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इंजीनियर हारे, तकनीक फेल! उज्जैन में 2 दिन में भी नहीं हिली 170 साल पुरानी हनुमान प्रतिमा, अब होगी स्कैनिंग

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उज्जैन, मध्य प्रदेश | 9 सितंबर 2026

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है, लेकिन इसी दौरान करीब 170 साल पुरानी खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिश प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। दो दिनों तक तमाम तकनीकी प्रयास किए जाने के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिल सकी। अब प्रतिमा की संरचना और उसके आधार की स्थिति जानने के लिए विशेषज्ञों की मदद से स्कैनिंग कराई जाएगी।

यह मामला उज्जैन के कंठाल से छत्री चौक और बड़ा सराफा की ओर जाने वाले मार्ग से जुड़ा है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और प्रमुख मार्गों को चौड़ा करने का काम किया जा रहा है। इसी प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण की जद में खड़े हनुमान मंदिर का हिस्सा आ रहा है।

सड़क चौड़ीकरण के बीच सामने आई चुनौती

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर शहर के कई हिस्सों में विकास कार्य तेज किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की भारी संभावित भीड़ को देखते हुए सड़क, यातायात और आवागमन की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर है।

इसी क्रम में कंठाल से छत्री चौक की ओर जाने वाले मार्ग को चौड़ा करने की योजना बनाई गई है। सड़क के विस्तार में खड़े हनुमान मंदिर का हिस्सा आने के कारण प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

प्रशासन की कोशिश थी कि विकास कार्य भी आगे बढ़े और प्राचीन प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान भी न पहुंचे।

दो दिन तक चलता रहा प्रतिमा को हटाने का प्रयास

प्रतिमा को स्थानांतरित करने के लिए तकनीकी टीम ने लगातार दो दिनों तक प्रयास किए। आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञों की मदद से प्रतिमा को सावधानीपूर्वक अपनी जगह से हटाने की कोशिश की गई।

लेकिन कई प्रयासों के बावजूद प्रतिमा में अपेक्षित हलचल नहीं हुई। प्रतिमा के भारी वजन के साथ-साथ उसके नीचे मौजूद आधार और जमीन की संरचना को भी इसकी एक संभावित वजह माना जा रहा है।

प्रतिमा को नुकसान पहुंचने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने जबरन कार्रवाई करने के बजाय आगे की तकनीकी जांच का रास्ता चुना है।

आखिर क्यों नहीं हिल रही प्रतिमा?

प्रतिमा के जमीन से किस तरह जुड़े होने की वास्तविक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। यही कारण है कि अब इसके आधार और आसपास की जमीन की तकनीकी जांच कराने की तैयारी की जा रही है।

संभावना है कि प्रतिमा का आधार सामान्य तरीके से अपेक्षा से अधिक गहराई तक जुड़ा हुआ हो या जमीन के नीचे कोई ऐसी संरचना मौजूद हो, जिसके कारण उसे ऊपर उठाना आसान नहीं हो रहा।

हालांकि वास्तविक स्थिति विशेषज्ञों की जांच के बाद ही सामने आएगी।

अब होगी तकनीकी और आर्कियोलॉजिकल स्कैनिंग

दो दिनों के प्रयास के बाद प्रशासन ने अब प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया में जल्दबाजी नहीं करने का फैसला किया है। इसके लिए आधुनिक तकनीक की मदद से प्रतिमा के आधार और आसपास की जमीन की स्कैनिंग कराई जाएगी।

स्कैनिंग के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि प्रतिमा जमीन के अंदर किस तरह स्थापित है और उसके नीचे किस प्रकार की संरचना मौजूद है।

जांच के बाद विशेषज्ञ यह सुझाव देंगे कि प्रतिमा को किस तरीके से सुरक्षित रूप से स्थानांतरित किया जा सकता है।

प्रतिमा के आसपास की जमीन की भी होगी जांच

प्रतिमा के आधार की स्थिति समझने के लिए आसपास की जमीन की भी जांच की जा रही है। इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि प्रतिमा का भार किस संरचना पर टिका हुआ है।

