 16 गोलों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही वह FIFA World Cup इतिहास के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए।
लेकिन दूसरी ओर एम्बाप्पे भी पीछे नहीं हैं। इराक के खिलाफ दो गोल दागने के बाद फ्रांसीसी सुपरस्टार के विश्व कप गोलों की संख्या 16 हो चुकी है। यानी वह मेसी से केवल दो गोल पीछे हैं। फ्रांस के कोच Didier Deschamps ने भी विश्वास जताया है कि एम्बाप्पे भविष्य में यह रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं।
एम्बाप्पे की सबसे बड़ी ताकत उनकी उम्र है। जहां मेसी अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं, वहीं एम्बाप्पे अभी अपने स्वर्णिम वर्षों में प्रवेश कर रहे हैं। 2018 विश्व कप विजेता और 2022 विश्व कप फाइनल के नायक रह चुके एम्बाप्पे के पास कई बड़े रिकॉर्ड तोड़ने के लिए पर्याप्त समय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेसी और एम्बाप्पे की यह प्रतिस्पर्धा केवल गोलों की नहीं, बल्कि विरासत की लड़ाई भी है। एक तरफ वह खिलाड़ी है जिसने लगभग हर उपलब्धि हासिल कर ली है, दूसरी तरफ वह युवा स्टार है जो आने वाले दशक में फुटबॉल का चेहरा बनने की क्षमता रखता है।
फिलहाल रिकॉर्ड बुक में शीर्ष स्थान मेसी के नाम है, लेकिन विश्व कप 2026 के बाकी मुकाबलों में एम्बाप्पे के पास इस अंतर को और कम करने का मौका होगा। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों की नजरें अब इस रोमांचक दौड़ पर टिकी हुई हैं कि क्या मेसी का ताज सुरक्षित रहेगा या फिर एम्बाप्पे इतिहास के नए बादशाह बनेंगे।

अफगानिस्तान 152 रन पर ऑलआउट; टीम इंडिया को 412 रन की लीड
चंडीगढ़ | 8 जून 2026
भारत और अफगानिस्तान के बीच न्यू चंडीगढ़ में खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने पूरी तरह पकड़ बना ली है। भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी 564/8 के विशाल स्कोर पर घोषित की, जिसके जवाब में अफगानिस्तान की पूरी टीम महज 152 रन पर सिमट गई। इसके साथ ही भारत को 412 रन की बड़ी बढ़त मिली और कप्तान शुभमन गिल ने अफगानिस्तान को फॉलोऑन देने का फैसला किया।
भारत की पहली पारी में कप्तान शुभमन गिल और केएल राहुल ने शानदार शतक लगाए। साई सुदर्शन ने 81 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली, जबकि ऋषभ पंत और वॉशिंगटन सुंदर ने भी अर्धशतक जड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। भारतीय बल्लेबाजों के दमदार प्रदर्शन की बदौलत टीम 564 रन के विशाल स्कोर तक पहुंची।
गेंदबाजों ने बरपाया कहर
विशाल स्कोर के दबाव में उतरी अफगानिस्तान की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी। टेस्ट डेब्यू कर रहे बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार ने शानदार गेंदबाजी करते हुए अफगान बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाया। तेज गेंदबाजों और स्पिनरों के संयुक्त प्रदर्शन के कारण अफगानिस्तान की पारी जल्दी सिमट गई।
फॉलोऑन देकर जीत की ओर भारत
पहली पारी में 412 रन की बढ़त मिलने के बाद भारत ने अफगानिस्तान को फॉलोऑन दिया। अब अफगान टीम को पारी की हार से बचने के लिए दूसरी पारी में मजबूत प्रदर्शन करना होगा। दूसरी ओर भारतीय गेंदबाज जल्द से जल्द बाकी विकेट लेकर मैच समाप्त करना चाहेंगे।
रिकॉर्ड जीत की ओर नजर
भारत मैच में पूरी तरह हावी नजर आ रहा है। यदि अफगानिस्तान दूसरी पारी में भी संघर्ष करता है तो टीम इंडिया को पारी और बड़े अंतर से जीत मिल सकती है। यह शुभमन गिल की कप्तानी में टेस्ट क्रिकेट की एक यादगार जीत साबित हो सकती है।

Olympic में क्रिकेट की वापसी तय: 128 साल बाद USA में बनेगा नया स्टेडियम
