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भारत की नई रक्षा रणनीति: ‘बेबी ब्रह्मोस’ जैसे किफायती हथियारों पर जोर, लंबी जंग की तैयारी

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भारत की नई रक्षा रणनीति: ‘बेबी ब्रह्मोस’ जैसे किफायती हथियारों पर जोर, लंबी जंग की तैयारी

नई दिल्ली |  13 फरवरी 2026

वैश्विक संघर्षों के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारत अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहा है। रक्षा सूत्रों के अनुसार अब फोकस सिर्फ महंगी और सीमित संख्या वाली मिसाइलों पर नहीं, बल्कि कम लागत वाले, उच्च तकनीक से लैस और बड़ी संख्या में उपलब्ध हथियारों पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूसयूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्ध लंबे समय तक चल सकते हैं और उनमें हथियारों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा।

‘मिनी लेकिन मारक’ हथियारों पर जोर

हाल में पिनाका रॉकेट सिस्टम के हवाई संस्करण का परीक्षण इसी नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञ इसे अनौपचारिक तौर पर “बेबी ब्रह्मोस” की अवधारणा से जोड़कर देख रहे हैं—यानी ऐसे छोटे आकार के हथियार जो सटीकता और मारक क्षमता में मजबूत हों, लेकिन लागत बहुत कम हो। बताया जा रहा है कि इनकी कीमत पारंपरिक हाई-एंड मिसाइलों की तुलना में कई गुना कम हो सकती है, जिससे इन्हें बड़े भंडार में रखा जा सकेगा।

सेना प्रमुख ने बताई जरूरत

उपेन्द्र द्विवेदी, जो वर्तमान में भारतीय सेना के प्रमुख हैं, ने हाल ही में कहा कि आधुनिक युद्ध “हाई-डेंसिटी वारफेयर” की ओर बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार यदि किसी देश के पास किफायती लेकिन तकनीकी रूप से उन्नत हथियारों का पर्याप्त स्टॉक हो, तो वह लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में भी अपनी बढ़त बनाए रख सकता है।

रणनीतिक बदलाव का कारण

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ ताकतवर हथियारों की गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि उनकी संख्या, उपलब्धता और लगातार उपयोग की क्षमता पर भी निर्भर करते हैं। लंबे युद्ध में महंगे हथियार जल्दी खत्म हो सकते हैं या उन्हें फिर से तैयार करने में समय लगता है। ऐसे में कम लागत वाले, तेज उत्पादन वाले हथियार निर्णायक साबित हो सकते हैं।

आत्मनिर्भरता और उत्पादन पर जोर

सरकार की “मेक इन इंडिया” रक्षा नीति के तहत स्वदेशी हथियार प्रणालियों के विकास और उत्पादन पर भी जोर बढ़ा है। इससे न केवल लागत घटती है बल्कि युद्धकाल में विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता भी कम होती है।

विशेषज्ञों का निष्कर्ष:
भारत की यह रणनीति संकेत देती है कि आने वाले समय में युद्ध केवल तकनीकी श्रेष्ठता से नहीं, बल्कि संसाधनों के स्मार्ट प्रबंधन और बड़े पैमाने पर तैनाती की क्षमता से तय होंगे। “बेबी ब्रह्मोस” जैसी अवधारणाएं इसी सोच का हिस्सा मानी जा रही हैं, जो भविष्य की लड़ाइयों के लिए नई सुरक्षा नीति का आधार बन सकती हैं।

 


 78 साल बाद बदलेगा सत्ता का केंद्र: PM मोदी आज नए ‘सेवा तीर्थ’ कार्यालय में शिफ्ट, साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक

नई दिल्ली |  13 फरवरी 2026

देश की प्रशासनिक व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होंगे। यह कदम केंद्र सरकार के नए प्रशासनिक ढांचे की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, प्रधानमंत्री दोपहर करीब 1:30 बजे सेवा तीर्थ बिल्डिंग कॉम्पलेक्स के नाम का औपचारिक अनावरण करेंगे, जबकि शाम करीब 6 बजे सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 व 2 का उद्घाटन करने के बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।