अगर प्रतिमा के नीचे कोई पुरानी नींव या विशेष संरचना मौजूद है, तो उसे नुकसान पहुंचाए बिना स्थानांतरण की अलग तकनीक अपनानी पड़ सकती है।

यही वजह है कि अब अगला कदम तकनीकी जांच के परिणाम के आधार पर उठाया जाएगा।

श्रद्धालुओं में बढ़ी हलचल

प्रतिमा को हटाने की कोशिश की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं में भी हलचल बढ़ गई है। कई लोग प्राचीन प्रतिमा से अपनी धार्मिक आस्था जुड़ी होने की बात कह रहे हैं।

श्रद्धालुओं की मांग है कि प्रतिमा को किसी भी परिस्थिति में नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। वहीं, प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि सड़क चौड़ीकरण का काम भी तय योजना के अनुसार आगे बढ़ाया जाए।

इस पूरे मामले में प्रशासन को विकास कार्य और धार्मिक आस्था, दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा।

महाआरती और पूजा-अर्चना का आयोजन

प्रतिमा के नहीं हिलने की जानकारी के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी बढ़ी। लोगों ने पूजा-अर्चना और हनुमान चालीसा का पाठ किया।

प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था दिखाई दे रही है। कुछ लोग इसे धार्मिक दृष्टि से विशेष घटना मान रहे हैं, जबकि प्रशासन तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई करने की तैयारी में है।

प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

एक तरफ सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन की सड़कों को बेहतर बनाने और यातायात व्यवस्था को सुचारू करने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ प्राचीन धार्मिक प्रतिमा की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।

ऐसे में प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की जल्दबाजी नुकसानदायक हो सकती है। प्रशासन अब विशेषज्ञों की सलाह और तकनीकी जांच के आधार पर आगे बढ़ने की तैयारी में है।

स्कैनिंग के बाद तय होगा अगला कदम

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि स्कैनिंग के बाद क्या सामने आता है। यदि प्रतिमा के नीचे की संरचना और आधार की स्थिति स्पष्ट हो जाती है तो विशेषज्ञ उसके स्थानांतरण के लिए सुरक्षित तकनीक तय कर सकेंगे।

इसके बाद ही यह फैसला होगा कि प्रतिमा को वर्तमान स्थान से हटाकर प्रस्तावित नए स्थान पर स्थापित किया जाए या स्थानांतरण के लिए कोई अलग तकनीकी समाधान अपनाया जाए।

फिलहाल प्रतिमा अपनी जगह पर ही मौजूद है।

सिंहस्थ 2028 से पहले महत्वपूर्ण मामला

उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक शहरों में शामिल है और सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

लेकिन विकास कार्यों के दौरान प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में स्थानीय आस्था का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा का मामला इसी संतुलन की एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

फिलहाल नहीं हिली प्रतिमा

दो दिनों की कोशिश के बाद भी करीब 170 साल पुरानी बताई जा रही खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाया नहीं जा सका है। अब तकनीकी और आर्कियोलॉजिकल स्कैनिंग के जरिए इसकी वास्तविक स्थिति समझने की कोशिश की जाएगी।

स्कैनिंग के बाद विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। तब तक प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया में सावधानी बरती जाएगी।


दिल्ली से जयपुर तक स्वाइन फ्लू का अलर्ट! अस्पतालों में बेड-दवाओं की तैयारी तेज

नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026

देश के कई हिस्सों में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विभागों की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली से लेकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक स्वास्थ्य व्यवस्था को अलर्ट किया गया है। बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों में दवाओं, डॉक्टरों, ICU और आइसोलेशन बेड जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है और यह कोई नया वायरस नहीं, बल्कि हर साल सामने आने वाला मौसमी फ्लू है।

दिल्ली में 3 हजार के करीब मामले

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इन्फ्लूएंजा-A के मामलों में तेजी देखी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में अब तक करीब 3,000 मामले सामने आए हैं, जिनमें 2,308 मामले H1N1 के बताए गए हैं।