23 अप्रैल, 2026
IPL 2026: ‘वैभव सूर्यवंशी नहीं, यह खिलाड़ी मचाएगा तबाही’—आकाश चोपड़ा ने बताया सीजन का सबसे बड़ा गेमचेंजर
नई दिल्ली | 20 मार्च, 2026
आईपीएल 2026 के मेगा ऑक्शन के बाद अब सभी की निगाहें मैदान पर प्रदर्शन पर टिकी हैं। पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर आगामी सीजन का विश्लेषण करते हुए कहा कि भले ही वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा चर्चा में हों, लेकिन इस साल का सबसे बड़ा इम्पैक्ट अभिषेक शर्मा (सनराइजर्स हैदराबाद) पैदा करने वाले हैं।
आकाश चोपड़ा का बड़ा दावा
आकाश चोपड़ा का मानना है कि अभिषेक शर्मा अब उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां से वह वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे खतरनाक टी20 ओपनर बन सकते हैं। उन्होंने अभिषेक के साथ तिलक वर्मा और ध्रुव जुरेल को भी ‘ब्रेकआउट स्टार्स’ की लिस्ट में रखा है, लेकिन गेमचेंजर के रूप में अभिषेक को सबसे ऊपर रखा।
अभिषेक शर्मा को गेमचेंजर बताने के 3 मुख्य कारण:
-
निर्भीक बल्लेबाजी (Fearless Approach): आकाश के अनुसार, “अभिषेक जिस तरह से पहली गेंद से प्रहार करते हैं, वह विपक्षी गेंदबाजों के मन में खौफ पैदा करता है। पावरप्ले में उनका स्ट्राइक रेट किसी भी अन्य भारतीय बल्लेबाज से बेहतर है।”
-
स्पिन के खिलाफ महारत: भारतीय पिचों पर जहां स्पिनर हावी होते हैं, वहां अभिषेक का फुटवर्क और लंबे छक्के मारने की क्षमता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
-
लेफ्ट-आर्म स्पिन (ऑलराउंडर विकल्प): अभिषेक न केवल बल्ले से बल्कि अपनी कसी हुई गेंदबाजी से भी मैच का रुख बदल सकते हैं, जो उन्हें एक परफेक्ट टी20 पैकेज बनाता है।
वैभव सूर्यवंशी पर क्या बोले आकाश?
14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी, जिन्हें राजस्थान रॉयल्स ने भारी भरकम राशि में खरीदा है, पर आकाश चोपड़ा ने संतुलित राय दी। उन्होंने कहा:
“वैभव में गजब का टैलेंट है और वह भविष्य के स्टार हैं, लेकिन आईपीएल जैसे हाई-प्रेशर टूर्नामेंट में 14 साल की उम्र में लगातार इम्पैक्ट डालना थोड़ा मुश्किल होता है। इस सीजन में हमें उनसे चमत्कार की उम्मीद करने के बजाय उनके सीखने की प्रक्रिया पर ध्यान देना चाहिए।”
तिलक वर्मा और ध्रुव जुरेल पर भी नजर
आकाश चोपड़ा ने मुंबई इंडियंस के तिलक वर्मा को ‘मिस्टर कंसिस्टेंट’ बताया और भविष्यवाणी की कि वह इस सीजन में ऑरेंज कैप की रेस में रहेंगे। वहीं, ध्रुव जुरेल को उन्होंने फिनिशर के तौर पर सबसे बड़ी ताकत माना है, जो दबाव की स्थितियों में मैच जिताने का माद्दा रखते हैं।
IPL 2026 की ताजा स्थिति
-
शुरुआत: आईपीएल 2026 का पहला मैच 22 मार्च को चेन्नई सुपर किंग्स और गुजरात टाइटंस के बीच खेला जाएगा।
-
वेन्यू: इस साल टूर्नामेंट के मुकाबले भारत के 12 अलग-अलग शहरों में आयोजित होंगे।
दूसरा सेमीफाइनल आज IND vs ENG: भारत-इंग्लैंड लगातार तीसरी बार आमने-सामने, 1-1 से बराबरी
05 मार्च 2026
आईसीसी टी-20 विश्व कप का दूसरा सेमीफाइनल आज भारत क्रिकेट टीम और इंग्लैंड क्रिकेट टीम के बीच खेला जाएगा। मुकाबला वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई में शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा।
यह मुकाबला इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भिड़ रही हैं। 2022 और 2024 के संस्करण में भी भारत और इंग्लैंड आमने-सामने आए थे, जहां दोनों को एक-एक जीत मिली थी। खास बात यह रही कि जिस टीम ने सेमीफाइनल जीता, उसने फाइनल में भी खिताब अपने नाम किया।
भारत का आत्मविश्वास बुलंद