नई इमारतों में केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों के कार्यालय भी स्थापित किए जाएंगे। अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय और विभिन्न मंत्रालयों के दफ्तर नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक में संचालित होते रहे हैं। ये दोनों इमारतें करीब 78 वर्षों तक देश की सत्ता और प्रशासन का मुख्य केंद्र रही हैं और स्वतंत्र भारत की कई महत्वपूर्ण नीतियों व फैसलों की साक्षी रही हैं।

शुक्रवार इन ऐतिहासिक इमारतों के लिए खास दिन है, क्योंकि यह सरकारी कामकाज का आखिरी दिन होगा। नए परिसर में स्थानांतरण से पहले प्रधानमंत्री मोदी साउथ ब्लॉक में केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक करेंगे, जो शाम 4 बजे निर्धारित है। यह बैठक ब्रिटिश कालीन सचिवालय भवन में आयोजित होने वाली आखिरी कैबिनेट बैठक होगी, जिससे इस इमारत के प्रशासनिक अध्याय का औपचारिक समापन हो जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सेवा तीर्थ परिसर में स्थानांतरण से मंत्रालयों के बीच समन्वय, डिजिटल प्रशासन और कार्यक्षमता में सुधार होगा। साथ ही यह कदम आधुनिक बुनियादी ढांचे और केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में सरकार की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा माना जा रहा है।

इस ऐतिहासिक बदलाव के साथ भारत की शासन व्यवस्था एक नए युग में प्रवेश करने जा रही है, जबकि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक देश के राजनीतिक इतिहास की अमूल्य धरोहर के रूप में याद किए जाते रहेंगे।


भारत में सैटेलाइट सर्विस को लेकर पिछले काफी समय से चर्चा चल रही है। अब ऐसा लग रहा है कि भारत में जल्द ही सैटेलाइट इंटरनेट की सर्विस शुरू होने वाली है। दरअसल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एलन मस्क की स्टारलिंक को भारत सरकार की तरफ से लाइसेंस दे दिया गया है। स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने के बाद अब यह कहा जा सकता है कि सैटेलाइट इंटरनेट का इंतजार अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। मस्क की कंपनी को पिछले महीने लेटर ऑप इंटेंट मिला था। अब एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सरकार की तरफ से इसे GMPCS लाइसेंस भी मिल गया है।

Starlink बनी अप्रूवल पाने वाली तीसरी कंपनी

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की तरफ से शुक्रवार को स्टारलिंक को देश में सर्विस शुरू करने के लिए लाइसेंस दिया गया है। भारत सरकार की तरफ से स्टारलिंक को लाइसेंस मिलना कंपनी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। आपको बता दें कि सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस के लिए भारत सरकार की तरफ से अप्रूवल पाने वाली स्टारलिंक तीसरी कंपनी है। सरकार ने इसससे पहले जियो और एयरटेल को भी लाइसेंस दे रखा है। सरकार की तरफ से लाइसेंस मिलने से पहले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधियां ने कहा था कि स्टारलिंक सैटकॉम को जल्द लाइसेंस दिया जा सकता है।

सर्विस शुरू करने से एक कदम है दूर

GMPCS लाइसेंस मिलने के बाद अब स्टारलिंक के सामने सिर्फ एक चुनौती है। कंपनी को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए IN-SPACe से अंतिम अप्रूवल हासिल करना होगा। इस अप्रूवल के मिलने बाद यूजर्स सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस का इस्तेमाल कर पाएंगे। हालांकि अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है कि इस अंतिम अप्रूवल के पूरा होने में कितना समय लगेगा।

आपको बता दें कि भारत में स्टारलिंक की एंट्री के लिए एलन मस्क 2022 से लगातार कोशिश कर रहे हैं। आखिरकार अब कंपनी का इंतजार खत्म हो गया है। भारत में सैटैलाइट इंटरनेट के लिए अमेजन की कुइपर कंपनी भी कोशिश में लगी हुई है। कंपनी ने इसके लिए भारत सरकार के पास आवेदन भी किया है।

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