मामलों में बढ़ोतरी के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आपात बैठक की। बैठक में अस्पतालों की तैयारियों, दवाओं और मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा की गई।

अस्पतालों में दवाओं और बेड की तैयारी

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, दवाएं और बेड उपलब्ध हैं। जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त संसाधन भी जुटाए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग का फोकस इस बात पर है कि यदि मरीजों की संख्या और बढ़ती है तो अस्पतालों पर अचानक दबाव न पड़े और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

नोएडा में भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर यानी नोएडा में भी H1N1 के मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार यहां 15 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने करीब 20 ICU बेड तैयार रखे हैं।

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सभी जिला अस्पतालों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। बुखार और फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की समय पर जांच और निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

जयपुर में मंत्री किरोड़ी लाल मीणा संक्रमित

राजस्थान में भी स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ाई है। राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा H1N1 पॉजिटिव पाए गए हैं।

तबीयत खराब होने के बाद उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS Hospital) में भर्ती कराया गया है। उन्हें मेडिकल ICU में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। संक्रमण को देखते हुए संबंधित ICU ब्लॉक में अतिरिक्त सावधानियां बरती जा रही हैं।

राजस्थान में पिछले साल से कई गुना बढ़े मामले

राजस्थान में इस साल स्वाइन फ्लू के मामलों में पिछले साल की तुलना में बड़ी बढ़ोतरी की बात सामने आई है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग संक्रमण को लेकर सतर्क है।

अस्पतालों में मरीजों की निगरानी, टेस्टिंग और संक्रमण नियंत्रण के उपायों को मजबूत किया जा रहा है। जयपुर में कृषि मंत्री के संक्रमित होने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।

अस्पतालों को आइसोलेशन बेड तैयार रखने के निर्देश

स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों को तैयारी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले 25 अगस्त की स्वास्थ्य रिपोर्ट में अस्पतालों को आइसोलेशन बेड तैयार रखने को कहा गया था।

इसका मकसद संभावित रूप से गंभीर मरीजों को दूसरे मरीजों से अलग रखकर संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करना और जरूरत पड़ने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराना है।

ICMR ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं

स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच ICMR के डायरेक्टर जनरल डॉ. राजीव बहल ने लोगों से घबराने की अपील नहीं की है।

उनके मुताबिक H1N1 कोई नया वायरस नहीं है, बल्कि यह हर साल सामने आने वाला मौसमी फ्लू है। हालांकि बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में फ्लू के गंभीर रूप लेने का खतरा ज्यादा हो सकता है, इसलिए लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

किन लक्षणों पर सावधान रहें?

स्वाइन फ्लू में आम तौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, थकान और कमजोरी जैसे फ्लू संबंधी लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

यदि बुखार या सांस से जुड़ी परेशानी बढ़ती है, मरीज की हालत बिगड़ती है या वह हाई-रिस्क ग्रुप में आता है तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

राज्यों में बढ़ाया गया निगरानी तंत्र

दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग मरीजों की संख्या पर नजर रख रहा है। जिला अस्पतालों को संदिग्ध मरीजों की पहचान, जांच और उपचार के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

स्वास्थ्य अधिकारियों की कोशिश है कि संक्रमण के मामलों में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में अस्पतालों में बेड, दवाओं और चिकित्सा कर्मचारियों की कमी न हो।

घबराहट नहीं, सावधानी जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मौसमी फ्लू के मामलों में वृद्धि के दौरान लोगों को घबराने के बजाय सावधानी बरतनी चाहिए। भीड़भाड़ वाली जगहों पर संक्रमण से बचाव, हाथों की स्वच्छता और बीमार होने पर दूसरों से दूरी जैसे सामान्य उपाय मददगार हो सकते हैं।

वहीं गंभीर लक्षण या लगातार बिगड़ती तबीयत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।


लद्दाख का संघर्ष: कॉकरोच पार्टी से लेकर सोनम वांगचुक के आमरण अनशन तक, क्या झुकेंगे दिल्ली के सत्ता के गलियारे?

