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INDI गठबंधन की कमान को लेकर सियासी हलचल: अय्यर के बयान से बढ़ी चर्चा, विपक्षी दलों में प्रतिक्रिया तेज

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INDI गठबंधन की कमान को लेकर सियासी हलचल: अय्यर के बयान से बढ़ी चर्चा, विपक्षी दलों में प्रतिक्रिया तेज

23 फरवरी 2026

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के ताज़ा बयान ने विपक्षी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने सुझाव दिया कि राहुल गांधी को INDI गठबंधन की कमान किसी अन्य वरिष्ठ नेता को सौंप देनी चाहिए ताकि गठबंधन को अधिक समय और सक्रिय नेतृत्व मिल सके। अय्यर का कहना है कि गठबंधन को मजबूत करने के लिए नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो सभी दलों को संतुलित समय दे सके और साझा रणनीति पर फोकस कर सके।

उन्होंने संभावित नेताओं के तौर पर ममता बनर्जी, एम. के. स्टालिन, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव जैसे नामों का जिक्र किया। उनके मुताबिक ये नेता क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत जनाधार रखते हैं और गठबंधन को समय देकर उसे चुनावी तौर पर अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

कांग्रेस और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया

अय्यर के बयान पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। पार्टी के कई नेताओं ने इसे उनका व्यक्तिगत विचार बताया और कहा कि गठबंधन के नेतृत्व का फैसला सामूहिक सहमति से होता है, न कि सार्वजनिक बयानबाज़ी से।

वहीं तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्षी एकता को लेकर सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान देना राजनीतिक रूप से उचित नहीं है और इससे विपक्षी एकजुटता की छवि प्रभावित हो सकती है।

गठबंधन की रणनीति पर बढ़ी चर्चा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अय्यर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विपक्षी दल आगामी चुनावों को लेकर साझा रणनीति बनाने में जुटे हैं। ऐसे में नेतृत्व को लेकर उठी यह बहस संकेत देती है कि गठबंधन के भीतर नेतृत्व मॉडल और समन्वय तंत्र पर अभी भी चर्चा जारी है।

हालांकि, अभी तक गठबंधन के किसी आधिकारिक मंच से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई संकेत नहीं दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दल फिलहाल सीट-शेयरिंग, साझा एजेंडा और चुनावी रणनीति पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, ताकि चुनावी मुकाबले में एकजुटता दिखाई जा सके।



स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, राहुल गांधी के हस्ताक्षर न करने पर सियासी चर्चा तेज

नई दिल्ली |11 फरवरी 2026

संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। विपक्षी दलों ने मंगलवार को लोकसभा सचिवालय को स्पीकर को पद से हटाने के लिए औपचारिक नोटिस सौंपा। यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत दिया गया है, जिसके तहत लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने जानकारी दी कि यह कदम स्पीकर पर लगाए गए उन आरोपों के चलते उठाया गया है, जिनमें कहा गया है कि उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से नहीं चलाई जा रही, जिसके कारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी सहित कई दलों के सांसद शामिल हैं। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि खुद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी का मानना है कि संसदीय परंपरा और लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुसार स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष का हस्ताक्षर करना उचित नहीं माना जाता, इसलिए उन्होंने इस पर हस्ताक्षर नहीं करने का निर्णय लिया। पार्टी का कहना है कि यह कदम संस्थागत सम्मान बनाए रखने के दृष्टिकोण से लिया गया है, न कि समर्थन या विरोध के आधार पर।

उधर सत्तारूढ़ पक्ष ने विपक्ष के इस कदम को राजनीतिक स्टंट करार दिया है और कहा है कि संसद की कार्यवाही नियमों के अनुसार चल रही है। भाजपा नेताओं का दावा है कि विपक्ष सदन में व्यवधान पैदा करने के बाद अब स्पीकर पर आरोप लगाकर मुद्दा भटकाने की कोशिश कर रहा है।

संसदीय विशेषज्ञों का कहना है कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दुर्लभ घटनाओं में से होता है और इसका राजनीतिक व संवैधानिक महत्व काफी बड़ा होता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नोटिस पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और क्या यह प्रस्ताव सदन में चर्चा के लिए सूचीबद्ध होता है या नहीं।

यह मामला फिलहाल संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है।


केंद्र में मोदी सरकार के 11 साल पूरे हो गए हैं। इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। नड्डा ने कहा कि मोदी सरकार जनता के नेतृत्व वाली सरकार है। पिछले कुछ सालों में हमने पारदर्शिता लाई है और एक दूरदर्शी, फ्यूचर ओरिएंटेड प्रशासन बनाया है। इसीलिए हम विकसित भारत की बात करते हैं। यह अमृत काल है। पिछले 11 सालों ने वास्तव में विकसित और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव रखी है।

इन सिद्धांतों पर किया गया काम

बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के मूल सिद्धांत पर काम किया है। मोदी सरकार की योजनाओं से आम जनता को खासा लाभ हुआ है।

11 सालों में मोदी सरकार ने लिए ऐतिहासिक फैसले

इसके साथ ही नड्डा ने कहा, ‘एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 11 साल के शासन का पूरा लेखा-जोखा पेश करना मुश्किल है, लेकिन हमारी सरकार ने लगातार राष्ट्रहित में साहसिक और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। कुछ उदाहरण लें तो हमने अनुच्छेद 370 को हटाया और तीन तलाक को खत्म किया। हमने नया वक्फ अधिनियम बनाया और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित किया। हमने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण भी सुनिश्चित किया है।’

लोगों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि

नड्डा ने कहा कि मोदी सरकार के तहत नेतृत्व में मजबूत भरोसे के कारण लोगों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह वही देश है, जहां पहले शिक्षा मंत्रियों को एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने में भी संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन आज हम सामूहिक रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर सहमत हुए हैं। जो कि हमारे इतिहास में सबसे व्यापक और सबसे समावेशी परामर्श प्रक्रियाओं में से एक का परिणाम है।

स्वच्छ भारत सबसे सफल आंदोलन बना

पार्टी अध्यक्ष ने आगे कहा, ‘एक समग्र दृष्टिकोण के कारण, हमने बिना किसी भ्रम या अराजकता के सुचारू रूप से एक नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति पेश की है। स्वच्छ भारत जैसी पहल सबसे सफल जन आंदोलनों में से एक बन गई है।’

जिम्मेदार व जवाबदेह वाली सरकार है

केंद्रीय मंत्री एवं पार्टी अध्यक्ष नड्डा ने कहा कि देश में 11 साल पहले, तुष्टिकरण व समाज को खंडित करके अपनी कुर्सी को सुरक्षित रखना राजनी​तिक संस्कृति का तरीका बन गया था। लेकिन 2014 के बाद पीएम मोदी के नेतृत्व वाली जिम्मेदार व जवाबदेह सरकार आई, जिसने रिपोर्ट कार्ड की राजनीति शुरू की। हम जो काम कर रहे हैं, उसे जनता के सामने रखें। उन्होंने कहा कि पिछले 11 साल में पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भारत की राजनीति की संस्कृति को बदला ​है।

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