भारतीय टीम शानदार फॉर्म में है। शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने टूर्नामेंट में निरंतर रन बनाए हैं, जबकि गेंदबाजों ने डेथ ओवर्स में कसी हुई गेंदबाजी की है। टीम प्रबंधन संतुलित संयोजन के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है।
मुंबई की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों के अनुकूल मानी जाती है, लेकिन शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को स्विंग मिल सकती है। ऐसे में पावरप्ले का प्रदर्शन निर्णायक हो सकता है।
इंग्लैंड की चुनौती
इंग्लैंड की टीम भी बड़े मैचों की अनुभवी मानी जाती है। आक्रामक बल्लेबाजी और गहराई वाली बॉलिंग लाइनअप उसकी ताकत है। इंग्लैंड के खिलाड़ी दबाव के मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए जाने जाते हैं, जिससे मुकाबला रोमांचक होने की उम्मीद है।
हेड-टू-हेड और सेमीफाइनल रिकॉर्ड
टी-20 वर्ल्ड कप इतिहास में भारत और इंग्लैंड के बीच मुकाबले हमेशा हाई-वोल्टेज रहे हैं। 2022 में इंग्लैंड ने सेमीफाइनल जीता था, जबकि 2024 में भारत ने हिसाब बराबर किया। अब दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर हैं और यह मुकाबला बढ़त तय करेगा।
क्या हो सकती है रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि टॉस अहम भूमिका निभा सकता है। वानखेड़े में शाम के मैच में ओस का असर देखने को मिल सकता है, जिससे दूसरी पारी में बल्लेबाजी आसान हो सकती है।
फैंस को एक हाई-स्कोरिंग और रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है। जीतने वाली टीम फाइनल में जगह बनाएगी और खिताब से सिर्फ एक कदम दूर होगी।
सात्विक और चिराग ने विदेश की बजाय देश में ओलंपिक की तैयारियां करने का फैसला लिया है। अलेक्जेंडर डन और एडम हाल के साथ सात्विक और चिराग 22 से 30 जून तक मुंबई में तैयारियां करेंगे, जबकि आगुंग और एंग्रियावान के साथ दोनों पांच से 20 जुलाई तक हैदराबाद में तैयारियां करेंगे।
पेरिस ओलंपिक में पदक की दावेदार राष्ट्रमंडल और एशियाड स्वर्ण विजेता बैडमिंटन जोड़ी सात्विक साईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी को ओलंपिक की तैयारियां दो नामी विदेशी जोड़ियां कराएंगी। ये दोनों जोड़ियां यूरोपियन चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता स्कॉटलैंड के अलेक्जेंडर डन-एडम हाल और थॉमस कप पदक विजेता इंडोनेशिया के रेन आगुंग-बेरी एंग्रियावान हैं। सात्विक-चिराग इन दोनों जोड़ियों के साथ पेरिस की तैयारियां मुंबई और हैदराबाद में अंजाम देंगे। दोनों ही जोड़ियों को सात्विक-चिराग और उनके डेनमार्क के कोच मथायस बोए की सिफारिश पर बुलाया जा रहा है। साई ने दोनों की तैयारियों के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है, जिस पर तकरीबन साढ़े छह लाख रुपये का खर्च आएगा।
जून और जुलाई आएंगी विदेशी जोड़ियां
सात्विक और चिराग ने विदेश की बजाय देश में ओलंपिक की तैयारियां करने का फैसला लिया है। अलेक्जेंडर डन और एडम हाल के साथ सात्विक और चिराग 22 से 30 जून तक मुंबई में तैयारियां करेंगे, जबकि आगुंग और एंग्रियावान के साथ दोनों पांच से 20 जुलाई तक हैदराबाद में तैयारियां करेंगे। इसके बाद यहीं से दोनों पेरिस रवाना होंगे। मथायस बोए दोनों को कोरियाई जोड़ी के साथ तैयारियां कराना चाहते थे। कोरियाई जोड़ी ने 10 हजार अमेरिकी डॉलर की मांग की। इस पर बात नहीं बनी। इंडोनेशियाई जोड़ी चार हजार डॉलर में आ रही है।
हैदराबाद में बैडमिंटन खिलाड़ियों की तैयारियों के लिए इंडोनेशिया के तीन स्पारिंग पार्टनर (तैयारी कराने वाले) अनुबंधित किए गए थे। सात्विक और चिराग भी इनके साथ तैयारी करते थे, लेकिन इनमें से दो वापस चले गए, जिसके चलते सात्विक-चिराग को तैयारियों के लिए नए सिरे से योजना बनानी पड़ी।