स्थान: लेह/नई दिल्ली

दिनांक: 15 जुलाई, 2026

विशेष ब्यूरो:

हिमालय की गोद में बसे लद्दाख में एक बार फिर विरोध की आंच तेज हो गई है। प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक, जो पिछले कुछ महीनों से केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए अभिनव तरीके अपना रहे थे, अब एक बार फिर आमरण अनशन (Hunger Strike) पर बैठ गए हैं। उनकी मांगें वही हैं—लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा (Statehood), संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा, और क्षेत्र के लिए लोक सेवा आयोग।

‘कॉकरोच पार्टी’ से ‘आमरण अनशन’ तक का सफर

सोनम वांगचुक का विरोध प्रदर्शन हमेशा से ही रचनात्मक रहा है। पिछले दिनों उन्होंने ‘कॉकरोच पार्टी’ का प्रतीकात्मक आह्वान किया था, जिसमें उन्होंने यह संदेश दिया था कि जिस तरह कॉकरोच परमाणु आपदा (Nuclear Disaster) को भी झेलकर जीवित रह सकते हैं, उसी तरह लद्दाख के लोग भी विपरीत परिस्थितियों में अपना अस्तित्व बचाए रखेंगे। यह सरकार के ‘मौन’ के खिलाफ एक गहरा कटाक्ष था।

अब उन्होंने आमरण अनशन का रुख इसलिए किया है क्योंकि:

  • बातचीत का बेनतीजा होना: केंद्र सरकार और ‘लेह एपेक्स बॉडी’ के बीच कई दौर की वार्ता के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

  • विकास बनाम पर्यावरण: वांगचुक का आरोप है कि लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी को बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए दांव पर लगाया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है।

क्या सरकार मांगें मानेगी?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार के लिए लद्दाख की मांगें ‘संवैधानिक और रणनीतिक’ पेचीदगियों से भरी हुई हैं।

  1. सुरक्षा का तर्क: केंद्र सरकार लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत विशेष अधिकार देने के मामले में सावधानी बरत रही है, क्योंकि इसका असर देश के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।

  2. रणनीतिक महत्व: चीन से सटे होने के कारण लद्दाख का प्रशासन सीधे केंद्र के नियंत्रण (UT) में है, जिसे सरकार अभी बदलना नहीं चाहती।

  3. दबाव की राजनीति: आगामी चुनाव और लद्दाख की बढ़ती अशांति को देखते हुए, सरकार पर अब एक ‘मध्यम मार्ग’ (Middle Path) अपनाने का दबाव बढ़ गया है।

तबीयत बिगड़ी तो क्या होगा?

वांगचुक की पिछली भूख हड़ताल के बाद से ही लद्दाख में समर्थन की लहर है। यदि इस बार उनकी तबीयत बिगड़ती है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

  • जन-आंदोलन का खतरा: लद्दाख ही नहीं, बल्कि देशभर के पर्यावरणविदों और युवाओं में सरकार के प्रति भारी नाराजगी फैल सकती है।

  • अशांति का डर: लेह और कारगिल जैसे शांत शहरों में सड़कों पर विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं, जिससे पर्यटन और क्षेत्र की शांति प्रभावित होगी।

  • नैतिक संकट: सोनम वांगचुक की अंतरराष्ट्रीय छवि को देखते हुए, सरकार के लिए एक नैतिक संकट पैदा हो सकता है, जहाँ सरकार को ‘विकास विरोधी’ करार दिया जा सकता है।

फिलहाल लद्दाख में क्या स्थिति है?

आज 15 जुलाई को लेह के मुख्य चौक पर हजारों लोगों ने वांगचुक के साथ एकजुटता दिखाई है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सुरक्षा बढ़ा दी है, लेकिन इंटरनेट सेवाओं पर फिलहाल कोई प्रतिबंध नहीं है।

सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण बने रहने की अपील की है। उनका कहना है, “हम सरकार से लड़ नहीं रहे, हम सरकार को अपना ही वादा याद दिला रहे हैं।”

क्या सरकार और लद्दाख के बीच यह गतिरोध समाप्त होगा, या यह अनशन किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका तैयार करेगा? यह आने वाले कुछ दिन स्पष्ट कर देंगे।


उत्तराखंड में बारिश का कहर, पहाड़ों से गिरा मलबा; चारधाम मार्ग बाधित

देहरादून (उत्तराखंड) | 3 जुलाई 2026

उत्तराखंड में मॉनसून के सक्रिय होते ही कई पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हो गया है। लगातार हो रही वर्षा से कई स्थानों पर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की घटनाएं सामने आई हैं। पहाड़ों से मलबा और चट्टानें गिरने के कारण बद्रीनाथ और केदारनाथ यात्रा मार्ग कई जगह बाधित हो गए, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को रास्ते में रुकना पड़ा।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश के चलते कई सड़कों पर मलबा जमा हो गया। राष्ट्रीय राजमार्गों और चारधाम यात्रा मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। सीमा सड़क संगठन (BRO), लोक निर्माण विभाग (PWD) और प्रशासन की टीमें मलबा हटाने में जुटी हैं ताकि मार्गों को जल्द से जल्द सुचारु किया जा सके।

प्रशासन ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर अस्थायी रूप से वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। कई श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया है। मौसम सामान्य होने और सड़कें साफ होने के बाद ही यात्रा को आगे बढ़ाने की अनुमति दी जा रही है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटों के लिए उत्तराखंड के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने नदी-नालों के उफान पर आने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ की आशंका को देखते हुए लोगों और यात्रियों से सतर्क रहने की अपील की है।

चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं से प्रशासन ने मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करने की सलाह दी है। साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार संवेदनशील इलाकों की निगरानी कर रही हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर हैं

लगातार हो रही बारिश से जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ी क्षेत्रों में जनजीवन और चारधाम यात्रा पर इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि मौसम में सुधार होने तक यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।


देशभर में मौसम का कहर: UP-बिहार में तूफान, मुंबई में लैंडस्लाइड, राजस्थान में रेतीला तूफान

नई दिल्ली, 10 जून 2026।

देश के कई राज्यों में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। उत्तर प्रदेश और बिहार में तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं ने जनजीवन को प्रभावित किया, जबकि मुंबई में भारी बारिश के बीच भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की घटना सामने आई। दूसरी ओर राजस्थान के कई जिलों में रेतीले तूफान ने दिन में ही अंधेरे जैसे हालात पैदा कर दिए। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक सतर्क रहने की सलाह दी है।

UP-बिहार में तूफानी मौसम का असर

उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। कई जिलों में पेड़ और बिजली के पोल गिरने की खबरें सामने आईं, जिससे बिजली आपूर्ति और यातायात प्रभावित हुआ। प्रशासन ने राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट पर रखा है। तेज हवाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों और फसलों को भी नुकसान पहुंचने की सूचना मिली है।

100 से ज्यादा स्थानों पर नुकसान

आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि अनेक स्थानों पर बड़े-बड़े पेड़ जड़ से उखड़ गए। कई जगह बिजली के खंभे गिरने से आपूर्ति बाधित हुई। स्थानीय प्रशासन ने सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने का काम तेज कर दिया है।

मुंबई में लैंडस्लाइड, 5 कारें मलबे में दबीं

मुंबई में लगातार बारिश के बीच एक पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन की घटना से हड़कंप मच गया। मलबा खिसकने से पार्किंग क्षेत्र में खड़ी पांच कारें दब गईं। राहत दलों ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी बड़े जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन घटना ने मानसून पूर्व तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजस्थान में रेतीले तूफान का प्रकोप

राजस्थान के बीकानेर, चूरू और आसपास के क्षेत्रों में तेज रेतीले तूफान ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। धूल के घने गुबार के कारण दृश्यता काफी कम हो गई और कई इलाकों में दिन के समय भी अंधेरा छा गया। तेज हवाओं से पेड़ उखड़ने और टिन शेड उड़ने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग ने उत्तर भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक आंधी, बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाओं की संभावना जताई है। लोगों को खुले स्थानों, कमजोर संरचनाओं और बड़े पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।

प्रमुख बिंदु

  • UP और बिहार में आंधी-बारिश से जनजीवन प्रभावित।
  • 100 से अधिक स्थानों पर पेड़ और बिजली के पोल गिरे।
  • मुंबई में लैंडस्लाइड, 5 कारें मलबे में दबीं।
  • राजस्थान में रेतीले तूफान से दृश्यता घटी।
  • मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट।


NEET UG 2026 Paper Leak मामले में बड़ा एक्शन, Re-Exam 21 जून को होगा

14 मई 2026

National Testing Agency (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है। 3 मई 2026 को आयोजित हुई इस परीक्षा से देशभर के लगभग 22 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं। सरकार ने घोषणा की है कि अब NEET UG का दोबारा एग्जाम 21 जून 2026 को कराया जाएगा। छात्रों को फिर से registration करने की आवश्यकता नहीं होगी।

पेपर लीक मामले की जांच अब Central Bureau of Investigation (CBI) के हाथ में है। 14 मई तक CBI ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और देशभर में 14 अलग-अलग locations पर छापेमारी की है। जांच Maharashtra, Rajasthan और Delhi तक पहुंच चुकी है।

Investigation में सामने आया है कि WhatsApp groups के जरिए “guess paper” circulate किया जा रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार उस material के 120 से अधिक सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। कुछ रिपोर्ट्स में 140–150 सवालों तक matching होने की बात कही गई है।

CBI को money trail से जुड़े कई अहम सुराग भी मिले हैं। एजेंसी के मुताबिक कुछ छात्रों से लाखों रुपये वसूले गए थे। एक आरोपी के bank account में 21 अलग-अलग accounts से पैसे ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई है। Coaching centres और कुछ consultancies के connections की भी जांच की जा रही है।

इस मामले में एक आरोपी के court के बाहर दिए गए बयान ने भी हलचल बढ़ा दी, जिसमें उसने दावा किया कि “बड़े लोगों को बचाया जा रहा है।”

इसी बीच Dharmendra Pradhan ने घोषणा की है कि वर्ष 2027 से NEET परीक्षा computer-based online mode में आयोजित की जाएगी। सरकार ने कहा है कि exam security मजबूत करने, paper leak रोकने और digital monitoring बढ़ाने के लिए परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव किए जाएंगे।


कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना: रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी ब्लैकमेल की चेतावनी

07 मार्च 2026 नई दिल्ली | भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका द्वारा 30 दिन की छूट देने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि अमेरिका की यह छूट भारत की संप्रभुता पर हमला और देश को राजनीतिक रूप से ब्लैकमेल करने की कोशिश है।

कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि अमेरिका की तरफ से यह दबाव कब तक चलेगा। पार्टी का कहना है कि विदेशी ताकतों के निर्देश के अनुसार देश की ऊर्जा नीतियों को नियंत्रित करना स्वीकार्य नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार राहुल गांधी ने लोकसभा में पिछले सत्र का वीडियो शेयर करते हुए कहा था, “क्या अमेरिका हमें बताएगा कि हम रूस या ईरान से तेल खरीद सकते हैं या नहीं। यह अमेरिका तय करेगा, हमारे प्रधानमंत्री नहीं।” कांग्रेस प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति पर किसी भी विदेशी दबाव को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत स्पष्ट नीति और जवाब देने की मांग की।

अमेरिकी छूट और केंद्र की स्थिति

अमेरिका ने भारत को रूस से तेल आयात के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी है, ताकि भारत अपनी आवश्यक ऊर्जा आपूर्ति को जारी रख सके। केंद्र सरकार का कहना है कि यह छूट वैश्विक ऊर्जा संकट और तेल आपूर्ति की निरंतरता को ध्यान में रखकर दी गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र और संप्रभु है, और अमेरिका की ओर से दी गई छूट किसी भी प्रकार के दबाव का संकेत नहीं है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

कांग्रेस के अलावा विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं कि क्या भारत की नीति पूरी तरह से स्वतंत्र और संप्रभु रह पाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला चुनावी सत्र और आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान और गरमाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को रूस से तेल खरीदने की नीति में अमेरिका के दबाव और दी गई अस्थायी छूट के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होगा।


I-PAC रेड विवाद: ईडी का सुप्रीम कोर्ट में आरोप—ममता बनर्जी ने सत्ता का दुरुपयोग कर जांच में डाली बाधा

20 फरवरी 2026 प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी ने कथित कोयला तस्करी मामले से जुड़ी जांच के दौरान अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया। एजेंसी के अनुसार, पश्चिम बंगाल की राज्य मशीनरी और पुलिस अधिकारियों ने जांच कार्रवाई में अवैध तरीके से हस्तक्षेप किया और ईडी टीम के काम में बाधा डाली। ईडी का कहना है कि 8 जनवरी को I-PAC के कार्यालयों और उसके निदेशक से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के दौरान राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कथित तौर पर एजेंसी की कार्रवाई को रोकने की कोशिश की। एजेंसी ने अदालत को बताया कि यह सब मुख्यमंत्री के “निजी फायदे” के लिए किया गया और इसमें स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत थी। इस मामले में ईडी ने अदालत से जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग भी की है। एजेंसी का तर्क है कि जब राज्य की पुलिस ही जांच में बाधा डालने के आरोपों में घिरी हो, तो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच आवश्यक है। अदालत ने मामले की सुनवाई फिलहाल 18 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी है। इससे पहले भी सुनवाई टल चुकी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने टिप्पणी की थी कि यदि किसी राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा केंद्रीय जांच में हस्तक्षेप किया गया है, तो यह बेहद गंभीर मामला माना जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच पहले से जारी टकराव को और बढ़ा सकता है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला अब अदालत की निगरानी में है और अगली सुनवाई पर सभी पक्षों की दलीलें अहम मानी जा रही हैं।


नहीं रहे महाराष्ट्र के ‘दादा’, बारामती में विमान हादसे में अजित पवार का निधन

नई दिल्ली/मुंबई | 28 जनवरी 2026

महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिग्गज नेता अजित पवार का एक भीषण विमान हादसे में निधन हो गया है। यह हादसा उनके अपने गढ़ बारामती में उस वक्त हुआ जब वे एक चुनावी जनसभा को संबोधित करने जा रहे थे।

कैसे हुआ हादसा? (ग्राउंड रिपोर्ट)

जानकारी के मुताबिक, अजित पवार बुधवार सुबह करीब 8:10 बजे मुंबई से चार्टर्ड विमान Learjet 45 (VT-SSK) के जरिए बारामती के लिए रवाना हुए थे।

  • लैंडिंग के वक्त अनहोनी: सुबह लगभग 8:45 बजे, जब विमान बारामती एयरपोर्ट के रनवे पर लैंड करने की कोशिश कर रहा था, तभी पायलट ने खराब विजिबिलिटी के कारण ‘गो-अराउंड’ का फैसला लिया।

  • धमाका और आग: दूसरे प्रयास के दौरान विमान अचानक अनियंत्रित होकर रनवे से करीब 200 मीटर दूर एक खेत में जा गिरा। चश्मदीदों के मुताबिक, गिरने के साथ ही विमान में 4-5 धमाके हुए और वह आग के गोले में तब्दील हो गया।

5 लोगों की मौत की पुष्टि

DGCA और स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि इस विमान में सवार सभी 5 लोगों की जान चली गई है। मृतकों में शामिल हैं:

  1. अजित पवार (उपमुख्यमंत्री, महाराष्ट्र)

  2. विदिप जाधव (निजी सुरक्षा अधिकारी – PSO)

  3. कैप्टन सुमित कपूर (पायलट)

  4. शांभवी पाठक (को-पायलट)

  5. पिंकी माली (क्रू मेंबर)

अजित पवार की संपत्ति: पीछे छोड़ गए करोड़ों का साम्राज्य

अजित पवार न केवल राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी थे, बल्कि वे महाराष्ट्र के सबसे अमीर राजनेताओं में से भी एक थे। 2024 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी संपत्ति का विवरण कुछ इस प्रकार है:

  • कुल नेटवर्थ: लगभग ₹124 करोड़ (पत्नी सुनेत्रा पवार की संपत्ति मिलाकर)।

  • चल संपत्ति: उनके पास करीब ₹8.22 करोड़ की चल संपत्ति थी, जिसमें बैंक बैलेंस और शेयर शामिल हैं।

  • आलीशान घर: मुंबई के मालाबार हिल में स्थित ‘देवगिरी’ बंगला उनका पावर सेंटर था। इसके अलावा बारामती में उनका विशाल पैतृक निवास है।

  • जमीन और निवेश: उनके और उनकी पत्नी के नाम पर महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में ₹50 करोड़ से अधिक की कृषि और व्यावसायिक भूमि है।

देश में शोक की लहर

  • 3 दिन का राजकीय शोक: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र में 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।

  • PM मोदी ने जताया दुख: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “अजित पवार जी के आकस्मिक निधन से स्तब्ध हूं। वे एक परिश्रमी नेता थे जिन्होंने महाराष्ट्र के विकास में अमूल्य योगदान दिया।”

  • जांच के आदेश: नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हादसे की Black Box बरामद कर ली है और हाई-लेवल जांच के आदेश दिए हैं।


गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून को भीषण विमान हादसा हुआ है। Air India का Boeing 787-8 Dreamliner विमान क्रैश हो गया, जिसमें 242 यात्री सवार थे। इस हादसे में कई लोगों की मौत हो गई है। वहीं इसी विमान में गुजरात के पूर्व सीएम विजय रुपाणी भी सवार थे। इस हादसे से पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच DGCA (Directorate General of Civil Aviation) ने बोइंग 787-8/9 विमानों पर सेफ्टी जांच बढ़ाने का निर्देश जारी कर दिया है। बता दें कि नया निर्देश 15 जून 2025 की रात 12 से लागू हो जाएगा।

DGCA ने बोइंग 787-8/9 विमानों की सेफ्टी जांच पर दिया ये निर्देश:

1- हर विमान की उड़ान से पहले होगी ये जांच

  • फ्यूल पैरामीटर मॉनिटरिंग और संबंधित सिस्टम की जांच होगी।
  • केबिन एयर कंप्रेसर और उससे जुड़े सिस्टम की जांच की जाएगी।
  • इलेक्ट्रॉनिक इंजन कंट्रोल सिस्टम टेस्ट किया जाएगा।
  • इंजन फ्यूल ड्रिवन एक्ट्यूएटर का ऑपरेशनल टेस्ट और ऑयल सिस्टम की जांच होगी।
  • हाइड्रोलिक सिस्टम की सर्विसेबिलिटी जांच होगी।
  • टेक-ऑफ पैरामीटर्स की समीक्षा की जाएगी।

2- ट्रांजिट इंस्पेक्शन में अब ‘फ्लाइट कंट्रोल इंस्पेक्शन’ अनिवार्य होगा जो कि अगले आदेश तक लागू रहेगा। 3- पावर एश्योरेंस चेक, अगले दो हफ्तों में कराना होगा पूरा। 4- बीते 15 दिनों में बार-बार आई तकनीकी खराबियों की समीक्षा के आधार पर मेंटेनेंस एक्शन जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश।

लंदन जा रही थी फ्लाइट, तभी हुआ हादसा

बता दें कि एयर इंडिया का जो विमान हादसे का शिकार हुआ है, वह 242 यात्रियों को लेकर अहमदाबाद से लंदन जा रहा था। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद यह विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों समेत कुल 297 लोगों की मौत हुई है। इस घटना में विमान में सवार केवल एक ही व्यक्ति की जान बची है, जिनकी पहचान रमेश विश्वास कुमार के रूप में हुई है, जो कि एक ब्रिटिश नागरिक हैं।

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